अपनी बीवी को प्रेग्नेंट कराने के लिए डॉक्टर से चुदवाया

मेरा नाम राजीव है और मैं एक डॉक्टर हूं। मैं एक छोटे से गांव में अपनी डाक्टरी चलाता हूं। मेरे पास पूरे गांव की छोटी-मोटी बीमारी वाले मरीजों के अलावा सेक्स संबंधी आदमी और औरत भी आते हैं। आज मैं आपको अपने ऐसे ही एक मरीज के बारे में बताता हूं। Dehati Maal Chudai

वो गांव के बड़े घराने का लड़का था और उसकी शादी तीन-चार साल पहले हुई थी। उसकी औरत को तब तक बच्चा नहीं हुआ था। जब वो लड़का इस बात के लिए मेरे पास आया तो मैंने उसे शहर जाकर कुछ टेस्ट करवाने को कहा। टेस्ट के नतीजे से पता चला कि औरत में कोई कमी नहीं थी और उस लड़के में कमी थी। वो बच्चा पैदा करने में सक्षम नहीं था।

सब कुछ जानने के बाद उस लड़के ने जो मुझे कहा वो सुनकर मैं पागल हो गया। वो लड़का किसी को बता नहीं सकता था कि वो बच्चा नहीं पैदा कर सकता। इससे उसकी मर्दानगी कम हो जाती। उसने मुझे अपनी बीवी को चोदने के लिए कहा और उसके लिए बच्चा पैदा करने को कहा।

मुझसे उस लड़के को कोई खतरा नहीं था। एक तो मैं पढ़ा-लिखा था और उस गांव का नहीं था। एक दिन वो अपनी पत्नी को इलाज के नाम पर मेरे क्लिनिक लेकर आया। मैंने पहली बार उसको देखा था। यकीनन बहुत ही सुंदर थी उसकी बीवी। गांव की लड़कियों में एक अजीब सी कशिश होती थी और उसके बदन की महक मुझे पागल बना रही थी। मेरे लंड ने खड़ा होना शुरू कर दिया।

चूंकि मैं अपनी मेज के पीछे था तो मेरे खड़े लंड को कोई देख नहीं पाया। फिर मैंने उस लड़के को बाहर जाने को कहा और उसकी बीवी संजना को पलंग पर लेटने के लिए कहा। मैं संजना को भी एक बार चेक करके संतुष्ट होना चाहता था। मैंने संजना को लिटाया और हाथ लगाने से पहले उससे थोड़ी सी बातचीत शुरू कर दी ताकि वो मेरे साथ आराम महसूस कर सके।

फिर मैंने उसको उसके पति के बारे में बताया और उसकी मंशा भी बताई। संजना अपने आप को थोड़ा असहज महसूस कर रही थी। तो मैंने उसके होंठों पर हाथ फिराने शुरू कर दिए और उसके शरीर पर भी कामुकता से हाथ फेरने शुरू कर दिए। संजना ने भी थोड़ा सा मचलना शुरू कर दिया।

मैंने उसके कपड़े खोलने शुरू कर दिए। मैंने उसको नंगा नहीं किया और सिर्फ उतने ही कपड़े उतारे जितने मुझे चेक करने के लिए उतारने थे। जब मैंने सब कुछ चेक कर लिया तो उसको कपड़े पहनकर बाहर आने को कहा और उसके पति को बुला लिया। फिर मैंने उसके पति को सारी बातें बता दी।

उसके पति ने मुझे उसके लिए काफी सारा पैसा देने का वादा किया और बच्चे के बारे में पता लगने के बाद गांव छोड़ने के लिए कहा। मुझे कोई ऐतराज नहीं था और मैंने उसको क्लिनिक की छुट्टी वाले दिन बुलाया। उस दिन मैंने अपने आप को काफी साफ किया और कुछ जरूरी बातें संजना को भी समझा दी।

उस दिन संजना अपने पति के साथ मेरे घर आ गई। संजना का नामर्द पति दूसरे कमरे में जाकर लेट गया और बाहर इंतजार करने लगा। मैंने संजना को अपने बिस्तर पर बैठाया और उसको मिठाई खिलाई। अपने होंठों को संजना के होंठों से जोड़ दिया। मेरी और संजना की सांसें गरम हो रही थीं और तेज-तेज चल रही थीं। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

मेरे हाथ संजना के बदन पर हलचल कर रहे थे और संजना मस्ती में कसमसा रही थी। वो मुझे बोल रही थी कि डॉक्टर मुझे नहीं मालूम था कि तुम इतने गरम हो। आआआआआ… ऊऊऊऊऊओ…साला मेरा पति तो नामर्द है और मेरी चूत की प्यास को बुझा नहीं पाता। तेरा लंड मेरी चूत को फाड़ देगा? ऊऊऊऊऊऊऊ… ऊऊऊओ… साले आ जा और चोद डाल मुझे।

उसके बदन की खुशबू ने तो मुझे पहले ही पागल कर दिया था और उसकी इन बातों ने मेरे लंड को और बड़ा कर दिया। मेरा लंड रिसने लगा। अब मुझे से रुका नहीं जा रहा था। मैंने संजना की गर्दन पर अपने होंठ रख दिए और उसके शरीर को चूसने लगा।

मेरे हाथों ने संजना के कपड़े खोलने शुरू कर दिए और एक ही मिनट में मैंने संजना को नंगा कर दिया। उसका नंगा गोरा बदन किसी संगमरमर की तराशी हुई मूर्ति से कम नहीं लग रहा था। संजना की चूत से सफेद जूस बाहर निकलकर चूत के बालों पर जमना शुरू कर दिया।

मैंने भी मिनट से कम समय में अपने कपड़े अपने बदन से अलग कर दिए। मेरा काला लंड हद से ज्यादा बड़ा हो चुका था और किसी सांप की तरह फुंकार रहा था। संजना नंगी पलंग पर पड़ी हुई थी और उसने अपने पैर खोल रखे थे। उसकी बालों से ढकी हुई चूत मेरा लंड लेने के लिए मचल रही थी।

मैंने आव-ना-देखा-ताव और अपने लंड को अपने हाथ से हिलाता हुआ संजना की चूत पर पिल पड़ा। मैंने अपना लंड संजना की चूत पर घिसना शुरू कर दिया। संजना ने मस्ती में मचलना शुरू कर दिया और उसकी कामुक आवाजें कमरे के माहौल को और भी मदमस्त बना रही थीं। आआआआआआआआ… ऊऊऊऊऊऊऊ… मैंने अपने लंड रगड़ते हुए एक ही झटके के साथ अपना लंड संजना की चूत में घुसा दिया।

लंड ने चूत में स्स्सरररर करते हुए अपनी जगह बना ली और संजना की चीख निकल पड़ी। आआआआआआ आआआआआआआआ… मर ग्यीईईए… क्या कर रहा है साले? मरेगा क्या? वाह… और फिर मेरे तेज धक्के संजना की गांड को हिलने पर मजबूर करने लगे। हम दोनों का शरीर थप थप थप थप थप करके टकराने लगा और पूरा कमरा हमारी आवाजों से गूंजने लगा। “Dehati Maal Chudai”

हम दोनों मजे में उछाल रहे थे और पूरा पलंग हिलने लगा। हम दोनों के ही धक्के तेज होने लगे। एक ही साथ हम दोनों ने अपनी-अपनी गरम पिचकारी छोड़ दी। मैंने गरम वीर्य की धार उसकी चूत पर गिराई तो संजना चिल्ला उठी। आआआअ… ऊऊऊऊऊ…बहुत ही गरम है साले। लग रहा है कि गरम लोहे का सरिया मेरी चूत में घुसा दिया हो।

हम दोनों थक गए थे और पांच मिनट एक दूसरे पर पड़े रहने के बाद हम अलग हो गए। करीब पंद्रह मिनट बाद संजना उठी और अपने पति के साथ चली गई। उसका पति वादे के मुताबिक कुछ पैसे मुझे दे गया। मैंने संजना को दो-तीन बार और चोदा और महीने भर बाद ही संजना की गोद में मेरा बच्चा था। संजना के ससुराल में सब खुश थे और जब संजना को बच्चा हो गया तो मैंने वो गांव हमेशा के लिए छोड़ दिया। अब मेरी भी शादी हो चुकी है और मेरे दो बच्चे हैं। मैंने इस वाकिये को हमेशा के लिए भुला दिया है।

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Ritu Agarwal

हैलो दोस्तों! मैं ऋतु अग्रवाल हूँ - कानपुर विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र में मास्टर डिग्री पाने वाली और पिछले 5 साल से हिंदी में वो कहानियाँ लिख रही हूँ जो आपकी रूह को छू लें और तन को तड़पा दें। मैं मानव व्यवहार और इंसानी इच्छाओं पर गहरा रिसर्च करती हूँ ताकि हर कहानी असली और दिलकश हो। मेरी कहानियाँ लाखों पाठकों ने पढ़ी हैं और हर कोई वापस आता है। मैं समझती हूँ आप क्या चाहते हैं - और वही लिखती हूँ जो आपको पागल कर दे। तो चलो, मेरी कहानी से आज की रात को खास बनाते हैं!

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