हैलो दोस्तों, मेरा नाम संतोष है, मैं पंजाब का रहने वाला हूँ, उम्र 19 साल, गोरा रंग, लंबा चौड़ा बदन, जिम जाता हूँ इसलिए छाती और बाजू अच्छे खासे हैं, लड़कियाँ मुझे देखकर जरूर पलटती हैं। मैं भी आप लोगों की तरह पिछले कई सालों से हिंदी सेक्स कहानियाँ पढ़ता आ रहा हूँ और आज अपनी सच्ची वाली घटना आप तक पहुँचा रहा हूँ। Hot Noida Girl Sex
मैं नोएडा में एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करने आया था, तीसरी मंजिल पर एक छोटा सा रूम किराए पर लिया। ठीक नीचे दूसरी मंजिल पर दो बहनें रहती थीं। दोनों ही एकदम माल थीं, लेकिन छोटी वाली अंशिका तो गजब की थी। गोरी, लंबे काले बाल, बड़ी-बड़ी आँखें, हमेशा टाइट कपड़े पहनती, उसके बूब्स बड़े बड़े गोल गोल और गांड़ भारी मटकती हुई।
रोज सीढ़ी में मिलती तो मैं उसकी तरफ देखता रहता, वो भी मुझे देखकर हल्की मुस्कान दे देती। धीरे धीरे हाय हैलो होने लगा, मैं उस पर लाइन मारता, वो शरमाकर हंस देती। एक दिन मैं अपने रूम में लेटा हुआ था, लैपटॉप पर पॉर्न फिल्म चला रखी थी, लंड हाथ में पकड़कर धीरे धीरे हिला रहा था, तभी दरवाजे पर दस्तक हुई।
जल्दी से लंड अंदर किया, लैपटॉप बंद किया और दरवाजा खोला। सामने अंशिका खड़ी थी, उस दिन उसने सफेद कलर का क्रॉप टॉप पहना था जिससे उसकी नाज़ुक कमर दिख रही थी और नीचे काली हॉट शॉर्ट्स, जांघें एकदम गोरी चिकनी। मैंने उसे अंदर बुलाया, वो आई तो लैपटॉप पर फिल्म का थंबनेल दिख गया.
वो शरमा कर मुस्कुराई और बोली, “ये क्या देख रहे थे?” मैं उसके पास बैठ गया, उसकी जांघ से जांघ टच हो रही थी। बातों बातों में उसने पूछा, “गर्लफ्रेंड है?” मैंने कहा, “अभी तक नहीं, तुम जैसी कोई मिली ही नहीं।” वो मुस्कुराई और थोड़ी देर बाद बोली, “मुझे घर जाना है।”
मैंने उससे नंबर लिया, रात भर व्हाट्सएप पर बातें की। अगले दिन उसका कॉल आया, “नीचे आ जाओ।” मैं तुरंत नीचे पहुँचा। उसने दरवाजा खोला तो पिंक कलर की पतली सी स्लीवलेस नाइटी पहनी थी, ब्रा की ब्लैक लेस साफ दिख रही थी, निप्पल्स के उभार भी नजर आ रहे थे।
अंदर जाकर वो बोली, “दीदी से लड़ाई हो गई, बहुत अकेलापन लग रहा है।” फिर खुद मेरे सीने पर सर रखकर लेट गई। उसकी गर्म सांसें मेरी गर्दन पर लग रही थीं, बूब्स दब रहे थे, मेरा लंड फटाफट खड़ा हो गया। मैंने पूछा, “हग कर लूँ?” उसने मना किया लेकिन आँखें बंद कर लीं।
मैंने उसके गाल पर हाथ फेरा, फिर कसकर हग कर लिया। वो भी मुझे जोर से पकड़ लिया। मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए, पहले हल्का फिर जीभ अंदर डालकर चूसने लगा। वो भी साथ देने लगी। हाथ उसके बूब्स पर ले गया, टॉप के ऊपर से दबाया तो वो सिसकारी, “उफ्फ्फ संतोष…”
मैंने उसकी नाइटी ऊपर उठाई, ब्लैक लेस ब्रा में उसके गोरे बूब्स लबालब भरे थे। मैंने ब्रा का हुक खोला, दोनों बूब्स बाहर आए, गुलाबी गुलाबी निप्पल्स पूरी तरह तने हुए। मैंने एक निप्पल मुंह में लिया, जोर जोर से चूसने लगा, दूसरे को उँगलियों से मसलता रहा। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
वो तड़पने लगी, “आह्ह्ह्ह… संतोष… चूसो… ऊईई… मेरे बूब्स दुख रहे हैं… ह्ह्हीईई…” उसकी सिसकारियाँ कमरे में गूंज रही थीं। फिर मैंने उसकी नाइटी पूरी उतार दी, अब सिर्फ ब्लैक लेस पैंटी थी। मैं उसके पेट पर किस करता हुआ नीचे आया, पैंटी के ऊपर से ही चूत सहलाने लगा। वो काँप रही थी।
मैंने पैंटी साइड की, उसकी चूत एकदम गुलाबी, हल्के हल्के बाल, क्लिटोरिस सूजी हुई थी, पूरी गीली चमक रही थी। मैंने जीभ से क्लिटोरिस को छुआ तो वो उछल पड़ी, “आह्ह्ह्ह… संतोष… चाटो… मेरी चूत चाटो…” मैंने जीभ अंदर तक डालकर चूसना शुरू किया, उसका रस मीठा सा था।
वो मेरे सिर को चूत पर दबाए चिल्ला रही थी, “हाँ… और अंदर… उफ्फ्फ… आह्ह्ह्हीईई… मैं झड़ने वाली हूँ…” और काँपकर झड़ गई, मैंने सारा रस चाट लिया। अब उसने मेरी टी-शर्ट उतारी, मेरी छाती चूमी, फिर जींस खोली। मेरा लंड देखकर चौंकी, “इतना बड़ा… कभी नहीं देखा…”
फिर मुंह में लेकर चूसने लगी, ग्ग्ग्ग्ग… गों गों… गी गी… गोग गोग… गला तक ले रही थी। मैं उसके बाल पकड़कर मुंह चोदने लगा। फिर मैंने उसे लिटाया, लंड को चूत पर रगड़ा, वो बेचैन थी, “डाल ना संतोष… फाड़ दे…” मैंने एक झटका मारा, आधा गया, वो चीखी, “आआह्ह्ह्ह मार गया…”
फिर धीरे धीरे पूरा अंदर, चूत बहुत गर्म और टाइट थी। मैं धीरे धीरे आगे पीछे करने लगा, फिर स्पीड बढ़ाई। वो नीचे से गांड़ उछाल रही थी, “हाँ संतोष… और जोर से… फाड़ दे मेरी चूत… ऊईई माँ… चोदो मुझे…” 90 मिनट तक चोदा, वो पाँच बार झड़ चुकी थी, मैं आखिर में उसकी चूत में झड़ गया।
फिर बाथरूम में साथ नहाए, शाम को फिल्म देखने गए। रात को फिर कॉल आया, मैं 9 बजे उसके रूम में पहुँचा। उसने दरवाजा खोला तो सिर्फ लाल रंग की स्लीपिंग शॉर्ट और टाइट टॉप पहना था, अंदर कुछ नहीं। मैंने उसे गोद में उठाकर बेड पर पटका। वो बोली, “आज पूरी रात चुदाई करनी है।”
मैंने उसे पूरा नंगा किया, फिर से बूब्स चूसे, चूत चाटी, फिर मिशनरी, फिर घोड़ी बनाकर, फिर वो ऊपर आई। रात 2 बजे तक चोदा, वो चूर हो गई थी, फिर भी मैं नहीं रुका, सुबह 5 बजे तक रुक रुक कर चोदा। वो रोने लगी, “संतोष बस… मेरी चूत जल गई… पर मत रुको…”
आखिरी राउंड में घोड़ी बनाकर फिर झड़ा। सुबह 8 बजे उठा तो वो नंगी सोई थी, चूत लाल सूजी हुई। मैंने किस करके ऑफिस चला गया। उसने दिन में कॉल किया, “बुखार आ गया, चल नहीं पा रही, पर बहुत मजा आया।” शाम को फिर मेरे रूम में आई और हमने फिर चुदाई की।
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