माँ की कामुक सिसकियाँ चुदाई के दौरान

हेलो दोस्तो मेरा नाम मुकेश है (यह एक काल्पनिक नाम है) (यह घटना मेरी और मेरी मां के साथ रियल में घटित घटना है) मेरी उम्र 20 साल है. मेरी मां का नाम सविता है(यह एक काल्पनिक नाम है) मां कि उम्र 39 साल है. मैं छत्तीसगढ़ बिलासपुर के एक छोटे से गांव का निवासी है. Maa Beta Sex Kahani

ये कहानी 5-6 साल पहले की है जब मैं मां और पापा के साथ सोता साथ एक दिन कि बात है जब मैं सो रहा था. मां और पापा चुदाई कर रहे थे. जब मां और पापा चुदाई करते थे तब लाइट ऑफ होता था मां कि सिसकारियां ले रही थी जिसके कारण मेरा नींद खुला गया.

तब पापा मां कि चुदाई कि आवाज सुनकर मेरा लवड़ा खड़ा हो गया था चुदाई के समय मां जोश जोश में बेड शीट को खींचने लगती तो कभी कभी मां के बूब्स मेरे हाथ से टच हो जाता था तो मेरे को बहुत अच्छा लगता था मां और पापा कि चुदाई लगभग 15-20 मिनट तक चलता था उसी दौरान मैं अपना लौड़ा हिला लेता था.

ऐसा लगभग मेरे साथ 2 3 साल तक होता रहा. कभी कभी जब मां और पापा बिना चुदाई किए सो जाते थे तब मैं मां के ब्लाउज के बटन खोल कर मां के बूब्स टच करता था और बूब्स को दबाता और चुस्त था और कभी-कभी मां का पेटीकोट धीरे धीरे उपर करके मां के गांड़ को टच करता और दबाता था.

पर पापा के होने के करण मां के चूत को चुने कि हिम्मत नही हो पता था. मां उठा ना जाए इसलिए उनके ब्लाउज का बटन नही लगता था पर मां जब सुबह उठाती तब मेरा को कुछ नही कहती थी. मैने लगभग ऐसा मां के साथ 2-3 साल किया. फिर मैं अपने कमरे में सोने लगा.

ये 3 साल पहले कि बात है दिवाली का समय था. हमारे गांव में जुआ होता है. पापा बड़े पापा और दूर के चाचा जुआ खेलने बाहर गए थे. मां और बड़ी मम्मी और दादी रात मिठाई बनाकर अपने अपने कमरे में सोने चले गए, चाचा के बेटा की उम्र उस समय 9-10 साल होगी.

मैं मां और दूर के चाचा का बेटा मां और पापा के कमरे में सोने चले गए. बेड में पहले मां फिर चाचा का बेटा फिर मैं सोए थे. लेकिन जब चाचा का बेटा सो गया फिर मैं उसे हटा कर मां के पास जाकर सो गया लेकिन मां ने कुछ नही कहा उस समय मां जाग रही थी और मेरे तरफ देखकर थोड़ी स्माइल दिया.

जब मां सो गई फिर कुछ समय बाद में मां के ब्लाउज का बटन खोला कर मां के बूब्स को टच करने लगा और दबाने लगा जब मां ने कुछ नही कहा तब फिर मैं बूब्स को चूसने लगा करीब मैं मां के बूब्स को 10 मिनट तक चूसा फिर मां ने कुछ देर बाद करवट बदल ली.

जिसके कारण मां कि गांड़ मेरी तरफ हो गई फिर मैं मां का पेटीकोट धीरे धीरे उपर करके मां के गांड़ को टच करने लगा और दबाने लगा. फिर कुछ देर बाद मैंने अपना हाथ मां कि चूत कि ओर ले गया और मां कि चूत को छूने लगा मां की चूत में मस्त छोटे छोटे बॉल अच्छा लग रहा था. ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

कुछ टाइम तक मां कि चूत को छूता रहा फिर अपनी एक ऊगली मां कि चूत के अंदर डाला दिया फिर मां ने थोड़ी कम आवाज़ में सिसकारी ली मां की चूत मस्त गरम और थोड़ा सा गीला लग रहा था फिर कुछ टाइम बाद मैंने अपनी दूसरी ऊगली मां की चूत में डाला दिया.

करीब मैं मां की चूत में 15-20 मिनट तक ऊगली किया फिर कुछ टाइम बाद मैं अपना लौड़ा मां कि चूत में अपना लौड़ा रगड़ने लगा 3 मिनट तक मैं अपना लौड़ा मां कि चूत से रगड़ता रहा. कुछ टाइम बाद मैं अपना लौड़ा मां कि चूत मां कि चूत में डालने कि कोशिश करने लगा.

लेकिन लौड़ा मां कि चूत के अंदर जा ही नहीं रहा था मैंने 5-6 बार कोशिश किया पर लौड़ा मां कि चूत में नही गया फिर मैं ऊंगली की सहायता से मां की चूत का रस आपने मुंह तक ले गया मां कि चूत का रस का स्वाद थोड़ा नमकीन था पहली बार चूत का रस का स्वाद अच्छा लग रहा था.

फिर उस दिन चाचा के बेटा के होने के कारण और ज्यादा कुछ नहीं किया और मां के बूब्स को कुछ और टाइम तक चूसा फिर बिना मां के ब्लाउस का बटन लगाए सो गया ओ रात भी बिता गईं मां ने सुबह कुछ भी नहीं कहा और अपने काम करने लगी.

फिर मैंने अपने कमरे में सोने लगा. वे घटना 1 या 2 साल पहले की है मैं अपने कमरे में सो रहा था रात के 11 बज रहा था अचानक मेरी नींद टूट गई. फिर मुझे डर लगने लगा फिर कुछ देर बाद मैं मां और पापा के कमरे में जाकर मां और पापा के बीच में सो गया मां और पापा ने कुछ नही कहा.

जब मां और पापा सो गया मैं मां के बूब्स को टच करने लगा तब मुझे पता चला मां ने ब्लाउज नहीं पहना है शायद गर्मी का समय था इसलिए मां ने ब्लाउज नहीं पहना था. फिर 15-20 मिनट तक मां के बूब्स को टच किया दबाया और चूसा कुछ देर बाद जब मैं मां का पेटीकोट ऊपर करने लगा तो मां करवट बदला लेती.

और अपना हाथ से जब चूत को छूने कि कि कोशिश करता तब मां अपने हाथ से मेरा हाथ रोक देती थी पर मां बूब्स को टच करने दे रही थी और दबाने और चूसने दे रही थी उस रात करीब 12 बजे से 2 बजे तक मैने मां का बूब्स चूसा और दबाया पर मां ने कुछ नही कहा शायद पापा साथ में सो रहे थे इसलिए मां ने ज्यादा कुछ नहीं करने दे रही थी.

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Ritu Agarwal

हैलो दोस्तों! मैं ऋतु अग्रवाल हूँ - कानपुर विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र में मास्टर डिग्री पाने वाली और पिछले 5 साल से हिंदी में वो कहानियाँ लिख रही हूँ जो आपकी रूह को छू लें और तन को तड़पा दें। मैं मानव व्यवहार और इंसानी इच्छाओं पर गहरा रिसर्च करती हूँ ताकि हर कहानी असली और दिलकश हो। मेरी कहानियाँ लाखों पाठकों ने पढ़ी हैं और हर कोई वापस आता है। मैं समझती हूँ आप क्या चाहते हैं - और वही लिखती हूँ जो आपको पागल कर दे। तो चलो, मेरी कहानी से आज की रात को खास बनाते हैं!

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