प्यासी मामी को चोदा गर्मियों की छुट्टियों में

ये बात 2024 जून की है और में हर छुट्टियों में अपने नाना के घर जाता था, क्योंकि वहाँ मामी अर्पिता, उम्र 34 साल और छोटी मौसी श्रृष्टि, उम्र 30 साल रहती थी. में वहाँ इसलिए जाता था कि कम से कम उनकी चूची और गांड तो दिनभर देखने को मिलेगी. Bathroom Incest Chudai

उनकी ब्रा और पेंटी में मुठ मारने में बड़ा मज़ा आता था, लेकिन अब श्रृष्टि मौसी की 2 साल पहले शादी हो गई थी, लेकिन इस बार वो भी आने वाली थी तो जिस दिन वो सुबह पहुँची तो शाम को में भी पहुँच गया, उनके एक साल की लड़की भी थी, उसका नाम वामिका था.

अब में मौसी को 2 साल के बाद देख रहा था और अब उनके बूब्स एकदम बड़े-बड़े और तने हुए रहते थे और गांड भी चौड़ी हो गई थी. मेरे मामा पतले दुबले से है तो मामी अभी भी वैसी थी जैसी शादी के वक़्त लगती थी. मेरे मामा उन्हें ठीक से चोदते नहीं थे, लेकिन उनके भी 2 लड़के थे.

अब में गया तो सबने खाना खाया, फिर सोने का इंतजाम हुआ तो वहाँ 3 कमरे थे, एक में नाना नानी रहते थे और बीच वाले रूम में डबल बेड पर में, मौसी और फिर उनकी लड़की और लास्ट वाले रूम में मामा मामी और उनके बच्चे रहते थे. फिर कुछ देर मैंने और मौसी ने बात की और फिर वो सो गई.

लेकिन अब मुझे कहाँ नींद आने वाली थी, उन्होंने लाल कलर की साड़ी पहनी थी और मेरी तरफ अपनी गांड करके सो रही थी. फिर में धीरे से उनके पास गया और उनकी कमर को पकड़ा और ऐसे ही सोया रहा. में बचपन से ही ऐसा करता हूँ तो अगर मौसी जाग भी जाती तो कुछ नहीं कहती है.

अब में ऐसे ही कुछ देर पड़ा रहा और तब मौसी पलटी तो उनके बूब्स एकदम से मेरे मुँह के ऊपर आ गये. अब मुझे कुछ समझ में नहीं आया कि क्या हुआ? लेकिन ये में जानता था कि मौसी बेफ़िक्र होकर सोती है, अब मुझे बहुत ही सॉफ्ट-सॉफ्ट महसूस हो रहा था और ये पहली बार था.

फिर मैंने हल्की सी अपनी जीभ बाहर निकाली और ब्लाउज के ऊपर से ही चाटने लगा, लेकिन मुझे डर भी बहुत लग रहा था कि अब मेरी आगे कुछ करने की हिम्मत नहीं हुई. मौसी घर में सबसे पहले 5 बजे उठती है तो मैंने फोन में 4:30 बजे का अलार्म लगाया और हेडफोन लगाकर सो गया ताकि अलार्म सिर्फ़ मुझे सुनाई दे.

फिर में 4:30 बजे उठा तो मौसी पीठ के बल सो रही थी. फिर में उनके पास आया और उनके हाथ को मेरी पेंट के अंदर डाल दिया और उनके सीधे हाथ को उनके बूब्स पर रख दिया, ताकि उन्हें लगे कि वो नींद में उत्तेजित हो गई थी और अपने बूब्स दबा रही थी और उनके एक हाथ में मेरा लंड पकड़ लिया था.

अब में मौसी के उठने का इंतजार करने लगा और फिर 5 बजे उनकी नींद खुली और उनका अपने हाथ की तरफ जैसे ही ध्यान गया तो उन्होंने तुरंत अपना हाथ बाहर खींचा और उसके साथ में मेरा लंड भी बाहर आ गया. अब में चोरी से मौसी के चेहरे को देख रहा था, अब वो एकदम डरी हुई थी कि क्या हो गया?

फिर उन्होंने मेरे लंड को अंदर नहीं किया, शायद उन्हें डर था कि में जाग जाऊंगा और बस वो चादर डालकर चली गई और मैंने भी अपना लंड अंदर नहीं किया और में भी वैसे ही लेटा रहा. फिर कुछ देर के बाद मामी मुझे उठाने आई तो उन्होंने मुझे 2 बार आवाज़ दी, लेकिन में नहीं उठा तो उन्होंने मेरी चादर खींच दी तो उनकी नज़र मेरे लंड पर पड़ी.

फिर उन्होंने कुछ देर तक मेरे लंड को देखा और फिर मेरे लंड को पकड़ा और मेरे लंड के सुपाड़े को अपने अंगूठे से सहलाया और पेंट के अंदर डालकर चली गई. अब में उनके जाते ही उठा और उनके पीछे आने लगा, ताकि उन्हें लगे कि उन्होंने जो किया है, वो मुझे पता है.

फिर उनकी नज़र मुझ पर पड़ी तो उन्होंने कहा कि आप कब उठे? तो मैंने कहा कि जब आप जा रही थी तो आपकी पायल की आवाज़ से उठ गया. फिर वो मुस्कुरा कर चली गई. अब मौसी भी मुझसे नॉर्मल बात कर रही थी और अब में नज़र बचाकर दोनों की चूचीयों को देख रहा था.

फिर मौसी नहाकर आई तो में तुरंत बाथरूम में घुस गया ताकि में उनकी पेंटी में मुठ मार सकूँ. फिर जब में अंदर गया तो उनकी काली ब्रा और पेंटी धुलकर बाल्टी में रखी थी. फिर मैंने दोनों को बाहर निकाला और बाथरूम में ऐसे बिछाया, जैसे मौसी ने पहनी हो और अपने सारे कपड़े उतार कर लेट गया और उनकी ब्रा को मसलने लगा और पेंटी पर लंड रगड़ने लगा.

अब मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था कि तभी किसी ने दरवाजा खटखटाया, अब बाहर मौसी थी और उनकी लड़की ने पेशाब कर दिया था तो वो उसके पैर धुलाने के लिए आई थी. फिर मैंने अपनी चड्डी पहनी और उनकी ब्रा पेंटी को बाल्टी में डाल दिया, लेकिन ये भूल गया कि मौसी ने उन्हें सारे कपड़ो के नीचे रखा था.

लेकिन मैंने उनकी ब्रा पेंटी एकदम ऊपर रख दी थी और ऊपर से मेरी पेंट में भी टेंट बना था. अब में वैसे ही खड़ा था. मैंने छुपाया नहीं तो मौसी ने उसे देखा, लेकिन कुछ नहीं कहा और फिर उनकी नज़र बाल्टी पर पड़ी, शायद वो समझ गई थी कि में क्या कर रहा था? अब वो जाते वक़्त बाल्टी साथ में लेकर चली गई.

अब मुझे बड़ा गुस्सा आया, लेकिन मैंने मुठ नहीं मारी और वैसे ही बाहर आ गया और मामी के सामने पंखे के नीचे सिर्फ़ टावल पहन कर पैर ऊपर करके बैठ गया. अब उन्हें मेरा लंड दिख रहा था, अब वो बार-बार मेरे लंड को देख रही थी. फिर दोपहर में मामा, नाना ऑफिस गये थे.

और मामी के बच्चे स्कूल गये थे और नानी, मौसी पड़ोस में गई थी, तो घर पर सिर्फ़ में और मौसी थे और एक ही बेड पर सोकर बात कर रहे थे. अब में बात करते वक़्त पेंट के ऊपर से लंड सहला रहा था, लेकिन मामी कुछ कह नहीं रही थी और वो बात करते-करते सो गई थी. “Bathroom Incest Chudai”

फिर जब मैंने देखा कि वो सो गई है तो में तुरंत उठा और उनके बूब्स पर से साड़ी के पल्लू को हटा दिया. अब मेरे सामने उनके ब्लाउज में क़ैद उनके बूब्स थे, फिर मैंने डरते-डरते उनके ब्लाउज के सारे हुक खोल दिए और अब मामी सिर्फ़ सफ़ेद ब्रा में थी. अब मुझे बहुत डर लग रहा था, लेकिन कंट्रोल भी नहीं हो रहा था. ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

फिर मैंने उनके दोनों बूब्स पर हाथ रख दिया और धीरे से दबाया तो अब मुझे बड़ा मज़ा आया और मेरी कुछ हिम्मत भी बढ़ गई. फिर मैंने मामी की ब्रा के अंदर हाथ डालकर उनकी एक चूची को बाहर निकाला और उसे चूमा कि तभी बेल बजी, अब मामा आवाज़ लगा रहे थे. दोस्तों इसके आगे में कुछ नहीं कर पाया.

बाद में मैं बाथरूम में चला गया और मामी के नाम की मुठ मार कर कमरे में जाकर सो गया. मुझे पता ही नहीं चला कि शाम के सात बज गए. जब मामी ने मुझे जगा कर बाजार से कुछ सामान लाने के लिए कहा, तब मुझे इतनी देर तक सोये रहने का अहसास हुआ. सच में माल निकल जाने के कारण बड़ी मीठी और गहरी नींद आई थी. “Bathroom Incest Chudai”

फिर मैं बाजार गया और मामी ने जो कहा था, वो सामान लेकर आ गया. मामी खाना बनाने लगीं और मैं टीवी देखने लगा. कुछ देर बाद हम दोनों ने खाना खाया. मामी अब मेरे साथ टीवी देखने बैठ गईं. टीवी में देखने जैसा कुछ नहीं आ रहा था.. इसलिए हम दोनों बात करने लगे.

तभी उन्होंने मुझसे पूछा कि मैं जब मैं सो रही थी, तब तुम क्या देख रहे थे?

मैंने कहा- कुछ नहीं.

तो वो बोलीं- मुझको सब पता है.. तुम्हारी नजरें क्या देख रही थीं. ऐसा लगता है, अब तुम्हारी शादी करवानी पड़ेगी.

फिर उनको न जाने क्या हुआ, मुझको पता ही नहीं चला क्योंकि उन्होंने पूछा कि क्यों इससे पहले तुमने किसी के देखे नहीं क्या?

मैं समझ गया कि मामी गर्म हो गई हैं सो मैंने जबाव दिया- नहीं देखे.

“तो फिर देखना चाहोगे?”

मैं- क्या?

“वही जो तुम देखने की कोशिश कर रहे थे.”

मैं- क्या आप दिखा सकती हैं?

तब उन्होंने काले रंग का नाइट ड्रेस पहना हुआ था. मेरी बात सुनते ही उन्होंने अपना टॉप निकाल दिया. अब वो सिर्फ ब्रा में थीं. मैंने देखा कि उनके 34 इंच की साइज के चूचे बाहर निकलने को बेताब थे. ऐसा नजारा देख कर मेरा लंड लोहे का हो गया. इस वक्त मैंने भी नाईट ड्रेस पहना था.. इसलिए मामी ने मेरे पजामे में बना तम्बू देख लिया. “Bathroom Incest Chudai”

मामी ने पूछा- तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है?

मैं- नहीं.. क्यों?

मामी- बस ऐसे ही पूछा.

मैं- मैं आपसे एक बात पूछना चाहता हूँ, अगर आप गुस्सा न हो तो.

मामी- मैं क्यों गुस्सा होऊंगी.. बोलो न?

मैं- क्या आप आज की रात मेरी गर्लफ्रेंड बनेगीं?

मामी- अगर तुम ज्यादा बदमाशी नहीं करोगे तो ही बोलो.

मैं- ओके.

“तो क्या मैं आज की रात आपके साथ बेड पे सो सकता हूँ?”

मामी चूची उठाते हुए बोलीं- ओके.

अब मैं और मामी टीवी बंद करके बेडरूम में आ गए. बेडरूम मैं और मामी साथ बेड पर लेट गए. बेडरूम में हल्की सी रोशनी थी.

मैं- मामी, क्या मैं आपके उनको छू सकता हूँ?

मामी- वो वो क्या करते हो.. चूचे बोलो न.. ओके..

मैं- क्या मैं आपको तेल की मालिश कर दूँ?

मामी- ये आईडिया बहुत अच्छा है. चलो आज तुम मेरी पूरी बॉडी की मालिश कर दो. बाद में मैं तुम्हारी बॉडी की मालिश कर दूँगी.

मैं- ओके प्यारी मामी.. मैं अभी तेल की बोतल लेकर आता हूँ.

मामी- उस ड्रॉवर में है.

मैं बोतल लेकर आ गया.

मैं- कहां से शुरूआत करूँ?

मामी- तुम जहां से करना चाहो.

मैं- मैं तो यहाँ से करना चाहूँगा.

ऐसा कह कर मैंने मामी के मम्मों पर हाथ रख दिया.

मामी- क्या ब्रा के ऊपर से ही मालिश करोगे?

मैं- नहीं वो तो निकालनी पड़ेगी न.

मामी- तो तुम ही निकाल दो न..

ऐसा बोल कर मामी बैठ गईं. मैंने जैसे ही ब्रा उनकी निकाली, मामी के चूचे उछल पड़े. मैं तेल लगा कर मामी के मम्मों को मसलने लगा और मामी गर्म होने लगीं. मेरा लंड पूरी तरह से लोहा बन चुका था और शायद उनको भी मालूम हो गया था क्योंकि मेरा लंड उनको टच कर रहा था. “Bathroom Incest Chudai”

मामी ने अपना हाथ मेरे लंड पर रखा और बोलीं- ये क्या है?

मैं- आपको तो सब पता है.

मामी- इतना बड़ा है? तुम्हारे मामा का तो छोटा सा ही है.

“उम्मीद है आपको मजा आया होगा.”

“मजा तो देखने से आएगा.”

इतना कह कर मामी ने मेरी नाईट ड्रेस ला लोअर उतार दिया और मेरी अंडरवियर के ऊपर से ही लंड पकड़ कर कस के दबाने लगीं. मुझको भी मजा आने लगा.

मैं- मामी, क्या मैं आपको बिना कपड़ों के देख सकता हूँ.. क्योंकि आज तक मैंने किसी औरत को बिना कपड़ों के नहीं देखा है.

मामी- चलो आज मैं तुमको सब दिखाऊँगी.

ऐसा बोल कर वो मेरे कपड़े उतारने लगीं और मुझको पूरा नंगा कर दिया.

मामी- यदि तुम मुझको नंगा देखना चाहते हो, तो मेरे कपड़े उतार दो.

‘ओके…’ कह कर मैंने मामी के एक एक करके सारे कपड़े उतार दिए. क्या लग रही थीं मामी.. उनके बड़े बड़े चूचे.. नीचे एकदम सफाचट चूत.

मामी- देख क्या रहे हो.. अब मुझे प्यार करने दो.

ऐसा बोल कर मामी ने मेरा लंड मुँह में भर लिया और लंड चूसने लगीं. मैं तो जैसे स्वर्ग में पहुँच गया. मैं भी मामी की चूत में हाथ फेरने लगा और वो भी मादक सिसकारियाँ भरने लगीं. मैं भी मामी की चूत को चाटने लगा और हम 69 की पोजीशन में आ गए. फिर लंड चूत की चुसाई का मंजर दस मिनट तक चला. “Bathroom Incest Chudai”

बाद में मामी बोलीं- अब बर्दाश्त नहीं होता.. तुम अपना लंड डाल दो मेरी चूत में.

मैं- ओके प्यारी मामी.. अभी डालता हूँ.

मामी- थोड़ा आराम से डालना इतना बड़ा लंड तेरे मामा का भी नहीं है न.. इसलिए मुझे दर्द होगा. तेरे मामा का तो तुमसे आधा ही है.

मैंने मामी के पैरों को फैलाया और उनके ऊपर आ गया.

मामी डरते हुए बोलीं- आराम से करना प्लीज़..

मैंने पहले मामी की चूत पर लंड को सैट किया और एक धक्का मारा तो लंड बाहर फिसल गया और मामी चीख उठीं- उम्म्ह… अहह… हय… याह… आराम से करो.

मैं- आपकी चूत टाइट है, लगता है मामा ने ऐसे ही छोड़ दी है. मेरी खूबसूरत मामी और उसकी चूत को.

मामी- तुम्हारे मामा का लंड ही छोटा सा टुन्नू सा है.

ऐसा कह के मामी ने मेरा लंड पकड़ के अपनी चूत पर रखा और शॉट लगाने को बोलीं. मैंने और जोर से शॉट लगाया तो आधा लंड मामी की चूत को फाड़ता हुआ चला गया.

मामी- आआआ.. अह्ह्हह मर गई रे.. थोड़ा तो रहम करो अपनी मामी पर… मार डालोगे क्या!

मैं थोड़ी देर रुका. फिर बाद में लगा कि अब रास्ता क्लियर है तो फिर एक जोरदार शॉट मारा. अबकी बार मेरा पूरा लंड मामी की चूत में चला गया. मामी गिड़गिड़ाने लगीं. मैं थोड़ी देर रुका, थोड़ी देर बाद वो भी गांड उछाल कर मेरा साथ देने लगीं.

और हम लोग सब भूल कर काफी देर तक चुदाई करते रहे. फिर मैं झड़ने वाला था तो मैंने मामी से बोला तो उन्होंने कहा- अन्दर ही छोड़ दो. कुछ दमदार शॉट लगे ही थे कि मेरा पूरा माल मामी की चूत में ही छूट गया. इस दौरान मामी तीन बार झड़ चुकी थीं. हम दोनों ऐसे ही एक दूसरे से चिपके पड़े रहे. अब रात के दो बज रहे थे. ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

मैं- मामी कैसी लगी मेरी चुदाई?

मामी- मैं तो धन्य हो गई तुम्हारे लंड से… पहली बार इतना बड़ा लंड लिया है, मजा आ गया. अब तो मैं तुमसे ही चुदवाऊंगी.

ऐसा कह कर वो मेरा लंड चूसने लगीं.

मैं- और खाने का इरादा है क्या?

मामी- मेरा बस चले तो पूरा निगल जाऊं.

मैं- तो निगलो न.

इतना बोल कर वो मेरे लंड को चूसने लगीं. थोड़ी देर चूसने के बाद मेरा लंड फिर से लोहा हो गया.

मैं- अब कहां डालूँ बोलो.. खड़ा हो गया.

मामी- अब मेरी चूत में तो थोड़ी भी जान नहीं है.

मैं- तो फिर अब क्या करूँ. अब तो गांड ही एक उपाय है.

मामी- उसमें बहुत दर्द होता है.

मैं- क्यों मामा ने कभी डाला नहीं है?

मामी- नहीं.. मेरी सहेलियां बोल रही थीं.

मैं- पर मैं प्यार से करूँगा ओके.. और तेल लगा दूँ, इससे दर्द कम होगा.

मामी- ओके पर आराम से करना.. मुझे तो डर लग रहा है.

मैं- डरो मत मैं हूँ न.

ऐसा बोल कर मैंने उनको घोड़ी बनने को बोला. वो डरते डरते घोड़ी बन गईं. मैंने लंड उनकी गांड पर लगाया और जोर से एक शॉट मारा, तो आधा लंड उनकी गांड में चला गया और वो चिल्लाने लगीं- प्लीज़ बाहर निकालो प्लीज़..मार डालाआआ रेईई अह्ह्ह्ह.. मेरी जान लोगे क्या निकालो न प्लीज़.. “Bathroom Incest Chudai”

मैं थोड़ी देर शांत रहा, फिर एक और शॉट मारा और पूरा लंड उनकी गांड में डाल दिया. फिर एक मिनट तक मैं ऐसे ही पड़ा रहा. बाद में दर्द थोड़ा कम हुआ तो मैं लंड अन्दर बाहर करने लगा और उनको भी मजा आने लगा. मैं ऐसे ही कुछ देर तक उनकी बड़ी सी गांड मारता रहा और वो मुझको सपोर्ट देती रहीं.

मैं- अब मैं झड़ने वाला हूँ.. कहां निकालूँ?

मामी- मेरी चूत में डाल दो प्लीज़..

मैं- ओके प्यारी मामी.

मामी- आज जितना मजा आया वो लाइफ में कभी नहीं आया.

अब हम बहुत थक चुके थे.. सो हम ऐसे ही सो गए. सुबह 8 बजे मेरी नींद खुली तो देखा कि मामी नंगी ही किचन में नाश्ता बना रही थीं. मैं उठ कर उनके पास गया और पीछे से पकड़ कर मामी के मम्मों को मसलने लगा. तीन दिन का राशन घर में ही था इसलिए हमने तीन दिन तक कपड़े ही नहीं पहने और घर के अन्दर चुदाई का खेल चलता रहा. उस दिन के बाद से हमें जब भी मौका मिलता, हम चुदाई करते.

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Ritu Agarwal

हैलो दोस्तों! मैं ऋतु अग्रवाल हूँ - कानपुर विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र में मास्टर डिग्री पाने वाली और पिछले 5 साल से हिंदी में वो कहानियाँ लिख रही हूँ जो आपकी रूह को छू लें और तन को तड़पा दें। मैं मानव व्यवहार और इंसानी इच्छाओं पर गहरा रिसर्च करती हूँ ताकि हर कहानी असली और दिलकश हो। मेरी कहानियाँ लाखों पाठकों ने पढ़ी हैं और हर कोई वापस आता है। मैं समझती हूँ आप क्या चाहते हैं - और वही लिखती हूँ जो आपको पागल कर दे। तो चलो, मेरी कहानी से आज की रात को खास बनाते हैं!

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