प्यासे पापा को चूत का पानी पिलाया बेटी ने 2

नमस्ते दोस्तों, मैं रश्मि हूँ, कर्नल प्रशांत की इकलौती बेटी और अब उनकी निजी रखैल भी। दोस्तों आपने कहानी के पिछले भाग “ प्यासे पापा को चूत का पानी पिलाया बेटी ने 1 ” में आपने पढ़ा होगा कि पापा के साथ रोज़ की चुदाई ने मेरे जिस्म को और भी रसीला बना दिया था। चूचे एक कप बड़े होकर 34D हो गए, कमर पतली और गांड इतनी उठी कि पैंट में भी साफ झलकती थी। दिन-रात चुदाई के ख्याल दिमाग में घूमते रहते थे। Doctor Clinic Sex Story

घर में हम दोनों ज्यादातर नंगे ही रहते, नाइटी और एसी का बिल बचता था, बस कंडोम और आई-पिल का खर्चा बढ़ता था। तीन बार अबॉर्शन करवाना पड़ा था क्योंकि मैं अपने ही पापा के बच्चे की माँ नहीं बन सकती थी। पापा को कंडोम बिल्कुल पसंद नहीं, मुझे भी नहीं। चमड़ी से चमड़ी की रगड़ और आखिर में बच्चेदानी पर गर्म वीर्य की बौछार, यही असली जन्नत है।

एक दिन मैंने कहा, “पापा, मैं कॉपर-टी लगवा लेती हूँ।”

पापा ने हँसकर हामी भर दी, “जा बेटी, फिर तो खुलकर चोदेंगे।”

पापा साथ नहीं जा सकते थे, तीसरा कोई हमराज़ भी नहीं था। मैं अकेले ही निकल पड़ी। नहा-धोकर क्रॉप टॉप और माइक्रो स्कर्ट पहनी, ब्रा-पैंटी घर पर ही छोड़ दी। शीशे में खुद को देखकर खुद ही गर्म हो गई। क्लीनिक दूर चुना ताकि कोई जान-पहचान वाला न मिले।

गूगल पर नया क्लीनिक दिखा, रेटिंग अच्छी थी। अंदर गई तो डॉक्टर देखकर दंग रह गई। बेहद जवान, शायद 25-26 का, ताज़ा-ताज़ा डॉक्टर बना था। मैं खड़ी थी, वो बैठा। मेरी स्कर्ट इतनी छोटी कि जाँघें पूरी नंगी, चूत बस इंच भर कपड़े से छुपी थी। उसकी नज़रें वहीं अटक गईं।

मैंने टोका, “हैलो डॉक्टर!”

वो हड़बड़ाया, “ह…हाँ, प्लीज़ बैठिए…” चेहरा लाल।

मैं मुस्कुराई, बैठ गई। टॉप इतना छोटा कि क्लीवेज आधा बाहर। उसकी नज़रें वहीं घुस गईं।

“गुड मॉर्निंग डॉक्टर, कॉपर-टी लगवानी है।”

वो चौंका, “शादीशुदा तो नहीं लगतीं?”

“नहीं… बस सेक्स लाइफ बहुत अच्छी चल रही है,” मैंने शरमाते हुए कहा।

वो हँसा, “किस्मतवाली हो… चलिए उस केबिन में टेस्ट करेंगे।”

केबिन में ऑपरेशन टेबल जैसा बेड था। मैं बैठ गई। वो आया और बोला, “लेट जाइए, कपड़े हटाने होंगे।”

मैंने सोचा आज मस्ती हो जाए। वो मशीन की तरफ मुड़ा, मैंने फटाक से क्रॉप टॉप उतार फेंका। ब्रा थी ही नहीं, मेरे गोरे-गोरे चूचे उछलकर बाहर आ गए। वो पलटा तो देखता रह गया। मैं सिर्फ माइक्रो स्कर्ट में लेटी थी।

“वाउ… मैं नीचे के कपड़ों की बात कर रहा था,” वो हकलाया।

मैंने माथे पर हाथ मारा, फिर टॉप वापस रख दिया। खड़ी हुई, स्कर्ट नीचे सरकाई। अब सिर्फ थॉन्ग पैंटी और हाई हील्स। पीठ उसकी तरफ थी, गांड पूरी नंगी। जब घूमी तो उसकी आँखें फट गईं। पैंट में तंबू खड़ा हो चुका था।

वो बोला, “पैंटी भी उतारनी होगी।”

मैंने शरमाते हुए पूछा, “ज़रूरी है?”

“हाँ, बिल्कुल,” उसकी आँखें लालसा से चमक रही थीं।

मैंने थॉन्ग नीचे सरकाई, हाथ से चूत ढककर लेट गई। वो ग्लव्स पहनकर अल्ट्रासाउंड करने लगा। उसके हाथ पेड़ू पर फेर रहे थे, जैल ठंडी-ठंडी लग रही थी। मैंने आँखें बंद कर लीं, साँसें तेज हो गईं। अचानक उसने मेरे हाथ हटाए और खुद टाँगें फैला दीं। मेरी गांड टेबल के किनारे, चूत उसके मुँह के बिल्कुल सामने।

वो झुका, चूत को उंगलियों से फैलाया, अंदर झाँका। उसका गर्म साँस चूत पर लग रहा था। अंगूठा दाने पर दबा था, मैं काँप गई। फिर अचानक एक उंगली अंदर घुसेड़ दी। मैं उछली, “आह्ह्ह…” वो टटोलता रहा, नाक चूत पर टिकाकर खुशबू सूंघने लगा। मैं बर्दाश्त न कर सकी। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

हाई हील की एड़ी उसके सिर के पीछे टिकाई और सिर खींचकर चूत में घुसा दिया। जैसे ही उसके होंठ चूत से छुए, मैंने जाँघों से सिर दबा लिया, बाल कसकर पकड़ लिए। वो भी पूरा साथ देने लगा। ग्लव्स उतारे, जाँघें मसलने लगा और जीभ चूत में घुमाने लगा।

“च्ट्ट… च्ल्लप… च्ट्ट…” उसकी जीभ दाने पर रगड़ रही थी, दो उंगलियाँ अंदर-बाहर।

मैं चिल्लाई, “आह्ह्ह डॉक्टर… ओह्ह्ह… येस्स… चाटो… आह्ह्ह…”

हाथ उसके हाथ पकड़कर चूचों पर रख दिए। वो निचोड़ने लगा, दाँतों से निप्पल काटने लगा। मैं गांड उठा-उठाकर मुँह पर रगड़ रही थी। दो मिनट में ही मैं झड़ने लगी, “आह्ह्ह… बस… आ रहा है… ओह्ह्ह्ह…” चूत से रस की बौछार, उसका पूरा चेहरा भिगो दिया।

मेरी कमर हवा में अकड़ गई, बाल उसके हाथों में उखड़ आए। झड़कर मैं ढीली पड़ गई। चूचों पर लाल निशान, टाँगें लुढक गईं। उसका चेहरा मेरे रस से चिपचिपा, बाल बिखरे। मैं आँखें बंद कर साँसें ले रही थी कि अचानक चूत पर गर्म-गर्म लंड का सुपारा लगा। मैंने आँख खोली ही थी कि उसने एक झटके में पूरा लंड पेल दिया, गोटियाँ चटाक से गांड से टकराईं।

वो चूचे चूसते हुए धकापेल चालू कर दी। मैं अभी निचुड़कर आई थी, ऊपर से बिना पूछे चोदने लगा। गुस्सा आ गया। मैंने जोर से धक्का मारा, “पुच्छ…” करके लंड बाहर निकला। चूत में खालीपन लगा, पर आत्मसम्मान बड़ा था। वो हक्का-बक्का देखता रह गया।

मैं उठकर बैठ गई, “क्या कर रहे हो?”

वो हकलाया, “सॉरी… पर तुम इतनी हॉट हो…”

मैंने होंठ चबाए, फिर मुस्कुरा दी। आज कॉपर-टी भी लगवानी थी और इस नौजवान डॉक्टर का लंड भी चखना था… पर अपनी शर्तों पर। मेरे धक्के से डॉक्टर अल्ट्रासाउंड मशीन से टकराया और फिर झपटा। मैंने हाई हील वाला पैर उसकी छाती पर रखकर रोक दिया। वो आँखें चमकाकर मेरी जाँघें पकड़ने लगा, सोचा मैं खेल रही हूँ।

मैंने फिर जोर से धक्का मारा और टेबल से उतरकर पैंटी उठाई। झुकते ही उसने पीछे से बाल खींचे और मुँह के बल टेबल पर पटक दिया। एक हाथ से बायाँ चूचा मसल लिया, दूसरा गर्दन दबाकर टेबल पर जमा दिया और पीछे से लंड पूरा पेल दिया। “च्ट्टाक… च्ट्टाक… च्ट्टाक…” कमरा गूँज उठा। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

वो बाल खींचकर पागलों की तरह ठुक रहा था। हर झटके में गोटियाँ मेरी गांड से टकरा रही थीं। फिर उसने चूतड़ पर जोरदार चांटा मारा, “पट्ट्ट्ट…” मैं चीखी, “आआह्ह्ह…” मौका मिलते ही मैंने घूमकर उसकी पकड़ ढीली की और फुल स्पीड में मुँह पर तमाचा जड़ दिया, “चट्ट्ट्ट…” वो सहमकर गाल पकड़कर खड़ा रह गया। उसका लंड सेकंड में छुआरा हो गया। मैं गुस्से में बड़बड़ाते हुए कपड़े पहनने लगी।

वो गिड़गिड़ाने लगा, “सॉरी… गलतफहमी हो गई… प्लीज शिकायत मत करना…” आँखों में आँसू।

मुझे तरस आ गया। मैंने उसे उठाया, गाल पर पप्पी की, “इट्स ओके… तुम अच्छे हो…”

उसकी पैंट में फिर उभार दिखा। मैंने मुस्कुराकर उसका हाथ हटाया और खुद लंड पर हाथ फेरा। पैंट-कच्छा नीचे किया, सांवला लंड आधा खड़ा था। उसे टेबल से सहारा देकर मैं घुटनों पर बैठ गई। पहले गोटियाँ चाटीं, “च्ल्लप…” फिर पूरा लंड गले तक उतार लिया।

“सुड़ुप… सुड़ुप… सुड़ुप…” मेरे मुँह से आवाजें आ रही थीं। वो आँखें बंद कर मजे ले रहा था। मैंने उसके हाथ अपने सिर पर रखवाए। समझते ही उसने बालों की चोटी बनाकर पकड़ी और धीरे-धीरे मुँह चोदने लगा। फिर हैवान बन गया। कमर के झटके तेज, पकड़ सख्त। “ग्ग्ग्ग… ग्ग्ग्ग… गों… गों…” उसका लंड मेरे गले को चोद रहा था।

मैंने टॉप नीचे किया, चूचे उसकी जाँघों पर रगड़ने लगी। वो गुर्राया, बाल पूरी ताकत से खींचे और गले तक पेलता रहा। मेरी साँसें घुटने लगीं, आँखों से आँसू। पर मैंने सहा। मौका देखकर मैंने उंगली उसकी गांड में घुसा दी। वो अकड़ गया। बाल खींचकर सिर लंड पर दबाया और झड़ने लगा। “ग्ग्ग्ग्ग्ग…” एक के बाद एक पिचकारी, सीधे मेरे पेट में। इतना माल कि लगा दोगुना निकला। मैं थप्पड़ मारकर अलग हुई, बचा माल गटककर साँस ली। “Doctor Clinic Sex Story”

वो घबराया, “सॉरी… वाइल्ड हो गया…”

मैंने उसका लंड जीभ से चाट-चाटकर साफ किया, कपड़े ठीक किए और दरवाजे की ओर बढ़ी।

वो बोला, “रूटीन चेकअप के लिए आना…”

मैंने मुस्कुराकर मना कर दिया। दरवाजा खोला तो ऊपर सीसीटीवी कैमरा दिखा।

मैं पलटी, “ये क्या?”

वो डर गया, “प्लीज गुस्सा मत करो… सिर्फ मेरे पास एक्सेस है… अभी डिलीट कर दूँगा…”

मैंने उसकी जेब से पेन निकाला, कागज पर अपनी ईमेल लिखी, “आज की सारी फुटेज मेल कर… फिर डिलीट कर देना…”

वो हामी भरता रहा। मैं मुस्कुराते हुए घर आ गई। घर पहुँची तो पापा नहीं थे। सारे कपड़े फेंके और उनके बिस्तर पर लेट गई। जिस्म पर डॉक्टर का थूक और माल अभी भी चिपचिपा था। नहाकर काली जालीदार ब्रा-पैंटी पहनी, पापा की फेवरिट। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

खाना बनाकर इंतज़ार करने लगी। फोन पर नोटिफिकेशन आया। डॉक्टर ने साले ने पूरी HD फुटेज भेज दी थी। लैपटॉप खोला, वीडियो प्ले किया और उल्टी लेटकर देखने लगी। जैसे ही डॉक्टर ने मेरी चूत चाटी, मेरा जोश फिर भड़क उठा। तकिया चूत के नीचे रखकर कमर हिलाने लगी। “Doctor Clinic Sex Story”

वीडियो में मैं झड़ रही थी, इधर मैं आँखें बंद कर उसी सीन में खो गई। पता ही नहीं चला कि पापा कब आकर दरवाजे पर खड़े हो गए। जब आँख खुली तो पापा का चेहरा आग उगल रहा था। मैं लपककर लैपटॉप बंद करने को हुई, पापा ने बाल पकड़कर पीछे खींच लिया, “अब शर्मा रही है रंडी? बहुत मजा आया ना उस हरामी का लंड लेते हुए?”

उनकी आँखें लाल थीं। मेरे मुँह पर तीन जोरदार थप्पड़ पड़े, “चट्टाक… चट्टाक… चट्टाक…” कान बज गए। फिर मुझे बेड पर मुँह के बल पटक दिया। ब्रा-पैंटी फाड़कर फेंकी। बेल्ट निकाली और लात मारकर घोड़ी बनने को कहा। मैं डर से काँपते हुए घोड़ी बन गई। पापा ने बाल पकड़े, चूतड़ फैलाए और बिना तेल-सेल के पूरा लंड गांड में पेल दिया।

“आआआह्ह्ह्ह्ह… पापा… नहह्हीईई…” मेरी चीख निकली, पर पापा नहीं रुके। बेल्ट मेरी कमर और चूतड़ों पर बरसने लगी, “तड़ाक… तड़ाक… तड़ाक…” हर मार के साथ मैं सिसक रही थी। मेरी ब्रा-पैंटी मुँह में ठूँस दीं। पापा जानवर बन चुके थे। बाल खींचकर गांड चोद रहे थे, “ले रंडी… ले… आज तेरी गांड फाड़ दूँगा…”

दर्द इतना था कि कुछ ही मिनट में मैं बेहोश हो गई। होश आया तो पापा मुझे सीने से चिपकाए रो रहे थे। शराब की महक आ रही थी। मुझे देखते ही फूट-फूटकर रोने लगे, “माफ कर दे बेटी… मैं पागल हो गया था…” मैंने भी उन्हें गले लगाया। हम दोनों देर तक रोते रहे। “Doctor Clinic Sex Story”

फिर पापा ने गर्म पानी से नहलाया, दवा खिलाई, खाना खिलाया और नंगे ही लिपटकर सुला दिया। उनका खड़ा लंड मेरी जाँघों में दबा था, पर किसी ने छेड़ा नहीं। अगले तीन दिन मैं रूठी रही। पापा टूट गए। तीसरे दिन शाम को मेरे पैरों में गिर पड़े, “जो सजा देगी मंजूर है… बस माफ कर दे…” मैंने टाँगें फैलाईं। पापा ने चूत पर मुँह रख दिया। मैंने लोअर-पैंटी उतार दी।

“वो वीडियो वाला लड़का याद है?”

पापा चूत चाटते हुए बोले, “हाँ…”

“मुझे उससे चुदवाना है… और आप अपने हाथों से उसका लंड मेरी चूत में डालोगे।”

पापा रुक गए, मेरी आँखों में देखने लगे।

मैंने मुस्कुराकर कहा, “कन्यादान तो बाप का फर्ज होता है ना पापा?”

पापा समझ गए।

मैंने टॉप उतारा, चूचे हिलाए और बोली, “बचपन से जो माँगा आपने दिया… आज बेटी दो लंड माँग रही है… दोगे ना?”

पापा मुस्कुराए, सहमति में सिर हिलाया और मुझे गोद में उठाकर बेतहाशा चोदने लगे। तीन बार झड़े, तीनों बार चूत में ही। अब बस डॉक्टर को बुलाने की तैयारी थी। अगले दिन शाम को मैंने डॉक्टर को मैसेज किया, “कल रात 9 बजे, मेरे घर आना। अकेले।”

उसने तुरंत रिप्लाई किया, “आ रहा हूँ जान… तैयार रहना।”

शाम सात बजे से मैं तैयार होने लगी। लाल ट्रांसपेरेंट बेबी-डॉल पहना, अंदर कुछ नहीं। चूचे और चूत साफ दिख रहे थे। पापा ने देखा तो लंड खड़ा हो गया, पर मैंने मना कर दिया, “आज नहीं पेशेंस रखिए पापा… आज आपकी बेटी का कन्यादान है।” ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

डॉक्टर ठीक नौ बजे आया। दरवाजा मैंने खोला। वो मुझे देखकर हक्का-बक्का। मैंने उसे अंदर खींचा और लिविंग रूम में ले गई। पापा सोफे पर बैठे थे, सिर्फ बॉक्सर में। डॉक्टर ने पापा को देखा तो घबरा गया, “ये… ये कौन?”

मैंने मुस्कुराकर पापा के पास बैठ गई, उनके लंड पर हाथ फेरते हुए बोली, “मेरे मालिक… और आज तुम्हारे भी मालिक।”

डॉक्टर की समझ में कुछ नहीं आया।

पापा ने शांत आवाज में कहा, “बैठो डॉक्टर साहब… आज मेरी बेटी का कन्यादान करना है।”

डॉक्टर की आँखें फट गईं, “बेटी???”

मैंने हँसते हुए पापा का बॉक्सर नीचे खींचा और उनका 8 इंची फौलादी लंड बाहर निकाल लिया। डॉक्टर का मुँह खुला का खुला रह गया।

पापा ने कहा, “हाँ बेटी… आज तू जो चाहेगी वही होगा।”

मैं डॉक्टर के पास गई, उसकी पैंट खोली और लंड बाहर निकाला। फिर पापा के सामने घुटनों पर बैठ गई और दोनों लंड एक साथ मुँह में लेने की कोशिश करने लगी। डॉक्टर अभी भी शॉक्ड था, पर उसका लंड मेरे मुँह में कड़क हो रहा था। मैंने दोनों को एक-एक करके चूसा, “सुड़ुप… सुड़ुप… च्ल्लप…”

फिर खड़ी हुई, बेबी-डॉल उतारा और नंगी होकर सोफे पर लेट गई। टाँगें फैलाईं और बोली, “पापा… कन्यादान कीजिए।”

पापा उठे, डॉक्टर का लंड हाथ में लिया, उसकी तरफ देखा और बोले, “आज से ये मेरी बेटी की चूत का दूसरा मालिक है।”

फिर मेरी चूत पर थूक लगाई, डॉक्टर का लंड सुपारा चूत पर रगड़ा और धीरे-धीरे अंदर धकेल दिया। डॉक्टर की आँखें बंद हो गईं, “आह्ह्ह… रश्मि…” पापा ने उसकी कमर पकड़कर एक जोरदार धक्का लगवाया, पूरा लंड अंदर चला गया। डॉक्टर सिसक उठा। “Doctor Clinic Sex Story”

मैंने पापा को देखकर मुस्कुराई, “थैंक यू पापा… अब आप भी आ जाइए।”

पापा मेरे मुँह के पास आए। मैंने उनका लंड गले तक ले लिया। अब मैं एक साथ दो लंड ले रही थी, एक चूत में, एक मुँह में। डॉक्टर पीछे से धकापेल कर रहा था, पापा मेरा मुँह। कमरा सिर्फ च्ट्टाक… च्ट्टाक… और सुड़ुप… सुड़ुप की आवाजों से भर गया।

फिर मैं घोड़ी बन गई। डॉक्टर ने गांड में, पापा ने चूत में। दोनों एक साथ अंदर-बाहर। मैं चीख रही थी, “आह्ह्ह पापा… आह्ह्ह डॉक्टर… फाड़ दो मुझे… ओह्ह्ह्ह…” दोनों लंड एक साथ मेरे अंदर टकरा रहे थे। मैंने कभी ऐसा मजा नहीं लिया था।

डॉक्टर पहले झड़ा, मेरी गांड में। फिर पापा ने चूत में। मैं तीन बार झड़ चुकी थी। फिर मैं दोनों के बीच लेट गई। एक का लंड मुँह में, दूसरा चूत में। रात भर चुदाई चली। कभी डॉक्टर ऊपर, कभी पापा। कभी दोनों एक साथ। सुबह तक हम तीनों नंगे लिपटे सोए।

पापा ने डॉक्टर से कहा, “अब से तू जब चाहे आ सकता है… मेरी बेटी अब हमारी साझा रखैल है।”

डॉक्टर खुश होकर चला गया। अब मेरे पास दो मालिक हैं। एक जो मुझे जन्म दिया, दूसरा जिसने मेरी चूत में कॉपर-टी डाली। प्यारे पाठकों, अब मेरी चूत और गांड दोनों हमेशा भरी रहती है। अगली बार बताऊँगी कैसे हम तीनों ने होटल में पूरी रात गंद मचाया।

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Ritu Agarwal

हैलो दोस्तों! मैं ऋतु अग्रवाल हूँ - कानपुर विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र में मास्टर डिग्री पाने वाली और पिछले 5 साल से हिंदी में वो कहानियाँ लिख रही हूँ जो आपकी रूह को छू लें और तन को तड़पा दें। मैं मानव व्यवहार और इंसानी इच्छाओं पर गहरा रिसर्च करती हूँ ताकि हर कहानी असली और दिलकश हो। मेरी कहानियाँ लाखों पाठकों ने पढ़ी हैं और हर कोई वापस आता है। मैं समझती हूँ आप क्या चाहते हैं - और वही लिखती हूँ जो आपको पागल कर दे। तो चलो, मेरी कहानी से आज की रात को खास बनाते हैं!

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