खेत में चोदा गाँव की हेरोइन को

मेरा नाम मुकुंद है और मैं अपने गाँव का सबसे हट्टा-कट्टा पहलवान हूँ। मेरी चौड़ी छाती और ताकतवर शरीर देख हर औरत कामुक हो जाती। मुझे कई सारी औरते मन ही मन पसंद करती थी जिस कारण मैंने कई सारी अलग अलग लड़कियों के साथ सेक्स किया। Village Lover Outdoor XXX

पर रंडी चोदना किसे पसंद है आखिर ? रंडियो की गांड चुदाई करते करते मैं थक गया और अब मैं बस एक ही लड़की को चोदना चाहता था। उस लड़की का नाम प्रिया था जो गाँव के सबसे अमीर आदमी की लड़की थी। अब प्रिया तो काफी पढ़ी लिखी लड़की थी मैं जब भी उसके पास जाता तो घबरा जाता।

उसका बात करने का तरीका और मटकती गांड देख मेरे शरीर से पसीने और लंड से पानी छूटने लगता। अब हार मान कर मैं आप लोगो की तरह हिंदी सेक्स कहानियाँ पड़ने लगा और अपने लिंग पर जोर से मुठ मारने लगा। मेरा ये काम रोज का हो गया था।

मैं बस आंखे बंद करता और प्रिया के लटके स्तन और पानी टपकती चुत के सपने देखता रहता। उन दिनों मुझे ये भी पता लगा की मेरे पड़ोस के लड़के गे थे इसलिए वो मुझे घूर घूर कर देखते थे और मुझे लगता था की वो लोग मेरी बॉडी से जलते है और मेरी जैसी बॉडी बनाना चाहते है।

उसके कुछ दिन बाद प्रिया अपने पिता जी के खेतों में चल रहा काम देखने आई थी। उनके पिता जी ने मजदूरों को पैसा दे कर अपने खेत में काम करने के लिए बुला रखा था। तभी मैं भी कहा अपने साथियों के साथ।

उस दिन प्रिया को देख मेरा दिल तेजी से धड़कने लगा और मेरे दोस्तों ने कहा जा साले जा। साथियों के सामने झंड न हो जाये इस लिए मैं प्रिया के पास जा कर खड़ा हो गया। मुझे देखते ही प्रिया की दोनों सहेलिया शर्मा कर हसने लगी तो मेरी छाती गर्व से चौड़ी हो गई।

प्रिया – तुम तो मुकुंद हो न ?

मैंने कहा – हाँ हाँ !!

मेरी उत्सुकता देख प्रिया की सहेलियां समझ गई की मैं प्रिया से क्या चाहता हूँ। उन दोनों ने प्रिया का हाथ पकड़ा और उसे दूर लेजा कर कुछ कहने लगी। उन तीनो के बीच किया खिचड़ी पक रही थी मुझे तो पता नहीं लगा पर उसके बाद जो हुआ काफी मजेदार था। बात करने के बाद प्रिया मेरे पास आई और उसकी दोनों सहेलियां वहां से चली गई।

प्रिया – तुम यहां मेरा खेत देखने आये हो क्या ?

मैं आया तो प्रिया के कामुक शरीर को देखने था पर जब प्रिया ने ये पूछा तो मेरे मुँह से हाँ निकल गई। उस दौरान मैंने देखा की सहेलियों से बात करने के बाद प्रिया के हाव भाव ही बदल गए। मेरे हाँ बोलने के बाद प्रिया ने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे खींचते हुए अपने खेतों में ले गई जहा मुझे देसी चुदाई करने का मौका मिला।

कुछ देर कर हम दोनों ने दिल खोल कर बाते की और सब कुछ सही जा रहा था। उस वक्त मैंने अपने अस पास देखा तो कोई नहीं था और हम दोनों अनाज के खेत में थे। अपने आप को प्रिया के साथ अकेला पा कर मेरी अन्तर्वासना बढ़ने लगी और मैं प्रिया को हवसी आँखों से देखने लगा। मेरी नज़र सिर्फ प्रिया के दूधो पर थे जिस वजह से मेरा लिंग अकड़ गया।

मैंने प्रिया की गर्दन पर हाथ रखा और कहा ” मुझे तुम्हारे साथ चुदाई करनी है !! ”

प्रिया – क्या ?? छी हमे लगा था की तुम तो सिर्फ प्यार से बतियाने आए हो।

मैंने प्रिया की सलवार में हाथ घुसाया और उसकी चुत रगड़ने लगा। प्रिया मेरी आँखों में दिलचस्पी देख कामुक होने लगी उसने अपने कोमल हाथ मेरे कंधे पर रखा और मेरा मुँह पास खींच कर मेरे होठों पर चूमने लगी। उसके बाद हम दोनों ने खेत में ही सेक्स करना चालू कर दिया।

मैंने प्रिया का सूट उतरा और उसे स्तनों पर अपना थूक गिरा गिरा कर चाटने चूसने लगा। जल्द ही प्रिया की चुत गीली होने लगी और मेरा लंड भी लसलसा होने लगा। अब मैं करता भी तो क्या लड़की मेरे सामने चुत खोले लेटी थी और मुझे लंड की मजबूरी थी।

मैंने प्रिया की सलवार का नाड़ा खोला और कच्छी उतार कर उसकी चुत देखने लगा। प्रिया की चुत गुलाबी लाल थी और उसमे से पानी टपक रहा था। तभी प्रिया ने मेरा हाथ पकड़ा और मेरी दो ऊँगली ले कर अपनी चुत में घुसाने लगी।

उस वक्त मुझे पता लगा की रंडियो की चुत चोदने से मुझे मजा क्यों नहीं आता था। प्रिया की चुत टाइट थी और ऊँगली डाल कर मुझे ये पता लग गया था की इस चुत की चुदाई आज तक कोई नहीं किया। मैंने जल्दी से अपनी पैंट और चपल उतारी और प्रिया को जमीन पर लेटा कर उसकी चुत में लंड देने लगा।

भोसड़े में लंड जाते ही मेरे लंड को जो गर्माहट मिली उस से मुझे मज़ा ही आ गया। प्रिया चुदाई करते हुए मेरी छाती और कंधो पर हाथ फेरने लगी। उसे मेरा मर्दाना और पहलवान शरीर काफी पसंद आ रहा था। कंधे और छाती सहलाते हुए वो मेरी चूतड़ों को भी हाथ लगाने लगी और मुझे अजीब सा मजा देने लगी।

कुछ देर बाद मैंने प्रिया को कस कर गले लगा लिया और अपनी कमर हिला हिला कर लोढ़ा अंदर बाहर देता रहा। चुदाई में मुझे काफी मजा। प्रिया के मुलायम दूधो में अपना मुँह दे कर मैं उसकी टाइट चुत चोदे जा रहा था।

प्रिया – अहह अहह उठ उह्ह्ह नहीं इतना तेज मत करो !!

मैंने कहा – क्यों क्या हुआ ??

प्रिया – नहीं मैंने आज तक सिर्फ अपनी दो ऊँगली का इस्तेमाल किया है तुम्हारा काफी बड़ा है मेरे लिए !!

मैंने कहा – अहह अहह !!! थोड़ी देर सहन कर लो ना !!

प्रिया – नहीं अब मुझे जलन हो रही है नीचे !!

मैंने प्रिया की एक बात न मानी क्यों की मैं उस वक्त झड़ने वाला था। मैंने प्रिया का सर पकड़ा और उसके होठों और जीभ को जम कर चूसने चूमने लगा। प्रिया के बड़े होठों किसी गुलाब की पंखुड़ी जैसे थे। चूमते हुए हम दोनों का मुँह थूक से लसलसा हो गया और साथ ही चुत लंड ने भी पानी छोड़ना शुरू कर दिया।

प्रिया अपनी चुत से सफ़ेद माल चढ़ने लगी और मैं अपने लंड से सफ़ेद पिचकारी। हम दोनों के लिंग इतनी गंदे और चिपचिपे हो गए की बस हमे जल्द से जल्द नहाने का दिल करने लगा। झड़ने के बाद भी मैं प्रिया को किसी फूल की तरह देखने लगा जिसे मैं तोड़ना चाहता था। “Village Lover Outdoor XXX”

मैंने प्रिया की गन्दी चुत से अपना लोला निकाला और उसे बेशर्मो की तरह फिरसे चाटने लगा। प्रिया की चुत का स्वाद कुछ अच्छा तो नहीं था पर उस वक्त मैं प्रिया की सिसकियाँ निकलवाने के लिए कुछ भी कर सकता था। अब इतनी जबरदस्त चुदाई के बाद मेरे लोडे में तो जान थी नहीं पर मैं फिर भी प्रिया को खूब चोदना चाहता था।

इसलिए मैंने प्रिया की चुत गांड चाटना शरूर कर दिया। करीब 20 मिनट बाद प्रिया ने फिरसे अपनी चुत से पानी निकला और उसके बाद वो बेहोशी की हालत में चली गई। चुदाई करते करते शाम के 7 बज गए और अँधेरे में ये सब करना कुछ ठीक नहीं था।

मैं चाहता तो प्रिया की चुत से 3 से 4 बार पानी और निकाल सकता था क्यों की वो पुरे मूड में थी पर मैंने ऐसा नहीं किया। कुछ देर नंगा आराम करने के बाद हमने कपड़े पहने और मैंने प्रिया को उसके घर छोड़ दिया। उस दिन के बाद प्रिया मेरे मर्दाना शरीर से प्यार कर बैठी और अब वो मेरी प्रेमिका है। ये बाद प्रिया की सहेलियों के अलावा किसी को नहीं पता थी। हमने कई बार और सेक्स किया और मुझे हर बार प्रिया का थुल थुला शरीर चोदने में मजा आया।

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Ritu Agarwal

हैलो दोस्तों! मैं ऋतु अग्रवाल हूँ - कानपुर विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र में मास्टर डिग्री पाने वाली और पिछले 5 साल से हिंदी में वो कहानियाँ लिख रही हूँ जो आपकी रूह को छू लें और तन को तड़पा दें। मैं मानव व्यवहार और इंसानी इच्छाओं पर गहरा रिसर्च करती हूँ ताकि हर कहानी असली और दिलकश हो। मेरी कहानियाँ लाखों पाठकों ने पढ़ी हैं और हर कोई वापस आता है। मैं समझती हूँ आप क्या चाहते हैं - और वही लिखती हूँ जो आपको पागल कर दे। तो चलो, मेरी कहानी से आज की रात को खास बनाते हैं!

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