गर्दन के बाद चूत अकड़ गई

Gardan ke Bad Chut Akad Gai मेरा नाम पारितोष है। मैं पुणे में रहता हूँ और एक कंपनी में काम करता हूँ।

मैं आज आप को अपनी एक घटना से रूबरू कराना चाहता हूँ।

हुआ यूँ कि एक दिन मेरे फ़ोन की घंटी बजी, मैंने देखा तो मेरी गर्लफ्रेंड का कॉल था।

थोड़ी देर बात करने के बाद पता चला कि रात को गलत सोने की वजह स मैडम की गर्दन की नस खिंच गई है। उसने मुझसे पूछा- तुम्हें मसाज करना आता है?

वैसे दोस्तो, मैं अच्छी-खासी मसाज कर लेता हूँ और मुझे शरीर के अंगों के बारे में भी अच्छा ज्ञान है, क्यूँकि मैं कॉलेज के दिनों में एक अच्छा खिलाड़ी था तो नसों और पसलियों से मेरा आमना-सामना अक्सर होता रहता था।

तो मैंने उससे कहा- मेरे कमरे पर आ जा.. देखता हूँ मुझसे जो भी हो सकता है।

मैडम तो कुछ ज्यादा ही तेज़ थीं, वो तो बाहर ही खड़ी थीं।

मैंने खुद को और उसे दोनों को गाली देते हुए दरवाज़ा खोला।

वो एक टी-शर्ट और जींस में दिखी। उसे देख कर तो नहीं लग रहा था कि कहीं दर्द होगा, पर उसे वाकयी दिक्कत थी।

मैंने उसे अन्दर बुलाया और बिठाया, तो बोली- जल्दी से थोड़ी मालिश कर दो.. मुझे जाना है।

मैंने भी ज्यादा देर न लगा कर, पहले ‘फास्ट रिलीफ’ से इलाज करने की सोची।

पर वो बोली- उसे उसकी महक से दिक्कत है।

तो मैंने कहा- अब क्या करूँ?

तो उसने कहा- तेरे पास मालिश का कोई तेल नहीं है?

मैंने कहा- रुक देखता हूँ।

मैं अलमारी में अन्दर देखा तो आलमंड ऑयल की शीशी पड़ी थी तो मैंने बोला- अच्छा आ जा।

मैंने उसे नीचे बिठा कर खुद कुर्सी पर बैठ गया, उसकी गर्दन पर तेल लगा कर थोड़ा नर्म करने लगा।

ऊपर से मुझे उसकी टी-शर्ट में से दिखने लगा.. तो मेरी समझ में आया कि उसने ब्रा नहीं पहन रखी है।

पहले तो मैं नजरअंदाज करता रहा, पर बीच-बीच में, नज़र घूम ही जाती थी।

जिसकी वजह से मेरे लंड में थोड़ी हरकत शुरू हो गई, जिसे वो भी महसूस करने लगी थी।

मालिश से धीरे-धीरे उसे आराम आता गया और मेरा चैन जाता जा रहा था।

लंड की हरकत से उसे थोड़ी शरारत सूझी तो वो भी अपनी टी-शर्ट को संभालने के बहाने अपने दोनों करामाती खरगोशों के दर्शन कराने लगी।

तब मैं बोला- कुछ आराम हुआ?

तो बोली- हुआ तो.. पर पीठ भी दुख रही है… थोड़ा उसमें भी मालिश कर दे।

मैंने मना कर दिया, तो बोली- अरे ऊपर से कर दे.. मैं कौन सा तेरे सामने कपड़े उतारने जा रही हूँ।

तो मैंने कहा- चल ठीक है।

उसे थोड़ा दूर करके उसकी पीठ के सारे पॉइंट्स पर धीरे-धीरे काम करना शुरू किया।

उसे आराम मिलना तो तय था क्यूँकि इस काम में मेरा अनुभव अच्छा है.. आज भी आराम की गारंटी तो मैं ले सकता हूँ।

उसे तो कुछ और ही सूझ रहा था तो उसने अपनी टी-शर्ट ऊपर खींच ली और बोली- अब सही से कर दे।

तो मैं भी बिना शर्माए तेल की कुछ बूंदें उढ़ेल कर शुरू हो गया।

कब मेरा हाथ उसके खरगोशों को छूने लगा, मुझे पता ही नहीं चला।

तभी वो झट से पलट गई और बोली- अब ‘फुल-मसाज’ कर दे। आज मेरा शरीर मेरा साथ नहीं दे रहा है।

मैंने पूछा- मतलब?

तो बोली- कल रात से पूरा बदन दर्द कर रहा था और आज साली गर्दन अकड़ गई।

तो फिर धीरे-धीरे मैंने उसकी गर्दन पर, कंधों पर मालिश शुरू कर दी।

अब उसे मदहोशी सी छाने लगी और उसकी आँखें बंद होने लगीं।

अब धीरे-धीरे मेरा हाथ कंधों से नीचे उसके स्तनों पर जाना शुरू हो गया और उसके स्तन कड़क होने लगे।

थोड़ी देर बाद वो उठी और बिस्तर पर उल्टी लेट गई और बोली- पीठ की और पैरों की भी मालिश कर दे.. पर ऊपर से ही।

मैंने कहा- जैसी आप की मर्ज़ी।

मैंने मालिश शुरू कर दी, अब धीरे-धीरे उसका बदन अकड़ने लगा और उस पर मस्ती सी छाने लगी।

मेरा भी बुरा हाल हो रहा था। अब वो पलट गई और बोली- अब पूरे बदन की अकड़न मिटा दो आज.. बहुत दिनों से अकड़ रहा है।

अब मैंने उसकी टी-शर्ट उतार दी.. उसकी चूचियाँ तो एकदम पपीते जैसी कड़क हो गई थीं।

मैंने उन्हें प्यार से मसलता रहा और उसका हाथ मेरे लंड पर आ गया था। अब मैंने उसकी जींस भी उतार दी।

उसकी पैन्टी एकदम गीली हो गई थी। मैंने जैसे ही उसकी पैंटी पर ऊपर से हाथ फेरा, वो तो एकदम तड़प ही गई।

मैंने उसकी पैंटी पर ऊपर से ही ऊँगली चलाना चालू रखा और उसकी हालत बिगड़ती जा रही थी।

अब उसके मुँह से अलग-अलग तरह की मादक आवाज़ें आने लगीं।

फिर मैंने जब उसकी पैंटी उतार कर जैसे ही थोड़ी देर अपनी ऊँगली उसकी चूत में चलाई, तो वो ज़ोर से बिस्तर की चादर को अपनी मुट्ठी में भींचकर, अपनी आँखों को ज़ोर से दबाकर चिल्लाते हुए झड़ गई।

पर अभी तो हमारा खेल शुरू हुआ था।

अभी तो दोनों को एक लंबा सफ़र तय करना था।

अब मैं भी बिस्तर पर उसके बगल में आकर लेट गया और उसकी चूचियों को मसलता रहा, उसकी जांघों पर हाथ फेरता रहा।

अब वो दोबारा गर्म हो रही थी।

अब इस बार मैंने देर ना करते हुए उसकी चूत को दोबारा छेड़ना शुरू किया, बीच-बीच में उसे चुम्बन भी कर लेता और उसकी चूत को भी चूम लेता, जिससे उसके पूरे शरीर में करेंट सा दौड़ जाता।

अब मैं लंड उसकी चूत पर रगड़ने लगा तो बोली- अब देर ना करो और डाल दो।

मैंने भी देर ना करते हुए जोरदार धक्के के साथ अपना लंड उसकी चूत में घुसेड़ दिया और धक्के लगाने शुरू कर दिए।

धीरे-धीरे धक्कों की रफ़्तार तेज़ होती गई और पूरा कमरा हमारी आवाज़ों की गूँज से भर गया।

फिर थोड़ी देर बाद वो दोबारा झड़ गई, पर मेरा खेल अभी बाक़ी था।

मैंने धक्के लगाने चालू रखे और पाँच मिनट बाद मैं भी उसकी चूत में ही झड़ गया।

दोस्तो, कैसी लगी यह दास्तान… ज़रूर बताएँ।

Ananya Verma

अरे! मैं अनन्या वर्मा हूँ - लखनऊ विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान की पढ़ाई करने वाली और पिछले 4 साल से हिंदी में ऐसी कहानियाँ लिख रही हूँ जो आपकी अंगुलियाँ स्क्रीन पर रोक दें। मैं इंसानी इच्छाओं, ख्वाहिशों और वो पलों को समझती हूँ जो आप छुपाना चाहते हैं लेकिन महसूस करना चाहते हैं। मेरी कहानियों में वही बात है जो दिल को छूती है और तन को सिहराती है। हज़ारों पाठकों ने मेरी कहानियाँ पढ़कर गर्म रातों का मज़ा लिया है। तो चलो, आज की रात मेरी कहानी से बनाते हैं!

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