लेस्बियन गर्ल फर्स्ट सेक्स स्टोरी में दो सगी बहनें समलिंगी सेक्स करती थी. उनमें बड़ी बहन की शादी हुई तो छोटी का मन दुखी हुआ. पर बड़ी बहन की सुहागरात कैसे मनी?
दोस्तो, कैसे हैं आप? अन्तर्वासना के सागर में मस्ती के गोते लगा रहे हैं।
आज की लेस्बियन गर्ल फर्स्ट सेक्स स्टोरी रीना और मीना की है। दोनों बहनें हैं। रीना बड़ी और मीना उससे दो साल छोटी।
दोनों बहनें बाद में पक्की दोस्त पहले हैं; दोनों की खूब पटती है; दोनों एक नंबर की खुराफाती। बचपन से लेकर आगे तक दोनों एक ही साथ पढ़ीं, बड़ी हुईं।
पिता फौज में थे और मां स्कूल टीचर। घर पर मस्त माहौल; किसी तरह की कोई रोक-टोक नहीं।
रीना बड़ी होने के नाते थोड़ी संजीदा थी तो मीना उतनी ही चंचल। रीना लंबी और छरहरी थी, पर मीना थोड़ी गठीले जिस्म की मालकिन। दोनों सुंदर और अत्याधुनिक।
पिता की व्हिस्की की बोतल मीना ऐसे गायब कर लेती थी कि वो खुद भी नहीं ढूंढ पाते थे और फिर रात के अंधेरे में बेड में छिपकर दोनों पेग लगातीं।
ऐसा नहीं है कि कर्नल साहब को अंदाज़ नहीं था, पर कभी कोई बात बिगड़ी नहीं तो वो भी इनकी मां के शिकायत करने पर हो-हो करके हंस देते।
रीना और मीना पूरी मस्तीखोर थीं। पढ़ने में दोनों तेज़ थीं तो कोई शिकायत का मौका नहीं मिलता था उनकी मां को। वरना इनकी हरकतें तो आवाराओं से कम नहीं थीं।
मीना बुलेट चलाती थी और रीना उसके पीछे लिपटकर बैठती। बचपन से ही दोनों साथ ही नहातीं और साथ ही सोतीं।
अब बचपन से बढ़कर जवानी आ गई थी तो नहाने और सोने में एक दूसरे के बदन को भी मसलती। सही शब्दों में कहें तो दोनों लेस्बियन हो गई थीं। इस सबका श्रेय मीना को ही जाता।
रीना इतनी बदमाश नहीं थी। वो तो मीना ने उसे खुराफातें सिखाईं। और फिर जब जवानी जोर मार रही थी तो ये सब अच्छा लगता ही है।
हालाँकि सजा मीना को ही भुगतनी पड़ती क्योंकि उसी के मम्मे भारी थे तो रीना उन्हें जमकर मसलती। दोनों 69 भी खूब होतीं।
कॉलेज में आते-आते दोनों की जवानी भरपूर रंग ले आई। मीना तो तितली बनी हुई थी पूरे कॉलेज में। पर मुंहफट थी तो कोई पंगा नहीं लेता था। मीना भले ही गठीले जिस्म की थी पर लंबी थी और मम्मे भारी।
कुल मिलाकर सेक्सी फिगर था उसका। रीना तो ऐसा लगता था जैसे एयर होस्टेस। लंबी छरहरी और तीखे नाक-नक्श।
सच तो ये था कि दोनों एक दूसरे की दीवानी थीं। दोनों का एक दूसरे के बिना गुजारा नहीं था।
उनका ये आपसी प्यार इतनी गहराई तक जा पहुंचा कि उन दोनों ने हमेशा साथ रहने और जीने-मरने की कसम खा ली।
मीना ने तो उससे साफ कह दिया- रीना को शादी करनी हो तो कर ले, पर मैं कभी शादी नहीं करूंगी। मैं तो रीना के साथ ही रहूँगी।
मीना रीना को अपना पति मान चुकी थी। रीना उसे बहुत समझती पर मीना के सर पर तो भूत सवार था। ये बात किसी से कही भी नहीं जा सकती थी।
और फिर रीना भी बिना मीना से लिपटे और चूमे-चाटे सो ही नहीं पाती थी।
पर विपरीत सेक्स का आकर्षण भी कुछ चीज होती है। जैसे जवानी में होता है, रीना को भी इश्क हो गया और वो भी ऐसे-वैसे से नहीं, अपने शहर के नामी व्यवसायी रमेश सिंघल के बेटे सुमित से।
सुमित और रीना साथ-साथ बिजनेस मैनेजमेंट का कोर्स कर रहे थे। रीना ने अपने दिल का हाल शेयर किया मीना से।
पहले तो मीना ने उससे उसका वादा याद दिलाया कि वो दोनों साथ रहेंगी।
रीना ने जवाब दिया, “मैं साथ रहने को मना कब कर रही हूँ। पर समाज के सामने और परिवार बनाने और फिर बच्चे पैदा करने के लिए तो मर्द से शादी जरूरी है!”
मीना बहुत रोई पर रीना ने आखिर उसे समझा ही लिया वो भी इस वादे के साथ कि जब मीना चाहेगी रीना उसके साथ हमबिस्तर होगी, चाहे उसके लिए उसे अपने पति से समझौता करना पड़े।
अब मीना ने उसके इश्क को पूरी हवा दी। खुद मीना भी सुमित से कई बार मिली।
मीना के उकसावे में आकर एक बार तो रीना सुमित के साथ होटल में पूरी दोपहर बिता आई। अब पूरी दोपहर होटल में ज्यादा कुछ नहीं तो हुआ क्योंकि रीना बहुत समझदार थी। और वैसे भी सुमित रीना को लेकर ईमानदार था।
दोनों ने अपने-अपने पेरेंट्स को अपने प्यार के बारे में बता दिया। रमेश सिंघल खुले विचारों के थे।
रीना बहुत सुंदर थी, पढ़ा-लिखा परिवार था तो दोनों परिवार शादी के लिए सहमत हो गए।
रिश्ता तय होने के बाद तो रीना और सुमित दोनों को हरी झंडी मिल गई। अब तो रीना मीना के रोकने से भी न रुकती। मीना ने मां से कहा कि शादी जल्दी करवा दें।
खैर, ऐसी बेवकूफ तो रीना भी नहीं थी। उसने सुमित को कभी भी सेक्स नहीं करने दिया था।
चूमाचाटी और नजदीकी से उसे कोई ऐतराज नहीं था। उसका मानना था कि सेक्स तो सुहागरात पर ही करूंगी। शायद उसकी यही बात सुमित को भा गई।
अलबत्ता उसकी हर दूसरी मुलाकात में मीना भी साथ होती। सुमित की मौज थी। दुनिया को साली का मजा शादी के बाद मिलता है, सुमित को साली का मजा शादी से पहले ही मिल रहा था।
मीना को चूमाचाटी से कोई परहेज नहीं था, वो जब मर्जी आती सुमित को हग कर लेती।
रीना ने यह बात सुमित को बोल दी थी कि वे दोनों बचपन से साथ रही हैं नहीं तो मीना में उसके लिए बहुत लगाव है। वो रीना से अलग होने की सोच भी नहीं सकती। रीना ने यह कहकर सुमित को इशारा दिया पर सुमित ने इसे बचकानी हरकत सोचकर कुछ नहीं कहा।
खैर, दोनों की शादी हुई। भरपूर मस्ती वाली शादी। मीना तो चिड़िया की तरह चहकती रही पूरी शादी में।
शादी राजस्थान के एक रिसोर्ट से हुई। अगले दिन बाकी सब लोग तो विदा हो गए पर रमेश जी और उनकी पत्नी और मीना और उसकी मां रिसोर्ट में रुक गए सुमित और रीना के साथ। इन दोनों के लिए एक शाही सूट बुक किया गया था।
रात को डिनर के बाद मीना ने रीना को अच्छे से सजाया और उसके सूट में सुहागरात पर बिठा आई। पूरा सूट गुलाब से महक रहा था। रीना भी दुल्हन बनी गजब ढा रही थी।
मीना बोली, “मैं भी यहीं रुक जाऊं!” रीना बोली, “हाँ रुक जा, सुमित को एक के साथ एक फ्री मिल जाएगी!” दोनों हंस पड़ीं।
मीना बोली, “यार एक न एक दिन मुझे भी चख कर देखना है, सुमित को, बड़ा हॉट है!” रीना ने लंबी सी जीभ निकाल दी।
तभी सुमित आ गया। मीना नखरे दिखाती गेट पर खड़ी हो गई रास्ता रोककर।
मीना बोली, “पचास हजार चाहिए!” सुमित भी खेला खाया था। सुमित बोला, “पचास नहीं इक्यावन दूंगा पर तुम यहीं रुक जाओ!”
खैर बात इक्कीस हजार पर उधारी में तय हुई। गारंटी करी रीना ने।
मीना ने हंसते-हंसते रास्ता छोड़ दिया पर बोली, “यार कुछ शगुन तो देते जाओ!”
कहकर उसने अपनी दोनों बाहें फैला दीं। सुमित ने उसे एक जोरदार झप्पी दी। मीना ने उसे कसकर चूमा और वहां से हंसते हुए भागी।
सुमित बेड के पास आया। रीना बला की खूबसूरत लग रही थी। सुमित ने पास बैठकर उसका घूंघट उठाया।
रीना ने मुस्कुराते हुए अपनी हथेली आगे कर दी और बोली, “यहाँ उधार नहीं चलेगा!”
सुमित ने मुस्कुराते हुए जेब से एक डिब्बी निकाली। उसमें हीरे के कान के ईयर रिंग्स और एक अंगूठी थी। रीना खुश हो गई।
इस हीरे के सेट का बाकी सामान मतलब हार और कड़े दिन में सुमित की माताजी और पिताजी ने उसे दिए थे।
रीना लिपट गई सुमित से। आज के मिलन में समर्पण था।
सुमित ने रीना को चूमते हुए कहा, “आज तो कोई रोक-टोक नहीं होगी न!” रीना ने सुमित के आगोश में अपने को समाते हुए कहा, “आज नहीं, अब पूरी उम्र कोई रोक नहीं। मैं पूरी की पूरी तुम्हारी!”
दोनों लिपट गए। दोनों के होंठ मिल गए थे और जिस्म एक होने को आतुर थे।
सुमित ने रीना को कपड़े बदलने में मदद की। रीना बोली, “एक मिनट में आई!” कहकर अपना बैग लेकर वॉशरूम में चली गई।
इतनी देर में सुमित ने भी अपने कपड़े बदलकर हल्का कुर्ता-पायजामा डाल लिया।
अंदर से रीना ने आवाज दी, “प्लीज लाइट बंद कर दो!” सुमित बोला, “क्यों?” रीना बोली, “करो न। मुझे शर्म आती है। ये मीना ने क्या ड्रेस रख दी है!”
खैर सुमित ने लाइट बहुत धीमी कर दी। अंदर से रीना आई।
उसने बहुत झीनी सी शॉर्ट नाइटी पहनी थी। निगाहें झुकाए रीना बेड तक आई और सुमित से लिपट गई।
आज उसके जिस्म को ऐसे पहली बार देखा था सुमित ने। सुमित ने उसे गोदी में उठाया और चूमते हुए बेड पर आहिस्ता से लिटा दिया। रीना की कलाइयों में चूड़ियाँ और पैरों में पायल खनक रही थी।
रीना ने सुमित को हाथ पकड़ कर खींच लिया। दोनों जिस्म बेड पर एक होने को मचल गए।
रीना की नाइटी के अंदर नाम मात्र के ब्रा-पेंटी भी थे। हालाँकि कुछ भी कुछ भी छिपा नहीं पा रहा था।
सुमित ने ऊपर से ही उसके मम्मों के निप्पल चूसने शुरू कर दिए। उसका एक हाथ नीचे उसके पेट पर होता हुआ पेंटी की दरार टटोल रहा था।
रीना कसमसाई और उसने उठते हुए सुमित का कुर्ता उतार दिया।
अब तो कपड़े उतारने को होड़ में दोनों ही बिना कपड़ों के हो गए। दो जिस्म एक दूसरे में समाने को गुत्थम-गुत्था हो गए थे।
सुमित रीना के होंठों को पागलों की तरह चूम-चाट रहा था। दोनों की जीभें एक दूसरे को हराने में आपस में टकरा रही थीं।
रीना का हाथ सुमित का मोटा लंबा लंड मसल रहा था। सुमित के हाथों में रीना के मांसल मम्मे थे।
सुमित को ये देखकर बहुत आश्चर्य हुआ कि रीना के मम्मों पर बहुत बारीक बेल मेहंदी से बनी हुई थी। उसने पूछा, “ये कैसे बनवाई?” रीना हंस पड़ी और बोली, “ये सब खुराफातें मीना ही कर सकती है। उसी ने जबरदस्ती मेरे बनाई है!”
इस समय मीना का जिक्र से सुमित के लंड में कुछ अलग सा तनाव आया। अभी कुछ देर पहले जब उससे लिपट मीना ने उसे किस किया था तो उसका मांसल मम्मों को सुमित ने अच्छे से महसूस किया था।
सुमित थोड़ा नीचे हुआ और एक-एक करके मम्मे चूमने लगा। उसने एक हाथ नीचे करके रीना की मखमली गुफा की फांकों को टटोला। रीना की चूत तो पानी बहा रही थी।
सुमित ने उसमें उंगली घुसानी चाही तो रीना बिदकी। अब सुमित नीचे होता हुआ रीना की चूत के मुहाने तक पहुंच गया और उसने रेशमी गुफा की दरार को ऊपर से चूमते हुए जीभ अंदर करने की कोशिश की। रीना का जिस्म अकड़ रहा था। उसने सुमित के बाल कसकर पकड़ रखे थे।
सुमित ने उसकी टांगें खोलीं और जीभ पूरी उसकी चूत की फांकों में घुसा दी।
उसके हाथ अभी भी उसके मम्मों की गोलाइयां नाप रहे थे। जैसे-जैसे जीभ लपलपाती, वैसे-वैसे रीना मछली की तरह तड़पती।
रीना ने भी खूब पोर्न देखी थीं। उसने मिमियाते हुए सुमित से कहा, “मुझे भी तुम्हारा चूसना है!”
अब सुमित 69 हो गया। रीना ने सुमित का लंड लपक कर उसे धीरे से होंठों से चूमा और थूक से लपेटते हुए थोड़ा सा मुंह के अंदर किया। उसे समझ नहीं आ रहा था कि इतना मोटा लंड उसके मुंह में कैसे जाएगा।
उसे टेंशन एक और भी थी कि मुंह में चला गया तो चला गया, पर उसकी चूत के छोटे से छेद में कैसे जाएगा। खैर रीना ने लंड को लॉलीपॉप समझकर चूसना शुरू किया।
अब सुमित के लंड के टोपे की चमड़ी पीछे हो गई थी और रीना बड़ी तन्मयता से उसे चूस रही थी।
जब बात दोनों के ही बर्दाश्त के बाहर हो गई तो सुमित की पहल पर दोनों सीधे हुए।
एक बार अच्छे से चूम कर सुमित ने रीना से कहा, “मैं अंदर आना चाहता हूँ!” रीना थोड़ी सी घबराई और बोली, “क्रीम लगा लो और धीरे-धीरे करना। अगर मुझे दर्द हो तो प्लीज रुक जाना!”
सुमित ने उसे फिर होंठों और माथे पर चूमा और कहा, “हमें प्यार करना है, वार थोड़े ही। तुम डरो नहीं!” कहकर सुमित ने पास रखी क्रीम अपने लंड और रीना की फांकों पर लगाई और रीना के होंठों पर होंठ रखकर धीरे से अपने लंड को चूत की फांकों के अंदर धकेला।
अभी तो वो अंदर गया भी नहीं था कि रीना डर से चीखी, “रुक जाओ! अभी रुक जाओ!”
पर सुमित ने उसकी बात को डर समझते हुए धीरे से लंड को अंदर धकेला दिया। कुछ तो उसने धकेला, कुछ रीना ने समेटा। लंड पूरा अंदर घुसता चला गया।
रीना चीखी, “मुझे दर्द हो रहा है, प्लीज निकालो!” पर वो सुमित से कसके लिपट गई थी। शायद उसने अपने लंबे नाखून सुमित की पीठ पर गड़ा दिए थे।
सुमित ने बहुत आराम से लंड को मूवमेंट दिया। वो हल्के-हल्के अंदर-बाहर करने लगा। रीना कसमसाते हुए अब उसका साथ देने लगी।
सुमित ने पूछा, “दर्द हो रहा हो तो निकालूँ?” सुनते ही रीना और कसके चिपट गई सुमित से और बोली, “ऐसे ही करते रहो!”
अब तो धक्कों की स्पीड बढ़ती गई। रीना भी अब चुदाई में सुमित का साथ देने लगी।
दोनों का जिंदगी का पहला सेक्स था। रीना की चूत में मीना ने कई बार खीरा और गाजर तो किए थे, पर लंड पहली बार था।
रीना ने मूवीज में देखा था कि लड़कियां ऊपर आती हैं तो उसने भी सुमित से ऊपर आने की इच्छा जाहिर की।
सुमित ने बिना लंड बाहर निकाले उसे पलटा और ऊपर कर दिया। अब रीना ने अपने बाल संभाले और लंड को सही सा सेट करके लगी उछलने। उसके मम्मे हवा में लहरा रहे थे। सुमित ने उन्हें लपक लिया और लगा मसलने।
रीना अब हांफ रही थी, उसका होने को था। सुमित ने उसे वापिस नीचे पलटा। इस धकापेल में उसका लंड बाहर निकल गया।
इससे पहले कि सुमित उसे वापिस दबोचता, सुमित का फव्वारा छूट गया। गाढ़ा वीर्य रीना के पेट और मम्मों पर जा गिरा। दोनों निढाल होकर पसर गए।
रीना की चूत फट गई थी। बेडशीट पर खून के धब्बे नजर आ रहे थे।
सुमित रीना को सहारा देकर वॉशरूम तक लेकर गया। वहां रीना ने गर्म पानी के तरेड़े लिए और दोनों ने अपने को साफ करके साथ-साथ शावर लिया और फिर बेड पर आ गए।
सुमित ने बेडशीट के ऊपर टॉवेल डाल लिए। रीना ने दोनों के लिए कॉफी बनाई और फिर कॉफी लेकर सुमित की गोदी में जा बैठी।
रीना की एक बड़ी भाभी ने उसे पेन किलर दे रखी थीं। रीना ने कॉफी के साथ वो दवाई ले ली।
सुबह चार बजे रीना की आँख खुली। उसे अब दर्द में बहुत राहत थी। वो वॉशरूम होकर आई तो देखा कि सुमित का लंड तना हुआ है।
रीना ने दर्द की परवाह न करते हुए सुमित का लंड चूमना शुरू कर दिया। सुमित की आँख खुल गईं। अब तो दोनों का मूड बन गया था एक मस्त चुदाई का।
पर सुमित समझदार था। उसने रीना को चूमते हुए कहा, “रात को मस्ती की सजा तुम्हारी गुलाबो को और ज्यादा नहीं देते। आज दिन में आराम करो। फिर रात को सारी कसर पूरी करेंगे!”
रीना चिपट गई सुमित से यह सोचकर कि उसे कितना समझदार पति मिला है।
यह कहानी चार भागों में चलेगी. अभी तक की लेस्बियन गर्ल फर्स्ट सेक्स स्टोरी कैसी लग रही है? मुझे मेल और कमेंट्स में बताएं. [email protected]
लेस्बियन गर्ल फर्स्ट सेक्स स्टोरी का अगला भाग: जिन्दगी के रंग, सेक्स के संग- 2