एक फैमिली ऐसी भी-5

पिछला भाग पढ़े:- एक फैमिली ऐसी भी-4

हिंदी चुदाई कहानी अब आगे-

मेरी और मम्मी की पहली चुदाई के बाद ही हमारे बीच अब मां-बेटे वाली शर्म खत्म हो चुकी थी। अब हम सिर्फ मर्द और औरत थे – एक चुदाई की प्यासी औरत, जिसकी डेढ़ साल से ढंग से चुदाई नहीं हुई थी और एक 3XL लंड वाला नया-नया जवान हुआ लड़का, जिसका लंड फुद्दी की चुदाई के ख्याल भर से ही खड़ा हो जाता था।

इस बार मैंने आधा घंटा मम्मी की रगड़-रगड़ कर चुदाई की। चुदाई करवाते वक़्त मम्मी खूब बोल रही थी, “आह मेरे राजा, क्या मस्त लंड है राजा, चोद और जोर से चोद बेटा। फाड़ दे अपनी मम्मी की फुद्दी, बड़ी तरसी है ये लंड लेने के लिए, आज तो पूरी रात ही चुदवाऊंगी धीरज, पूरी रात।”

मम्मी की बातों में मुझे मस्ती तो आ रही थी। मन तो कर रहा था मैं बह कुछ ऐसी ही सेक्सी बातें करूँ। मगर एक झिझक तो थी ही। आखिर को तो मैं अपनी मम्मी को ही चोद रहा था। मैं भी कुछ भी बोल नहीं रहा था – बस चुप-चाप मम्मी को चोद रहा था।

लंड की प्यासी मम्मी मस्त चुदाई करवा रही थी। मम्मी को एक बार फुद्दी चुसाई से और एक बार फुद्दी चुदाई से मजा आ चुका था। मगर मम्मी अभी और चुदाई के मूड में थी।

मुझे तो कोई प्रॉब्लम ही नहीं थी। ऐसी मस्त चुदाई तो मैं भी पहले बार ही कर रहा था, जिसमें चुदाई करवा रही लड़की या औरत को कही भी जाने की जल्दी ही नहीं थी। अपना घर, अपना बिस्तर और अपना बेटा।

मैंने फिर से मामी की चुदाई शुरू कर दी। इस बार आधा घंटा मेरी और मम्मी की चुदाई हुई। चुदाई करवाते वक़्त मम्मी मजे में वही बातें बोल रही थी, “आह मेरे राजा, क्या मस्त लंड है राजा, छोड़ और जोर से चोद बेटा फाड़ दे अपनी मम्मी की फुद्दी, बड़ी तरसी है ये लंड लेने के लिए, आज तो पूरी रात ही चुद वाऊंगी धीरज, पूरी रात।”

मम्मी को एक बार फिर मजा आ गया, मगर लंड अभी भी खड़ा ही था। इस वाले मजे के बाद मम्मी ने अपनी टांगें मेरी कमर से हटा ली। मतलब अब थोड़ा आराम करना था इंटरवल – मध्यांतर।

मैंने खड़ा लंड मम्मी की फुद्दी से निकाला और मम्मी के पास ही लेट गया। कुछ देर बाद मम्मी उठी और बोली, “धीरज तेरा लंड तो कमाल ही है – ये कभी ढीला पड़ता भी है या नहीं या हमेशा खड़ा ही रहता है?”

ये बोल कर मम्मी मेरा लंड मुंह में लेकर चूसने लगी। थोड़ा चूसने के बाद मम्मी बोली, “धीरज चूस कर मजा दे दूं बेटा या एक बार और चोदेगा?

“मम्मी चुदाई ही करूंगा आपकी, आज फुद्दी के मजे लो आप।”

फिर मैं बोला, “मम्मी एक सवाल घूम रहा है मेरे दिमाग में।”

मम्मी ने पूछा, “क्या धीरज?”

मैंने कहा, ” मम्मी चलो पापा को प्रॉब्लम हो गयी – किसी को भी हो सकती है। मगर मम्मी आज-कल तो तो लंड सख्त रखने के लिए कई तरह की गोलियां आती है, जैसे वियाग्रा, सुहागरा। पापा वो खा कर क्यों नहीं चोदते आपको?”

मम्मी बोली, “बेटा तेरे पापा का एक केमिस्ट दोस्त है। यश ने उससे बात की थी। उसने कहा था कि ये वियाग्रा, सुहागरा हफ्ते दस दिन में एक बार ही कहानी चाहिए। ज्यादा खाने से दिल पर बुरा असर हो सकता है। अब धीरज मुझे तो हर रोज़ – या एक दिन छोड़ कर चुदाई की आदत पड़ी हुई है। यश का लंड सख्त नहीं होता, मगर फिर भी मैं उनका लंड तकरीबन रोज़ फुद्दी में तो डलवाती ही हूं।”

मैं हैरान हुआ की कमाल है मम्मी – अभी भी इनकी फुद्दी इतनी गरम रेहती है, अभी भी रोज़ इनको फुद्दी में लंड चाहिए।”

मैंने मम्मी की बात सुन कर सोचा, “अगर इस उम्र में मम्मी की ये हालत है तो मैं तो बाईस का ही हूं। फिर मैंने सोचा जब मम्मी बाईस तेईस की होगी, तब कितनी चुदाई करवाती होगी?”

मेरा लंड तो ये सोचने भर से ही सख्त होने लग गया।

मैं मम्मी से बोला, “मम्मी, चलो अब पीछे से चोदता हूं। पूरा लंड अंदर जाएगा फुद्दी में अंदर तक।”

मम्मी बोली, “वो तो मुझे भी मालूम है धीरज, बहुत चुदवाई है मैंने पीछे से।”

ये बोल अम्मी उल्टा हो कर बिस्तर पर ही घुटनों के बल लेट गयी। मैंने मम्मी से कहा, “मम्मी ऐसे पूरा नहीं जाएगा लंड आपकी चूत में। बेड के किनारे पर लेटो, मैं खड़ा हो कर पीछे से चुदाई करूंगा।”

मम्मी बोली, “पीछे से? खड़ा हो कर? मतलब जैसे कुत्ता कुतिया को जकड़ कर पीछे से चोदता है?”

मैंने हंसते हुए कहा, “हां मम्मी, जैसे कुत्ता कुतिया को चोदता है। अपनी अगली टांगों में जकड़ कर। हिलने भी नहीं देता कुतिया को – ऐसी ही चोदूंगा इस बार आपको, हिलने भी नहीं दूंगा।”

मम्मी हंसती हुई बोली, “ठीक है धीरज इस बार समझ एक कुतिया ही है तेरे नीचे – कुत्ते की तरह ही चोद इस इस कुतिया को। डेढ़ साल की प्यास बुझा दे अपनी इस कुतिया की फुद्दी की। फाड़ दे इसकी फुद्दी, सुजा दे चोद-चोद कर।”

मम्मी की इस तरह की बातें मुझे पागल कर रही थी – चुदाई के लिए इतना पागलपन? इतनी बेसब्री?

“क्या सच में ही मम्मी की फुद्दी की डेढ़ साल से रगड़ाई नहीं हुई है। अगर नहीं भी हुई है तो क्या मम्मी ने किसी और से भी नहीं चुदवाई?”

मैंने सोचा किसी और से नहीं ही चुदवाई होगी, वरना इस तरह अपने ही बेटे से क्यों चुदवाती?

मैंने नीचे बैठ कर फिर से मम्मी की फुद्दी चूसी और मम्मी के चूतड़ चौड़े करके गांड का छेद चाटने लगा। मम्मी की गांड का छेद अभी भी गुलाबी-पन किये हुए हल्का-हल्का भूरा था। इसका मतलब था मम्मी या तो गांड चुदवाती ही नहीं थी, या बहुत ही कम चुदवाती थी।

मैंने खड़ा होकर मम्मी की फुद्दी में लंड डालते हुए पूछा, “मम्मी आपकी गांड देख कर लगता है, या तो आपकी गांड बहुत कम चुदी है या बिलकुल ही नहीं चुदी है। ऐसा ही है क्या?”

मम्मी बोली, “हां बेटा, तेरे पापा को गांड चोदने का शौक नही, वो नहीं चोदते मेरी गांड।”

मैंने फिर पूछा, “तो मम्मी क्या एक बार भी लंड नहीं गया आपकी गांड में?”

मम्मी बोली, “नहीं धीरज ऐसा तो नहीं है। कभी-कभी तो लंड डलता ही है इसमें, गांड चुदाई होती है मेरी।”

मम्मी की बात पर मुझे थोड़ी हैरानी सी हुए। अभी तो मम्मी कह रही थी तेरे पापा को गांड चोदने का शौक नहीं, वो नहीं चोदते मेरी गांड, और अब कह रही है कभी कभी तो लंड डलता ही है गांड में।”

खैर मैंने मम्मी की इस बात पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया और मैं मम्मी की फुद्दी में लंड डाल कर मम्मी को चोदने लगा। मगर मैंने कहा, “मम्मी किसी दिन आपकी गांड भी चोदनी है।”

मम्मी पीछे सर करके बोली, “धीरज बेटा अगर सच में ही तेरा गांड चोदने का मन है तो फिर किसी दिन क्यों, आज ही क्यों नहीं – आज ही, अभी ही चोद ले। मेरी फुद्दी और गांड दोनों तेरे सामने हैं, जिसमें चाहे, जब चाहे लंड डाल दे। जितनी चाहे चोद ले, जैसे चाहे चोद ले। अब तू ही तो है जो मुझे आगे-पीछे से लंड का मजा देगा।”

मतलब मम्मी ने इस डेढ़ साल में मम्मी ने पापा के अलावा किसी और से फुद्दी नहीं चुदवाई।

आखिर को थी तो संस्कारी औरत ही मेरी मम्मी। घर की बात बाहर ना जाये इसलिए बेटे से चुदवा रही थी।

औरत हो तो ऐसी।

फिर मम्मी जैसे अपने आप से बोली, “तेरे पापा का ढीला पड़ चुका लंड चूत में तो ढंग जा नहीं पाता, गांड में कहां से जाएगा?”

उस दिन तो मम्मी की गांड चुदाई तो नहीं हुई, मगर फुद्दी मम्मी ने खूब चुदवाई, चूतड़ झटका-झटका कर, चूतड़ घुमा-घुमा कर। बस इसके बाद तो रोज़ मेरी और मम्मी की मस्त चुदाई होने लग गयी।

गुड़गांव का मेरा का पूरे सात दिन का प्रोग्राम था। में तो ये सोच-सोच कर ही बड़ा खुश था था कि वो सातों दिन फुद्दी और गांड की मस्त चुदाई करूंगा – वो भी आराम से, तसल्ली से – अब तो मुझे अपनी मम्मी एक ऐसी औरत नज़र आने लगी थी जो हर वक़्त चुदाई के लिए तैयार थी, और मैं तो लड़का था, लड़कों को चुदाई से क्या परहेज?

गुड़गांव आये मुझे तीन दिन हो चुके थे। तीनों दिन मैंने मम्मी को रगड़-रगड़ कर चोदा। पूरा मजा दिया मम्मी को चुदाई का और पूरा मजा लिया भी मम्मी को चोदने का। रोज़ तीन-तीन चार-चार बार चुदाई हुई। चुदाई से मन ही नहीं भर रहा था हम दोनों का – मेरा भी और मम्मी का भी।

मम्मी अब चुदाई के दौरान बहुत बोलने लग गयी थी। मम्मी की सेक्स से भरी हुई बातें सुन-सुन कर मैं भी वैसी ही बातें बोलने लग गया था।

काम वाली के जाने के बाद दोपहर बाद को शुरू होती चुदाई आधी रात तक चलती थी, जब तक हम दोनों थक नहीं जाते थे और हमें नींद नहीं आ जाती थी। चुदाई के प्यासी मम्मी तो जैसे चुदाई के मजे ले ले कर थक ही नहीं रही थी।

चौथे दिन दिव्या भी दिल्ली से लौट आयी। अक्सर दिव्या को मौसी के घर से लेने पापा जाते थे, मगर इस बार चूंकि पापा थे नहीं तो दिव्या को मौसी का ड्राइवर कार में छोड़ गया था। दिव्या के आने भी से मेरी और मम्मी की चुदाई में कोइ फर्क नहीं पड़ने वाला था। में तो कई सालों से ही ऊपर वाले कमरे में सोता था और दिव्या नीचे ही सोती थी।

चौथे दिन रात को भी मेरी और मम्मी की मस्त चुदाई हुई। मेरा मन मम्मी की गांड चोदने का हो रहा था। मैंने मम्मी को कहा, “मम्मी आज तो आपकी गांड में डालने का मन हो रहा है।”

मम्मी बोली, “डाल ले बेटा। मैंने तो उस दिन ही कहा है, मेरे आगे-पीछे मुंह में जहां भी डालना है डाल बस मस्त मजा दे मुझे। बहुत तरसी हूं इस डेढ़ साल में मैं ढंग की चुदाई के लिए।”

ये बोल कर मम्मी चूतड़ ऊपर करके लेट गयी और हाथों से चूतड़ खोलते हुए बोली, “ले धीरज, ये रही तेरी मम्मी की गांड, आजा चोद ले आज इसे भी।”

मैंने मम्मी के चूतड़ों पर ढेर सारा थूक लगा कर चूतड़ों के छेद में लंड डालने की कोशिश की मगर लंड का सिर्फ आगे का टोपा ही गांड ले छेद में जा पाया। मम्मी की गांड का छेद टाइट था और मेरा लंड बहुत मोटा।

मम्मी बोली, “क्या बात है धीरज जा नहीं रहा? चल छोड़ धीरज, तेरा लंड है ही बड़ा मोटा, इतनी आसानी से नहीं जा पायेगा। फिर कभी चोद लेना अपनी मम्मी की गांड। एक क्रीम आती है। वो लाना उससे जाएगा लंड आसानी से। चल अब फुद्दी में लंड डाल और चोद दबा-दबा कर, फुद्दी चुदवाने का बड़ा मन कर रहा है।”

उस रात भी मैंने अपनी मम्मी की दो बार चुदाई की और जब दूसरी बार की चुदाई के बाद भी मेरे लंड का पानी नहीं निकला तो मम्मी बोली, “क्या हुआ धीरज आज फिर अटक गया क्या? चूस कर निकालूं क्या?”

मैंने कहा, “नहीं मम्मी, चूस कर नहीं, आज मेरा भी फुद्दी चोदने का ही मन है। मम्मी मैं लेटता हूं, आप चढ़ो मेरे लंड पर और अपनी मन मर्जी की चुदाई करो उस दिन की तरह। बड़ा मजा आता है जब आप मेरी लंड पर बैठ ऊपर-नीचे होती हो।”

मम्मी बोली, “ठीक है धीरज, चल फिर लेट जा आज मैं ही देती हूं तुझे मजा – निकालती हूं तेरे लंड की मलाई।”

में बिस्तर पर लेट गया। मेरा लंड सीधा खड़ा था। मम्मी आयी और टांगें मेरे दोनों तरफ करके मेरे लंड पर बैठ गयी और बिना एक भी सेकंड गंवाए ऊपर-नीचे होने लगी। मम्मी बीच-बीच में पूरी उठ जाती थी – पूरा लंड मम्मी की फुद्दी में से बाहर निकल जाता था और फिर मम्मी झटके के साथ लंड पर बैठ जाती थी। जब मम्मी ऐसा करती थी, तो मेरे लंड का आगे का हिस्सा मम्मी की फुद्दी में किसी नरम सी चीज़ से टकराता था। शायद मम्मी की फुद्दी का आखिर का हिस्सा था नरम-नरम नाजुक-नाजुक।

जो भी था इस तरह की चुदाई में भी मुझे मजा बहुत आ रहा था। ऊपर-नीचे होते हुई मम्मी के मम्मे भी ऊपर-नीचे हो होते थे। बड़ा ही मस्त सेक्सी सीन बन रहा था। मैंने पहले ही की तरह अपनी मम्मी के मम्मे पकड़ लिए और मम्मों के निप्पल मसलने लगा। मम्मी को अब मजा आने लगा था। मम्मी ने हाथ नीचे करके उंगली से अपनी चूत का दाना रगड़ना शुरू कर दिया। मम्मी के मुंह से मजे की सिसकारियां निकलने लगी।

मम्मी अब पूरी तरह से चुदाई में मस्त हो चुकी थी और उनके मुंह से ऊंची-ऊंची आवाजें निकल रहीं थी, ”आह धीरज बेटा मजा आ गया, बड़ा मजा आए रहा है धीरज मुझे। आह क्या मस्त लौड़ा है धीरज तेरा, क्या मस्त चुदाई हो रही है आज। आह धीरज बस बेटा मेरी फुद्दी पानी छोड़ने ही वाली है।” [email protected]

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Nisha Gupta

हैलो! मैं निशा गुप्ता हूँ - जयपुर विश्वविद्यालय से संचार विज्ञान में मास्टर और पिछले 6 साल से डिजिटल दुनिया में हिंदी कहानियाँ लिखने वाली एक अनुभवी लेखिका। मैं वो कहानियाँ लिखती हूँ जो पढ़ते ही आपके मन में आग लगा दें। मेरी कहानियों में वो सब कुछ है जो आप चाहते हैं - बोल्ड, बेबाक और बेरोकटोक। मेरे लेखन को हजारों पाठकों ने सराहा है और कई पुरस्कार भी मिले हैं। मैं यहीं हूँ आपके मज़े के लिए — तो लेटे रहो और पढ़ते जाओ!

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