एक फैमिली ऐसी भी-33

पिछला भाग पढ़े:- एक फैमिली ऐसी भी-32

हिंदी चुदाई कहानी अब आगे-

अपनी ग्रुप चुदाई की कहानी सुनाते-सुनाते मौसी कुछ सोचते-सोचते हंस दी। मैंने पूछा, “क्या हुआ मौसी, आप हंसी क्यों, कुछ याद आ गया क्या?”

मौसी बोली, “हां धीरज कुछ याद ही आ गया।”

फिर मौसी ही बोली, “धीरज उस दिन यश जीजा जी मुझे चोद कर हटे थे। मुझे मजा आ चुका था, मगर जीजा जी का लंड खड़ा ही था। मैं और जीजा जी सोफे पर बैठ गए। मेरे हाथ में जीजा जी का खड़ा लंड था।”

“सामने मनोहर जीजी को चोद रहा था। मनोहर फर्श पर खड़े थे और जीजी चूतड़ पीछे करके उल्टी लेटी हुए था। मनोहर ने जीजी की कमर पकड़ी हुई थी और जोर-जोर से जीजी की फुद्दी में लंड अंदर-बाहर कर रहे थे। अचानक जीजी ऊंची आवाज में बोली, “मनोहर रगड़ो दबा कर मुझे मजा आने वाला है।”

“मनोहर उन्ह-उन्ह करके जोर-जोर से जीजी की फुद्दी में लंड के धक्के लगाने लगे। तभी जीजा जी उठे और जा कर जीजी के दोनों तरफ टांगें करके लंड जीजी के मुंह के सामने करके लेट गए। जीजी ने एक पल के लिए आँखें खोलें और जीजा जी को देख कर जीजा जी का लंड मुंह में ले लिया और चूसने लगी।

“और तभी जीजी ने जोर से चूतड़ घुमाये और जीजा जी का लंड मुंह सी निकाल कर बोली, “साले मनोहर क्या चोदता है, निकल गया मेरी फुद्दी का पानी।” ये बोल कर चूतड़ घुमाते घुमाते जीजी ने जीजा जी का लंड दुबारा मुंह में ले लिया।”

“तभी जीजा जी ने जीजी का सर अपने लंड पर दबा दिया और बोले, “मादरचोद सुधा निकल गया मेरे लंड का पानी। चूस साली चाट सारा पानी।”

“मनोहर का लंड अभी भी जीजी के फुद्दी में ही था। उंगली करते-करते मेरी फुद्दी फिर से गरम हो चुकी थी। मैं उठी और जा कर जीजी की बगल में ही चूतड़ पीछे करके लेट गयी और मनोहर से कहा, “मनोहर साले अब रगड़ मेरी फुद्दी, चोद मुझे, निकाल मेरी फुद्दी का पानी। आग लग गयी है मेरी फुद्दी में तुम लोगों की चुदाई देख-देख कर।”

“मनोहर ने लंड जीजी की फुद्दी में से निकाला और मेरी फुद्दी में डाल दिया और मेरी कमर पकड़ कर मुझे चोदने लगे।”

“मेरी फुद्दी तो गरम ही थी, मनोहर भी जीजी को आधे घंटे से चोद रहा था। ये चुदाई पांच मिनट भी नहीं चली और मुझे मजा आ गया। मैं जोर से बोली, “मनोहर मजा आ गया मुझे।”

“मनोहर ने भी कस कर मेरी फुद्दी में धक्के लगाए और एक जोर की दहाड़ लगाई, “तेरी मां का भोसड़ा कौशल्या, साली मादरचोद निकल गया मेरा भी। यश यार क्या मस्त चुदाई करवाती हैं ये दोनों बहनें। एक नंबर की चुदक्कड़ हैं दोनों सालियां। कितना मजा देती हैं ये दोनों मादरचोद।”

“ये कह कर मनोहर थोड़ा रुका और जब उसके लंड का पूरा पानी निकल गया तो उसने लंड मेरी फुद्दी में से निकाला और जा कर सोफे पर बैठ गया।”

“जीजी ने भी यश जीजा जी का लंड मुंह से निकाल लिया और बिस्तर पर ही ढेर हो गयी। जीजा जी भी उठे और जा कर मनोहर क पास सोफे पर बैठ गए।”

“मैं भी उठी और जीजी के पास ही लेट गयी।”

“मौसी हंसते हुए बोली, “इतना काफी है धीरज या कुछ और भी बताऊं?”

“मैं हैरानी से बोला, “मौसी इससे आगे भी कुछ हो सकता है क्या? मौसी और भी कुछ करते थे क्या आप लोग? और क्या-क्या करते थे आप?”

“मौसी बोली, “धीरज, हमारा फाइनल काम होता थे इकट्ठे नहाना जिसमें हम एक-दूसरे के ऊपर पेशाब भी कर देते थे। अब ये कैसे करते थे, ये ना ही पूछे तो अच्छा है।” कह कर मौसी फिर से हंस दी।

“मुझे मम्मी का और दिव्या का मेरे मुंह में पेशाब करने वाला सीन याद आ गया।”

“मैं बस यही सोच रहा था, “क्या है यार हमारा खानदान हमारी फैमिली?”

“जो भी था, ग्रुप सेक्स का किस्सा जो मौसी ने सुनाया था, कमाल था। मैं सोच रहा था मम्मी-पापा, मौसा जी और मौसी तो बड़े मजे करते रहे हैं, वो भी पिछले चौबीस सालों से।

खैर ये तो हुआ हमारे खानदान का ग्रुप सेक्स का किस्सा। माधवी अपनी सहेली के साथ गयी हुई थी और दिन में मौसी की चुदाई तो मैं कर ही चुका था, रात को मैंने माधवी को चोदना था।”

“रात को मौसी, खाना खाने के बाद बोली, “माधवी, बेटा मेरा सर ज़रा भारी सा है, आज नींद की गोली खा कर जल्दी सोऊंगी।”

ये मेरी लिए इशारा था। माधवी को तो कुछ पता ही नहीं था। जैसे ही मौसी गयी और मौसी के कमरे का दरवाजा बंद हुआ तो मैंने माधवी से कहा, “माधवी आज चुदवानी है? मौसी तो गोली खा कर सोयेगी, तो समझो सुबह ही उठेगी।”

माधवी बोली, “ठीक है, मैं चलती हूं, कब तक आओगे?”

मैंने कहा, “आधे पौने घंटे में आता हूं, तब तक मौसी भी गोली खा कर सो चुकी होंगी।”

माधवी बोली, “ठीक है, तब तक मैं कंप्यूटर पर चुदाई की फिल्म देख कर अपनी फुद्दी गरम करती हूं। धीरज पीछे के दरवाजे से आना।”

मैंने सोचा, यार हद्द ही है इन लड़कियों की। चुदाई के लिए हर वक़्त तैयार।

माधवी गयी और मैं भी अपने कमरे में आ गया। दरवाजा अंदर से बंद करके पीछे की बालकनी से मौसी के कमरे में चला गया। मौसी ने दरवाजा खुला ही रखा हुआ था। बिस्तर पर मौसी नंगी ही लेटी हुई थी। मुझे देखते ही बोली, “धीरज मुझे मालूम ही था बेटा तू जरूर आएगा।”

मैंने अपने कपड़े उतारे और बोला, “मौसी मेरे लिए आप और मम्मी पहले हैं – दिव्या और माधवी बाद में। चलिए आपको मजा देता हूं, माधवी के कमरे में आधे घंटे के बाद जाना है। आज माधवी की गांड चोदने का मन हो रहा है। क्रीम भी लेनी है।”

मैंने मौसी से पूछा, “बोलो मौसी कैसे चुदवानी है?”

मौसी बोली, “पीछे से ही डाल धीरज, तेरा लम्बा लौड़ा पीछे से फुद्दी की गहराई तक जाता है – बड़ा मजा आता है। मगर धीरज आज लंड का पानी माधवी की गांड के लिए बचा कर रखना।”

इसके बाद मौसी की पूरे आधी घंटे मैंने चुदाई की। मौसी की फुद्दी दो बार जब पानी छोड़ गयी, तब मैं जा कर मौसी के पीछे से हटा मैंने कपड़े भी नहीं पहने और मौसी से क्रीम लेकर पीछे के दरवाजे से निकलने लगा।

मौसी बोली, “अरे धीरज, क्या ऐसे ही जाएगा? लंड को बैठने तो दे, माधवी क्या सोचेगी।”

मैंने कहा, “मौसी पूरे दो हफ्ते चोदा है मैंने दिव्या और माधवी को। उन्हें मेरी आदतों का पता चल चुका है।”

मौसी हंसी और बोली, “ये लड़कियां तो चुदाई के लिए जैसे मरी ही पड़ी हैं – पर तू ही कौन सा कम है। जा मजे ले बीस साल की टाइट फुद्दी के। कल नहीं जाने दूंगी तुझे कहीं भी – सारी रात चुदवाऊंगी।”

मैं बिना कपड़ों के खड़े लंड के साथ पिछले दरवाजे से माधवी के कमरे में पहुंचा तो माधवी भी नंगी ही बिस्तर पर लेटी हुई थी। मुझे दखते ही मेरे खड़े लंड की तरफ इशारा करते हुए बोली, “वाह मेरा भाई पूरी तरह से तैयार हो कर आया है।”

उस रात माधवी की मस्त चुदाई हुई। कितने बार मजा लिया माधवी ने इसकी तो कोइ गिनती ही नहीं रही। आखिर में माधवी ने गांड में भी लंड ले लिया। पूरा मजा लेने के बाद माधवी बोली, “धीरज अब मुंह में निकालो।”

मैंने कहा ठीक है, “चल लेट जा।” माधवी लेट गयी। मैंने माधवी की गांड और सर के नीचे तकिया रखा और माधवी के ऊपर उल्टा लेट गया।

मेरा लंड माधवी के मुंह में था और मेरा मुंह माधवी की फुद्दी में। माधवी मस्त लंड चूस रही थी। पंद्रह मिनट की चुसाई के बाद मुझे मजा आने वाला हो गया। मैंने माधवी से कहा, “माधवी मेरा लंड पानी छोड़ने वाला है।”

इतना सुनना था कि माधवी मेरा लंड और भी जोर-जोर से चूसने लगी। जल्दी ही मेरे लंड से गर्म-गर्म मलाई निकली और माधवी के मुंह में जाने लगी। मेरा लंड मलाई छोड़ रहा था और माधवी उसे पीती जा रही थी। जब मेरा लंड पूरा पानी छोड़ चुका और ढीला हुआ तो माधवी ने लंड मुंह में से निकाला और बोली, “धीरज मजा आ गया।”

मैंने भी माधवी के ऊपर से उतरा और माधवी के पास ही लेट गया। फुद्दी, गांड और आखिर में मुंह में – मैं तो बस यही सोचता रहा -“बड़ी हिम्मत वाली हैं आज कल की लड़कियां, चुदाई के मामले में।”

अगले दो दिन तो बस मौसी के ही चुदाई हुई – वो भी मस्त। पूरे सात दिन रोहिणी गुजारने के बाद मैं वापस गुडगांव आ गया। इस बार का रोहिणी का ट्रिप पूरी मस्ती वाला था।

गुडगांव आया तो मम्मी बोली, “क्यों मेरे बच्चे कैसा रहा मौसी के घर का ट्रिप?”

मैंने जवाब दिया, “मम्मी ट्रिप तो मस्त था। मौसी और माधवी के मस्त चुदाई हुई। मगर मम्मी मौसी ने कुछ और भी बताया।”

मम्मी बिना किसी हैरानी के बोली, “अच्छा वो ग्रुप सेक्स वाली बात?”

मैं चुप रहा।

फिर मम्मी बोली, “अरे बेटा इसमें नया क्या है? मैं तुम और दिव्या भी तो यही कर रहे हैं। और अगर कौशल्या तुम्हे ना बताती तो भी मैं बता देती। इसमें तुमसे छुपाने वाली तो कोइ बात ही नहीं। अच्छा ये बता हमारी चारों के इकट्ठी चुदाई की कहानी सुनने का मजा आया या नहीं?”

मैंने कहा, “मम्मी मजा तो बहुत आया। मेरा तो पूरी कहानी के दौरान लंड ही खड़ा रहा। मगर मम्मी आपकी और मौसा जी की पहली रात वाली चुदाई का पूरा किस्सा तो मौसी जी को भी नहीं मालूम। इतना ही कह रही थी कि आप दोनों की पूरी रात चुदाई हुई। मौसी को भी उतना ही मालूम है जितना आपने और मौसा जी ने बताया। मम्मी पूरी कहानी तो बताईये। आखिर पूरी रात आप और मौसा जी करते क्या रहे?”

मम्मी बोली, “क्या बात है धीरज, अपनी मम्मी की मनोहर के साथ हुई चुदाई की कहानी सुनने को बड़ा उतावला है क्या?”

मैंने कहा, “नहीं मम्मी उतावली आपकी चुदाई की कहानी की नहीं, उतावली ग्रुप सेक्स की कहानी सुनने की है।”

मम्मी ने अपनी और मनोहर मौसा की उस रात हुई चुदाई की कहानी बतानी शुरू की।

मम्मी बोली, “धीरज सब कुछ ठीक हो गया सब लोग ग्रुप सेक्स के लिए तैयार हो गए। तो फिर आपस की शर्म भी खत्म ही हो गयी।”

“उस इतवार को तेरे मैं पापा और कौशल्या सब बैठे थे। जब मैंने मनोहर से चुदाई की बात साफ़ ही कर ली और मैं मनोहर की गोद में मनोहर के खड़े लंड पर बैठ गयी तो मनोहर से भी रहा नहीं गया। मनोहर मेरे मम्मे दबाने लगा। मैंने मनोहर के गले में बाहें डालें और मनोहर के होंठ अपने होठों में ले लिए।”

“मुझे साफ़ पता चल रहा था कि मनोहर का लंड सख्त हो चुका था। तभी तेरे मौसा मनोहर उठे, मेरी कमर में हाथ डाल कर मुझे कमरे की तरफ ले जाने लगे। मैं मनोहर के आगे आगे थी और मनोहर मेरे पीछे-पीछे। चलते-चलते मनोहर ने सब के सामने एक हाथ मेरे चूतड़ों में उंगली डाल दी। अब धीरज तू बता इससे ज्यादा और क्या शर्म जानी थी?”

मम्मी बता रही थी, “धीरज अंदर कमरे में जाते ही मनोहर ने मुझे बांहों में ले लिया और बेतहाशा मुझे चूमने लगा। मनोहर मुझे चूमता भी जा रहा था और बोलता भी जा रहा था, “आह मेरी जीजी, आज फुद्दी चोदने का मस्त मजा दूंगा आपको, गांड में भी डालूंगा जीजी आह जीजी।” मनोहर ऐसे मुझे छू चाट रहा था जैसे पहले बार कोइ जवान लड़की देखी हो।”

कुछ देर की बाद मनोहर ने मुझे छोड़ा और अपने कपड़े उतार दिए। मैंने भी अपने कपड़े उतार दिए और नंगी हो गयी। तब मैं कितने साल के होऊंगी – 23 की। मेरा कसा हुआ जिस्म देख कर मनोहर का लंड एक-दम से ही फुंकारे मारने लगा।”

मैंने भी अपनी फुद्दी पर हाथ फेरते हुए कहा, “आजा मनोहर मेरी फुद्दी भी गरम हुई पड़ी है,आग लगी हुई है इसमें, आजा और बुझा मेरे फुद्दी की आग।”

“इसके साथ ही मैंने मनोहर का खड़ा लंड हाथ में पकड़ लिया।”

मनोहर ने पूछा, “जीजी अब? कहां लेना है लंड? आगे या पीछे?”

मैंने मनोहर का लंड दबाते हुए कहा, “मनोहर आज की इस चुदाई में तेरी मर्जी चलेगी। जो मर्जी कर, जैसे मर्जी कर, जहां मर्जी डाल अपना लंड।” [email protected]

अगला भाग पढ़े:- एक फैमिली ऐसी भी-34 (अंतिम भाग)

Nisha Gupta

हैलो! मैं निशा गुप्ता हूँ - जयपुर विश्वविद्यालय से संचार विज्ञान में मास्टर और पिछले 6 साल से डिजिटल दुनिया में हिंदी कहानियाँ लिखने वाली एक अनुभवी लेखिका। मैं वो कहानियाँ लिखती हूँ जो पढ़ते ही आपके मन में आग लगा दें। मेरी कहानियों में वो सब कुछ है जो आप चाहते हैं - बोल्ड, बेबाक और बेरोकटोक। मेरे लेखन को हजारों पाठकों ने सराहा है और कई पुरस्कार भी मिले हैं। मैं यहीं हूँ आपके मज़े के लिए — तो लेटे रहो और पढ़ते जाओ!

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