एक फैमिली ऐसी भी-17

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फैमिली चुदाई कहानी अब आगे-

मम्मी गांड चुदवा कर हटी थी, मगर चूतड़ पीछे करके ही लेटी हुई थी। तभी दिव्या ने मम्मी के गांड में उंगली डाल दी। मम्मी की गांड का छेद तो मोटे लंड की चुदाई से थोड़ा खुला ही था। दिव्या की उंगली फिसल कर मम्मी की गांड में चली और मेरे लंड की मलाई मम्मी की गांड से बाहर आने लगी।

दिव्या ने मुझसे पूछा, “धीरज ये क्या है?”

मैंने कहा, “दिव्या यही तो है मेरे लंड की का चिकना पानी जो मम्मी की गांड में गया है।”

दिव्या अपनी उंगली चाटती हुई बोली, “बाहर निकल कर तो वेस्ट हो रहा है – या तो गांड के अंदर ही रहे, जैसे मेरी फुद्दी के अंदर ही रहा था। तुम्हारे लंड का पानी तो मेरे फुद्दी से बाहर नहीं आया।” और ये कह कर दिव्या नीचे बैठ गयी और मम्मी की फुद्दी में से निकलता हुआ मेरे लंड का गाढ़ा सफ़ेद पानी चाटने लगी।”

मम्मी ने सर घुमाया और मुझसे पूछा, “धीरज ये दिव्या क्या कर रही है?”

मैंने जवाब दिया, “मम्मी आपके चूतड़ों के छेद से मेरे लंड का गाढ़ा सफ़ेद पानी बाहर आ कर नीचे फुद्दी के तरफ बह रहा था। दिव्या बोली ये तो वेस्ट हो रहा है, और नीचे बैठ कर वो अपनी गांड पर से इसे चाट रही है।”

मम्मी कुछ नहीं बोली और पहले की ही तरह लेटी रही। गाढ़ा सफ़ेद पानी मम्मी की गांड में से बाहर बह रहा था और दिव्या चाटती जा रही थी। बीच-बीच में मम्मी अपनी गांड में थोड़ा नीचे के तरफ जोर भी लगा देती थी। इससे गाढ़े पानी की दो-चार बूँदें और बाहर निकल आती थी। जल्दी ही सारा सफ़ेद पानी निकल गया और दिव्या ने एक एक बूंद इस पानी की चाट ली।” जब दिव्या ने चाट-चाट कर मम्मी की गांड बिलकुल साफ़ और सूखी कर दी, तो दिव्या खड़ी हो गयी और बोली, “हो गया धीरज, मजा आ गया लंड का गाढ़ा पानी चाटने का।”

मम्मी भी खड़ी हो गई और मुझसे बोली, “बेटा धीरज आज तूने मेरी पूरी तसल्ली कर दी, तेरे मोटे लंड को गांड में लेने का अलग सा ही मजा आया है।”

दिव्या बोली, “मम्मी ये लंड का सफ़ेद पानी तो बड़ा टेस्टी होता है, हल्का सा नमकीन, मगर इसकी महक तो बड़ी ही मस्त करने वाली होती है। मैं तो मम्मी मुंह में भी डलवाऊंगी धीरज के लंड से ये पानी, धीरज को बोलूंगी अपना लंड चुसवाये मुझसे।”

फिर दिव्या ने मेरी तरफ देख कर बोली, “क्यों धीरज?”

मैंने कहा, “चुसवाऊंगा, भला मुझे क्या प्रॉब्लम होगी, तुम्हारी फुद्दी की चुदाई तरह तुम्हारी लंड चुसाई भी मस्त रहेगी – तुम्हारी फुद्दी की तरह कुंवारी। जैसे तुम्हारी फुद्दी में अब तक कोइ लंड नहीं गया था, तुम्हारे मुंह में भी नहीं गया होगा।”

मम्मी ने दिव्या की तरफ देखते हुए बोली, “दिव्या क्या-क्या करवाएगी धीरज से? फुद्दी तू चुदवा ही चुकी है, गांड चुदवाने के सोच ही रही है, और अब मुंह में भी लंड लेगी?”

दिव्या बोली, “हां मम्मी सब कुछ करूंगी जो लड़का-लड़की आपस चुदाई करते हुए करते हैं – कर सकते हैं। धीरज का लंड तो मैं चूस ही चुकी हूं, बस धीरज के लंड का पानी ही नहीं निकलवाया मुंह में।”

मम्मी हंसते हुए बोली, “चल ठीक है, ये भी कर लेना। जब एक बार धीरज से चुदाई करवा ही ली, फुद्दी की सील तुड़वा ही ली तो फिर बचा ही क्या? अब तो जो भी तेरा मन करता है कर। गांड चुदवा, मुंह में ले, अपने मम्मों पर भाई के लंड की मलाई गिरवा – जो करना है कर। खुद भी मजा ले और धीरज को भी मजा दे।”

और फिर मम्मी मेरी तरफ मुड़ कर बोली, “चल धीरज, चल बाथरूम में। तू कह रहा था तुमने हमारा पेशाब टेस्ट करना है। चल तुझे पेशाब टेस्ट करवाएं। आजा दिव्या तू भी आजा। आज की मस्त चुदाई में बस यही एक काम रह गया है।”

मैं मम्मी और दिव्या, हम तीनों बाथरूम में आ गए। मैंने ने इधर-उधर देखते हुए मम्मी से पूछा, “मम्मी कैसे पेशाब डालोगी मेरे मुंह में? कहां बैठूं मैं? टॉयलेट सीट पर बैठ कर तो पेशाब मुंह में जाएगा नहीं। नीचे लेटूं क्या और आप मेरे ऊपर खड़े होकर मेरे मुंह पर पेशाब करो।”

मम्मी बोली, “नहीं धीरज, ऐसा कुछ नहीं है। उधर कोने में छोटा स्टूल पड़ा है, बैठ कर कपड़े धोने वाला, वो ले आ और बैठ जा उसके ऊपर।”

मैं स्टूल ले आया और उस पर मुंह खोल कर बैठ गया। पहले मम्मी आयी अपनी टाँगें चौड़ी करके अपने हाथों से अपनी फुद्दी की फांकें खोली और आगे हो कर पेशाब की धार सीधी मेरे मुंह में डाल दी और बोली, “ले बेटा, पी अपनी मम्मी का पेशाब।”

मम्मी का गर्म-गर्म पेशाब अजीब सी तीखी महक वाला था। पेशाब मेरे मुंह में जा कर बाहर निकलता हुआ उसके लंड ऊपर गिर रहा था। कुछ देर में मम्मी का सारा पेशाब निकल गया और मम्मी मेरे मुंह में मूतने से फारिग हो गयी।

मम्मी का पेशाब तो मेरे मुंह में गिर कर बाहर बह चुका था, बस पेशाब की कुछ बूंदें ही मुंह में बची हुईं थी। मैंने वो सारी बूंदें निगल ली। मम्मी का पेशाब तीखी महक वाला तो था ही, साथ ही नमकीन और खट्टा सा भी था।

जैसे ही मम्मी हटी, तो दिव्या आ गयी और मम्मी की तरह ही टांगें चौड़ी करके फुद्दी की फांकें खोल कर मेरे मुंह में पेशाब करने लगी। जहां मम्मी के पेशाब की धार मोटी थी और नीचे की तरफ गिर रही थी। दिव्या के पेशाब की धार पतली थी और सीधी मेरे गले में जा रही थी। मैं बड़ी मुश्किल से दिव्या का पेशाब अपने अंदर जाने से रोक पा रहा था। पेशाब करते हुए दिव्या की फुद्दी में सुर्र-सुर्र की तेज आवाज के साथ निकल रहा था। सुर्र-सुर्र की आवाज इतनी तेज थी की शायद पास खड़ी मम्मी को भी वो आवाज सुनाई दे रही होगी।

दिव्या ने भी पूरा पेशाब मेरे मुंह में किया और हट गयी। मम्मी के पेशाब की तरह ही दिव्या का पेशाब भी मेरे के मुंह से बाहर निकलता हुआ लंड पर गिर कर बह रहा था। दिव्या के पेशाब करने के बाद भी दिव्या के पेशाब की कुछ बूंदे मेरे के मुंह में थी। मैंने मम्मी के पेशाब की तरह ही दिव्या के पेशाब भी निगल लिया।

दिव्या का पेशाब भी गर्म था मगर उतना नमकीन नहीं था जितना मम्मी का पेशाब था, और ना ही उतना खट्टा ही था। मगर दिव्या के पेशाब की महक तो मम्मी के पेशाब जैसी ही थी – या शायद उससे कुछ ज्यादा ही तीखी थी।

इस मूतने के काम से जब सब फारिग हुए तो मैंने मम्मी से कहा, “मम्मी आप लोग जाओ, मैं नहा कर आपका मूत धो कर आता हूं नहीं तो और जयदा महक छोड़ेगा।”

मम्मी बोली, “चल दिव्या, धीरज को नहाने दे, हम बाहर रात के खाने का काम करें।”

मैं नहा कर बाहर निकला और कपड़े पहन लिए और डाइनिंग टेबल पर बैठ गया। मम्मी और दिव्या अभी भी नंगी ही बैठी थी।

मम्मी ने मुझसे पूछा, “हां तो बेटा धीरज क्या रिपोर्ट है मेरे और दिव्या के पेशाब की खुशबू और टेस्ट के बारे में?”

मैंने कहा, “मम्मी, ये लड़कियों का तो पेशाब भी कमाल है, जैसे ही आपने मेरे मुंह में पेशाब किया, गर्म-गर्म पेशाब और इसकी खुशबू ने तो मेरा तो लंड ही हरकत में ला दिया था। अगर मैंने आज इतनी बार आपकी और दिव्या की फुद्दी ना चोदी होती, तो मैंने तो वहीं बाथरूम के फर्श पर लिटा कर आपको और दिव्या को वहीं का वहीं चोद देना था। आपको अंदर ला कर बिस्तर पर लिटाने का भी इंतजार नहीं करना था। मम्मी जानवर भी इसीलिए पेशाब चाटते और सूंघते हैं। उनके लंड में भी एक-दम से हरकत आ जाती होगी।”

मम्मी और दिव्या दोनों हंस दी। मैं बोला, “मम्मी आपका पेशाब तीखी महक वाला, नमकीन और खट्टा था। दिव्या का पेशाब उतना नमकीन भी नहीं था जितना आपका पेशाब था, और ना ही उतना खट्टा ही था। मगर दिव्या के पेशाब के पेशाब निकलने की आवाज तो बड़ी तेज़ थी।”

मम्मी बोली, “धीरज दो औरतों के मूत के टेस्ट में थोड़ा बहुत फर्क हो सकता है, मगर दिव्या के मूतने से जो पतली धार और सुर्र-सुर्र की आवाज आ रही थी, वो इसलिए थी, क्योंकि दिव्या का मूतने वाला छेद भी दिव्या की फुद्दी की तरह ही अभी टाइट है, खुला नहीं है जैसे मेरा पेशाब वाला छेद खुल चुका है मेरी फुद्दी की तरह।”

फिर मम्मी बोली, “धीरज अब खाने का क्या प्रोग्राम है बेटा?”

मुझे तो चुदाई की थकान के कारण नींद सी आ रही थी। सुबह से चुसाई चुदाई ही हो रही थी। मैंने मम्मी से कहा, “मम्मी मेरा मन तो खाने का है नहीं, इतनी चुदाईयों के बाद अब मुझे थकान सी लग रही है, मैं तो अब सोऊंगा।”

मम्मी बोली, “ठीक है धीरज, आज असली मेहनत तो तेरी ही हुई है। तू जा, बाकी मौज मस्ती अब हम मां बेटी करेंगे।” फिर मम्मी ने दिव्या के तरफ देखते हुए कहा, “क्यों दिव्या बेटा, देगी ना मम्मी को फुद्दी चूस कर मजा?”

दिव्या बोली, “मम्मी फुद्दी चूसूंगी भी चुसवाऊँगी भी और अपनी फुद्दी चोदूंगी भी।”

मम्मी ने दिव्या की छोटी-छोटी तनी हुई चूचियों पर हाथ फेरते हुए कहा, “मेरी प्यारी प्यारी बेटी।”

सात दिनों का गुडगाँव में घर का प्रोग्राम मस्त रहा – एक तरह से जन्नत का मजा था। चुदाई-चुसाई और फ़ी चुदाई – बस यहीं होता रहा। सात दिनों के इस प्रोग्राम में पहले दो दिन तो मम्मी की चुदाई हुई। फिर जब तीसरे दिन दिव्या दिल्ली से वापस आ गयी तो तीन दिन मम्मी और दिव्या की मस्त चुदाई हुई। बस दिव्या की गांड चुदाई नहीं हो पाई। दिव्या लंड गांड में लेने के लिए तो तैयार बैठी थी। मगर दिव्या के गांड का छेद ही इतना टाइट था कि लंड अंदर जा ही नहीं पाया।

छठे दिन पापा आ गए। अब मम्मी के साथ तो चुदाई हो नहीं सकती थी, मगर दिव्या को उस रात मैंने फिर से चोद दिया। रात साढ़े दस बजे चुप-चाप, धीरे से मैं नीचे दिव्या के कमरे में गया और दिव्या को चोद कर दो बजे दिव्या के कमरे से बाहर निकला।

जैसे ही साढ़े दस बजे मैं नीचे दिव्या के कमरे में पहुंचा तो देखा दिव्या नंगी ही बिस्तर पर लेटी हुई थी। मुझे देखते ही दिव्या बोली, “धीरज मुझे मालूम ही था तुम जरूर आओगे। चलो आओ और बताओ कैसे चुदाई करनी है।”

उस दिन भी दिव्या को मैंने मस्त चोदा। दिव्या अब मस्त चुदाई करवाने लग गयी थी। दिव्या की फुद्दी तीन बार पानी छोड़ गयी, तीन बार मजा आ गया दिव्या को – मगर मेरा लंड खड़े का खड़ा ही था।

धुआंधार चुदाई कि बाद मैंने दिव्या से पुछा, “दिव्या, एक बज गया है एक बार और चुदवानी है तो बता। मेरा लंड तो अभी भी खड़ा ही है? अगर तू कहेगी तो इस बार तेरी फुद्दी मैं निकाल दूंगा लंड की गर्मा-गर्म मलाई।”

दिव्या बोली, “धीरज चुदवानी तो है तेरे लंड का गर्म पानी अपने अंदर डलवाने के लिए, पर धीरज मेरा गांड चुदवाने का मन हो रहा है।”

मैंने कहा, “कोइ बात नहीं दिव्या, चल अजा आज तेरी गांड में ही डालता हूं।”

दिव्या फट से चूतड़ ऊपर कर के उल्टी हो कर लेट गयी। मैंने दिव्या की अलमारी में से मुंह पर लगाने वाली क्रीम निकाली और दिव्या की गांड के छेद पर लगा कर एक उंगली गांड में डाल दी। एक उंगली तो दिव्या की गांड में चली गई, मगर जब मैंने दो उंगलियों पर क्रीम लगा कर दो उंगलियां दिव्या की गांड में डालने की कोशिश की तो मेरे दो उंगलियां भी दिव्या की गांड में बड़ी मुश्किल से जा पायी।

इतने से ही मुझे समझ आ गया दिव्या की गांड में उसकी दो उंगलियां इतनी मुश्किल से जा रहीं हैं तो फिर चार उंगलियों की बराबर की मोटाई वाला उसका लंड दिव्या की गांड में कैसे जाएगा।

मैंने दिव्या से कहा, “दिव्या आज गांड चुदाई रहने देते हैं, नहीं जा पायेगा मेरा लंड तेरी कुंवारी गांड में। मैं जब मई-जून की छुट्टियों में आऊंगा तो गांड चुदाई की एक स्पेशल क्रीम होती है – जैल बोलते हैं उसे – वो लेता आऊंगा। ये जैल बेहद चिकनी क्रीम होती है और गांड चुदाई की शौक़ीन इसे इस्तेमाल करते हैं। नई कुंवारी सील बंद फुद्दी को भी मर्द ये जैल लगा कर ही चोदते हैं। लंड फिसल तो फुद्दी के अंदर जाता है और लड़की को दर्द भी कम होता है। ये वाली जैल लगा कर ही तेरी और माधवी के गांड चुदाई करूंगा। मम्मी की गांड चुदाई के बाद अब तो तुम्हारी और माधवी – तुम दोनों की गांड चोदने के बिना मुझे भी चैन नहीं मिलने वाला।”

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Nisha Gupta

हैलो! मैं निशा गुप्ता हूँ - जयपुर विश्वविद्यालय से संचार विज्ञान में मास्टर और पिछले 6 साल से डिजिटल दुनिया में हिंदी कहानियाँ लिखने वाली एक अनुभवी लेखिका। मैं वो कहानियाँ लिखती हूँ जो पढ़ते ही आपके मन में आग लगा दें। मेरी कहानियों में वो सब कुछ है जो आप चाहते हैं - बोल्ड, बेबाक और बेरोकटोक। मेरे लेखन को हजारों पाठकों ने सराहा है और कई पुरस्कार भी मिले हैं। मैं यहीं हूँ आपके मज़े के लिए — तो लेटे रहो और पढ़ते जाओ!

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