एक फैमिली ऐसी भी-11

पिछला भाग पढ़े:- एक फैमिली ऐसी भी-10

हिंदी अन्तर्वासना कहानी अब आगे-

“मम्मी मैंने दिव्या से ही पूछा, “दिव्या, नीचे फुद्दी में दर्द तो नहीं हो रही?

“दिव्या बोली, “हल्की-हल्की दुःख तो रही है मगर इतनी नहीं।” मम्मी ये कह कर दिव्या फिर से मेरा लंड हाथ में पकड़ कर दबाने लगी और बोली, “धीरज एक बार और चोद दो, मेरी फुद्दी फिर से लंड मांग रही है।”

“मम्मी अब आप ही बताओ, मैं करता भी तो क्या करता। एक बीस साल की कुंवारी लड़की मेरा खड़ा लंड पकड़े हुए अपनी फुद्दी खोल कर मुझे फुद्दी में लंड डालने को कह रही थी। मैं मना करता भी तो कैसे करता?”

“बस मम्मी इससे अगली चुदाई में दिव्या की फुद्दी ने पीछे से लंड डाला। मम्मी पीछे से चुदाई में दिव्या को इतना मजा आ रहा था कि दिव्या लगातार चूतड़ आगे-पीछे करके पूरा लंड फुद्दी में ले रही थी। इस चुदाई में भी दिव्या को दो बार मजा आया, मगर मम्मी मेरा लंड फिर भी खड़ा ही था। मेरे लंड का पानी तब भी नहीं निकला था।”

“मम्मी, उसके बाद दिव्या बोली, “बस धीरज इतनी चुदाई कि मैं थक गयी हूं। मैंने खड़ा लंड दिव्या की फुद्दी में से निकाल लिया। मेरे खड़े लंड को देख कर दिव्या बोली, “धीरज ये क्या तुम्हें लंड तो अभी भी वैसा ही है, खड़ा ही है, तुम्हें मजा नहीं आया?”

“मम्मी मैंने दिव्या को बताया, “दिव्या अभी मुझे मजा नहीं आया। जब मुझे मजा आएगा तो तो मेरे लंड में से गरम-गरम गाढ़ा-गाढ़ा सफ़ेद रंग का पानी निकल कर तुम्हारी फुद्दी में निकलेगा और तुम्हें भी पता लगेगा की मेरे लंड से कुछ निकल कर तुम्हारी फुद्दी में गिरा है, और तुम्हे और भी ज्यादा मजा आएगा।”

“मम्मी ये सुन कर दिव्या बोली, “धीरज अभी निकालो अपने लंड का गर्म पानी मेरी फुद्दी में , मुझे अभी ही “वो” मजा भी लेना है प्लीज़ धीरज।”

“मम्मी दिव्या तो पागल हुई पड़ी थी एक और चुदाई के लिए, मेरे लंड का पानी अपने फुद्दी में निकलवाने के लिए। मगर तब तक पांच बज गए थे। मैंने ही दिव्या को कहा, “अभी रहने दो दिव्या, इस बार जब चोदूंगा तब लंड की मलाई फुद्दी में निकल दूंगा।”

“मम्मी, दिव्या बोली, “मगर धीरज मुझे तो आज ही तुम्हारे लंड का गर्म पानी अपने फुद्दी मैं डलवा कर देखना है कि कैसा लगता है – कैसा मजा आता है जब गरम लंड का पानी फुद्दी में निकलता है।”

“मम्मी मुझे पता ही नहीं था कि अब दिव्या की चुदाई कब होगी। इसलिए मैंने बस इतना ही कहा, “ठीक है दिव्या देखते हैं।”

इसके बाद दिव्या बोली, “ठीक है धीरज इतनी चुदाई से थक सी भी गयी हूं, नींद भी आ रही है। मम्मी दिव्या तो नंगी ही लेटने लगी थी, मैंने ही दिव्या से कहा, “दिव्या ऐसे मत लेट, कपड़े डाल ले। मेरे कहने से दिव्या ने मैक्सी पहन ली। मैंने दिव्या को दो एस्प्रिन की गोलियां दी और दिव्या वो खा कर सो गयी। बस मम्मी इसके बाद मैंने भी कपड़े पहने कर यहाँ आ गया। तकिये का कवर। जिस पर दिव्या की फुद्दी का थोड़ा सा खून लगा हुआ था वो दिव्या ने बाथरूम मैं रख दिया है।”

मेरी और दिव्या की चुदाई की कहानी सुनते-सुनते मम्मी अपनी सलवार का नाड़ा खोल कर अपना हाथ अपने सलवार में डाल चुकी थी।

मम्मी ने हाथ अपनी सलवार से निकाला, सलवार का नाड़ा बांधा और मेरे कमरे में चली गयी। दस सेकण्ड के बाद मामी वापस आयी और बोली, “धीरज, दिव्या बड़ी गहरी नींद मैं है। मम्मी के हाथ में तकिये का कवर था, जिस पर दिव्या की फुद्दी में से निकला खून लगा हुआ था।

मम्मी बोली, “धीरज बाकी तो सब ठीक है, मगर दिव्या ने जो मेरी और तुम्हारे चुदाई देख ली ये ठीक नहीं हुआ। ये नहीं होना चाहिए था, बिलकुल भी नहीं। अब ना जाने दिव्या मेरे बारे में क्या सोच रही होगी।”

मैंने मम्मी से कहा, “मम्मी अब जो होना था वो तो हो चुका। देखते हैं इस बारे में दिव्या आपसे क्या कहती है।”

मम्मी कुछ देर चुप रही फिर बोली, “धीरज चुदाई तो लगता है मस्त की है तूने दिव्या की। चल उठ एक बार अपना लंड चुसवा, तेरी और दिव्या के चुदाई की कहानी सुनते-सुनते मेरी फुद्दी फिर से गरम हो गयी है, आग लगी पड़ी है इसमें। एक बार लंड चुसवा और फिर रगड़ मेरे फुद्दी दबा कर जैसे दिव्या के रगड़ी है तूने। बाकी की बातें बाद में करेंगे। फिर जब वो उठेगी तो एक बार अपने लंड की गर्म मलाई का मजा भी दे देना उसे।”

मैंने कहा, “मम्मी अभी? अगर दिव्या जाग गयी, और उसने हमें चुदाई करते देख लिया तो?”

मम्मी बोली, “धीरज तेरे लम्बे मोटे लंड से हुई तीन घंटे की चुदाई की थकान के कारण बड़ी गहरी नींद में है, दो घंटे से पहले नहीं उठने वाली।”

फिर मम्मी बोली, “वैसे धीरज वो आ भी गई तो क्या? अब तो वो तुम्हारी और मेरी चुदाई के बारे में सब जान चुकी है, चुदाई होते देख भी चुकी है, और अब तो मैं भी तुम्हारे और दिव्या के बारे में सब जानती ही हूं। अब क्या डर और क्या पर्दा। और धीरज, जब दिव्या हमारी चुदाई एक बार देख चुकी है तो एक बार और देख लगे तो कौन सा पहाड़ टूट पड़ेगा – चल आजा।”

मैं और मम्मी अंदर आ गए – मैंने अपना पायजामा उतार दिया। मम्मी सोफे पर बैठ गयी। मैंने अपना लंड मम्मी की मुंह के सामने कर दिया। मम्मी ने कुछ देर मेरा लंड चूसा और बोली, “धीरज मेरी तो फुद्दी एक-दम गीली हो गयी है। बता कैसे चोदनी है। एक बार तो बिलकुल वैसे ही जैसे तूने आज दिव्या की फुद्दी चोदी है।”

मैंने कहा, “मम्मी दिव्या को तो दोनों तरह से चोदा था, लिटा कर भी हुए पीछे से भी। मगर मम्मी आप सीधी ही लेटो, आपको ऊपर से चोदने में ही मुझे मजा आता है। आपकी तो फुद्दी और मम्मे देख कर ही मुझे मस्ती से आ जाती है।”

मम्मी खड़ी हो गयी और बोली, “ठीक है मेरे लाल, पहले ज़रा इधर तो आ।”

मैं तो मम्मी की चुदाई करने के लिए खड़े लंड के साथ बिस्तर की तरफ जा रहा था, मम्मी की बात सुन कर मम्मी के पास चला गया।

मम्मी ने मुझे बाहों में लेकर अपना मुंह खोल दिया। अब मुझे मालूम था क्या करना है। मैंने अपनी जुबान मम्मी के मुंह में डाल दी। मम्मी मेरी जुबान चूसने लगी। फिर मम्मी ने अपने जुबान मेरे मुंह में डाल दी और मैं मम्मी की जुबान चूसने लगा। जब मेरी और मम्मी की ये जुबान चुसाई हो गयी तो मम्मी ने मुझे छोड़ा और बोली, “चल आजा मेरे लाल, आजा चढ़ मेरे ऊपर।” और ये बोल कर मम्मी बिस्तर के तरफ चल पड़ी।

मम्मी जा कर बिस्तर पर लेट गयी, तकिया अपने चूतड़ों के नीचे रखा और टांगें उठ करकर नीचे से फुद्दी खोल कर बड़े ही मादक अंदाज में बोली, “आजा मेरे राजा, ये रही तेरी मम्मी की फुद्दी, चल अब चोद अपमी मम्मी को दबा दबा कर।”

फिर मम्मी बोली, “पर हां धीरज याद रखना लंड की मलाई बचा कर रखना अपनी बहन दिव्या के लिए। पहली बार दिव्या की फुद्दी में जानी है – पूरी भर जानी चाहिए तेरी बहन की फुद्दी तेरे लंड की मलाई से। चल आजा मेरा प्यारा बेटा अब देर मत कर। देख तेरी मम्मी की फुद्दी पानी-पानी हुई पड़ी है।”

मम्मी की बातों से मेरा लंड फुफकारे मारने लगा। पता नहीं मुझे क्या हुआ, मैं उठा और अपने पापा की शराब की बोतलों वाली अलमारी खोली और ब्लेंडर प्राइड की बोतल खोल कर चार घूंट व्हिस्की के नीट ही लगा लिए। मम्मी ने मुझे देखा, मगर बोली कुछ भी नहीं।

मैं बिस्तर पर चढ़ा और अपनी मम्मी के मम्मों के निप्पल चूसने लगा। कुछ देर निप्पल चूसने के बाद मैं उठा, और मम्मी के मुंह पर लंड रख कर बोला, “मम्मी एक बार और चूसो, और कड़क हो जाएगा मस्त रगड़े लगेंगे फुद्दी में।”

मम्मी ने मेरा लंड मुंह में ले लिया और चूसने लगी। मम्मी की चुसाई से लंड एक-दम ही सख्त हो गया।

मैंने लंड मम्मी की मुंह में से निकाला और कहा, “मम्मी अब डालूंगा अंदर।” ये कह कर मायने मम्मी की टांगें थोड़ी और ऊपर उठाई और मम्मी की फुद्दी पर लंड रख कर एक ही झटके में लंड फुद्दी के अंदर डाल दिया और चुदाई चालू कर दी।

मैंने मम्मी को बाहों में जकड लिया और बोला, “लो मेरी जान, मेरी प्यारी मम्मी लो मेरा लंड पूरा अंदर तक अपनी फुद्दी मैं जकड़ लो मेरा लंड। निचोड़ लो मेरे लंड को।”

मैं अभी बोल ही रहा था कि मम्मी ने जोर के चूतड़ घुमाये और बोली, “आह धीरज बेटा ये तो निकल भी गया मेरा।”

मैंने मम्मी से पूछा, “ये क्या हुआ मम्मी इतनी जल्दी आपको मजा कैसे आ गया?”

मम्मी बोले, “धीरज तेरी और दिव्या के चुदाई की कहानी सुनते-सुनते मैंने अपनी फुद्दी में उंगली ऊपर-नीचे, अंदर-बाहर कितनी की थी देखा नहीं था? मेरी फुद्दी तो तेरी और दिव्या की कहानी सुनते-सुनते ही पानी छोड़ने वाली थी।”

मैंने पूछा, “तो मम्मी अब?”

मम्मी बोली, “अब क्या, एक बार और चोद दे, मैं तो लेटी ही हुई हूं, तेरा लंड भी मेरी फुद्दी में ही है।”

मेरा कड़क लंड मामी की फुद्दी में ही था। मम्मी की बातों से मेरा दिमाग काम ही नहीं कर रहा था। मैंने मम्मी को फिर से चोदना शुरू कर दिया, और साथ ही बोलने लगा, “लो मम्मी ये लो एक और चुदाई। ऐसे ही हमेशा चोदूंगा आपको ऐसे ही बाहों में लेकर मेरी रानी, मेरी जान, दिन में भी चुदाई करूंगा रात में भी चुदाई करूंगा। मम्मी आपकी गांड में भी डालूंगा ये मोटा लंड। आह मम्मी क्या चूतड़ घुमाती हैं आप, कैसे हट-हट कर फुद्दी मरवाती हैं।”

शायद पंद्रह मिनट ये चुदाई चली और मम्मी की चूत एक बार और पानी छोड़ गयी।”

मम्मी बोली, “धीरज मुझे तो दूसरी बार भी मजा आ गया है। अब लंड निकाल ले बेटा फुद्दी में से। याद है ना लंड की मलाई दिव्या की फुद्दी में डालनी है।”

मैंने कहा, “मम्मी उसकी आप फ़िक्र मत करो, आज कप भर के गर्म मलाई दिव्या की फुद्दी मैं ही जाएगी। आप एक मजा और लेलो, आज रात मैं दिव्या को ही चोदूंगा, जब तक वो कहेगी तब तक।”

ममी बोली, “चल तो ठीक है धीरज निकाल दे इस फुद्दी का पानी एक बार और, इस बार पीछे से चोद। पीछे से चुदाई में जब टट्टे चूत से टकराते हैं तो बड़ा मंजा आता है।”

मम्मी बेड के किनारे पर उल्टी लेट गई और चूतड़ उठा दिए। मैं मम्मी की चुदाई में पागल हो चुका था। बिना एक सेकंड भी गंवाए मैंने मम्मी की कमर पकड़ी मैंने और मम्मी की चुदाई फिर से चालू कर दी वैसे ही जोर-जोर से जैसे मैंने दिव्या की चुदाई की थी, जब दिव्या चुदाई में मस्त हो चुकी था।”

इस बार की चुदाई आधे घंटे से ज्यादा चली और इस चुदाई में मम्मी ने खूब चूतड़ आगे-पीछे किये। मम्मी पूरा लंड फुद्दी में ले रहे थी। एक बात तो थी, मम्मी चुदाई मस्त करवाती थी। चुदाई का मजा ही आ गया। मम्मी की इस तरह चूतड़ आगे-पीछे करने से मैं सोच रहा था कि आखिर तजुर्बा भी तो कोइ चीज़ है। मम्मी को चुदाई का बाईस सा साल से ज़्यादा का चुदाई कि तजुर्बा भी तो था। मम्मी के सामने मैं और दिव्या तो चुदाई के मामले में अभी कच्चे और बच्चे ही थे।

इस चालीस पैंतालीस मिनट चली। इस चुदाई से फारिग होकर मैं और मम्मी बाहर आ गए और डाइनिंग टेबल पर बैठ गए।

मम्मी बोली, “धीरज तेरी ऐसी चुदाई से तो मुझे अपनी और तेरे पापा की चुदाई याद आ जाती है, जब तेरी पापा हर दिन चार-पांच बार मुझे चोदते थे। ना चोदते हुए तेरे पापा थकते थे, ना चुदाई करवाते-करवाते मैं ही थकती थी। क्या मस्त दिन थे। फिर मम्मी धीरे से बोली, “धीरज जैसी चुदाई तू करता है ना बेटा, इससे कम चुदाई में तो तब मुझे तब भी मजा नहीं आता था।”

मैंने मम्मी से कहा, “मम्मी एक बताओ पहली रात आपने भी तो मस्त चुदाई करवाई होगी पापा से। सील भी तुड़वाई होगी। आपकी फुद्दी में से भी खून निकला होगा।” [email protected]

अगला भाग पढ़े:- एक फैमिली ऐसी भी-12

Nisha Gupta

हैलो! मैं निशा गुप्ता हूँ - जयपुर विश्वविद्यालय से संचार विज्ञान में मास्टर और पिछले 6 साल से डिजिटल दुनिया में हिंदी कहानियाँ लिखने वाली एक अनुभवी लेखिका। मैं वो कहानियाँ लिखती हूँ जो पढ़ते ही आपके मन में आग लगा दें। मेरी कहानियों में वो सब कुछ है जो आप चाहते हैं - बोल्ड, बेबाक और बेरोकटोक। मेरे लेखन को हजारों पाठकों ने सराहा है और कई पुरस्कार भी मिले हैं। मैं यहीं हूँ आपके मज़े के लिए — तो लेटे रहो और पढ़ते जाओ!

Read All Stories by Nisha Gupta
Disclaimer

इस वेबसाइट पर प्रकाशित सभी कहानियाँ पूर्णतः काल्पनिक हैं और केवल वयस्क पाठकों (18 वर्ष से अधिक आयु) के मनोरंजन के लिए लिखी गई हैं। इनका किसी भी वास्तविक व्यक्ति, घटना या स्थान से कोई संबंध नहीं है।

यहाँ प्रस्तुत किसी भी सामग्री को वास्तविक जीवन में अनुकरण करने के लिए प्रोत्साहित नहीं किया जाता। यदि आप 18 वर्ष से कम आयु के हैं, तो कृपया इस वेबसाइट को तुरंत छोड़ें।

इस साइट की सामग्री केवल भारत के कानूनों के अनुरूप वयस्क मनोरंजन हेतु है। कहानियों में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी हैं और वेबसाइट का किसी भी प्रकार से उन पर कोई नियंत्रण नहीं है।

हमारी साइट का उपयोग करके आप स्वीकार करते हैं कि आपने हमारी Privacy Policy पढ़ और समझ ली हैं।

लिंक कॉपी हो गया!