एक फैमिली ऐसी भी-6

पिछला भाग पढ़े:- एक फैमिली ऐसी भी-5

हिंदी चुदाई कहानी अब आगे-

मैं नीचे लेटा था और मम्मी मेरे लंड पर छलांगें लगाते-लगाते कुछ भी बोल रही थी।

मस्ती में फुद्दी का दाना रगड़ती हुई मम्मी जोर-जोर से ऊपर-नीचे होने लगी। ऊपर-नीचे होते हुए मम्मी बोल रही थी, “आअह धीरज पूरा अंदर तक जा रहा है तेरा मस्त लंड। बस धीरज अब निकलेगा, आह… ओह… आह…‌ ले बेटा निकल गया, छोड़ गयी मेरी फुद्दी पानी। आह धीरज, पूरा अंदर तक जाता है तेरा लम्बा लंड बेटा। ऐसे ही चोदते रहना बेटा अपनी मम्मी को। क्या मस्त चुदाई करता है तू बेटा, आह धीरज, आह आह, इतना मजा भी आता है चुदाई का?”

मम्मी अभी भी ऊपर-नीचे हो रही थी, और तभी मेरे लंड से भी गर्म-गर्म मलाई निकल कर मम्मी की फुद्दी में जाने लगी। मजे के मारे मेरे चूतड़ अपने आप ही ऊपर-नीचे होने लगे और मेरे मुंह से भी निकला, “लो मम्मी निकला मेरा भी आपकी फुद्दी में। मजा आ गया मम्मी आज तो – मस्त मजा दिया आपने मेरा लंड अंदर लेकर। आह मम्मी लो, अभी भी निकल रहा है मेरे लंड में से। आह मम्मी निकल रहा है, जा रहा है आपकी फुद्दी में। आह मम्मी, आह मम्मी।” मुझे तो जैसे उस वक़्त जन्नत का मजा आ रहा था।

हम दोनों को मजा आ चुका था। ढीली पड़ी मम्मी अभी भी मेरे लंड पर ही बैठी हुई थी। कुछ देर के बाद मम्मी मेरे के लंड से ऊपर उठी और नीचे हाथ कर के अपनी चूत की फांकें चौड़ी कर दी। मेरे लंड की मलाई मम्मी की फुद्दी से निकल कर मेरे लंड पर और मेरे टट्टों पर टपकने लगी।

मम्मी मेरे ऊपर से उतरी और झुक कर मेरा लंड चाटने लगी। मम्मी ने चाट-चाट कर पूरी तरह से मेरा का लंड और टट्टे साफ़ कर दिए, मजा ही आ गया।

मेरा लंड साफ़ करके ममी मेरे ऊपर से उत्तरी, और मैं उठा और बाथरूम चला गया। लंड की धुलाई करके वापस आया और कपड़े पहन कर अपनी मम्मी से बोला, “मम्मी अब मैं अपने कमरे में चलता हूं। आज तो दिव्या भी यहीं है।”

जाने से पहले मैंने मम्मी को बाहों में लिया, मम्मी के होंठ जरा से चूसे और बोला, “मेरी प्यारी मम्मी, बड़े ही मस्त चुदाई करवाती हैं आप – मस्त मजा आता है आपको चोदने में। आज जैसे चुदाई का मजा तो मुझे आज तक नहीं आया।”

मम्मी को छोड़ मैं अपने कमरे के तरफ जाने लगा तो देखा कमरे का दरवाजा अंदर से बंद ही नहीं था।‌

मेरी और मम्मी की चुदाई में मेरी बहन दिव्या की एंट्री-

चुदाई की थकान से सुबह मैं लेट उठा। बाहर आया तो दिव्या डाइनिंग टेबल पर बैठी चाय पी रही थी। पापा मम्मी के कमरे का दरवाजा खुला था मगर मम्मी अंदर नहीं थी। मैंने दिव्या से पूछा , “दिव्या मम्मी कहां है?”

दिव्या बोली, “मम्मी मंदिर गयी है। बोल कर गयी है एक घंटे में आएगी।”

फिर दिव्या उठी और बोली, “मैं तुम्हारे लिए चाय बनाती हूं।”

दिव्या चाय बना लाई और मेरे सामने बैठ गयी। कुछ देर हम दोनों में से कोइ भी कुछ नहीं बोला।

फिर दिव्या बोली, “धीरज एक बात पूछूं?”

मैंने कहा, “पूछो दिव्या क्या बात है।”

दिव्या बोली, “धीरज तुम कल रात को मम्मी के कमरे में क्या कर रहे थे?”

जैसे ही दिव्या ने ये कहा – ये सुन मेरी तो जैसे गांड फट गयी। मेरे के मुंह से एक मिनट के लिए तो आवाज ही नहीं निकली।

हकलाते हुए मैंने ने कहा, “मम्मी के कमरे में? मैं? नहीं तो।”

दिव्या हंसते हुए बोली, “अब छोड़ो धीरज। मैंने बहुत कुछ देख सुन लिया है। तुम और मम्मी क्या-क्या कर रहे थे मुझे मालूम है। अब बच्ची भी नहीं हूं मैं, और ना ही फुद्दू। सब समझ है मुझे क्या गुल खिला रहे थे तू और मम्मी?”

मैंने उसी घबराहट में पूछा, “क्या? क्या कर रहा था, क्या देखा तुमने?”

इसे बाद तो दिव्या ने मुझे बताया उससे तो मेरा दिमाग ही घूम गया।

“यही कि तुम मम्मी के बिस्तर पर लेटे हुए थे – बिना कपड़ों के, और मम्मी तुम्हारे ऊपर बैठी हुई, ऊपर-नीचे हो रही थी। क्या मतलब है इसका? क्या ये भी मैं ही बताऊं कि मम्मी ऊपर-नीचे होते हुए क्या कर रही थी? साफ़-साफ़ बताओ मुझे ये क्या चल रहा है तुम्हारे और मम्मी के बीच और कब से चल रहा है?”

मैं समझ गया कि रात दिव्या ऊपर आयी होगी और कमरे का दरवाजा तो अंदर से बंद ही नहीं था और दिव्या ने मेरी और मम्मी की चुदाई देख ली थी। अब छुपाने से कोइ फायदा नहीं था।

हिम्मत करके मैंने दिव्या से पूछा, “दिव्या तुम ऊपर क्या करने आयी थी?”

दिव्या बोली, “मैंने तो ऊपर आना ही नहीं था। वो तो मुझे नींद नहीं आ रही थी। मैंने टीवी लगाया हुआ था और मेरे कमरे का दरवाजा भी बंद नहीं था। आधी रात को जब मुझे नींद सी आई तो मैंने टीवी बंद किया और बाहर का दरवाजा चेक करने गयी की देखूं कुंडी लगी है या नहीं।”

“तभी मुझे ऊपर से कुछ आवाजें आती सुनाई दी। मैं ऊपर गयी – ये देखने कि ये आवाजें क्या हैं।”

“देखा तो आवाजें मम्मी के कमरे में से आ रही थी। मैंने तुम्हारे कमरे का दरवाजा खोला, तो देखा तुम कमरे में नहीं थे।”

“मैंने मम्मी के कमरे का दरवाजा जरा सा धकेला देखा तो वो खुला हुआ था। अंदर छोटा बल्ब जल रहा था।”

“मम्मी तुम्हारे ऊपर बैठी हुई थी और तुमने मम्मी के मम्मे पकड़े हुए थे। मम्मी का एक हाथ नीचे था और मम्मी अपनी ये नीचे वाली में – मतलब फुद्दी में, कुछ उंगली सी कर रही थी। मम्मी तुम्हारे इस पर (दिव्या मेरे लंड की तरफ इशारा करके बोली) तुम्हारे लंड पर बैठी ऊपर-नीचे हो रही थी। तभी मम्मी जोर से चिल्लाई थी, ”आह धीरज बेटा मजा आ गया, बड़ा मजा आ रहा है धीरज मुझे। आह क्या मस्त लौड़ा है धीरज तेरा, क्या मस्त चुदाई हो रही है आज। आह धीरज बस बेटा मेरी फुद्दी पानी छोड़ने ही वाली है।”

“धीरज और भी पता नहीं मम्मी क्या-क्या बोल रही थी। मम्मी की बातें सुन कर तो मेरा दिमाग ही घूम चुका था। और धीरज ये तो मैंने साफ़ सुना। धीरज, ये सब करते हुए और बोलते हुई मम्मी चीखी ही इतनी जोर से थी।”

फिर दिव्या बोली, “और भोसड़ी के धीरज, तुम ही कौन से कम थे। नीचे लेटे तुम भी तो जोर-जोर से अपने चूतड़ ऊपर-नीचे कर रहे थे और तुम्हारे मुंह से भी निकल रहा था, “लो मम्मी निकला मेरा भी आपकी फुद्दी मैं। मजा आ गया मम्मी आज तो – मस्त मजा दिया आपने मेरा लंड अंदर लेकर, आह मम्मी लो, अभी भी निकल रहा है मेरे लंड में से, आह मम्मी निकल रहा है, जा रहा है आपकी फुद्दी में। आह मम्मी, आह मम्मी।”

दिव्या बोल रही थे, “अब बताओ धीरज, मम्मी को नंगी होकर तुम्हारे ऊपर बैठ कर कौन सा मजा आना था, और तुम भी तो बिना कपड़ों के ही लेटे हुए थे।”

और फिर दिव्या बोली, “और बेटा धीरज, तुम दोनों मां-बेटे का खेल यह खत्म नहीं हुआ। कुछ देर के बाद मम्मी तुम्हारे लंड से जरा सी ऊपर उठी और नीचे हाथ करके मम्मी ने अपनी फुद्दी में कुछ-कुछ किया और फिर झुक कर तुम्हारा लंड चाटने लगी।”

मैं समझ गया वो मम्मी का मेरा लंड चाटने का सीन था जो मम्मी ने देख लिया था।

दिव्या हंसते हुए बोली, “अब धीरज, अब ये भी बताऊं मम्मी ने नीचे हाथ करके क्या किया होगा और तुम्हारे लंड से क्या चाटा होगा?”

“तुम्हारा और मम्मी का ड्रामा देख कर मेरी फुद्दी तो गर्म हो ही चुकी थी। मेरा मन कर कहा था अभी ककी अभी फुद्दी मैं उंगली डाल लूं। फिर भी मैं खड़ी ही रही, ये देखने की लिए कि देखूं अब क्या होता है, अब क्या करोगे तुम दोनों मां बेटा?”

“तुम बाथरूम चले गए और मम्मी ने उठ कर कपड़े पहन लिए। फिर तुम बाथरूम से बाहर आए और मम्मी को बाँहों में कर मम्मी के होंठ चूसे और फिर कुछ ऐसे बोले, “मेरी प्यारी मम्मी, बड़ी ही मस्त चुदाई करवाती हैं आप – बड़ा ही मस्त मजा देती हैं आप।”

मैं चुप-चाप दिव्या को देख रहा था। दिव्या बोली, “इसके बाद जैसे ही तुम दरवाजे की तरफ आने लगे तो मैंने हल्के से दरवाजा बंद किया और नीचे आ गई – अपने कमरे में।”

“तुम्हारी और मम्मी की ये उठा-पटक देख कर मेरी फुद्दी गीली हो चुके थी। मैं नीचे अपने कमरे में गयी और किसी तरह फुद्दी में उंगली डाल कर फुद्दी का पानी छुड़ाया और सो गई।”

दिव्या को तो सब कुछ ही पता चल गया था। दिव्या ने तो सब कुछ ही देख लिया था। मगर मेरी असली परेशानी ये थी कि अब में दिव्या को बोलूं भी तो क्या बोलूं। क्या कहूँ दिव्या से कि मैं मम्मी की चुदाई क्यों कर रहा था। मैं परेशान सा सोच रहा था उसे मम्मी के साथ इतना कुछ करते दिव्या ने देख लिया था, अब क्या दिव्या करेगी? दिव्या की बातों से में परेशान हो चुका था, मगर दिव्या इतना कुछ जान कर भी नार्मल थी।

दिव्या बोली, “धीरज, मम्मी चुदाई के लिए पूरी तरह से फिट है। चवालीस की उम्र ऐसी भी नहीं होती कि फुद्दी लंड ही ना मांगे। सीधी सी बात जो मुझे समझ आ रही है अगर मम्मी ने तुम से चुदाई करवाई है तो इसका एक ही कारण मुझे समझ आ रहा, और वो ये कि पापा मम्मी को चोद नहीं पा रहे होंगे। वरना मम्मी ऐसी नहीं कि अपने बेटे से ही चुदाई करवा ले l

दिव्या बड़ी ही समझदारी वाले बातें का रही थी। मगर मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं आखिर कहूं भी तो क्या कहूं। मुझे यूं गुमसुम बैठे देख गुमसुम चुप देख कर दिव्या ही बोली, “क्या हुआ धीरज तुम इतने चुप और परेशान क्यों हो। चोद दिया तो चोद दिया अब क्यों तुम्हारी फटी पडी है? मैं मम्मी कि चुदाई के लिए तुम्हें दोष थोड़े ही दे रही हूं।”

मैं फिर भी चुप रहा। बोलता भी तो क्या बोलता? जब काफी देर तक में कुछ नहीं बोला, तो दिव्या ही बोली, “धीरज इतना भी मत सोचो मेरे भाई। जो हो रहा है ठीक हो रहा है। जैसा चल रहा है चलने दो। कहीं ऐसा ना हो मम्मी अपनी फुद्दी की आग बुझाने के लिए किसी बाहरी मर्द से चुदाई करवा ले।

फिर दिव्या जो बोली, उसने तो धीरज के होश ही उड़ा दिए। दिव्या बोली, “धीरज चलो छोड़ो, अब मुझे एक बात बताओ। चवालीस साल की मम्मी को तुम चोद रहे हो, जिसकी तो फुद्दी भी अब चुदाई करवा करवा कर दो-दो बच्चे पैदा करके तक खुल चुकी होगी। और धीरज जिस तरीके से नीचे लेटे तुम बोल रहे थे, इसका मतलब मम्मी की ऐसे ढीली-ढाली फुद्दी चोदने का मजा तुम्हें भी आ ही रहा था।”

दिव्या इसके बाद कुछ चुप हुई और फिर बोले, “धीरज मम्मी की आधी उम्र से भी कम उम्र की लड़की की फुद्दी चोदोगे? एक दम कुंवारी, टाइट फुद्दी, सील बंद। किसी भी लड़के का लंड फुद्दी के अंदर नहीं गया – फुद्दी के अंदर क्या किसी लंड ने उस फुद्दी को अब तक छुआ तक नहीं। बोलो? बोलो चोदोगे? बिलकुल कुंवारी सील बंद फुद्दी है, मजा आ जाएगा ऐसी टाइट फुद्दी में लंड डालने का और टाइट फुद्दी चोदने का।”

मैं हैरान-परेशान तो पहले ही था, दिव्या की बात सुन कर मेरी हैरानी और बढ़ गयी। मैंने दिव्या से पूछा, “मम्मी की उम्र से आधी से भी कम उम्र की लड़की, एक दम कुंवारी सील बंद, टाइट? किसकी दिव्या? किसकी फुद्दी?”

दिव्या बोली, “अबे गधे चूतिये धीरज, फुद्दी तो तुम्हारे सामने बैठी है। तुम्हारी बीस साल की जवान बहन दिव्या l मेरी फुद्दी, धीरज मेरी फुद्दी। अब तक बिलकुल अनछुई है, बिलकुल कुंवारी सील बंद – एक-दम टाइट होगी।”

फिर दिव्या अपनी फुद्दी को छू कर बोली, “धीरज लंड डालोगे इसमें तो मजा आ जाएगा तुम्हें, लंड रगड़ कर जाएगा अंदर। ऐसी कुंवारी फुद्दी चोदने लिए तो मर्द तरसते हैं और चुदाई के लिए लाखों खर्च करने तक भी तैयार हो जाते हैं। मैं तो अपनी कुंवारी फुद्दी तुम्हें प्लेट में सजा कर दे रही हूं। बोलो चोदोगे?” [email protected]

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Nisha Gupta

हैलो! मैं निशा गुप्ता हूँ - जयपुर विश्वविद्यालय से संचार विज्ञान में मास्टर और पिछले 6 साल से डिजिटल दुनिया में हिंदी कहानियाँ लिखने वाली एक अनुभवी लेखिका। मैं वो कहानियाँ लिखती हूँ जो पढ़ते ही आपके मन में आग लगा दें। मेरी कहानियों में वो सब कुछ है जो आप चाहते हैं - बोल्ड, बेबाक और बेरोकटोक। मेरे लेखन को हजारों पाठकों ने सराहा है और कई पुरस्कार भी मिले हैं। मैं यहीं हूँ आपके मज़े के लिए — तो लेटे रहो और पढ़ते जाओ!

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