दोस्तों मैं मनीष आप सभी का एक बार फिर स्वागत करता हूँ. आपने मेरी कहानी का पिछला भाग मिस्ट्रेस बहन ने दी अनोखी सजा 1 पढ़ा होगा. अगली सुबह – Sunday की शुरुआत सुबह के 9 बज चुके थे। Sunday था, घर में अभी भी वही शांति। मैं बिस्तर पर लेटा था, गांड अभी भी हल्की जलन कर रही थी कल रात की सजा से, लेकिन मन में एक अजीब सा सुकून था। Sister Warm Tight Pussy
गरिमा पहले नहाकर तैयार हो गई थी – साधारण सा सलवार-कमीज, बाल खुले, चेहरे पर हल्की सी मुस्कान। मैं भी नहाकर निकला, टॉवल लपेटे हुए। वो मेरे कमरे में आई, दरवाजा बंद किया। मैं उसे देखकर थोड़ा घबरा गया – क्या फिर सजा मिलेगी? लेकिन उसकी आँखें नरम थीं।
“मनीष…” उसने धीमी आवाज में कहा, “कल रात के लिए… सॉरी। मैंने बहुत ज्यादा कर दिया।”
मैंने सिर झुकाया। “नहीं गरिमा… मेरी गलती थी। अपनी ही छोटी बहन की पैंटी… छी… जो मैंने किया, उसकी सजा मिलनी ही थी। मैं डिजर्व करता था।”
उसकी आँखें भर आईं। वो पिघल गई। एक कदम आगे बढ़ी, मुझे दोनों हाथों से गले लगा लिया। मैंने भी उसे सॉफ्टली हग किया – कोई जल्दबाजी नहीं, बस गर्माहट। उसके बाल मेरे चेहरे पर लगे, उसकी खुशबू आई। फिर उसने मेरा गाल पकड़ा, धीरे से किस किया – गाल पर। “सॉरी…” उसने फुसफुसाया। मैंने भी उसके गाल पर किस किया।
“सॉरी गरिमा…” और फिर… हमारे होंठ मिल गए। धीरे से, बहुत धीरे। कोई rush नहीं। बस सॉफ्ट, रोमांटिक किस। उसके होंठ नरम थे, गर्म। वो “सॉरी… सॉरी…” कहती रही, मैं उसे किस करते-करते जवाब देता रहा। किस गहरा होता गया – जीभ मिली, साँसें तेज हुईं, लेकिन अभी भी tenderness बाकी थी। कुछ मिनट बाद हम अलग हुए। दोनों की साँसें फूल रही थीं।
वो मेरी आँखों में देखकर बोली, “सच बता… पैंटी क्यों स्मेल कर रहा था?”
मैंने शर्म से सिर झुकाया, लेकिन सच बोला। “गरिमा… तेरी खुशबू… तेरे बदन की वो स्मेल… मुझे पागल कर देती है। तू इतनी attractive है, स्लिम, सॉफ्ट, तेरी स्किन, तेरी बॉडी… मैं कण्ट्रोल नहीं कर पाया। रोज देखता हूँ तुझे, और सोचता हूँ… कितनी परफेक्ट है तू।”
उसकी आँखें चमक उठीं।
मैंने उसकी तारीफ जारी रखी – “तेरी कमर… इतनी पतली, तेरी गर्दन… इतनी graceful, तेरी आँखें… जब तू गुस्सा करती है तो भी कितनी हॉट लगती है। तू dominate करती है, लेकिन अंदर से कितनी caring है। मैं… मैं बस तेरे करीब रहना चाहता हूँ, तेरी खुशबू में खो जाना चाहता हूँ।”
वो फिर से पिघल गई। इस बार उसने खुद मुझे किस किया – गहरा, passionate। उसके हाथ मेरी पीठ पर, मेरे बालों में। किस के बीच में वो फुसफुसाई, “तू भी… कितना स्वीट है मनीष… मैं भी… कभी-कभी सोचती हूँ… तू मेरे लिए कितना स्पेशलl है।” हम बेड पर बैठ गए।
वो मेरे कंधे पर सिर टिका कर बोली, “कल रात जो हुआ… वो सजा थी, लेकिन अब… अब हम दोनों को एक-दूसरे को समझना है। अगर तुझे मेरी खुशबू पसंद है… तो परमिशन ले। मैं खुद दूँगी। लेकिन चुपके से मत करना।” मैंने हँसकर कहा, “जी Mistress… अब से परमिशन लूँगा।”
वो हँसी, फिर मेरे होंठों पर फिर से किस। “और हाँ… आज Sunday है। आज कोई सजा नहीं। बस… हम साथ में रहेंगे।” हम दोनों लेट गए। वो मेरी बाहों में, मैं उसे सॉफ्टली हग किए। किस होती रही, बातें होती रहीं – हल्की-फुल्की, रोमांटिक। उसकी तारीफ करता रहा, वो ब्लश करती रही। मन में अब सजा की जगह प्यार और craving थी।
सुबह का प्यार हम दोनों बेड पर बैठे थे। गरिमा मेरी बातें सुनकर पहले तो शर्मा रही थी, लेकिन धीरे-धीरे उसकी साँसें तेज हो गईं। आँखें चमकने लगीं, गाल लाल हो गए। वो मेरी तरफ झुकी, मेरे कान के पास फुसफुसाई, “सच में… मैं इतनी सुन्दर हूँ? सेक्सी हूँ? हॉट हूँ?”
मैंने उसके बालों में हाथ फेरा, आँखों में देखकर कहा, “हाँ गरिमा… तू सबसे सुन्दर है। तेरी स्लिम बॉडी, तेरी स्मूथ स्किन, तेरी वो स्माइल… तू हॉट है, इतनी हॉट कि मैं रोज कण्ट्रोल नहीं कर पाता।” उसने मेरी आँखों में घूरा, आवाज थोड़ी काँपती हुई, “तो… तू मुझे चोदना चाहता है ना? सच बोल… अपनी छोटी बहन को… चोदना चाहता है?”
मैंने चुप नहीं रहा। सीधे बोला, “हाँ… बहुत चाहता हूँ। तुझे प्यार से, धीरे-धीरे… तुझे फील कराना चाहता हूँ कि मैं तेरा कितना दीवाना हूँ।” उसकी साँस रुक गई एक पल के लिए। फिर वो मुस्कुराई – नॉटी वाली स्माइल। बिना कुछ कहे उसने मुझे किस करना शुरू कर दिया। इस बार किस पहले से ज्यादा गहरा, ज्यादा hungry। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
उसके होंठ मेरे होंठों पर दबे, जीभ मिली, हाथ मेरे बालों में उलझ गए। हम दोनों ने एक-दूसरे के कपड़े उतारने शुरू कर दिए। पहले उसका सलवार-कमीज, फिर मेरा टॉवल। हम नंगे हो गए – स्किन टू स्किन। उसकी स्लिम बॉडी मेरे सामने थी – छोटे लेकिन perfect breasts, पतली कमर, स्मूथ thighs।
मैंने उसे बेड पर लिटाया, ऊपर चढ़ गया। धीरे-धीरे किस करते हुए मैंने कहा, “I love you, गरिमा… बहुत प्यार करता हूँ तुझे।” वो भी फुसफुसाई, “I love you too… मनीष… आज मुझे अपना बना ले।” मैंने उसके breasts पर किस किया, nipples चूसे – वो सिसकारी ले रही थी।
फिर नीचे आया, उसकी चूत पर जीभ फेरी – गीली, warm, musky स्मेल। वो काँप गई, मेरे बाल पकड़कर बोली, “अंदर आ… प्लीज…” मैंने अपना लंड उसके entrance पर रखा। धीरे से पुश किया – टाइट, वार्म, गीला। वो “आह…” करके कराह उठी। मैंने पूरा अंदर डाला, फिर धीरे-धीरे thrust करना शुरू किया।
हर thrust में वो मुझे और कसकर पकड़ रही थी। “मनीष… और जोर से… प्यार से चोद मुझे…” मैंने speed बढ़ाई, लेकिन प्यार से – उसके होंठ चूमते हुए, “I love you” बार-बार कहते हुए। उसकी आँखें बंद थीं, मुस्कान थी चेहरे पर। हम दोनों की साँसें एक हो गईं।
वो climax के करीब आई – बॉडी काँपने लगी, चूत सिकुड़ने लगी मेरे लंड के चारों तरफ। “मनीष… मैं… आ रही हूँ…” वो चीखी, और orgasm में चली गई। मैं भी रुक नहीं पाया – उसके अंदर ही cum कर दिया, गर्म-गर्म। हम दोनों लेट गए। वो मेरी छाती पर सिर रखकर साँस ले रही थी।
मैंने उसके बाल सहलाए, फिर से किस किया। “तू मेरी है अब… हमेशा।” वो मुस्कुराई, “और तू मेरा… लेकिन याद रखना – Mistress Garima कभी गायब नहीं होती। अगली गलती पर सजा मिलेगी। लेकिन आज… सिर्फ प्यार।” हम दोनों नंगे लिपटे रहे। Sunday की सुबह… अब हमारा secret bond और गहरा हो चुका था। प्यार, domination, lust – सब मिलकर।
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