मुंबई में आकर

प्रेषिका : स्नेहल

प्यारे पाठको,

मेरी तरफ से आप सभी को मेरी मीठी बुर का सलाम !

मैं रूपा, मेरी यह पहली कहानी है। आप सब ध्यान से दिल थाम कर और लण्ड पकड़ कर पढ़िए।

मैं गाँव से मैट्रिक पास करने के बाद मुंबई अपने चाचा के पास आगे पढ़ाई के लिए आ गई थी। वो उस समय बोरीवली में रहते थे, सो मैं उनके यहाँ आ गई। वहाँ उनका पूरा परिवार था, मेरी चाची और मेरी एक छोटी बहन जो अभी दसवीं में थी।

मेरा दाखिला ठाकुर कॉलेज में हो गया और मैं कॉलेज जाने लगी जो मुंबई में मेरे लिए बिलकुल नई जगह थी।

थोड़े दिनों में वहाँ सबसे मेरी दोस्ती मेरी हो गई और मैं खुश थी।

एक दिन जब मैं घर लौटी तो देखा कि मेरे कॉलेज का एक दोस्त विकास मेरे यहाँ बैठा चाय पी रहा था।

उसने मुझे देख कर चाचा से पूछा तो चाचा ने उसे बताया कि मैं उनकी भतीजी हूँ।

बाद में मुझे मालूम पड़ा कि वो भी हमारी गाँव का ही है और किराये पर कमरा लेने के लिए आया था और चाचा जी ने उसे एक कमरा दे डाला था।

अब वो रहने के लिए तो आ गया उसकी नज़रे बराबर मेरे और बहन शिल्पी के ऊपर टिकी रहती थी, कॉलेज में भी वो मेरे काफी नजदीक आ गया था, वो मेरी शरीर का दीवाना हो गया था।

दोस्तो, आपको मैं यह तो बताना भूल गई कि उस समय मेरी उम्र 19 साल और बदन भरा-पूरा और कामुक था।

मुझे भी मुंबई में आकर कुछ गुदगुदी होती थी और कभी कभी चाचा-चाची को एक साथ रात में रासलीला करते देख अपनी चूत में उंगली मार लेती थी।

यह बात शिल्पा को भी मालूम थी क्योंकि हम दोनों हाल में ही सोते थे और विकास का एक अलग कमरा था और चाची का भी।

हम दोनो रात में मस्ती करते थे।

एक रात मैं टॉयलेट जा रही थी तो देखा कि विकास के कमरे का दरवाजा खुला है और वो सपने में ही अपने लण्ड को मसल रहा था।

यह देख कर मेरे भी बदन में आग लग गई और मैं चुदासी हो उठी और उसके कमरे में जाकर उसका लण्ड पकड़ कर हिलाने लगी।

फिर मैंने चाचा की आहट सुनी तो वहाँ से भाग कर बाथरूम में जाकर उंगली की और पूरा माल बाहर निकाला। आज ज्यादा ही मजा आया था लेकिन मेरा दिल तो चुदने के लिए उफन रहा था।

कैसे भी रात को मैं सो गई।

दो दिन बाद अंकल को परिवार के साथ पिकनिक पर गोआ जाना था। मुझे भी चलने के कहा चाचा ने लेकिन मैं पढ़ाई के बहाने नहीं गई। वो लोग पाँच दिन के टूअर-पैक में गए थे।

अब तो मैं इंतजार कर रही थी विकास का ! शायद वो भी इसी इंतजार में था !

अगले दिन सुबह विकास ने मुझे कहा- मेरी तबियत ठीक नहीं है, मेरे लिए भी नाश्ता बना दे।

मैंने नाश्ता तैयार किया, जब मैं देने गई तो उसको देखा कि वो तो किसी नंगी लड़की से चैट कर रहा था।

मैं नाश्ता रखकर तुरन्त वहाँ से भागी और गाउन पहन कर आ गई। वो मुझे देखकर पागल हो गया और तुरंत ही मुझे चूमने लगा।

वो मस्त होकर से मेरे मम्मों को दबाता जा रहा था। थोड़ी देर में मैं हवा की सैर करने लगी क्योंकि बाद में उसने मेरा गाऊन उतार कर मेरे मम्मों से दूध पीना शुरू कर दिया।

अब तो मैं मस्ती में पागल हुई जा रही थी क्योंकि 69 की अवस्था में आकर उसने मेरी चूत चाटनी शुरू कर दी थी। मैं क्या करती, वो मुझे कहे जा रहा था लण्ड मुंह में लेने को !

मैंने भी उसका त्ना हुआ लण्ड मुँह में ले लिया और चूसने लगी।

थोड़ी देर में उसका लण्ड मेरे बुर को चीर कर अन्दर जा चुका था और बाद में दो घंटे तक चुदाई कार्यक्रम चला। इन दो घण्टों में हमने तीन बार चुदाई की।

मैंने कॉलेज जाना छोड़कर पाँच दिन घर में सेक्स-कॉलेज चलाया।

बाद में चाचा-चाची के आने के बाद भी रात को सेक्स क्लास लगती ही रही।

अपनी राय जरूर देना क्योंकि यह मेरी पहली कहानी है।

Ananya Verma

अरे! मैं अनन्या वर्मा हूँ - लखनऊ विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान की पढ़ाई करने वाली और पिछले 4 साल से हिंदी में ऐसी कहानियाँ लिख रही हूँ जो आपकी अंगुलियाँ स्क्रीन पर रोक दें। मैं इंसानी इच्छाओं, ख्वाहिशों और वो पलों को समझती हूँ जो आप छुपाना चाहते हैं लेकिन महसूस करना चाहते हैं। मेरी कहानियों में वही बात है जो दिल को छूती है और तन को सिहराती है। हज़ारों पाठकों ने मेरी कहानियाँ पढ़कर गर्म रातों का मज़ा लिया है। तो चलो, आज की रात मेरी कहानी से बनाते हैं!

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