मैं आपको अपनी सहेली प्रकृति की एक छोटी सी कहानी सुनाने जा रही हूँ। ये कहानी बिल्कुल सच्ची है। प्रकृति पिछले डेढ़ साल से चंडीगढ़ के एक कॉल सेंटर में काम कर रही थी। उसकी ज्यादातर शिफ्ट रात में ही होती थी और उसका परफॉर्मेंस भी कमाल का था। Factory Me Chudai Story
सब कुछ ठीक चल रहा था कि तभी उसकी शादी तय हो गई। अब प्रकृति को नौकरी छोड़ना तो नहीं था, लेकिन समस्या ये थी कि शादी के बाद रात की शिफ्ट करना उसके लिए मुश्किल हो जाता। आखिर पति रात को उसकी टाइट चूत को पेलने वाला था, ऐसे में वो भला नौकरी कैसे कर सकती थी?
प्रकृति ने अपनी ये परेशानी अपनी सीनियर नेहा को बताई। नेहा ने तुरंत सलाह दी, “तू गिरिराज सर से बात कर, वो जरूर कुछ मदद करेंगे।” गिरिराज शिफ्ट सुपरवाइजर था और कर्मचारियों का समय वही तय करता था। लेकिन प्रकृति और बाकी लड़कियों को अच्छे से पता था कि गिरिराज एक नंबर का चुदक्कड़ और वहशी इंसान है।
वो लड़कियों को सिर्फ चोदने की मशीन समझता था और मौका मिलते ही उनकी टाइट चूत पर नजर गड़ा देता था। फिर भी, नौकरी का सवाल था। प्रकृति को मजबूरी में गिरिराज के पास जाना पड़ा। उसने हिम्मत जुटाकर अपनी बात रखी। गिरिराज ने उसकी ओर देखा और मुस्कुराते हुए कहा, “टाइम तो मैं सेट कर दूंगा, लेकिन बदले में मुझे क्या मिलेगा?”
प्रकृति ने थोड़ा सकपकाते हुए पूछा, “सर, आपको क्या चाहिए?” गिरिराज ने फिर वही शातिर हंसी हंसी और बोला, “जो तू बड़े प्यार से मुझे दे दे, वही काफी है।” प्रकृति अभी भी उसकी बात का मतलब पूरी तरह नहीं समझ पाई थी। उसकी मासूमियत देखकर गिरिराज ने खुलकर कह ही दिया, “देख प्रकृति, मैं प्यार का भूखा हूँ। तू मुझे थोड़ा सा प्यार दे दे, बस!”
ये सुनकर प्रकृति के होश उड़ गए। ये साला गिरिराज तो खुल्लमखुल्ला उसकी चूत मांग रहा था! उसका मन तो हुआ कि गिरिराज की नौकरी को ठोकर मारकर वहां से निकल जाए, लेकिन नौकरी की जरूरत ने उसे रोक लिया। आखिरकार, उसने अपनी टाइट चूत का सौदा करने का फैसला कर लिया।
गिरिराज की तो जैसे लॉटरी लग गई। उसकी आंखों में चमक आ गई जब प्रकृति ने हां कर दी। उसने तुरंत शर्त रखी, “मैं तुझे हमेशा दोपहर की शिफ्ट दूंगा, लेकिन हर महीने तुझे मुझे एक बार ये प्यार देना होगा।” प्रकृति ने थोड़ा सोचा और फिर हामी भर दी।
मेरी सहेली बताती है कि उसने कई बार देखा है कि गिरिराज के केबिन से “आह्ह… ऊह्ह…” की सिसकारियां गूंजती रहती हैं। गिरिराज इतना कमीना था कि उसने कॉल सेंटर की कई लड़कियों की टाइट चूत का सील तोड़ दिया था। उसे कुंवारी लड़कियों की चूत का बड़ा शौक था। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
वो जानबूझकर ऐसी लड़कियों को पहले रात की शिफ्ट देता, फिर कुछ दिन बाद दिन की शिफ्ट देने के बहाने उनके साथ चुदाई का सौदा करता। और हैरानी की बात ये कि वो हर बार कामयाब भी हो जाता। अब प्रकृति की जिंदगी भी उसी राह पर चल पड़ी थी।
पहले महीने की बात है। गिरिराज ने उसे अपने केबिन में बुलाया। प्रकृति को अंदर जाते ही घबराहट होने लगी। केबिन की लाइट्स हल्की थीं और गिरिराज अपनी कुर्सी पर बैठा हुआ उसकी ओर भूखी नजरों से देख रहा था। उसने प्रकृति को पास बुलाया और बोला, “तो, तैयार हो ना मेरे प्यार के लिए?”
प्रकृति ने नजरें झुकाकर हल्के से सिर हिलाया। गिरिराज उठा और दरवाजा लॉक कर दिया। फिर उसने प्रकृति को अपनी बांहों में खींच लिया। प्रकृति का दिल जोर-जोर से धड़क रहा था, लेकिन अब पीछे हटने का कोई रास्ता नहीं था। गिरिराज ने धीरे से उसकी कमीज़ के बटन खोलने शुरू किए।
प्रकृति की सांसें तेज हो गईं। उसकी ब्रा में कैद चूचियां बाहर निकलने को बेताब थीं। गिरिराज ने ब्रा का हुक खोला और उसकी गुलाबी चूचियों को आजाद कर दिया। उसने उन्हें अपने हाथों में लिया और जोर-जोर से मसलने लगा। प्रकृति के मुंह से हल्की सी “आह” निकल गई।
गिरिराज अब और रुक नहीं सका। उसने प्रकृति की जींस नीचे खींच दी और उसकी टाइट पैंटी को भी उतार फेंका। प्रकृति की चिकनी, टाइट चूत देखकर उसकी आंखें चमक उठीं। उसने प्रकृति को टेबल पर बिठाया और उसकी टांगें चौड़ी कर दीं। फिर उसने अपनी जीभ उसकी चूत पर रख दी और चाटने लगा।
प्रकृति को ऐसा मजा पहले कभी नहीं मिला था। उसकी सिसकारियां कमरे में गूंजने लगीं, “आह्ह… सर… ऊह्ह…” गिरिराज ने अब अपनी पैंट उतारी और अपना मोटा, कड़क लंड बाहर निकाला। प्रकृति ने उसे देखा तो थोड़ा डर गई। उसका लंड इतना बड़ा था कि उसकी टाइट चूत में कैसे जाएगा, ये सोचकर ही वो सहम गई।
लेकिन गिरिराज को अब कोई फर्क नहीं पड़ता था। उसने प्रकृति की चूत पर लंड सेट किया और एक जोरदार धक्का मारा। प्रकृति की चीख निकल गई, “आह्ह… मर गई!” उसकी चूत फटने जैसी हो गई थी। गिरिराज ने रुकने का नाम नहीं लिया। वो धक्के पर धक्के मारता रहा। “Factory Me Chudai Story”
प्रकृति का दर्द धीरे-धीरे मजे में बदलने लगा। उसकी चूत अब गीली हो चुकी थी और लंड को अंदर-बाहर होने में आसानी हो रही थी। गिरिराज ने प्रकृति को टेबल से उतारा और उसे घोड़ी बनाकर पीछे से पेलना शुरू कर दिया। उसका लंड प्रकृति की चूत की गहराइयों तक जा रहा था।
प्रकृति अब चिल्ला रही थी, “आह्ह… सर… और जोर से… चोद दो मुझे!” करीब बीस मिनट की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद गिरिराज ने अपना माल प्रकृति की चूत में ही छोड़ दिया। प्रकृति की सांसें अभी भी तेज थीं। वो टेबल पर लेटी हुई हांफ रही थी। गिरिराज ने उसकी चूत को सहलाया और बोला, “मजा आया ना? अब हर महीने ऐसा ही मजा मिलेगा।”
प्रकृति ने सिर्फ मुस्कुराकर जवाब दिया। इसके बाद प्रकृति को दोपहर की शिफ्ट मिलने लगी। लेकिन हर महीने गिरिराज का “प्यार” उसे देना पड़ता था। धीरे-धीरे प्रकृति को भी इस चुदाई में मजा आने लगा। वो अब खुद गिरिराज के केबिन में बिना झिझक के चली जाती थी। मेरी सहेली बताती है कि प्रकृति अब पहले से कहीं ज्यादा खुल गई है। उसकी टाइट चूत ने ना सिर्फ गिरिराज को दीवाना बनाया, बल्कि उसकी जिंदगी को भी एक नया रंग दे दिया।
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