दोस्तों ने की मेरी मॉम की चुदाई

दोस्तो, मैं आपका राहुल गांडू! बात उस समय की है जब मेरी बारहवीं की परीक्षाएं चल रही थी, मेरे पास पढ़ाई के अलावा किसी भी काम के लिए समय नहीं था। घर में मैं और मेरी मॉम रहती थी. पापा 5 साल पहले एक दुर्घटना में मर चुके थे। मेरी मॉम एक ब्यूटी पारलर पर जॉब करती थी पर मॉम ने कभी मुझे एक बाप तरह प्यार किया।

अब असली कहानी पर आते हैं दोस्तो! हम सब दोस्त एग्जाम की टेंशन में थे. एक दिन मेरे एक पक्के दोस्त राकेश ने कहा- क्यों ना हम सब लोग किसी रंडी को चोद कर आयें, ताकि थोड़ा रिलैक्स हो जायें। मैंने भी कभी किसी रंडी को नहीं चोदा था क्योंकि मैं उस लायक नहीं हूँ, मेरा लंड कह लो या लुल्ली बस मूतने के काम आती है. पर मैंने अपने दोस्तों के बीच अपनी इज्जत बचाने के चक्कर में हाँ बोल दिया।

राकेश बोला- मुझे एक मस्त रंडी के बारे में मालूम है. उसने सारी सेटिंग कर ली और अगले दिन हम सबने जाना था.

अब दूसरे दिन हम 4 लोग मैं, नदीम, राकेश, अंकित सब शहर के बाहर एक ढाबे पर गए जहां उस रंडी को चोदने का इंतजाम किया हुआ था.

मैंने कहा- पहले तुम सब कर आओ, फिर मैं जाऊंगा। सबने हाँ भर दी।

अब सबसे पहले खुद राकेश गया और बाहर आकर उस रंडी की, उसकी चूत की, उसके बदन की तारीफ करने लगा।

फिर नदीम और फिर अंकित सब चुदाई करके आ चुके थे.

अब मेरी बारी थी, मैं जाना नहीं चाहता था पर मेरे तीनों दोस्त मेरे साथ जबरदस्ती करने लगे कि जा तू भी चोद के आ इस रंडी को, बड़ी मस्त रंडी है .

मैं जानता था कि अंदर जाकर मेरा क्या हाल होगा. पर दोस्तों के सामने इज्जत बचाने को मैं बेमन से अंदर गया और वहाँ हल्की सी रोशनी थी।

मैंने जाते ही उस रंडी को कहा दिया- देखो मैं तुम्हें नहीं चोद सकता, मैं हिजड़ा हूँ, मेरा खड़ा नहीं होता.

मेरी आवाज सुन कर उस रंडी ने लाइट जलाई. और जैसे ही उसने मुझे और मैंने उसका चेहरा देखा तो मेरे होश उड़ गए। वो और कोई नहीं… मेरी मॉम थी।

अब मॉम मुझे समझाने लगी कि वो ये सब क्यों करती है. मैंने कहा- ये कब से कर रही हो? मॉम- जब मैं 18 साल की थी। मैं- मतलब पापा को भी बेवकूफ बनाया? मॉम- तेरा बाप था ही हिजड़ा… पहली रात ही उसका राज खुल गया था और उसने मुझे पूरी आजादी दे दी थी।

मैं- फिर मैं कैसे पैदा हुआ? मॉम- तू मेरे बॉयफ्रेंड का बेटा है।

अब मैं रोने लगा. मॉम ने चुप कराया और बोली- तू भी गांडू ही है और मैं रंडी… हम दोनों के राज एक दूसरे को मालूम हैं, इसलिए राज को राज रहने दे बेटा! मैं मान गया और मुस्कराता हुआ बाहर आया।

सब बोले- कैसा माल था? मजा आया चोद के? मैं- मस्त धांसू माल था यार… क्या चूत थी! मजा आ गया साली को चोद के!

यह कह कर हम सब हँस पड़े और घर को आ गए।

शाम को 8 बजे राकेश का काल आया- कैसी थी रांड? मैं- कहा तो था कि मस्त थी. राकेश- तो अभी तक घर पहुंची या नहीं? मैं- क्या मतलब? और राकेश ने काल काट दिया।

मैं समझ गया कि राकेश ही जान बूझ कर ही मुझे वहाँ मेरी मॉम के पास ले गया था।

आपको कैसी लगी मेरी माँ की चुदाई की यह स्टोरी? मुझे बतायें! [email protected] पर अपनी किसी भी प्रकार की राय दें!

Ananya Verma

अरे! मैं अनन्या वर्मा हूँ - लखनऊ विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान की पढ़ाई करने वाली और पिछले 4 साल से हिंदी में ऐसी कहानियाँ लिख रही हूँ जो आपकी अंगुलियाँ स्क्रीन पर रोक दें। मैं इंसानी इच्छाओं, ख्वाहिशों और वो पलों को समझती हूँ जो आप छुपाना चाहते हैं लेकिन महसूस करना चाहते हैं। मेरी कहानियों में वही बात है जो दिल को छूती है और तन को सिहराती है। हज़ारों पाठकों ने मेरी कहानियाँ पढ़कर गर्म रातों का मज़ा लिया है। तो चलो, आज की रात मेरी कहानी से बनाते हैं!

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