माशूका की बड़ी बहन को चोदा-2

पूजा खुश हो गई और आखिर में मुझे ‘लव यू’ का मैसेज करके ‘बाय’ बोल दिया।

उस रात मैं सो ना सका, फिर रविवार को हम लोग मूवी देखने गए वहाँ हॉल में पहले अनिल, फिर पूजा, फिर मैं बैठा, उसके बाद मेरी गर्ल-फ्रेण्ड बैठी।

मूवी चालू होने के कुछ मिनट बाद मैंने पूजा के पैर पर हाथ चलाना चालू कर दिया।

वो सिहर गई लेकिन उसने मुझे नहीं रोका..

धीरे-धीरे मैं अपना हाथ उसकी चूत की तरफ ले गया और जीन्स के ऊपर से उसकी चूत को सहलाने लगा। उसकी सीत्कार निकलने लगी, उसने मेरे लंड को पकड़ लिया।

वो सीट से उठ कर टॉयलेट चली गई और वहाँ से एक मैसेज किया मैं तुम्हारे नाम पर अपनी चूत में ऊँगली डाल रही हूँ।

फिर वो दस मिनट में वापस आ गई।

अब मैं टॉयलेट गया और उसको मैसेज किया- जान.. मैं भी तुम्हारे नाम की मूठ मार रहा हूँ.. पर क्या हम लोग ऐसे ही एक-दूसरे के नाम पर ऊँगली करते और मूठ मारते रहेगे?

उसने बस एक ‘स्माइली’ के साथ रिप्लाई दी।

फिर मैं भी मूठ मार कर हॉल में वापस आ कर सीट पर बैठ गया और चुपके से एक चुम्मी उसके गाल पर कर दी।

अब पूजा पट चुकी थी और मुझसे चुदने को राजी थी।

इसके बाद बहुत दिन तक मुझे और पूजा को अकेले में समय नहीं मिला लेकिन करीब 10 दिन के बाद मैं और मेरा रूममेट काम पर गए हुए थे और मेरी गर्ल-फ्रेंड को उसकी सहेली के घर पर कुछ काम था और वो रात तक ही वापस आने वाली थी।

तभी करीब 12:30 बजे दोपहर में पूजा का कॉल आया, वो बोली- मुझको तुमसे कुछ काम है, तुम सीधे मेरे कमरे पर आ जाओ।

मैं 15 मिनट में उसके कमरे पर पहुँच गया। वो मुझे देख कर खुश हो गई और कमरे का दरवाजा बंद करके मेरे सीने से लिपट गई और कहने लगी- मेरे अन्दर की आग को मिटा दो…

मेरे भी अन्दर का शैतान जाग गया। मैं उसको गोद में उठा कर अन्दर बिस्तर पर चल गया और हम एक-दूसरे को चूमने लगे।

मैंने उसके टॉप को उतार दिया और उसकी चूचियों को दबाने लगा। वो पागलों की तरह मुझे नोचे जा रही थी।

फिर मैंने उसका लोअर उतार दिया। अब वो मेरे सामने में सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी।

वो मेरे कपड़े उतारने लगी। मैं भी देखते ही देखते सिर्फ अंडरवियर में आ गया। अब मैंने उसकी ब्रा को धीरे से उतारा। उफ्फ… क्या गुलाबी चूचुक थे उसके.. मैं पागलों की तरह एक चौंच को अपने होंठों में लेकर पी रहा था और एक चूचुक को मींज रहा था।

कब मेरा एक हाथ उसकी चूत पर चला गया, पता ही नहीं चला। करीब दस मिनट बाद मैं होश में आया तब तक वो एक बार झड़ चुकी थी।

मैंने अपने और उसके अंडरवियर को उतार फेंका और 69 की अवस्था में आकर एक-दूसरे के गुप्तांगों को चूस कर एक-दूसरे को आनन्द देने लगा।

वो मेरे लण्ड को एक लॉलीपॉप की तरह चूस रही थी और अजब-गजब की आवाजें निकाले जा रही थी।

फिर वो बोलने लगी- अमित प्लीज… अब और देर मत करो.. अपने इस लण्ड महाराज को मेरे चूत रानी के हवाले कर दो।

मैं भी इसी समय का इंतजार कर रहा था… लेकिन मैं उसको और तड़फाना चाहता था, इसलिए मैं उसकी दोनों टांगों के बीच आया और उसकी चूत को जीभ से चाटने लगा और अपने होंठों से चूसने लगा।

कभी-कभी मैं उसकी चूत पर दांत से काटने लगता, वो छटपटाने लगी और किसी छोटे बच्चे की तरफ गिड़गिड़ाने लगी- अब प्लीज और देर मत करो… अब पेल दो.. अपने लण्ड महाराज को…

मैं अपने लण्ड को पकड़ कर उसकी चूत पर रगड़ने लगा, वो अपनी कमर उठा-उठा कर निमंत्रण देने लगी।

उसकी चूत रसीली थी लेकिन चोदने के लिए तंग और कसी लग रही थी इसलिए मैंने उसके कमरे में रखी हुई दूध की मलाई को उसकी चूत और अपने लण्ड पर मल ली और फिर लौड़े को उसकी चूत के मुहाने पर सैट करके एक जोरदार झटके के साथ पूरा लण्ड पेल दिया।

वो रोने लगी और मुझे धक्का देने लगी। वो दर्द से छटपटाते हुए अपनी चूत से लण्ड निकालने के लिए हाथ लगाने लगी।

मैं उसके हाथों को अपने हाथों से पकड़ कर उसके होंठों पर चुम्बन करने लगा।

कुछ देर के बाद वो शांत हुई और मेरा साथ देने लगी।

करीब दस मिनट की चुदाई के बाद मेरा माल निकलने वाला था इसलिए मैंने अपना आसन बदला, उसको कुतिया बना दिया और खुद कुत्ता बन कर उसकी चूत में लण्ड घुसा दिया।

लौड़ा घुसाने के साथ ही उसके मस्त मस्त चूतड़ों को चांटे मार-मार कर लाल कर दिया।

इस बीच वो दो बार और झड़ चुकी थी और अब मेरा भी निकलने वाला था। मैंने अपनी रफ़्तार को तेज कर दिया और फिर दो मिनट के बाद उसकी चूत में ही माल गिरा दिया।

हम दोनों वैसे ही 15 मिनट तक एक-दूसरे से चिपके रहे।

उसके बाद मैंने उसे अलग अलग तरह से दो बार और चोदा।

वो मुझे बहुत प्यार से मेरे सर पर और मेरे होंठों पर चूमने लगी।

फिर मैं अपने काम पर वापस चला गया। रात में आते समय आई-पिल की गोली ले कर आया और उसे खिला दिया।

आज भी वो मुझसे प्यार करती है और जब भी मौका मिलता है हम दोनों एक-दूसरे में खो जाते हैं।

दोस्तो, जब भी कभी समय मिला तो मैं अपनी अगली कहानी में आपको जरूर बताऊँगा कि मैंने कैसे पूजा की गाण्ड मारी।

आप मुझे ईमेल करके जरूर बताएँ कि आपको मेरी यह कहानी कैसी लगी।

Ananya Verma

अरे! मैं अनन्या वर्मा हूँ - लखनऊ विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान की पढ़ाई करने वाली और पिछले 4 साल से हिंदी में ऐसी कहानियाँ लिख रही हूँ जो आपकी अंगुलियाँ स्क्रीन पर रोक दें। मैं इंसानी इच्छाओं, ख्वाहिशों और वो पलों को समझती हूँ जो आप छुपाना चाहते हैं लेकिन महसूस करना चाहते हैं। मेरी कहानियों में वही बात है जो दिल को छूती है और तन को सिहराती है। हज़ारों पाठकों ने मेरी कहानियाँ पढ़कर गर्म रातों का मज़ा लिया है। तो चलो, आज की रात मेरी कहानी से बनाते हैं!

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