कलयुग का कमीना बाप-3

जैसे ही मैंने अपना लंड निकाला उस लड़की ने तेज़ी से करवट ली और मेरा लंड अपने मुंह में भर लिया और मेरे लंड को अपने होंठों से साफ़ करने लगी। मैं निढाल होकर बिस्तर पर गिर गया। मैं बहुत थक चुका था, लेकिन वो लड़की अभी भी वैसे ही चुस्ती फुर्ती दिखा रही थी, शायद यह हमारी उम्र का अंतर था। मैंने उसकी तरफ देखा… वो अपनी जीभ अपने होंठों पर फेर रही थी। “बेटी… में थोड़ा आराम चाहता हूँ… मैं बहुत थक गया हूँ.” मैंने बेटी शब्द का प्रयोग इसलिये किया क्योंकि अभी तक वो मुझे पापा बोलती आयी थी, मुझे लगा कि उसे बेटी बोलने से उसे अच्छा लगेगा और वो ग़ुस्सा नहीं करेगी। “ओके पापा… वो कहते हुए मेरे ऊपर झुकी और मेरे होंठों को चूम लिया। फिर एकदम से वो खड़ी हो गयी और कमरे से बाहर निकल गयी।

जैसे ही मैंने अपना लंड निकाला उस लड़की ने तेज़ी से करवट ली और मेरा लंड अपने मुंह में भर लिया और मेरे लंड को अपने होंठों से साफ़ करने लगी। मैं निढाल होकर बिस्तर पर गिर गया। मैं बहुत थक चुका था, लेकिन वो लड़की अभी भी वैसे ही चुस्ती फुर्ती दिखा रही थी, शायद यह हमारी उम्र का अंतर था। मैंने उसकी तरफ देखा… वो अपनी जीभ अपने होंठों पर फेर रही थी।

“बेटी… में थोड़ा आराम चाहता हूँ… मैं बहुत थक गया हूँ.” मैंने बेटी शब्द का प्रयोग इसलिये किया क्योंकि अभी तक वो मुझे पापा बोलती आयी थी, मुझे लगा कि उसे बेटी बोलने से उसे अच्छा लगेगा और वो ग़ुस्सा नहीं करेगी।

“ओके पापा… वो कहते हुए मेरे ऊपर झुकी और मेरे होंठों को चूम लिया। फिर एकदम से वो खड़ी हो गयी और कमरे से बाहर निकल गयी।

मैं हैरत से उसे जाती हुई को देखने लगा।

कुछ ही देर में वो वापस आ गयी। वो बियर लेने गयी थी, उसके एक हाथ में बियर का बोतल और दूसरे हाथ में दो गिलास थे। उसने दोनों गिलास में बीयर उड़ेली और एक गिलास मेरी ओर बढ़ा दिया और दूसरा खुद ले लिया। उसने फिर से अपना हाथ उठकर “चीयर्स!” कहा और बियर पीने लगी। मैंने भी उसका अनुसरण किया और बियर का घूँट भरने लगा।

मैं चुपचाप बियर पीते हुए उस लड़की के बारे में सोचने लगा ‘कौन है ये लड़की? और मुझे पापा क्यों कह रही है?’ मेरे मन में कई सवाल थे जो मैं उस अजनबी लड़की से पूछना चाहता था लेकिन मेरी हिम्मत नहीं बन रही थी, क्या पता यह लड़की मेरे सवाल से भड़क जाए और मुझे नुकसान पहुंचा दे। मैं ख़ामोशी से बियर पीता रहा और उसे देखता रहा।

कुछ ही देर में मेरा गिलास खाली हो गया, मैंने गिलास साइड के टेबल पर रख दिया और एक सिगरेट सुलगा ली। जब तक उसका गिलास खाली होता, मैंने सिगरेट भी पी ली थी। उस लड़की ने अपना गिलास मेज पर रखा और मेरे पास आकर मेरे ऊपर आकर लेट गयी और मेरे होंठों को चूसने लगी, मैं भी उसे सहयोग देने लगा।

अचानक उस लड़की ने मेरा एक हाथ अपनी चुत पर रख दिया और मेरी एक अँगुली अपनी चुत पर घुसा ली और मेरा दूसरा हाथ अपने बूब्स पर रखकर दबाने लगी. अजनबी लड़की मेरी उंगली को अपनी चुत में घुसाए हुए अपनी कमर को धीरे धीरे हिलने लगी ऐसा लग रहा था जैसे वो मेरी उंगली को चोद रही हो।

उस लड़की के हिलते चूतड़ देख कर मेरी उत्तेजना बढ़ने लगी, मैं अपने हाथ का दबाव उसकी चूची पर बढ़ाने लगा, वो उम्म्ह… अहह… हय… याह… की सिसकारी निकालने लगी। मैंने अपना सर झुकाया और उसकी दूसरी चूची को मुंह में भर लिया, उसका निप्पल चुसने लगा. उसकी सिसकारियाँ तेज़ हो गयी। मैंने अपनी उंगली की रफ़्तार भी उसकी चुत पर बढ़ा दी थी।

अचानक वो लड़की एक झटके में उठी और अपना सर मेरे लंड के पास ले गयी और मेरे लंड को अपने मुंह में भर कर चूसने लगी। मेरा लंड उसके होंठों की गर्मी से अपनी औक़ात में फूलता चला गया। मेरे लंड के पूरे उफान पर आते ही उस लड़की ने अपना मुंह मेरे लंड से खींच लिया और वो मेरी जाँघों के बीच दोनों पैर फैला कर बैठ गयी।

फिर मेरे लंड को अपनी चूत पर रखकर बैठने लगी, मेरे लंड का टोपा उसकी चुत में घुस चुका था, फिर उस लड़की ने नशीली नज़र से मेरी ओर देखते हुए एक करारा धक्का मेरे लंड पर मारा। उसका धक्का लगते ही फच की आवाज़ के साथ मेरा लंड उसकी चुत में घुस गया। अब वो मेरे लंड को जड़ तक अपनी चुत में घुसाए मेरे जाँघों पर बैठी हुई थी। कुछ देर उसी हालत में बैठे रहने के बाद वो धीरे धीरे अपनी गांड हिला कर मुझे चोदने लगी।

मेरी आँखें मस्ती में बंद होने लगी.

धीरे धीरे उस लड़की की रफ़्तार बढ़ने लगी, अब वो किसी एक्सप्रेस की गति से धक्के पर धक्का लगा रही थी. मेरे मुंह से आह निकलने लगी, मैंने आँखें खोलकर उसको देखा… वो लड़की किसी जंगली शेरनी की तरह आक्रमक लग रही थी.

मैंने उसके हिलते हुए बूब्स को दोनों हाथों से पकड़ लिया और उन्हें मसलने लगा। मेरे ऐसा करने से उसकी रफ़्तार और बढ़ गयी, अब उसकी भी चीख़ें निकलने लगी थी, उसका पूरा बदन पसीने से भीग चुका था। फिर अचानक वो मुझसे चिपक गयी और अपने दाँत मेरे कन्धे पर गड़ाते हुए अपनी कमर को मेरी कमर से दबा ली, तभी उसकी चुत से एक पिचकारी निकली और मेरा पूरा पेट गीला हो गया। वो लड़की हांफती हुई मेरी छाती से लिपट गयी। वो लगभग पांच मिनट तक हांफती रही और अपनी सांसों पर काबू पाने की कोशिश करती रही, उसका पूरा शरीर मेरे ऊपर लिटा हुआ था, उसके दोनों बूब्स मेरी छतियों में दबे हुए थे.

मैं उसके बालों को सहलाते हुए उसे देखने लगा, वो आँखें बंद किये लेटी हुई थी, अब उसकी साँसें सामान्य हो गयी थी लेकिन बदन अभी भी पसीने से भीगा हुआ था।

लगभग 5 मिनट बाद मैंने उसे पुकारा लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। मैंने उसे देखा कि वो गहरी नींद सो चुकी थी, मैंने उसके चेहरे को गौर से देखा उसके खूबसूरत चेहरे में सुख की चादर फ़ैली हुई थी, उसकी भोली सूरत पर मुझे बहुत प्यार आया, मैंने उसका माथा चूम लिया और उसकी पीठ सहलाने लगा।

मैं एक बार फिर उस लड़की के बारे में सोचने पर मजबूर हो गया ‘कौन है ये लड़की… इसके माँ बाप कौन हैं, इस लड़की ने इस तरह मेरे घर आकर मेरे साथ सेक्स क्यों किया?’ मैं सोचते सोचते पता नहीं कब सो गया।

आँख खुली तो सुबह के 7 बज चुके थे, वो लड़की अभी भी मेरी छाती पर सर रखे अभी भी गहरी नींद में थी। नींद में होने की वजह से मेरा लंड अभी भी पूरे तनाव में उसकी चुत के अंदर था। मैंने उस लड़की के पीठ सहलाते हुए उसका माथा चूम लिया और उसकी पीठ सहलाने लगा।

मैंने उससे थोड़ा सा हिलाया तो वो थोड़ी सी कसमसा कर रह गयी। उसका बदन हिलने से मेरा लंड और ज़्यादा उत्तेजित हो गया। अब मेरे मन में रात की चुदाई का नजारा घूमने लगा, रात की चुदाई याद करते ही मेरे लंड में मस्ती आ गयी और उसकी पीठ सहलाते हुए नीचे से धीरे धीरे अपनी कमर उठाकर उसे चोदने लगा।

अभी मैंने 4 से 5 धक्के ही मारे थे कि उसकी आँख खुल गयी। उसको जागती देख मैंने एक स्माइल दी और फिर उसको जकड़ते हुए धीरे से एक धक्का दिया. वह हैरानी से मेरी और देखते हुए उठकर बैठ गई। वो आँखें फाड़े मेरी ओर देखने लगी, उसको इस तरह मेरी ओर देखता पाकर मैं परेशान हो गया। मैं सोचने लगा… कहीं इस लड़की का दिमाग फिर से तो नहीं ख़राब हो गया।

तभी उस लड़की को अपने नंगा होने का अहसास हुआ, वो अपने दोनों हाथों से अपनी चूचियों को ढकने लगी। फिर जैसे ही उसकी नज़र नीचे गयी, उसकी आँखें हैरत से फ़ैलती चली गई। मेरा लंड अभी भी उसकी चुत में घुसा हुआ था, वो एकदम से उछल कर खड़ी हो गयी और मुझे गुस्से से देखती हुई एक जोरदार लात मेरी गांड पर दे मारी। मैं कराह कर बिस्तर से उठ गया।

“यू बास्टर्ड़… तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे नंगी करने की… हरामी की औलाद अब तू नहीं बचेगा… तूने मुझे ख़राब किया है… मैं तुझे जान से मार दूँगी।” वो चीखती हुई मुझ पर झपटी, मैं फुर्ती से बिस्तर से उछल कर नीचे आ गया. वो लड़की मुंह के बल बिस्तर पर गिरी.

इससे पहले कि वो उठकर फिर से मुझपर हमला करे… मैं दरवाज़े की तरफ भागा, मैं अभी दरवाज़े तक ही गया था कि तभी मेरी पीठ पर कोई भारी वस्तु आकर टकराई, मैं टेढ़ा होता चला गया। मैंने पलट कर देखा, मेरे पाँवों के सामने बीयर की टूटी हुई बोतल पड़ी थी.

तभी मैंने उस लड़की को अपनी ओर दोड़ते पाया। मैं पलक झपकते उस रूम से ऐसे ग़ायब हुआ जैसे गधे के सर से सींग… मैंने बाहर से रूम को लॉक कर दिया और सोफ़े पर जकर पसर गया। मेरे पाँव ऐसे काँप रहे थे जैसे मुझे लकवा मार गया हो। मेरा दिमाग अभी भी कुछ सोचने की पोजीशन में नहीं था। वो लड़की अभी भी पागलों की तरह दरवाज़ा पीट रही थी। मेरे समझ में नहीं आ रहा था मैं क्या करूँ, मैं तो बस डरे सहमे दरवाज़े की तरफ देखते हुए यही फरियाद करता रहा कि मालिक कुछ भी करना मगर दरवाज़े को मत टूटने देना।

लगभग 15 मिनट बाद वो लड़की शांत हो गयी। मैं सोफ़े से उठा और रूम की खिड़की के पास चला गया, मैंने अंदर नज़र दौड़ायी वो लड़की मुझे फर्श पर लेटी हुई दिखाई दी, वो दर्द से कराह रही थी… उसकी आँखें बाहर आ रही थी, साथ ही साथ वो वही रात वाला वाक्य बड़बड़ा रही थी “पापा तुम गंदे हो!”

मेरे तो होश उड़ गये, मुझे समझ में नहीं आया क्या करूँ।

तभी मुझे मेरे एक डॉक्टर दोस्त की याद आयी। वो एक साइकोलोजिस्ट हैं और अक्सर ऐसे पागल मरीज़ उनके पास इलाज़ के लिए आते रहते हैं। मैं दौड़ कर अपने फ़ोन के पास गया और उनका नंबर डायल करने लगा। कुछ देर में उधर से रिंग बजने की आवाज़ सुनाई दी। डॉक्टर तो इस वक़्त सो रहा होगा, पता नहीं मेरा फ़ोन उठायेगा भी या नहीं… अगर उठायेगा तो मैं क्या कहूँगा उससे?

तभी उधर से किसी ने फ़ोन उठाया- हलो… मुझे फ़ोन के दूसरी तरफ से एक औरत की आवाज़ सुनाई दी, ये डॉक्टर ऋतेश की वाइफ थी।

“हल्लो… भाभी जी… क्या आप मुझे डॉक्टर ऋतेश से बात करा सकती हैं… मैं उनका दोस्त रोहित बोल रहा हूं… मुझे उनसे एक जरूरी काम है… प्लीज आप उन्हें बता दीजिये।” मैंने एक साँस में बोलकर जवाब का इंतज़ार करने लगा।

कुछ ही देर में मुझे डॉ रितेश की आवाज़ सुनाई दी- हल्लो… रोहित जी, कहिये इतना सुबह सुबह कैसे याद किया? सब ख़ैरियत से तो है? “कुछ भी ख़ैरियत से नहीं है ऋतेश जी… आप यह बताइये कि आप अभी मेरे घर आ सकते हैं.?” मैंने ख़ुशामद करते हुए कहा। “ऐसा क्या हो गया है… जो आप मुझे इस वक़्त घर बुला रहे हैं?” उधर से डॉ ऋतेश ने पूछा। “आप पहले यहाँ आइये, फिर सब बताता हूँ!” मैंने फिर से उन्हें रिक्वेस्ट किया। “ओके, मैं आता हूँ!” उधर से डॉ रितेश की आवाज़ आयी और इसके साथ ही लाइन कट गयी।

मैंने फ़ोन का रिसीवर रखा और सोफ़े पर जाकर बैठ गया। अचानक ही मुझे अपने नंगे होने का ख्याल आया, मैंने जल्दी से अपने बदन पर कपड़े चढ़ाये और वापस सोफ़े पर बैठ गया और उस लड़की के बारे में सोचने लगा।

मैं डरा सहमा सोफ़े पे बैठा हुआ उस अजनबी लड़की की सोच में गुम था कि तभी दरवाज़े की घण्टी बजी, मैं ऐसे उछला जैसे किसी ने मेरे पिछवाड़े के नीचे जलता तवा रख दिया हो। फिर मुझे ध्यान आया कि मैंने डॉक्टर को फ़ोन लगाया था. मैं विद्युत की रफ़्तार से दरवाजे तक गया और सेकंड से भी कम समय में दरवाज़ा खोल दिया।

दरवाज़ा खुलते ही मेरे चेहरे से सारी ख़ुशी ग़ायब हो गयी, सामने मेरी नौकरानी खड़ी थी। “क्या हुआ साहब… आप ऐसे क्यों आंखें दिखा रहे हो?” नौकरानी ने हैरत से देखते हुए कहा। “शीला… आज तुम्हें सफाई करने की जरूरत नहीं है… तुम घर जाओ.” मैं दरवाज़े पर खड़े खड़े नौकरानी से कहा।

“साहब, कोई गलती हुई हो तो माफ़ी दे दो… पर काम से मत निकालो!” नौकरानी ने परेशान होकर मेरी खुशामद की। “ऐसी बात नहीं है शीला, असल में मैं पूरी रात बाहर जाग कर आया हूँ और आराम से सोना चाहता हूं, तुम्हारे काम की खटर पटर से मैं ठीक से सो नहीं पाऊँगा.” मैंने उसे समझाया। “ठीक है साहेब… मैं कल आ जाऊँगी.” नौकरानी ने कहा और वो पलट कर जाने लगी।

उसके लौटते ही मैंने दरवाज़ा बंद कर दिया, वापस सोफ़े पर बैठ गया और सिगरेट सुलगाकर कश लेने लगा।

कहानी जारी रहेगी. मित्रो, अभी तक की यह सेक्स कहानी आपको कैसी लगी अवश्य बतायें. मेरा ईमेल है [email protected]

Ananya Verma

अरे! मैं अनन्या वर्मा हूँ - लखनऊ विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान की पढ़ाई करने वाली और पिछले 4 साल से हिंदी में ऐसी कहानियाँ लिख रही हूँ जो आपकी अंगुलियाँ स्क्रीन पर रोक दें। मैं इंसानी इच्छाओं, ख्वाहिशों और वो पलों को समझती हूँ जो आप छुपाना चाहते हैं लेकिन महसूस करना चाहते हैं। मेरी कहानियों में वही बात है जो दिल को छूती है और तन को सिहराती है। हज़ारों पाठकों ने मेरी कहानियाँ पढ़कर गर्म रातों का मज़ा लिया है। तो चलो, आज की रात मेरी कहानी से बनाते हैं!

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