बचपन के प्यार की चुदाई जवानी में

सभी अन्तर्वासना के पाठकों को मेरे पप्पू का प्यार भरा सलाम… मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ और आपको बता दूँ कि मैं अब तक 2158 कहानियाँ पढ़ चुका हूँ तो मेरे भी मन में अपनी हकीकत बताने का विचार आया है। यह मेरे जीवन ही सच्ची कहानी है, सिर्फ कुछ नाम के अलावा !

मैंने यूँ तो कई बार सेक्स किया है लेकिन मैं आपको मेरी यादगार और 17 दिन पहले की कहानी बताता हूँ।

मैं राजस्थान से एक गाँव से हूँ, मैं मेरे गाँव की एक लड़की को बहुत चाहता था लेकिन उससे बात नहीं हो पा रही थी। उस लड़की के पीछे गांव के सभी गबरू जवान लड़के थे। मेरा शहर में ज्यादा रहने के कारण लड़की से में संपर्क में नहीं था पर बचपन में हम दोनों साथ ही पढ़ते थे। जब भी मैं गाँव जाता तो उस लड़की को चोदने की सोचता, पर क्या करें!

मैं जब इस बार गाँव गया तो मैं छुट्टियों के कारण ज्यादा दिन रह पाया। मैं रोज उसके घर के पास जाया करता था, उसको देखता और कभी कभी वो भी मेरे को देख कर मुस्करा देती।

यह सिलसिला 4-6 दिन चलता रहा, फिर एक दिन शाम को मैं मंदिर में जा रहा था तो वो मेरे को अचानक मंदिर में अकेली दिखी तो मैं वहाँ पहुच गया और उससे कुछ बातचीत की, फिर उसका फोन नबर माँगा। तो पहले तो उसने मना कर दिया, फिर बोली- अपना नंबर दे दो! तो मैंने झट से उसको मेरा नंबर बताया, क्यूँकि मेरा नम्बर vip है तो उसने याद कर लिया।

मैं घर पर आकर उसके कॉल का इंतजार करने लगा लेकिन रात 12 बजे तक इंतजार करने पर भी उसका कॉल नही आया। ऐसे ही 3-4 दिन गुजर गए, फिर एक दिन शाम को नये नम्बर से कॉल आया तो मैंने रिसीव किया। उसकी आवाज पहचनने में मुझे देर नहीं लगी। फिर हम बचपन की शरारतों के बारे में बातें करने लगे, फिर धीरे धीरे हमारी देर रात तक बातें होने लगी, पता ही नहीं चला कि कब हम इतने करीब आ गये।

फिर मैंने उसको मजाक में बोला- मैं तेरे को बचपन से चाहता हूँ। उसका जवाब सुनकर मैं भी खुश हुआ, उसने बताया कि मैंने भी तुमसे बात करने की कोशिश की पर तुमसे कह नहीं पाई। फिर क्या था दोस्तो, बातें 10-15 दिन चलती रही, मैंने भी जल्दी नहीं की और रोज अपना हाथ जगन नाथ से काम चलता था।

एक दिन मैंने उसे मजाक में बोला कि मैं तुमसे अकेले में मिलना चाहता हूँ। उसने पहले तो मना कर दिया लेकिन मेरे नाराज होने के नाटक ने उसको मिलने के लिये राजी कर लिया। मैंने उसको उसके घर के पीछे बनी पुरानी हवेली में रात 11 को बुलाया वो अपने वादे के अनुसार सब सोने के बाद मेरे को कॉल किया और बोली- आ रही हूँ।

मैं भी वहाँ पहुँच गया और हवेली और उसके घर की दीवार एक ही है तो वो वहाँ पर आ गई। मैंने आते ही उसको चूमना शुरू किया, पहले तो उसने विरोध किया, फिर मेरा साथ देने लगी। मैं धीरे से उसके बोबे पर हाथ रख कर दबाने लगा, उसका पहली बार था तो वो गुदगुदी महसूस कर रही थी और किस भी सही नहीं कर पा रही थी, उसको साथ ही डर भी लग रहा था, मैंने उसको 5-7 मिनट तक चूम कर गर्म किया फिर उसकी कमीज को ऊपर कर उसका दूध पीने लगा।

दोस्तो, क्या उसके बोबे थे, एकदम कच्ची नांरगी की तरह… फिर मैंने एक हाथ उसकी पायजामी में डाला तो उसने मना कर दिया। फिर मैं ऊपर से ही उसकी चूत को मसलने लगा और मैंने उसके हाथ को मेरे लौड़े पर रखा तो उसने मेरे लण्ड को हिलाना शुरू कर दिया। फिर मैंने एक हाथ उसकी पेंटी में डाला तो पता चला उसकी पेंटी पूरी चूत के रस से भीग गई है, मैंने उसकी चूत में अंगुली करना शुरू किया और हवेली के आँगन में ही उसको लिटा कर किस करने लगा और उसकी पायजामी और पेंटी उतार दी। वो मेरे सामने चांदनी रात में बिल्कुल नंगी थी।

दोस्तो, क्या उसकी चूत थी, छोटे छोटे बाल और गुलाबी चूत फूल रही थी, मन कर रहा था कि उसको खा जाऊँ। उसने भी मेरी चड्डी निकाल दी और मेरे हथियार को आगे पीछे कर रही थी। मैंने उसको चूसने को बोला तो उसने मना कर दिया।

फिर मैं उसको सीधा लेटा कर मेरे लण्ड को उसकी चूत पर रख कर रगड़ने लगा, उसको मज़ा आ रहा था, वो बाली- डाल दे! तो मैं भी मजे से बोला- क्या? वह शर्मा गयी। फिर मैंने उसकी चूत पर मेरा लन्ड रखकर जोर दिया पर अंदर नहीं गया क्यूँकि वो अभी कुँवारी थी, उसकी सील मैं ही तोड़ने वाला था। फिर मैंने उसकी टाँगें चौड़ी कर थोड़ा थूक लगा कर जोर से झटका मारा, मेरे 9 इंच का लौड़ा आधा उसकी चूत में घुस गया और उसकी चीख निकली तो मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख कर चुप कराया।

वो दर्द से तड़प रही थी और बाहर निकालने को बोल रही थी। उसकी आँखों में आँसू आ गये थे, मैंने उसको समझाया कि पहली बार ऐसा होता है। फिर उसके बोबे और होंट चूमता रहा और उसका दर्द कम हो गया तो मैं धीरे धीरे मेरे लण्ड को चूत में आगे पीछे करना शुरू किया। तो उसको भी मज़ा आने लगा वो मेरा पूरा साथ दे रही थी। फिर मैंने मौका देख कर पूरा लण्ड उसकी चूत में घुसा दिया। वो एक बार तो तिलमिला गई, फिर सामान्य होने पर मैंने उसको घोड़ी बना कर चोदा। इस बार वो मेरा पूरा साथ दे रही थी।

दोस्तो, घोड़ी बनाकर चोदने का मज़ा कुछ और ही है।

मैं उसके बोबे दबा रहा था और चूमाचाटी भी कर रहा था। फिर उसको आँगन में सीधा लेटा कर 5-6 झटके मारे तो उसने मेरे को कस कर पकड़ लिया और उसका माल निकल गया। मैंने फिर भी चुदाई चालू रखी और उसको अलग स्टायल में देर तक चोदता रहा। फिर मेरा भी निकलने वाला था तो मैंने उसकी चूत में ही पूरा माल निकाल दिया और वो भी मेरे साथ और झड़ गई।

उसके चेहरे पर अजब सी खुशी थी फिर मैंने उसकी चूत को रूमाल से साफ किया तो पता चला वो पूरी खून से लाल हो गई, उसको डर लगा, मैंने उसको समझाया और उसको कपड़े पहनाये, उससे सही ढंग से चला नहीं जा रहा था पर वो खुश थी।

मैंने उसको किस किया और उसके घर की दीवार को पार करवा दिया, फिर हवेली के आँगन में मैंने बाहर से लाकर रेत डाली और घर आकर सो गया। दोस्तो, मजे की बात तो सुबह पता चली जब उसने फोन कर बताया कि हम चुदाई में इतने मगन हो गए थे कि मैंने उसको अपनी चड्डी पहना दी थी और उसकी पैंटी मैं पहन कर आ गया। फिर सुबह उसके घर के पीछे जाकर उससे अपना सामान लाया उसका दे आया तो उसको अजीब सी खुशी थी। दोस्तो, यह मेरी सच्ची कहानी है, आपको पसंद आई या नहीं, बताना! ईमेल जरूर करें।

Ananya Verma

अरे! मैं अनन्या वर्मा हूँ - लखनऊ विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान की पढ़ाई करने वाली और पिछले 4 साल से हिंदी में ऐसी कहानियाँ लिख रही हूँ जो आपकी अंगुलियाँ स्क्रीन पर रोक दें। मैं इंसानी इच्छाओं, ख्वाहिशों और वो पलों को समझती हूँ जो आप छुपाना चाहते हैं लेकिन महसूस करना चाहते हैं। मेरी कहानियों में वही बात है जो दिल को छूती है और तन को सिहराती है। हज़ारों पाठकों ने मेरी कहानियाँ पढ़कर गर्म रातों का मज़ा लिया है। तो चलो, आज की रात मेरी कहानी से बनाते हैं!

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