पेइंग गेस्ट ने चूत को ख़ुशी दी

मेरा नाम रश्मिका है और मैं दिल्ली की रहने वाली हूँ। मेरे मम्मी पापा एक लड़को का पेइंग गेस्ट (पेइंग गेस्ट) चलाते हैं जहाँ दिल्ली में पढ़ने या काम करने के लिए आये लड़के रहते हैं। मेरी हाल-फिलहाल ही शादी हुयी है लेकिन जो चुदाई का सुख मुझे एक पेइंग गेस्ट ने दिया, वो सुख मेरे पति नहीं दे पाते। मुझे चुदना, वो भी रगड़ के चुदना बहुत पसंद है। Newly Married Chudai Story

बात है आज से 4 साल पहले की जब मुझे मेरे जीवन का सबसे ज़बरदस्त चुदाई मिला। हम ऊपर वाले तल्ले में रहते हैं और निचे 6 कमरे हैं जिसमे 1 कमरे में एक पेइंग गेस्ट रहते हैं। उनमे से एक था जितेन्द्र। जितेन्द्र लखनऊ का रहने वाला था और दिल्ली विश्वविद्यालय में स्नातक की पढ़ाई करने के लिए आया था।

वो एक साल से हमारे यहाँ रह रहा था। जितेन्द्र ऊँचे कद-काठी का था, अच्छी बॉडी थी उसकी, और बहुत ही शांत और सुशिल स्वाभाव का था। मेरी कभी बात नहीं हुयी थी उससे लेकिन जब भी आमने सामने आते तो वो स्माइल करता और मैं भी बस स्माइल करके आगे बढ़ जाती।

लेकिन एक दिन मुझे अपने लिए एक ड्रेस खरीदना था और उस वेबसाइट पे कैश ऑन डेलिवेरी का ऑप्शन नहीं था, मेरे पापा मेरा अकाउंट चेक करते हैं इसलिए मैं अपने अकाउंट से नहीं कर सकती थी, मम्मी या पापा को बोलना मुश्किल था क्यूंकि वो इतनी मेहेंगी ड्रेस के लिए मना कर दिए थे।

मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था की मैं कैसे ये ड्रेस मँगवाऊं। तो मैं चिंता में टहलने के लिए निचे चली गयी। मैंने देखा जितेन्द्र भी किताब पढ़ते हुए टहल रहा था। पहले मैं वापस जाने का सोची लेकिन उतने में जितेन्द्र ने मुझे देखा और स्माइल किया। मैंने सोचा क्यों न इससे बात की जाए। उस वक़्त न मेरे घर पे कोई था और न कोई पेइंग गेस्ट।

मैं – हेलो। कैसे हो?

जितेन्द्र – हाई। मैं ठीक हूँ। आप बताईये।

मैं – हाँ, मैं भी ठीक हूँ। अच्छा, मुझे एक फेवर चाहिए था तुमसे अगर तुम्हे कोई ऐतराज़ ना हो।

जितेन्द्र – हाँ हाँ, बिलकुल। बताईये ना।

मैं – दरअसल मुझे एक ड्रेस आर्डर करना है और कैश ऑन डेलिवेरी का ऑप्शन नहीं है। तो क्या तुम मेरे लिए आर्डर कर दोगे? मैं तुम्हे अभी कैश दे दूंगी। मैं अपने अकाउंट से नहीं कर सकती ना ही मम्मी पापा से बोल सकती।

जितेन्द्र – ठीक है ठीक है। मैं कर दूंगा आप मुझे ड्रेस का लिंक भेज दीजिये।

मैं – थैंक यू, प्लीज़ पापा मम्मी को मत बोलना।

जितेन्द्र – ठीक है, नहीं बोलूंगा। लेकिन कितने की है ड्रेस?

मैं – पांच हज़ार।

जितेन्द्र अचंभित होकर…

जितेन्द्र – पांच हज़ार? बाप रे! कोई स्पेशल ड्रेस है क्या?

मैं (हँसते हुए) – हाँ, स्पेशल तो है।

वो ड्रेस मैं अपने बॉयफ्रेंड के बर्थडे पार्टी में पहनने वाली थी।

मैं – अभी कोई नहीं है, चलो न तुम्हारे रूम में, प्लीज़ अभी आर्डर कर दो। मैं तुम्हे कल कैश दे दूंगी।

मैं उसके साथ उसके रूम में घुसी तो मैं देख के दंग रह गयी। मैंने आज तक किसी लड़के के कमरे को इतना साफ़ सुथरा और सजा हुआ नहीं देखा।

जितेन्द्र – आप बिस्तर पे बैठ जाईये। मैं लैपटॉप खोल के आर्डर कर देता हूँ।

जब तक वो लैपटॉप ऑन कर रहा था, मैंने सोचा उससे ज़रा बात की जाए।

मैं – तुम कौनसे कोर्स में हो?

जितेन्द्र – मैं मैथ्स होनोर्स कर रहा हूँ।

मैं – माय गॉड, तुम तो बिलकुल पढ़ाकू टाइप के हो फिर तो। सॉरी सॉरी, मैं तुम्हारा टाइम वेस्ट कर रही हूँ।

जितेन्द्र – अरे नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है। आपके आने से मुझे भी ब्रेक मिल गया। और आपको जानने का मौका भी मिल गया।

उतने में उसने मुझसे उस ड्रेस का लिंक माँगा। तो मैं आगे बढ़ कर उसके लैपटॉप में वेबसाइट खोल के उस ड्रेस को सर्च करने लगी। मैंने नोटिस किया की जितेन्द्र मेरे पतली कमर को घूर रहा था। जैसे ही मैंने ड्रेस खोज के दिखाया तो जितेन्द्र की आँखे बड़ी बड़ी हो गयी।

जितेन्द्र – वॉव! ये तो काफी हॉट ड्रेस है।

ड्रेस एक ब्लैक कलर की बिलकुल टाइट वन पीस ड्रेस थी।

मैं – अच्छी है न? मुझे कौनसा साइज आएगा?

मैंने जान बुझ कर ये सवाल पूछा।

जितेन्द्र – आपके वेस्ट (कमर) के हिसाब से स्मॉल (सबसे छोटी साइज) ही फिट होगा आपको।

मैं शर्मा गयी लेकिन ये शुरू मैंने ही किया था। और मुझे उसका कॉन्फिडेंस बहुत पसंद आया।

मैं – ओह हो। तुमने तो काफी नोटिस किया है मेरे वेस्ट (कमर) को।

और मैंने उसे आँख मार दी।

जितेन्द्र – ऐसा कुछ भी नहीं है । आपने पूछा तो मैंने देख लिया। काफी हॉट ड्रेस है। आप पे अच्छी लगेगी।

मैं – और मैं? सिर्फ ड्रेस अच्छी लगेगी? मैं नहीं?

जितेन्द्र – आप सेक्सी लगोगी।

मैं फिर शर्मा गयी। क्यूंकि जितेन्द्र बिलकुल स्ट्रैट-फॉरवर्ड बात करता था। उतने में उसने आर्डर कर दिया। मैंने उसे अपना व्हाट्सप्प नंबर दिया ताकि जब आ जाए तो वो मुझे बता दे और मैं उससे पैकेट ले लूँ। मुझे उससे बात करने में काफी मज़ा आ रहा था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

लेकिन अचानक मुझे मेन दरवाज़े के खुलने की आवाज़ आयी और मैं हड़बड़ा के ऊपर की और भागी। उसी दिन रात में करीबन 11 बजे मुझे व्हाट्सप्प पे एक मैसेज आया। जिसमे जितेन्द्र ने मेरे ड्रेस आर्डर के निकलने का मैसेज भेजा था जो उसके नंबर पे आया था। मैंने उसे व्हाट्सप्प पे रिप्लाई किया –

मैं – थैंक यू। तुमने मेरी बहुत बड़ी मदद की।

जितेन्द्र – इसमें थैंक यू बोलने वाली कोई बात नहीं। आपको किसी भी चीज़ की ज़रूरत हो तो मुझे कह सकती हैं।

मैं – तुम सच में इतने अच्छे हो या सिर्फ बनते हो?

जितेन्द्र – आपको बनावटी लगता है तो मत बात कीजिये।

मैं – अरे अरे अरे, मैं तो मज़ाक कर रही थी।

जितेन्द्र – मैं भी।

और उसने हसने वाली स्माइली भेजी। फिर हमने करीबन 4 बजे सुबहे तक बात की, उसके घर पे कौन कौन है, मैंने कहाँ से पढ़ाई की, आगे का क्या प्लान है, मैंने अपने अकाउंट से ड्रेस आर्डर क्यों नहीं की (जिसे सुनकर जितेन्द्र 5 मिनट तक हंसा), और इधर उधर की बातें जो आप किसी नए को जानने के लिए करते हो। फिर उसने कहा –

जितेन्द्र – अब सोना चाहिए, काफी समय हो गया। मुझे फिर जल्दी उठ के कॉलेज भी जाना है।

मैं – हाँ, चलो साथ में सोते हैं।

जितेन्द्र – क्या?

मैं – कुछ नहीं, गुड नाईट!

जितेन्द्र – ओके, गुड नाईट!

और वो ऑफलाइन हो गया। लेकिन मेरी नींद उड़ गयी थी। सच कहूं तो कुछ देर और बात करने का मन कर रहा था। लेकिन मैंने सोचा की अगर ज़ोर करुँगी तो सोचेगा की मैं चेंप हो रही हूँ। इतने में मैंने देखा की मेरी चुत गीली हो गयी है। मैं अपने पाठको को बता दूँ की जैसे लड़को का किसी लड़की से बात करके या किसी लड़की के सिर्फ छूने पे मुठ छूटता है वैसे ही कई लड़कियों का लड़को से भी बात करके उनका पानी छूटता है।

मैंने अपने चुत में ऊँगली डाल के काफी देर ऊँगली की और झड़ गयी। और फिर मैं सो गयी। सुबहे जब उठी तो मुझे फिर से जितेन्द्र से बात करने की इच्छा हुयी। व्हाट्सप्प खोल के देखा तो कोई मैसेज नहीं। तो मैंने ही उसे हेलो लिख कर भेज दिया। उसका दोपहर में मैसेज आया।

जितेन्द्र – हेलो।

मैंने झट से उसे रिप्लाई किया।

मैं – हेलो मिस्टर बीज़ी बी। पुरे दिन गायब।

जितेन्द्र – मैं कॉलेज में था। कॉलेज में फ़ोन इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं।

मैं – ओके। और साथ में मैंने एक उदास होने वाला स्माइली भेजा।

तो जितेन्द्र का रिप्लाई आया –

जितेन्द्र – आप हमें मिस कर रही थी क्या?

बस, इसी लम्हे से हमारी बातें शुरू हुयी। मैं ठीक जितेन्द्र के ऊपर वाले कमरे में रहती थी लेकिन ना कॉल पे बात कर सकती ना उसके साथ बैठ कर। व्हाट्सप्प ही एक मात्र सहारा था। पुरे हफ्ते में जब भी समय मिलता, मैं जितेन्द्र से व्हाट्सप्प पे बातें करने लगी। मेरा बॉयफ्रेंड भी कहता की मैं दिन भर ऑनलाइन हूँ लेकिन उसे रिप्लाई क्यों नहीं दे रही?

दोस्तों सच कहूं तो मेरे बॉयफ्रेंड ने भी मेरी खूब चुदाई की है लेकिन सिर्फ उससे बात करने पे मेरी चुत कभी गीली नहीं हुयी। मुझे अपने ऑफिस में भी मन नहीं लगता। दिन भर मन करता जितेन्द्र से बातें करती रहूं। बेचारा वो भी कोशिश करता रात में देर तक बात करने की।

शुक्रवार का दिन था, मेरे मम्मी पापा फर्रुखाबाद चले गए दो – तीन दिन के लिए। मुझे भी जाने को कहा लेकिन मैं ऑफिस में काम का हवाला दे के रुक गयी। और रविवार को एक त्यौहार था तो पेइंग गेस्ट के सारे लड़के घर चले गए थे क्यूंकि वे आस पास के गांव-शहर के ही थे, लेकिन जितेन्द्र नहीं गया क्यूंकि उसका घर दूर था।

मेरा मन कर रहा था की निचे उसके कमरे में चली जाऊं लेकिन डर लग रहा था। हमारी हर रोज़ के तरह व्हाट्सप्प पे ही बातें हुयी। शनिवार का दिन था, वो अपने कॉलेज चला गया, मैं भी ऑफिस चली गयी। 10 बजे उसका मैसेज आया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

जितेन्द्र – आपका पार्सल आज डेलिवर होगा 11 बजे तक, ले लीजियेगा।

लेकिन मैं उस वक़्त किसी भी हालत में आ नहीं सकती थी क्यूंकि एक ज़रूरी मीटिंग रख दी थी हमारे बॉस ने। मैंने झट से जितेन्द्र को कॉल किया।

मैं – जितेन्द्र, प्लीज़ तुम मेरा ड्रेस ले लो। मैं घर पे नहीं हूँ और मैं अभी आ भी नहीं सकती क्यूंकि मीटिंग है।

जितेन्द्र – मेरा भी अभी क्लास है, मैं कैसे छोड़ के जाऊ? आप किसी पड़ोसी को बोल दीजिये वो ले लेंगे। आप शाम को ले लीजियेगा।

मैं – नहीं नहीं। वो तो सारी बातें फिर मम्मी को बता देंगे। प्लीज़ तुम घर जाके ले लो न मेरा ड्रेस। प्लीज़ प्लीज़। तुम जो मांगोगे मैं वो दूंगी तुमको। एक लास्ट हेल्प, उसके बाद कभी परेशान नहीं करुँगी।

मैंने किसी तरह उसे मनाया। जितेन्द्र ना चाह कर भी अपनी क्लास छोड़ के जल्दी से आया और उसने ड्रेस की डेलिवेरी ली।

उसका मैसेज आया –

जितेन्द्र – ड्रेस रिसीव्ड, मैडम ! अपना प्रॉमिस याद रखियेगा।

मैं – यस यस ! जो तुम कहो। थैंक यू सो सो सो मच।

फिर मैं मीटिंग में व्यस्त हो गयी।

शाम में जब घर लौटी तो फ्रेश होकर मैंने जितेन्द्र को कॉल किया। आज पहली बार ही मैंने उसे कॉल किया क्यूंकि घर पे कोई नहीं था।

जितेन्द्र – हेलो !

मैं – हेलो! तुम ड्रेस देने आओगे या मैं लेने आऊं।

जितेन्द्र – लेने आ जाईये मैडम, क्यूंकि मैं आपके लिए कॉलेज छोड़ के आया, काफी थका दिया आपने।

मैं – अच्छा जी? अच्छा मैं आती हूँ! तुम कुछ खाओगे? कुछ स्पेशल बना के लाती हूँ तुम्हारे लिए। मैग्गी खाओगे? मैं बहुत अच्छी चिकन मैग्गी बनाती हूँ।

जितेन्द्र – ओके। आज मैग्गी पार्टी करते है फिर। मैं कोल्ड ड्रिंक लेके आता हूँ।

मैं – ओके। मिलती हूँ तुमसे 8 बजे।

मैंने मैग्गी बनायी और ठीक 8 बजे उसके दरवाज़े पे दस्तक दी। उसने दरवाज़ा खोला। वो बिलकुल तैयार होकर था।

मैं – कहीं निकलने का प्लान है क्या? इतना तैयार हो?

जितेन्द्र – नहीं नहीं। आपके साथ मैग्गी डेट है तो सोचा कुछ स्पेशल किया जाए।

मुझे अच्छा लगा लेकिन मैंने थोड़ा शरारत करने का सोचा। उससे चिढ़ाने का सोचा।

मैं – ओ हेलो, मैं पहले से ही रिलेशनशिप में हूँ।

जितेन्द्र – तो? साथ में खाना खाने से क्या मैं आपका बॉयफ्रेंड बन जाऊँगा? खाना किसी के साथ भी खाया जा सकता है।

मैं – ठीक है ठीक है। चलो, पहले खा लो, ठंडी मैग्गी अच्छी नहीं लगती।

फिर हमने साथ में बिस्तर पे बैठ के मैग्गी खायी। घर पे कोई नहीं था इस वजह से किसी का डर भी नहीं था। मैं आराम से उससे बातें कर सकती थी। खाने के बाद मैं वापस ऊपर जाने का नाटक करने लगी। तो जितेन्द्र ने कहा–

जितेन्द्र – आपने कुछ वादा किया था।

मैं अनजानी बनते हुए,

मैं – क्या?

जितेन्द्र – आपने प्रॉमिस किया था कुछ अगर मैं आपकी ड्रेस ले लूँ तो।

मैं – अच्छा अच्छा। खिलाया तो मैग्गी।

जितेन्द्र – नहीं। मैग्गी आपने ऑफर किया। मैंने मांगा नहीं।

मैं (हँसते हुए) – अच्छा। क्या चाहिए तुम्हे?

जितेन्द्र – मैं आपको इस ड्रेस में देखना चाहता हूँ।

मैं – लेकिन ये मैंने अपने बॉयफ्रेंड को सरप्राइज देने के लिए ख़रीदा है।

जितेन्द्र – मुझे पता है। लेकिन मैं फिर भी देखना चाहता हूँ।

मैं अंदर से खुश थी।

मैं – ओके। मैं ऊपर जाके इससे पेहेनके तुम्हे फोटोज़ भेजती हूँ।

जितेन्द्र – नहीं। आप इससे यहीं पहनो। मैं आपको अपने आँखों से देखना चाहता हूँ।

मैं – लेकिन यहाँ कैसे?

जितेन्द्र – मैं आँखें बंद कर लेता हूँ।

ये कहकर उसने अपनी आँखें बंद कर ली। मैं असमंजस में पड़ गयी लेकिन जितेन्द्र मुझे इस ड्रेस में देखना डिज़र्व करता था। वो ना होता तो शायद ये ड्रेस मैं मंगवा ना पाती। मैंने अपने लोअर और टी-शर्ट को खोला और ड्रेस पहनकर उसे आँखें खोलने को कहा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

उसने जैसे ही आँखें खोली, वो देख के दंग रह गया। मेरी ड्रेस बिलकुल छोटी से थी। उसमें मेरे बूब्स आधे बहार दिख रहे थे। ड्रेस सिर्फ मेरी चुत और गांड को कवर कर रहे थे। मेरी पतली कमर और पतली लग रही थी और बूब्स और बड़े बड़े। मेरा पूरा पैर नंगा था।

जितेन्द्र – माय गॉड! यू आर लुकिंग सो हॉट !

मैं ये सुन के शर्मा गयी।

मैं – अब खुश? चलो मैं अब जा रहीं हूँ ऊपर।

जैसे ही मैं मुड़ी, उसने मेरे हाँथ को पकड़ा, मुझे अपनी ओर खिंच के मेरे चेहरे को पकड़ा और सीधा मेरे होंठो पे अपना होंठ रखकर चूमने लगा। दोस्तों, उन चंद सेकण्ड्स में मैंने कोई बहाना ना करने का निर्णय लिया और मैं भी उसका चुम्बन में साथ देने लगी। करीब 5 मिनट तक चूमते हुए हमारा सांस फूलने लगा तो उसने मुझे छोड़ा। और छोड़ते ही कहा –

जितेन्द्र – मैं आपको पसंद करने लगा हूँ।

मैं – जितेन्द्र, तुम बहुत अच्छे लड़के हो, मैं भी तुम्हे पसंद करती हूँ लेकिन मैं पिछले 4 साल से रिलेशनशिप में हूँ।

जितेन्द्र – तो क्या? मैं भी रिलेशनशिप में हूँ। इसका मतलब ये नहीं की हम अपने फीलिंग्स को दबा कर रखें। मैं रिग्रेट नहीं करता। जो फील होता है मैं कह देता हूँ। मैं आपको पसंद करता हूँ और आयी वांट टू मेक लव टू यू।

मैं – लेकिन…

मेरे इतना कहते ही उसने मुझे फिर पकड़ा और किस करने लगा। मैंने भी अपने असमंजस को छोड़ कर खुद को उसे समर्पित कर दिया। किस करते करते उसके हाँथ मेरे बूब्स पर चले गए जो आधे बहार निकले हुए थे। मुझे किस करते हुए उसने बूब्स को बाहर निकाल दिया और ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा।

अब वो थोड़ा झुककर मेरे निप्पल के पास अपने जीभ से चांटने लगा। धीरे धीरे मुझे मज़ा आने लगा। वो मेरे एक बूब को चांट रहा था और दूसरे बूब को ज़ोर ज़ोर से मसल रहा था। इतने में उसने अचानक मेरे निप्पल को मुंह में लेकर दांतो से ज़ोर से काट दिया। मैं दर्द से मचल गयी। अब वो ज़ोर ज़ोर से निप्पल को चूसने लगा। मेरी उत्तेजना से आहें निकलने लगी।

जितेन्द्र एक बार मेरे एक बूब को चूसता फिर दूसरे बूब को चूसता, ऐसे काफी देर तक वो चूसता रहा। मुझे मज़ा आ रहा था। वो फिर उठकर मुझे चूमने लगा। मेरे बालों को ज़ोर से पकड़ के वो बहुत ही तेज़ी से मुझे किस करता रहा। बीच बीच में अपने जीभ को मेरे जीभ से मिला कर खेलता। इतने में मुझे शरारत सूझी और मैंने उसके जीभ को ज़ोर से काट दिया। वो ज़ोर से चिल्लाया।

जितेन्द्र – ये क्या था?

मैं – मेरे निप्पल को ज़ोर से काटने की सज़ा।

हम दोनों हंस पड़े। इतने में मैंने देखा की उसके फॉर्मल पैंट में एक उभार सा दिख रहा है।

मैं – तुम्हारे पैंट के अंदर क्या है?

जितेन्द्र – मुझे क्या पता।

मैं – मुझे देखना है।

जितेन्द्र – आप खुद देख लो।

उसके कहते ही मैं बिस्तर से उतरकर जितेन्द्र को खिंच के लायी, अपने घुटनो पे बैठ गयी। मैंने उसके बेल्ट को खोल कर उसके पैंट को निचे खिंचा। तो उसके अंडरवियर में बड़ा सा तम्बू बना हुआ था।

मैं – ये उभार तो और बड़ा हो गया।

जितेन्द्र – अंडरवियर के निचे उभार और बड़ा है।

जैसे ही मैंने उसके अंडरवियर को खिंचा उसका लौड़ा तनतना के खड़ा हो गया। मैं उसके लौड़े को देखकर मदहोश हो गयी। दोस्तों, जितेन्द्र का लौड़ा 8 इंच लम्बा और 4 इंच मोटा था। उसका लौड़ा किसी भी कुंवारी की चुत अच्छे तरीके से फाड़ सकता है। मुझे पता है, ये पढ़ के मेरी महिला पाठकों की चुत ज़रूर गीली होगी।

उसके लौड़े को पकड़ कर मैंने अपने चेहरे से नापा तो वो मेरे चेहरे से भी बड़ा था। मेरे बॉयफ्रेंड का सिर्फ 5 इंच लम्बा और 3 इंच मोटा है। मैं उसके बड़े से लौड़े को पकड़ के चूमने लगी। कुछ देर चूमने के बाद मैंने सीधा उसके लौड़े को अपने मुंह में घुसा लिया। उसका बड़ा सा लौड़ा सिर्फ आधा ही मेरे अंदर जा रहा था। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

मैंने उसके लौड़े को निकाल कर दोनों हांथो से पकड़ा, लौड़े से मेरे मुंह का पूरा लार टपक रहा था। मैंने उस लौड़े पे थूका और फिर मुंह में लेकर पागलों के तरह चूसने लगी। और 5 मिनट तक लगातार ज़ोर ज़ोर से चूसते रही। जैसे एक छोटा बच्चा लोल्लिपोप को चूसता है, मैं भी जितेन्द्र के लौड़े को चूस रही थी।

जैसे मैं थोड़ा सा थकने लगी, जितेन्द्र समझ गया। वो मेरे चेहरे को पकड़ के अब मेरे मुंह को अपने बड़े लौड़े से चोदने लगा। उसका इतना बड़ा लौड़ा मेरे गले से टकरा रहा था। आसपास से पूरा लार और थूक बाहर टपक रहा था। करीब 3-4 मिनट मेरे मुंह को चोदने के बाद जितेन्द्र झड़ने वाला था।

उसने मुझे इशारो में ही पूछा और मैंने इशारो में ही कहा की मैं उसके वीर्य को पीना चाहती हूँ। जितेन्द्र मेरे मुंह के अंदर ही पूरा झड़ गया। वीर्य का एक एक कतरा मेरे मुंह के अंदर गिरा और मैं पूरा पी गयी। फिर लौड़े को निकाल कर चांट चांट कर साफ़ करने लगी। उस वक़्त मैंने देखा की हम दोनों पसीने से लथपथ हो गए थे। दोनों थक भी गए थे।

मैं सारे पाठकों को, विशेष कर महिला पाठकों को कहना चाहती हूँ की आपका पति/बॉयफ्रेंड/यार/आशिक़/दोस्त या कोई भी जिससे आप चुदती है, वो थोड़ी देर में झड़ेंगे और फिर वापस उनका खड़ा होगा। कई लोग पोर्न को सच मान लेते हैं जहाँ लड़का घंटो तक बिना झड़े चोदते रहते हैं। वो एडिटिंग करते हैं, टेक्स लेते हैं, अपने लौड़े पे इंजेक्शन लेते हैं। जितेन्द्र ने मुझे पकड़ के उठाया, मेरे होंटो पे किस करते हुए बिस्तर पे आके लेट गया। मैं भी उसके बगल में लेट गयी।

जितेन्द्र – आप बहुत गज़ब का ब्लोजॉब देती हैं।

मैं – जितेन्द्र, मुझे लगता है अब तुम मुझे ‘तुम’ कहकर बुला सकते हो। अब ये लखनवी अदब छोड़ सकते हो।

जितेन्द्र – ओके। तुम सच में गज़ब का ब्लोजॉब देती हो। रागिनी तो बस दो मिनट चूस के छोड़ देती है।

रागिनी जितेन्द्र की गर्लफ्रेंड का नाम है। इतने में मैं उसे चिढ़ाते हुए बोली –

मैं – अच्छा जी। तुम्हारी गर्लफ्रेंड भी है। और तुमने बताया भी नहीं। पहले पता होता तो ये सब करती ही नहीं।

जितेन्द्र – हाँ तो अब तुमने कभी पूछा ही नहीं। मैंने झूट तो नहीं कहा।

जितेन्द्र की ये बात मुझे काफी सेक्सी लगती थी। उसके पास हर बात का काफी सटीक, स्मार्ट और प्रैक्टिकल जवाब होता था।

मैं – इसका मतलब तुम अपनी गर्लफ्रेंड को चीट कर रहे हो।

जितेन्द्र – देखा जाए तो तुम भी अपने बॉयफ्रेंड को चीट कर रही हो।

ये सुन के हम दोनों ही हसने लगे। फिर हम बातें करने लगे, वो रागिनी के साथ अपने लव मेकिंग की बातें कर रहा था, मैं भी अपने बॉयफ्रेंड के साथ के बातों को बता रही थी। इसी बीच वो बड़े ही रोमांटिक अंदाज़ में मेरे बूब्स को हलके हल्का दबा रहा था, बीच बीच में माथे पे किस करता, और बीच बीच में होंटो पे।

आपको बता दूँ की मैं अभी सिर्फ पैंटी में थी। बात करते करते जितेन्द्र का हाँथ अब धीरे से निचे की ओर बढ़ रहा था, वो मेरी नंगी पेट पे हाँथ फिरा रहा था, फिर धीरे धीरे उसने अपने हाँथ को मेरे पैंटी के अंदर घुसा के जैसे ही मेरे चुत को सहलाने की कोशिश की मैं अचानक उठ गयी। मैं बस उसे तंग करना चाहती थी।

मैं – चलो मैं अब जाती हूँ, तुम थक गए होगे। कल तुम्हे कॉलेज भी तो जाना होगा।

मैंने जैसे ही उठने की कोशिश की, उसने मुझे धक्का दिया, खींच के बिस्तर पे सीधा किया और फिर से लिटा दिया।

जितेन्द्र – मैं आधे अधूरे काम पे विश्वास नहीं रखता और कल संडे है।

ये कहते ही उसने मेरे टांगो को फैलाया, और मेरे पैंटी को खोल के फ़ेंक दिया। मेरी चुत से मानो कोई नदी बह रही हो। पैंटी निकालते ही मेरे चुत का ढेर सारा पानी उसके बिस्तर पर गिर पड़ा। उसने अपने उँगलियों से मेरे पानी को उठा कर अपने मुंह में डाल दिया। ये मुझे बहुत पसंद आया क्यूंकि मेरा बॉयफ्रेंड ना मेरी चुत चांटता और ना मेरे पानी को छूता या चांटता है। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

जितेन्द्र – तुम्हारा चुत तो तुमसे भी ज़्यादा एक्साइटेड है।

ये कहते ही उसने अपने जीभ को मेरे चुत पे रख दिया, अपने हाँथ से मेरे चुत के दीवारों को अलग करके अपने जीभ को सीधा मेरे चुत के छेंद में अंदर बाहर करने लगा। मैं सच कह रही हूँ दोस्तों, मैं मचल गयी। मैंने उसके बालों को कसके पकड़ लिया। वो मेरे चुत को ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा। अब मैं अपनी आवाज़ को रोक नहीं पा रही थी।

मैं – आह, ओह, ओह्ह, यस, यस, प्लीज़ लीक ईट स्लोली।

मेरे पहले बॉयफ्रेंड ने बस एक दो बार ही मेरे चुत को चांटा था लेकिन मुझे अब पता चल रहा था की चुत चंटवाने का सुख क्या होता है। मैं एक हाँथ से उसके बालों को पकड़ी हुयी थी, और दूसरे हाँथ से बिस्तर पे लगी चादर को। क्यूंकि जितेन्द्र मेरी चुत को ज़बरदस्त चांट रहा था और मैं करहा रही थी।

अचानक जितेन्द्र ने चुत की चंटाई करते करते अपने उँगलियों को मेरे चुत में घुसा दिया। मैं चीख उठी। शुक्र है घर पे कोई नहीं था। शायद ऊपर वाले ने भी मेरे सुख का पहले से इंतज़ाम कर के रखा था। काफी देर चुत चटवाने के बाद मुझसे रहा नहीं गया।

मैं – बेबी, प्लीज़ फ़क मी नाउ। अब मुझसे रहा नहीं जा रहा।

जितेन्द्र उठ के आया, उसके खड़े लौड़े को उसने मेरे मुंह के अंदर घुसाया ताकि में थूक से उसके लौड़े को लपेट दूँ। लार टपकते लौड़े को उसने मेरे चुत के सिरहाने पर टिकाके सेट किया, हल्का हल्का सेहलाके एक बार में लौड़े को अंदर घुसा दिया। मैंने अपने हांथो को अपने मुंह में रखकर चिलाया वरना शायद पड़ोसी आ जाते।

मैं – बेबी, प्लीज़ शुरू शुरू में धीरे से करो, बाद में रगड़ देना।

मैंने अभी तक दो लंड से चुदाई करवाई है लेकिन मेरी छोटी सी चुत जितेन्द्र के इतने मुसल लौड़े के लिए तैयार नहीं थी। जितेन्द्र काफी समझदार भी था। वो मेरे कहने पैर बड़े प्यार से, धीरे धीरे अपने लौड़े को अंदर बाहर करना शुरू किया। लौड़ा अभी भी सिर्फ आधा ही अंदर जा पा रहा था।

अब मुझे मज़ा आने लगा, दर्द अब मीठा लगने लगा। अब मैं सिसकारियां लेने लगी, आहें भरने लगी। बीच बीच में जितेन्द्र मेरे माथे को खींच कर मेरे होंटो को चूमता और फिर चोदने लगता। थोड़ी देर बाद, जितेन्द्र थक गया। उसने इशारा किया की वो लेटेगा। उसके लेटने पर मैं उसके ऊपर आ गयी, और उसके सीधे खड़े लौड़े पैर अपनी चुत टिका कर बैठ गयी।

जितेन्द्र – मैं थक गया हूँ, जान। प्लीज़ अब तुम करो।

मैं झुकी और उसके होंठो को किस करते हुए उसके लौड़े पैर उछलने लगी। वो मेरे उछलते बूब्स को पकड़ता और दबाता, मेरे बूब्स को पकड़ के खींचता और ज़ोर ज़ोर से चूसता। एक ऊँगली से वो मेरे चुत को ऊपर से रगड़ रहा था जिससे मुझे और ज़्यादा मज़ा आ रहा था।

जितेन्द्र ने इशारा किया की वो झड़ने वाला है। मैं झट से उसके लौड़े से उतर गयी और फिर से उसके लौड़े को अपने मुंह में ले लिया। उसके वीर्य की धार सीधे मेरे मुंह के अंदर गयी और सीधे मेरे गले से निचे उतर गयी। मैंने घड़ी देखी तो रात के साढ़े बारह बज गए थे। मैंने सोचा की मुझे अब ऊपर जाना चाहिए।

मैं – जितेन्द्र, मुझे अब ऊपर जाना चाहिए। बहुत रात हो गयी है।

जितेन्द्र – आज यहीं रुक जाओ ना, आज रात भर सिर्फ तुम्हारे साथ ही रहने का मन कर रहा है।

मैं – लेकिन ऊपर सारे खिड़की दरवाज़े खुले हैं।

जितेन्द्र – चलो मैं बंद कर देता हूँ।

मैं – अच्छा तुम रुको बाबा, मैं बंद कर के आती हूँ। और सुसु भी कर आउंगी। तुमसे चुदवाते चुदवाते सुसु लग गयी।

मैं जितेन्द्र के रखे तौलिए को ओढ़ कर ऊपर गयी और 5 मिनट में जल्दी से खिड़की दरवाज़े बंद करके, मेन गेट में ताला लगाकर आ गयी।

मैं – अब खुश? लो आ गयी मैं वापस।

मैं उसके पास बिस्तर पे आके लेट गयी। वो मुझे अपने बाहों में कस के मुझे किस करने लगा। जितेन्द्र ने कहा

जितेन्द्र – तुम बहुत खूबसूरत हो।

मैं – रागिनी से ज़्यादा या कम?

जितेन्द्र – दोनों की अपनी खूबसूरती है, उसके कुछ फीचर्स अच्छे हैं तो तुम्हारे कुछ फीचर्स अच्छे हैं।

मैं – मिलना पड़ेगा इस रागिनी से, जिसका इतना जादू है की जितेन्द्र जी मुझे चोदते हुए भी रागिनी को नहीं भूल रहे।

जितेन्द्र – तुम बताओ, तुम्हारा बॉयफ्रेंड क्या भूलने लायक है?

मैं – नहीं, ऋषि मुझसे प्यार करता है लेकिन वो तुम्हारी तरह नहीं चोद पायेगा। मेरे आग को वो शांत नहीं कर पायेगा। उसका सिर्फ 5 इंच का है। तुमसे बहुत छोटा।

जितेन्द्र – ऐसी कोई बात नहीं है यार। 5 इंच भी ठीक ठाक साइज है। उसको इस्तेमाल करना और लड़की को कैसे सटिस्फायी करना होता है, ये आना चाहिए। बस।

मैं सोच में पड़ गयी की ये क्या लड़का है? ऐसे माहौल में भी सिर्फ पॉजिटिव बातें कर रहा है, अपने खूबी का कोई दिखावा नहीं कर रहा, ना ही किसी को छोटा दिखा रहा है। इतने में मैंने उसके लौड़े को पकड़ के ज़ोर से दबा दी।

जितेन्द्र – ये क्या है ?

मैं – कुछ नहीं मिस्टर बिग डिक, तुम सिर्फ हॉट नहीं, क्यूट भी हो। सिर्फ चुदाई से नहीं, बातो से भी इम्प्रेस कर देते हो।

ऐसा कहते हुए मैं उसे किस करने लगी। और एक हाँथ से उसके लौड़े को सहलाने लगी। कुछ ही देर में उसका लौड़ा फिर से तन के खड़ा हो गया।

मैं – अगर तुम थके नहीं तो दूसरा राउंड हो जाए?

जितेन्द्र – नेकी और पूछ पूछ ? अब तुम बिच (कुतिया) बन जाओ।

मैं कुतिया बन गयी।

उसने मेरे चुत में अपने लौड़े को एडजस्ट कर के अब बिना किसी संकोच के सीधे अंदर घुसा दिया।

मैं – ओह्ह, आई लव योर डिक इनसाइड माय पुसी।

जितेन्द्र – यू लाईक ईट?

मैं – यस, यस, आई डु !

ओह्ह, आह, यस, प्लीज़, यस, फ़क मी, प्लीज़ फ़क मी फास्टर। मैं इन्ही शब्दों को दोहराये जा रही थी।

मेरे बाल खुले हुए थे। जितेन्द्र ने मेरे बालों को समेटा और मुठी में पकड़ लिया। अब वो मेरे बालों को पकड़ कर मेरे चुत को और ज़ोर ज़ोर से रगड़ रहा था। पुरे कमरे में फच फच्च की आवाज़ गूँज रही थी।

मैं – और ज़ोर से, प्लीज़ और ज़ोर से।

ये सुनते ही जितेन्द्र ने अपनी तेज़ी और बढ़ा दी। अब वो मुझे सही तौर पे रगड़ रहा था। मैं सच कहूं तो मुझे लग रहा था मैं स्वर्ग में हूँ। लग रहा था मुझे स्वर्गीय सुख प्राप्त हो रहा है। फिर उसने मेरे बालों को छोड़ के मेरे पतली सी कमर को पकड़ के मेरी चुत को रगड़ने लगा। अचानक मैंने महसूस किया की जितेन्द्र मेरी गांड के छेंद को सेहला रहा है और धीरे धीरे ऊँगली करने की कोशिश कर रहा है। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

मैं – बेबी, मेरी गांड को आज छोड़ दो। आज बस मेरी चुत को फाड़ दो। मेरे चुत का भोसड़ा बना दो प्लीज़।

जितेन्द्र – ठीक है, जान। पर सिर्फ आज छोड़ रहा हूँ।

ये कहते हुए उसने मेरे चेहरे को घुमा कर किस किया और फिर से मेरे बालों को पकड़ के चोदने लगा। चुत के मीठे दर्द के सामने बालों के खींचने का दर्द कुछ नहीं लगता। और ज़्यादा मज़ा आता है। काफी देर चुदने के बाद मैं झड़ गयी और करहाने लगी।

मेरे झड़ने की वजह से मेरा चुत सिकुड़ सा गया था जिसकी वजह से और ज़्यादा रगड़न महसूस होने लगी। दो मिनट बाद जितेन्द्र ने भी कहा वो झड़ने वाला है, मैं झट से उसके सामने आके बैठ गयी। इस बार उसने अपना पूरा वीर्य मेरे चेहरे पर गिराया।

जितेन्द्र – मैं बस एक आखरी काम करना चाहता हूँ।

मैं – क्या ?

उसने मुझे फिर से बिस्तर पैर लिटा दिया, मेरे टांगो को फैलाया। इतने तेज़ रगड़न के कारण मेरा जी-स्पॉट फूल के बाहर दिखने लगा था। उसने मेरे जी-स्पॉट को जीभ से सहलाया। मैं फिर से करहाने लगी और 2 मिनट में फिर से झड़ गयी। जितेन्द्र मेरे पानी को चांट के पी गया। वो मेरे पास आके लेट गया, फिर एक बार किस करने लगा।

मैं – थैंक यू, बेबी। ऐसा सुख मैंने कभी नहीं पाया।

जितेन्द्र – तुमको भी थैंक यू। मुझे भी बहुत मज़ा आया।

हम दोनों एक दूसरे से लिपट कर सो गए। अगले दिन संडे था, दोनों की छुट्टी थी और घर भी खाली रहने वाला था। हमने एक गलती की, बिना कंडोम के दो बार चुदाई की। जितेन्द्र सुबह उठके सबसे पहले मार्किट से कंडोम का पैकेट खरीद लाया। संडे को भी हमने खूब मज़े और चुदाई की।

जितेन्द्र के साथ कई दिनों तक मैंने खूब मज़े किये। उसने मुझे चुदाई से सुख प्राप्त करना सिखाया। ऊपर वाले की भी योजनाओं के क्या कहने। जिस लड़के से मेरी एक हफ्ते पहले तक कोई बात चित नहीं थी, उसके व्यवहार, उसकी सोच, उसका रोमांटिक अंदाज़ और उसके बड़े लौड़े की मैं दीवानी हो गयी थी। उसने मुझे अपने एक दोस्त के साथ चोदा, मैंने पहली बार दो लौड़े एक साथ लिए। उसने मुझे और रागिनी को भी साथ में चोदा। मेरे पति मेरी चुदाई अच्छी करते हैं लेकिन कोई भी जितेन्द्र की जगह नहीं ले सकता। मुझे उसकी बहुत याद आती है।

Kavya Singh

नमस्ते! मैं काव्या सिंह हूँ - इलाहाबाद विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में मास्टर डिग्री वाली और पिछले 7 साल से हिंदी में इतनी बोल्ड कहानियाँ लिख रही हूँ कि पाठक दोबारा पढ़े बिना रह नहीं सकते। मैं भारतीय समाज के हर छुपे हुए जज़्बात को शब्दों में ढालती हूँ - वो इच्छाएँ, वो चाहतें जो आप दिन में छुपाते हैं लेकिन रात में महसूस करना चाहते हैं। राष्ट्रीय स्तर पर मेरी कहानियों को पुरस्कार मिले हैं और लाखों पाठकों ने मेरी कहानियों से अपनी रातों को गरमाया है। चलो, आज मेरी कहानी में डूब जाओ!

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