चुदाई देख गर्म हुई माँ को चोदा-2

पिछला भाग पढ़े:- चुदाई देख गर्म हुई माँ को चोदा-1

मां-बेटा सेक्स कहानी अब आगे-

मम्मी: हां बेटा, मुझे भी अच्छा लगा। मगर मैं जब भी ये सब सोचती हूं तो मुझे बड़ा अजीब लगता है। हम दोनों माँ-बेटा हैं। और तू मुझे प्यार करना चाहता है।

मैं: मम्मी, हम दोनों माँ-बेटे तो बाद में हैं। पहले हम दोनों इंसान हैं। और ये कहां लिखा है कि एक बेटा अपनी माँ को प्यार नहीं कर सकता।

मम्मी: मगर बेटा हमारे समाज में ऐसे रिश्ते को बहुत गंदा माना जाता है।

मैं: मम्मी, हमारा रिश्ता घर के अंदर कैसा है किसी को क्या पता चलेगा?

मम्मी मेरी बात सुन के सोच में पड़ गई। फिर जैसे ही वो कुछ बोलने वाली थी, मैंने उनके होठों पर उंगली रख दी। जिससे मम्मी चुप हो गई। फिर मैंने आगे बढ़ के फिर से उनके होठों को चूम लिया। मैं लगातार उनके होठों को चूसता रहा, और मम्मी आंखें बंद करके साथ देने लगी। मेरी जीभ ने मम्मी के होठों को खोल दिया।

अब मेरी जीभ मम्मी की जीभ से खेल रही थी। मम्मी आंखें बंद करके शांत रही। मैं लगातार उनके होंठ चूस रहा था। मम्मी के होठों को चूसते हुए मेरे हाथ उनकी चूचियों पर आ गये। फिर मैं साड़ी के ऊपर से ही मम्मी की चूचियां दबाने लगा। मम्मी के होंठ भी बीच-बीच में मेरे होंठों को चूस लेते थे।

मम्मी उतना खुल के मेरा साथ नहीं दे रही थी। मगर इस बार वो मुझे रोक भी नहीं रही थी। हम दोनों का किस्स 5 मिनट तक चला। जब मैं उनसे अलग हुआ, तो मम्मी के चेहरे पर एक शर्म थी। और वो नीचे देख रही थी।

मम्मी: खेत में कोई आ गया तो नजदीक से हम पकड़े जा सकते है।

मैं: आप सही कह रही हो। आओ खेत के बीच में चलते है।

फिर मैं खेत के बीच में कुछ धान काट दिया। यहां से खेत के चारों ओर कोहरा था। ठंड भी अधिक थी, तो मैं झट से अपना गमछा बिछा के माँ को उसपे लिटा दिया। फिर उनके ऊपर चढ़ के बदन से बदन की गर्मी महसूस करने लगा। इस बार मम्मी ने भी मुझसे नहीं रोका। मैं मम्मी की ब्लाउज़ को ऊपर कर चूचियों को निकाल के चूसने लगा।

मेरे दोनों हाथ मम्मी की चूचियों को कभी मसल रहे थे और मेरी जीभ मम्मी की चूचियों की घाटी में घूम रही थी। जिस सुख के लिए मम्मी तरस रही थी, अब उन्हें ये सुख मिल रहा था।‌ तो उन्होने आनंद के साथ अपनी आंखें बंद की हुई थी।

जैसे ही मेरी जीभ मम्मी के निप्पल पर लगती है। मम्मी अपने होठों को दबा देती। और मैं बार-बार अपनी जीभ मम्मी के निपल पर रगड़ने लगा। चूचियों के चूसने और मसले जाने से मम्मी आनंद की दुनिया में पहुंच गई थी। मम्मी की दोनों चूचियों को चूस के मैं उनके पेट को चाटने लगा।

मेरे दोनों हाथ अभी भी मम्मी की चूचियों को मसल रहे थे, और मेरी जीभ मम्मी की गहरी नाभि में घूम रही थी। मम्मी की गहरी नाभि चूसने में बहुत मजा आ रहा था। मैंने मम्मी की नाभि चूस-चूस के पूरी गीली कर दी। नाभि चूसने के बाद मैंने मम्मी की साड़ी कमर तक कर दी। उन्होंने ठंड से बचने के लिए इनर पेंट पहनी थी। उसे नीचे किया तो उनकी रसीली चूत मेरे सामने आ गयी। अब मेरी जीभ मम्मी की चूत के थोड़े ऊपर के हिस्स को चाटने लगी।

मम्मी का शरीर हल्के-हल्के गरम पड़ रहा था। उन्हें देखने से भी साफ पता चल रहा था कि मम्मी भी अपने शरीर की गर्मी बाहर निकालना चाहती थी। मैं मम्मी की गीली चूत चाट रहा था, और अब मम्मी मुँह से आह आह करके आवाज निकाल रही थी। वो कभी अपने होठों को काटती, तो कभी जोर से चादर को समेट लेती। मम्मी अपनी चूत चटाई से कुछ ज्यादा ही गरम हो गई थी।

मैं उन्हें भूलभुलैया देने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा था। मेरी जीभ मम्मी की चूत के अंदर घूम रही थी, और मेरा हाथ उनकी चूत के दाने को सहला रहा था। इस बार मम्मी भी बिना किसी की रोक-टोक के आअहह उम्म्म सीइइ कर रही थी।

मम्मी की चूत चाटते-चाटते मैं उनकी गांड को भी चाटने लगा। मेरी जीभ मम्मी की चूत और गांड दोनों पर घूम रही थी। इस बार जब मम्मी से बर्दाश्त नहीं हुआ तो उन्होंने अपना हाथ मेरे सिर पर रख दिया। फिर वो मेरे सर को अपनी चूत पर दबाने लगी।

मैं भी पूरी शिद्दत से मम्मी की चूत और गांड को चाटने लगा। मम्मी को इसमें ज्यादा ही मजा आ रहा था। कुछ ही देर बाद मम्मी मेरा सर कुछ ज्यादा ही अपनी चूत पर दबाने लगी। मैं अपनी जीभ उनकी चूत पर चला जा रहा था। मम्मी नीचे से अपनी चूत ऊपर की तरफ करने लगी।

फिर मम्मी के मुँह से एक आह निकली,‌ और उनका हाथ मेरे सिर पर ढीला पड़ गया। मैं समझ गया मम्मी का पानी निकल चुका था। मगर फिर भी मैंने अपनी जीभ चलानी बंद नहीं की, और मैं कुछ देर और मम्मी की चूत चाटता रहा।

जब कुछ देर बाद मैं मम्मी की चूत चाट के उठा, तो मम्मी मुझे ही देख रही थी। मम्मी की आँखों में एक संतुष्टि दिख रही थी। जो पानी निकलने के बाद हर औरत की आँखों में दिखती है। मम्मी के माथे पर गर्मी दिख रही थी, जो पसीने के रूप में इतनी ठंड में निकल रही थी।

मैं मम्मी के ऊपर आने लगा। इस बार जब मैंने मम्मी के होठों को चूमा तो उन्होंने भी मेरा पूरा साथ दिया। हम दोनों एक दूसरे के होठों को चूमते हुए चिपक गए। मम्मी और मैं एक-दूसरे के होठों को चूसते ही जा रहे थे। हम दोनों की आंखें बंद थी। हमें समय का पता ही नहीं चला कि हम दोनों कितनी देर तक एक-दूसरे के होठों को चूसते रहे।

जब हमारी आंखें खुली तो मम्मी मुझे देख कर शरमाने लगी। उन्होंने अपना मुंह दूसरी तरफ कर लिया। फिर मैंने उनके गाल पर हाथ रख कर उनका चेहरा अपनी तरफ किया और फिर से होंठों को चूम लिया।

मैं: आई लव यू मम्मी।

मम्मी : आई लव यू टू बेटा।

मैं: मम्मी, आप सच में बहुत खूबसूरत हो। मैंने आज तक आप जैसी खूबसूरत औरत नहीं देखी। मैं बहुत किस्मत वाला हूं, जो आप मेरी जिंदगी में आये।

मम्मी अपनी तारीफ सुन के शरमाने लगी। फिर मुझे ठंड महसूस होने लगी। तब मैंने उठ के बगल के खेत में देखा कि पूआल की छोटी सी मड़ई बनी थी, जो धान की रखवाली करने के लिए होती है। उसमे कोई नहीं था, तो मैं मम्मी को उसी में ले गया। उसमे पूआल के करण बिल्कुल ठंड महसूस नहीं हो रही थी। मैं मम्मी के ऊपर चढ़ गया। मैंने अपना पैंट निकाल के साइड में रख दी।

इसके आगे क्या हुआ, वो अगले पार्ट में।

अगला भाग पढ़े:- चुदाई देख गर्म हुई माँ को चोदा-3

Nisha Gupta

हैलो! मैं निशा गुप्ता हूँ - जयपुर विश्वविद्यालय से संचार विज्ञान में मास्टर और पिछले 6 साल से डिजिटल दुनिया में हिंदी कहानियाँ लिखने वाली एक अनुभवी लेखिका। मैं वो कहानियाँ लिखती हूँ जो पढ़ते ही आपके मन में आग लगा दें। मेरी कहानियों में वो सब कुछ है जो आप चाहते हैं - बोल्ड, बेबाक और बेरोकटोक। मेरे लेखन को हजारों पाठकों ने सराहा है और कई पुरस्कार भी मिले हैं। मैं यहीं हूँ आपके मज़े के लिए — तो लेटे रहो और पढ़ते जाओ!

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