चुदाई देख गर्म हुई माँ को चोदा-3

पिछला भाग पढ़े:- चुदाई देख गर्म हुई माँ को चोदा-2

मां-बेटा सेक्स कहानी अब आगे-

फिर मैं मम्मी की दोनों जांघों को पकड़ के उनके ऊपर सेट हो गया। फिर मैंने अपना लंड उनकी चूत पर लगा दिया। मम्मी की चूत पहले से ही गीली पड़ी थी। और मेरा लंड भी प्री-कम से चिकना हो गया था।

मैंने अपने लंड का सुपाड़ा मम्मी की चूत पर लगा दिया। फिर बड़े ही प्यार से मेरा लंड मम्मी की चूत में समा गया। लंड के अन्दर जाते ही मम्मी ने अपनी आँखे बंद कर ली। फिर जैसे ही मैं धक्के लगाने लगा, मम्मी मुझे पकड़ के अपने होठों को काटने लगी। मेरा पूरा लंड बड़े ही आराम से अंदर जा रहा था। और मम्मी के चेहरे के ऊपर वो कामुक भाव मुझे बहुत ज्यादा खुशी दे रहे थे।

मैं मम्मी को बाहों में पकड़ के धक्के लगा रहा था। साथ ही उनकी चूचियों को भी चूस रहा था। जिसकी मम्मी को ज़्यादा मज़ा आ रहा था। ऐसे करने से मम्मी के मुँह अह्ह्ह अह्ह्ह उम्म निकल रही थी। मम्मी मेरे बालों में हाथ फिराने लगी, और मैं धक्के लगाये जा रहा था।

तभी मम्मी ने अपनी टांगे मेरी कमर में बंद ली। और उन्होंने मुझे खुद से चिपका लिया। इस बार मम्मी मेरा भरपुर साथ दे रही थी। फिर मैं मम्मी की चूचियों को छोड़ के उनके होठों को चूसने लगा।

मम्मी और मैं एक-दूसरे के होठों को चूस रहे थे, और मैं ऊपर से धक्के लगा रहा था। मम्मी नीचे से अपनी कमर उठा के मेरा साथ दे रही थी। कुछ देर में मम्मी को ऐसे ही चोदता रहा। फिर मैंने मम्मी की दोनों बगलों के नीचे से हाथ डाला, और उनको हवा में उठा लिया। जब मैंने ऐसा किया तो मम्मी ने भी मेरी गर्दन में हाथ डाल लिया और मेरी कमर को पकड़ लिया।

मेरा लंड अभी भी मम्मी की चूत में ही था। मैं मम्मी को गोद लेके ही चोदने लगा, जैसा कि हम अश्लील वीडियो में देखते हैं। और सच में दोस्तों, इस पोज़ में चुदाई का एक अलग ही मजा आ रहा था।

जिसने भी इस पोज़ में कभी चुदाई की है। वही जानता है कि इस पोज में कितना मजा आता है। इस पोज़ में कुछ देर धक्के लगाने के बाद मैं उस मड़ई में बैठ गया और मम्मी मेरे लंड पर बैठी हुई थी। मेरे हाथ मम्मी की गांड पर थे, और मैं मम्मी की गांड को मसलते हुए अपने लंड का इस्तेमाल कर रहा था। मम्मी मेरे गले में हाथ डाले हुए चुदाई का मजा ले रही थी।

मम्मी की चूचियां बिल्कुल मेरे मुँह के पास थी और मैं बारी-बारी से उनको चूस रहा था। मगर वो मेरे मुँह में आ नहीं पा रही थी। तब मम्मी ने खुद अपनी चूची मेरे मुँह में लगा दी। जैसे एक मां अपने छोटे बच्चे के मुंह में चूची लगाके उसे दूध पिलाती है। वैसे ही मम्मी ने भी किया। और मैं मम्मी की चूची को खींच-खींच के चूसने लगा।

जैसे ही मैं उनकी चूची खींचता, मम्मी के मुँह से आउछ करके आवाज आती है। मगर फिर भी मम्मी मुझे रोक नहीं रही थी। मैं जल्दी-जल्दी मम्मी की गांड को अपने लंड पर चला रहा था। फिर कुछ ही देर बाद मम्मी बोली-

मम्मी: आअहह रुकना मत, उम्म्म रुकना मत आह्ह बेटा।

मम्मी की कामुकता भरी आवाज ने मेरे अंदर और ज्यादा जोश भर दिया। और मैं भी ज्यादा तेज मम्मी की गांड को अपने लंड पर मारने लगा। यहाँ तक कि मम्मी खुद अपनी गांड को मेरे लंड पर मार रही थी।

फिर कुछ ही देर बाद मम्मी जल्दी-जल्दी अपनी कमर चलाने लगी। और मैं खुद का पानी कंट्रोल करने लगा। कुछ ही देर बाद मम्मी का शरीर कांप गया, और वो तेज तेज सांसे लेने लगी। मैं मम्मी को लेके ऐसे ही पीछे पूआल पर लेट गया। और मम्मी भी मेरे ऊपर लेट कर तेज-तेज सांसें लेने लगी। मम्मी का पानी निकल चुका था। उनकी गीली चूत मेरे लंड को और भी ज्यादा गीला कर रही थी।

मैंने मम्मी के गाल पर प्यार से हाथ फेरा। फिर उनके होठों को चूसने लगा। मम्मी भी मेरा साथ दे रही थी। उनके होठों को चूसते हुए मैं नीचे से फिर से धक्के लगाने लगा। मम्मी की चूत पानी निकलने से बहुत ज्यादा चिकनी हो गई थी।

जिसकी वजह से मेरा लंड बार-बार चूत से बाहर निकल रहा था। जब ऐसा कई बार हुआ तो मैंने मम्मी को आपने ऊपर से उठा दिया। मम्मी उठ के नीचे लेट गयी और मैं उनके ऊपर से धक्के लगाने लगा। मेरा पूरा लंड जड़ तक अंदर जा रहा था। अब फूस की मड़ई में 2 आवाजें गूंज रही थी।

मेरे धक्के लगाने से थप थप की आवाज हो रही थी। और मम्मी आअहह अह्ह्ह उम्म्म मम्म कर रही थी। ठंड में खेतो में चुदने का मजा ही अलग था, और मम्मी के मुँह से जोर से आअहह की आवाज आई।

मम्मी को भी मजा आ रहा था। और वो बड़े ही आराम से झुके-झुके चुदाई करवा रही थी। फिर कुछ देर चुदाई करने के बाद मैंने मम्मी को सीधा लिटा दिया और खुद उनके ऊपर आ गया। मम्मी ने भी मेरा स्वागत अपनी टांगे और बाहें फैला के किया। मैंने भी अपना लंड चूत में डाल दिया और धक्के लगते हुए उनसे चिपक गया।

मम्मी और मैं एक-दूसरे के होठों को चूस रहे थे। और मैं नीचे से धक्के लगाये जा रहा था। मम्मी ने फिर से मुझे अपनी टांगों से जकड़ लिया था। मम्मी की चूत फिर पानी-पानी हो गई थी और मेरा लंड सटासट अंदर-बाहर हो रहा था।

अब मेरे हर धक्के पर मम्मी की कामुक भारी आवाज निकल रही थी। मम्मी की आवाज सुन के मैं और तेज धक्के लगाने लगा, और तभी मेरा लंड बाहर निकल गया। इससे पहले मैं अपना लंड दुबारा चूत में डालता, मम्मी ने जल्दी से मेरा लंड पकड़ा और जल्दी से चूत में डाल लिया। मैंने फिर से धक्के लगाने शुरू कर दिये।

शायद मम्मी का पानी निकलने वाला था, इसलिए वो भी नीचे से कमर उठा के मेरा साथ दे रही थी। अब हम दोनों एक-दूसरे में खो गए थे। मैं धक्के लगाता रहा, और जल्दी ही मम्मी का पानी निकल गया। फिर कुछ ही देर बाद मैंने भी अपना पानी मम्मी की चूत में भर दिया। हम दोनों एक-दूसरे को जकड़े हुए थे। और हम दोनों की ही सांसें फूल रही थी। मैं 5 मिनट तक मम्मी के ऊपर ऐसे ही लेटा रहा।

फिर मैं उनके ऊपर से उठ गया। मेरा लंड भी अब थोड़ा ढीला हो गया था। और वो मेरे और मम्मी की चूत के पानी से गीला हो गया था। मैं मम्मी के बगल में आ गया।

मम्मी भी मेरी पीठ सहलाने लगी और मैं उनकी चूची को चूसने लगा। कुछ देर हम दोनों एक-दूसरे से ऐसे ही चिपके हुए लेटे रहे। फिर मैंने मम्मी को देखा। और वो भी मुझे ही देख रही थी।

मैं: आई लव यू मम्मी!

मम्मी: मैं भी तुमसे प्यार करती हूं मेरे बच्चे!

मैं: मम्मी, क्या अब भी आप मुझसे और खुद से झूठ बोलोगी? कि हमारे बीच जो हुआ वो ग़लत है?

मम्मी: बेटा, अब गलत और सही का कोई मतलब नहीं है। हमें जो करना था वो हम दोनों कर चुके हैं। और इस कोहरे भरे खेत में तुमने बहुत मजा दिलाया। मगर मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरी इस ज़रुरत को मेरा बेटा पूरा करेगा।

मैं: मम्मी, जब पापा के ना होने पर मैं आपकी बाकी जरुरत का ख्याल रखता हूं, तो अब इसका भी ख्याल रखूंगा।

मम्मी मेरी बात सुन के शरमाने लगी। और हम अपनी कपड़े पहन कर बाहर निकले तो अभी भी कोहरा था। हम दोनों ने आज घर में रहने का फैसला किया क्यूंकि ठंड के कारण आज खेत में वैसे भी कोई नहीं था।

Nisha Gupta

हैलो! मैं निशा गुप्ता हूँ - जयपुर विश्वविद्यालय से संचार विज्ञान में मास्टर और पिछले 6 साल से डिजिटल दुनिया में हिंदी कहानियाँ लिखने वाली एक अनुभवी लेखिका। मैं वो कहानियाँ लिखती हूँ जो पढ़ते ही आपके मन में आग लगा दें। मेरी कहानियों में वो सब कुछ है जो आप चाहते हैं - बोल्ड, बेबाक और बेरोकटोक। मेरे लेखन को हजारों पाठकों ने सराहा है और कई पुरस्कार भी मिले हैं। मैं यहीं हूँ आपके मज़े के लिए — तो लेटे रहो और पढ़ते जाओ!

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