सारिका कंवल मैं गर्म होने लगी थी, उधर मेरे सहलाने की वजह से विजय का लिंग भी सख्त हो चुका था। विजय ने तब मेरी टाँगों को फैला कर अपने कमर के दोनों तरफ कर मुझे गोद में उठा लिया। उसने मेरी दोनों जाँघों को पकड़ कर सहारा दिया और मैं उसके गले में दोनों हाथ डाल कर किसी बच्चे की तरह लटक गई। फिर सुधा ने विजय का लिंग पकड़ कर मेरी योनि पर रगड़ना शुरू कर दिया, इससे मुझे बहुत मजा आ रहा था, मन कर रहा था कि जल्दी से उसे मेरी योनि में डाल दे। मैं भी अपनी योनि को उसके ऊपर दबाते हुए विजय को चूमने लगी। तब विजय ने मुझसे कहा- आज एक चीज़ तुम दोनों को करना होगा मेरी खातिर ! मैंने पूछा- क्या? तब उसने कहा- तुम दोनों को आपस में चूमना होगा, साथ ही एक-दूसरे की बुर को चूसना होगा ! यह बात सुनते ही मैं चौंक गई, मुझे ऐसा लगा कि यह क्या पागलपन है। तभी सुधा खुशी से बोली- हाँ.. क्यों नहीं.. बहुत मजा आएगा ! पर मैं इसके लिए तैयार नहीं थी, पर सुधा और विजय जिद पर अड़ गए और विजय ने मुझे कस कर पकड़ लिया। फिर सुधा ने मेरे सिर को थामा और मेरे होंठों से होंठ लगा कर मेरे होंठों चूमने लगी। मैं बार-बार मना कर रही थी, पर उन पर कोई असर नहीं हुआ। तब मैं गुस्से में आ गई तो उन दोनों ने मुझे छोड़ दिया। मैं गुस्से से जाने लगी तब उन दोनों ने मुझसे माफ़ी माँगी और फिर हम वैसे ही अपनी काम-क्रीड़ा में लग गए। सुधा के लिए शायद ये सब नया नहीं था क्योंकि वो ऐसी पार्टियों में जाया करती थी। पर मेरे लिए ये सब नया था तो मैं सहज नहीं थी। तब सुधा ने मुझसे कहा- सारिका, तुम्हें मजे लेने चाहिए क्योंकि ऐसा मौका हमेशा नहीं मिलता ! मैंने कह दिया- मुझे इस तरह का मजा नहीं चाहिए… मैं बस अपनी यौन-तृप्ति चाहती थी इसलिए तुम लोगों की हर बात ना चाहते हुए भी माना, पर अब हद हो गई है ! तब विजय ने मुझसे कहा- ठीक है, जैसा तुम चाहो वैसा ही करेंगे। तब उन्होंने कहा- दो औरतें अगर एक-दूसरे का अंग छुए और खेलें तो खेल और भी रोचक हो जाता है। पर मैंने मना कर दिया, तब उसने कहा- ठीक है मत करो ! तुम पर सुधा को करने दो उसे कोई दिक्कत नहीं। मैंने कुछ देर सोचा फिर आधे मन से ‘हाँ’ कर दी। अब विजय ने सुधा को पकड़ा और उसे पागलों की तरह चूमने, चूसने लगा। सुधा भी उसका जवाब दे रही थे। दोनों काफी गर्म हो गए थे, तब विजय ने मुझसे कहा- तुम दोनों मेरा लंड चूसो ! वो किनारे पर आ गया, जहाँ पानी घुटनों तक था। सुधा और विजय आपस में चूमने लगे और मैं झुक कर घुटनों के बल खड़ी होकर उसके लिंग को प्यार करने लगी। मैंने उसके लिंग को पहले हाथ से सहलाया, जब मैं उसके लिंग को आगे की तरफ खींचती तो ऊपर का चमड़ा उसके सुपाड़े को ढक देता पर जब पीछे करती तो उसका सुपाड़ा खुल कर बाहर आ जाता। मैं दिन के उजाले में उसका सुपाड़ा पहली बार इतने करीब से देख रही थी, एकदम गहरा लाल.. किसी बड़े से चैरी की तरह था। मैंने उसके सुपाड़े के ऊपर जीभ फिराई और फिर उसको अपने मुँह में लेकर चूसने लगी। कुछ देर में विजय भी अपनी कमर को हिलाने लगा और अपने लिंग को मेरे मुँह में अन्दर बाहर करने लगा। थोड़ी देर में सुधा भी घुटनों के बल आ गई और फिर वो भी लिंग को चूसने लगी। दोनों के लार और थूक से उसका लिंग तर हो गया था। विजय ने अब कहा- चलो चट्टान के ऊपर चलते हैं। फिर उसने सुधा को कहा- क्या तुम मेरे लिए सारिका की बुर चाटोगी ! उसने मुस्कुराते हुए सर हिलाया फिर मुझे चट्टान के ऊपर लेट जाने को कहा। मुझे अजीब लग रहा था क्योंकि पहली बार कोई औरत मेरी योनि के साथ ऐसा करने वाली थी। उसने मेरी टाँगें फैला दीं और झुक कर मेरे टाँगों के बीच अपना सर रख दिया। फिर उसने मेरी तरफ देख मुस्कुराते हुए कहा- अब तुम्हें बहुत मजा आएगा ! फिर उसने मेरी दोनों जाँघों को चूमा, फिर योनि के किनारे फिर अपनी जुबान को मेरी योनि में लगा कर नीचे से ऊपर ले आई। उसने मेरी योनि को चाटना शुरू कर दिया। काफी देर के बाद विजय सुधा के पीछे चला गया और झुक कर उसकी योनि को चाटने लगा। इधर सुधा मेरी योनि से तरह-तरह से खिलवाड़ करने लगी, कभी जुबान को योनि के ऊपर फिराती, तो कभी योनि में घुसाने की कोशिश करती, कभी दोनों हाथों से मेरी योनि को फैला देती और उसके अन्दर थूक कर दुबारा चाटने लगती या उंगली डाल देती। कभी मेरी योनि के दोनों तरफ की पंखुड़ियों को दांत से पकड़ कर खींचती। मुझे इससे काफी उत्तेजना हो रही थी। मैं अब काफी गर्म हो कर तैयार थी, पर उन दोनों को तो खेलने में ज्यादा रूचि थी। तभी विजय मेरे पास आकर लेट गया। मैंने उसको पकड लिया और चूमने लगी, साथ ही उसके लिंग को सहलाने लगी। सुधा ने फिर मुझे छोड़ दिया और विजय के लिंग को पकड़ कर चूसा, फिर अपनी दोनों टाँगें फैला कर उसके कमर के दोनों तरफ कर उसके लिंग के ऊपर आ गई। मैंने उसके लिंग को उसकी योनि में रगड़ा और उसकी छेद पर टिका दिया। इस पर सुधा ने दबाव दिया, लिंग अन्दर चला गया। अब सुधा ने धक्के लगाने शुरू कर दिए और विजय मुझे चूमने, चूसने में मग्न हो गया। वो मेरे स्तनों को पूरी ताकत से दाबता और चूसता तो कभी सुधा के आमों को चूसता। करीब 10 मिनट के बाद सुधा सिसकी लेते हुए हांफने लगी और विजय के ऊपर गिर गई। मेरे लिए यह खुशी का पल था क्योंकि मैं खुद विजय का लिंग अपने अन्दर लेने को तड़प रही थी। सुधा विजय के ऊपर से अलग हुई तो उसकी योनि में गाढ़े चिपचिपे पानी की तरह लार की तरह वीर्य लगा हुआ था। विजय मेरे ऊपर आ गया तो मैंने अपनी टाँगें फैला दीं और ऊपर उठा दीं। उसने झुक मेरे दोनों स्तनों को चूमा, चूसा फिर मेरे होंठों को चूसने लगा। मैंने हाथ से उसका लिंग पकड़ लिया और अपनी योनि के छेद पर टिका कर उसका सुपाड़ा अन्दर कर लिया। फिर मैंने अपनी कमर उठा दी। यह देख उसने जोश में जोर का धक्का मारा तो उसका लिंग मेरी बच्चेदानी से टकरा गई। मैं चिहुंक उठी, मेरे मुँह से अकस्मात निकल गया- उई माँ… धीरे.. चोदो ! यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं ! तब उसने 3-4 और जोर के धक्के लगाते हुए कहा- आज कुछ धीरे नहीं होगा ! उसका इतना जोश में आना, मुझे पागल कर रहा था… उसने जोर-जोर से मुझे चोदना शुरू कर दिया था। मैं इतनी गर्म हो चुकी थी कि कुछ ही देर में मैं झड़ गई। मैंने पूरी ताकत से विजय को पकड़ लिया। तब विजय ने मुझसे कहा- आज इतनी जल्दी झड़ गई तुम ! मैंने उसको कहा- तुम्हें इससे कोई परेशानी नहीं होगी.. तुम जितना चाहो चोद सकते हो, मैं साथ दूँगी तुम्हारा ! यह सुन उसने धक्कों का सिलसिला जारी रखा कुछ ही देर में मुझे लगा कि मैं दुबारा झड़ जाऊँगी, सो मैंने उसको कस के बांहों में भर लिया। अपनी टाँगें उसके कमर के ऊपर रख उसको जकड़ लिया। विजय की गति अब दुगुनी हो गई थी, उसकी साँसें और तेज़ हो गईं, मैं समझ गई कि अब वो भी झड़ने को है। हमारे होंठ आपस में चिपके हुए थे और हम दोनों ने एक-दूसरे को यूँ पकड़ रखा था जैसे एक-दूसरे में समा जायेंगे। सिर्फ विजय का पेट हिल रहा था। वो मेरी योनि में लिंग अन्दर-बाहर तेज़ी से करके चोद रहा था। अचानक मेरे शरीर की नसें खिंचने लगी और मैं झड़ गई। ठीक उसी वक़्त विजय ने भी पूरी ताकत से धक्के मारते हुए मेरे अन्दर अपना रस छोड़ दिया। हम दोनों हाँफते हुए एक-दूसरे से काफी देर लिपटे रहे। थोड़ा सुस्ताने के बाद हम वापस पानी में चले गए और फिर पानी में ही दो बार उसने मुझे और सुधा को चोदा। हम तीनों काफी थक चुके थे, फिर हमने खुद को पानी से साफ़ करके कपड़े पहने और वापस घर को आ गए। कहानी जारी रहेगी। मुझे आप अपने विचार यहाँ मेल करें। [email protected]
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