दोस्तों मेरी पिछली कहानी “ ज़ोहरा के साथ वासना भरा सेक्स 2 “ में मैंने बताया था कि कैसे मैने विपिन के साथ मिलकर ज़ोहरा को चोदा अब ज़ोहरा के थ्रीसम सेक्स का मज़ा लीजिए। फिर जब विपिन हटा तो मैं उसकी गाण्ड के स्पर्श के साथ चूत चोदने पर उतर आया। हालांकि विपिन के मोटे लम्बे लण्ड से चुदने के बाद मुझे वो मज़ा नहीं आ पा रहा था, लेकिन अब छोड़ भी तो नहीं सकता था। Jordar Threesome Chudai Kahani
इसलिए मैं आठ दस धक्के मार कर हट गाया और विपिन लग गया बहरहाल कुछ देर की चुदाई के बाद विपिन ने तो झड़ने के टाइम उसे ऐसे दबोचा के ज़ोहरा उसके लन्ड से निकल ही ना पाई और पूरी चूत विपिन के वीर्य से भर गई। झड़ने और लण्ड बाहर निकलने के बाद वह तो ज़ोहरा के बगल में ही गिर कर हांफने लगा।
लेकिन उसने मेरा रास्ता दुश्वार कर दिया। पूरी बुर उसके वीर्य से भरी हुई थी। तो मैंने एक बार लण्ड अन्दर कर के विपिन के वीर्य से अपने लण्ड को सराबोर किया और ज़ोहरा की गाण्ड के छेद में उतार दिया और गाण्ड के कसाव और गर्माहट ने कुछ ही धक्कों में मेरा पानी भी निकाल दिया और मैंने उसकी गाण्ड अपने सफ़ेद पानी से भर दी।
फिर मैं भी बिस्तर पर पसर गया और वह भी हम दोनों के बीच में ही फैल कर हांफने लगी। आँखें उसकी अभी भी बंद थी लेकिन चेहरे पर परम संतुष्टि के भाव थे। हम करीब आधे घंटे तक ऐसे ही बेसुध पड़े रहे। इसके बाद मैं ही पहले उठा और ज़ोहरा को सहारा देकर उठाया और उसे उसी नंगी हालत में चलाते हुए बाथरूम ले आया।
पीछे से विपिन भी आ गया। अब कपड़े तो वैसे भी तन पर नहीं थे। मेरे कहने पर ज़ोहरा ने हमारे सामने ही पेशाब किया और हमने भी साथ ही उसकी धार से धार मिलाई। तत्पश्चात, मैंने ही शावर चालू कर दिया और हम नहाने लगे। ज़ोहरा ने तो हमें नहीं नहलाया, लेकिन हम दोनों ने मिल कर उसे बड़ी इत्मीनान से ऐसे नहलाया जैसे बच्चे को नहलाते हैं।
उसके दोनों छेदों में ऊँगली डाल-डाल के सारी ‘मणि’ बाहर निकाली और साबुन से दोनों छेद अच्छी तरह धोए और उसके साथ चिपट और रगड़ कर खुद भी नहाते रहे। इस अति-उत्तेजक स्नान में सिर्फ ज़ोहरा ही नहीं बल्कि हम दोनों भी गरम हो गए और उसे गोद में उठा कर वापस बिस्तर पर ले आए।
अब जब विपिन उसके चूचों पर लदा, उसके होंठ चूस रहा था तो मैंने वह चॉकलेट निकाल ली जो विपिन अपने साथ लाया था। पहले मैंने अपने लंड पर चॉकलेट लैपी। फिर मेरा अनुसरण करते हुए विपिन ने और हम दोनों घुटनों के बल बैठे ज़ोहरा के चेहरे के इतने पास आ गए कि दोनों के लण्ड उसके गालों को छूने लगे और उसे चॉकलेट चाटने को कहा।
शरमाई तो वह अब भी… लेकिन पहले की तरह आँखें बंद नहीं की, बल्कि चुपचाप पहले मेरा और बाद में विपिन का लण्ड मुँह में लेकर चूसने लगी। भले हम स्नान से उत्तेजित हो गए हों लेकिन अभी हमारे लण्ड पूर्ण उत्तेजित नहीं थे और हमने इस बहाने उसे ढेर सारी चॉकलेट खिलाई। तब कहीं जाकर हमारे लौड़े पूर्ण रूप से तन पाए कि उसकी गाण्ड का मज़ा ले सकें।
इसके बाद थोड़ी चॉकलेट छोड़ कर बाकी जो भी थी हमने उसके पेट, कंधे, गर्दन और खास कर चूचियों और जाँघों पर मल दीं और दोनों ऊपर-नीचे हो कर कुत्तों की तरह उसे चाटने में जुट गए। अब आनन्द के अतिरेक से ज़ोहरा की आँखें मुंद गईं और वह हौले-हौले सिसकारने लगी।
जब सारे शरीर से चॉकलेट साफ़ हो गई तो बची चॉकलेट मैंने आधी तो उसकी चूत में मली और भर दी और बाकी आधी उसकी गाण्ड के छेद के अन्दर और बाहर मल दी। अब मैंने विपिन को सीधा लेटने को कहा और उसके ऊपर ज़ोहरा को कुतिया की तरह ऐसे व्यवस्थित किया कि उसकी चूत बिलकुल विपिन के मुँह पर आ गई और विपिन का लण्ड ज़ोहरा के मुँह में।
विपिन अब उसकी चूत के अन्दर बाहर भरी चॉकलेट चाटने लगा जो कि पक्का उसके रस से मिल कर कुछ ज्यादा ही स्वादिष्ट हो गई होगी और मैंने उसके चूतड़ थाम कर उसकी गाण्ड का छेद चाटने लगा। साथ ही जीभ नुकीली करके छेद के अन्दर भी उतार देता था। उत्तेजना में ज़ोहरा विपिन के लण्ड को मुँह में लिए पागलों की तरह चूसने लगी।
लेकिन चूँकि अभी हम दोनों एक बार झड़ चुके थे पॉवर गोली भी खाई हुई थी तो जल्दी झड़ने का सवाल ही नहीं था इसलिए विपिन को भी उसकी लंड चुसाई से कोई फर्क नहीं पड़ना था। लेकिन इस चाटम-चाट में मेरे और विपिन के चेहरे इतने पास थे कि हम एक-दूसरे की साँसें महसूस कर सकते थे।
कुछ देर बाद ज़ोहरा अपना एक हाथ उठा कर अपने चूतड़ सहलाने लगी जो कि मेरे लिए इशारा था कि वह अब बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी। मैंने सीधे होकर अपना लण्ड थूक से गीला करके उसके गुलाबी दुपदुपाते हुए गाण्ड छेद पर रखा और थोड़ा ज़ोर लगा कर अन्दर उतार दिया।
ज़ोहरा की एक गहरी सांस छूट गई और उसने विपिन का लंड बाहर निकाल कर अपनी आँखें बंद की और अपने शरीर के निचले हिस्से में लण्ड और जुबान से पैदा आनन्द की लहरों को एकाग्र होकर अनुभव करने लगी। लेकिन इस तरह की गाण्ड चुदाई में मेरी गोलियाँ विपिन की नाक से टकरा रही थीं लेकिन उसने भी आज किसी ऐतराज़ अवरोध को खातिर में नहीं लाना था।
वह अपना काम करता रहा और मैं ज़ोहरा की गाण्ड मारता रहा। कुछ देर की चुदाई के बाद ज़ोहरा ने आँखें खोल कर मुझे देखा। वह कुछ बोली नहीं लेकिन मैं उसकी आँखों की भाषा समझ सकता था और मैं हट गया और विपिन को ऊपर आने को बोला। खुद नीचे होकर ज़ोहरा के नीचे विपिन की जगह पहुँच गया और विपिन बाहर निकल कर मेरी जगह।
मैंने उसकी बहती हुई बुर को हाथ से ही साफ़ किया और फिर खुद जुबान लगा दी। मेरे चेहरे के बिल्कुल पास ज़ोहरा की गाण्ड का छोटा चिकना हुआ छेद था, बल्कि विपिन का केले जैसा लन्ड भी जो वो ज़ोहरा की गाण्ड में घुसा रहा था। अब ज़ाहिर है कि मेरी बनाई जगह उसके लिए अपर्याप्त थी, तो वह ऐसे लग रहा था जैसे फंस गया हो। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
ज़ोहरा को भी पता था कि विपिन के लण्ड से उसकी गाण्ड का हाल बुरा होने वाला था और उसे दर्द सहना पड़ेगा, लेकिन अब जब मिल ही गया था तो वह इस लण्ड को हर तरह से ग्रहण कर लेने में पीछे नहीं रहना चाहती थी। मैंने विपिन को थोड़ा पीछे सरका कर अपना ढेर सा गाढ़ा थूक ज़ोहरा के पानी सहित गाण्ड के छेद पर उगल दिया.
जिससे छेद एकदम से और चिकना होकर चमक उठा और जब विपिन ने लण्ड का टोपा सटा कर ज़रा सा ज़ोर लगाया तो ज़ोहरा का छल्ला खुद को फैलने से न बचा पाया और विपिन का टोपा एकदम से अन्दर हो गया। दर्द से ज़ोहरा ज़ोर से कर्राही और स्वाभाविक रूप से आगे सरकी ताकि विपिन के लण्ड को निकाल फेंके।
लेकिन उसी पल मैंने और विपिन ने उसे रोक लिया और ज़ोहरा ने भी अपनी बर्दाश्त की क्षमता को उपयोग करते हुए खुद को ढीला छोड़ दिया। विपिन ने कुछ देर लण्ड अन्दर रख कर जो बाहर निकाला तो मेरे एकदम समीप ‘पक्क’ की आवाज़ हुई और विपिन का सुपाड़ा बाहर आते ही ज़ोहरा का छेद एकदम इस हद तक खुला रह गया कि उसकी चूत में जुबान घुसाते हुए मुझे छेद के अन्दर के गुलाबी भाग तक के दर्शन हो गए। “Jordar Threesome Chudai Kahani”
पऱ अगले पल में विपिन ने फिर अपना लण्ड छेद से सटा कर दबाया तो ज़ोहरा फिर से कर्राही और लण्ड का अगला भाग अन्दर हो गया। इस बार विपिन ने दो इंच और अन्दर सरकाया, कुछ पल रोक कर छेद को एडजस्ट होने का मौका दिया और फिर बाहर निकाल लिया, छेद फिर उसी तरह खुला और मैंने एक बार और अपना गाढ़ा थूक उसमें उगल दिया।
तीसरी बार विपिन ने जब ज़ोहरा की गाण्ड में अपना लण्ड घुसाया तो अपेक्षाकृत आसानी से घुस गया और इस बार विपिन ने लण्ड बाहर न निकाल कर धीरे-धीरे ऐसा अन्दर सरकाया कि उसकी गोलियाँ मेरी नाक के पास आ गईं और उसका समूचा लण्ड ज़ोहरा की गाण्ड में अन्दर तक धंस गया। बर्दाश्त करने में जोहरा का पसीना छूट गया और वह हांफने लगी।
यह तो मैं लगातार उसकी चूत में घुसा, उसे गर्म कर रहा था जिससे वह इस दर्द से लड़ पा रही थी वरना उसे पक्का आफत आ जाती। मेरी चटाई उसे उस दर्द के एहसास से बाहर ले आई और फिर विपिन ने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू कर दिए। अजीब नज़ारा था। मेरी आँखों से सिर्फ डेढ़ इंच दूर एक मोटा लम्बा लण्ड एक कसे हुए छेद में अन्दर-बाहर हो रहा था।
उसकी गोलियाँ हिलती हुई मेरे चेहरे से दूर होती और फिर पास आ जाती थी। धीरे-धीरे जोहरा उस दर्द से उभर गई और अपनी गाण्ड खुद ही आगे-पीछे करने लगी, तो मुझे अब उसकी चूत की चटाई की आवश्यकता न लगी और मैं उसके नीचे से निकल आया और विपिन को हटा कर खुद लण्ड घुसा दिया।
मुझे छेद बुर की तरह ही एकदम ढीला और फैला हुआ लगा जो मेरे लण्ड को मज़ा न दे पाया, साथ ही मैंने जोहरा के शरीर में भी मायूसी सी महसूस की जैसे विपिन के लण्ड को लेने के बाद मेरे लण्ड से मज़ा न आ रहा हो। लेकिन हिस्सेदारी तो ज़रूरी थी और इसी वजह से मैंने अपने धक्कों में कोताही न की, विपिन पास ही बैठ कर हाथ से उसकी चूत सहलाने लगा।
फिर कुछ देर में मैं हटा तो विपिन ने जोहरा की गाण्ड की पेलाई चालू कर दी। अब ज़ोहरा को भी भरपूर मज़ा आने लगा था। उसने एक बार फिर मेरी तरफ निगाहें घुमा कर वासना से देखा। जिसे विपिन तो न समझा लेकिन मैं बखूबी समझा और मैंने विपिन को सीधा लेट जाने को कहा। “Jordar Threesome Chudai Kahani”
मेरे आदेश के मुताबिक विपिन बिस्तर पर पीठ के बल लेट गया और मेरे सहारे से जोहरा सीधी हो गई। फिर मेरे हाथों की हरकत के हिसाब से संचालित हो कर वो विपिन के लण्ड पर ऐसे बैठी कि विपिन का खड़ा लण्ड उसकी चूत में जगह बनाते हुए अन्दर उतर गया।
पूरा लण्ड अन्दर लेने के बाद जोहरा विपिन के ऊपर ऐसे झुकी कि उसके होंठ विपिन के होंठों से टकराने लगे और विपिन भी उन्हें चूसने से कहाँ बाज़ आने वाला था। पर इस पोज़ीशन में उसके दोनों छेद मेरे ठीक सामने हो गए। चूत में विपिन का लण्ड घुसा हुआ था और गाण्ड मुझे बुला रही थी। और मैंने भी गाण्ड में अपना लण्ड उतार दिया।
ज़ोहरा के अगले छेद में विपिन का मोटा और भारी लण्ड होने के कारण उसके पिछले छेद में जगह कम बची थी जिससे मेरे लण्ड पर भी वैसे ही कसाव महसूस हो रहा था जैसे पहले होता था। और यूँ दो लण्डों को एकसाथ अपने दोनों छेदों में लेकर जो़हरा को तो जैसे जन्नत नसीब हो गई।
उसने विपिन के चेहरे से अपना चेहरा हटा लिया और आँखें बंद करके इस आनन्द को पूरी तरह महसूस करके सिसकारने लगी और इसी स्थिति में हम दोनों धक्के लगाने लगे। विपिन इस तरह नीचे होने के कारण ठीक से धक्के नहीं लगा पा रहा था तो ज़ोहरा ने ही खुद को ऐसे आगे-पीछे करना शुरू किया कि हम दोनों के लण्डों को धक्के मिलने लगे.
और इस तरह वह शरीफज़ादी पर्दानशीं घोर चुदक्कड़ कन्या बन गई और तब अपने दोनों छेदो को चुदाती रही जब तक कि थक न गई। थोड़ी देर के बाद हमने जगह बदली। मुझे विपिन के लण्ड से खाली हुई ज़ोहरा की बुर फिर एकदम ढीली और फैली लगी लेकिन जैसे ही विपिन ने ज़ोहरा की गाण्ड में अपना लण्ड पेला, एकदम से कसाव महसूस हुआ।
अब थकी हुई ज़ोहरा तो धक्के न लगा पाई, विपिन ही आगे-पीछे हो कर ऐसे तूफानी धक्के लगाने लगा कि मेरे लण्ड को अपने आप धक्के मिलने लगे। ज़ोहरा की आँखें चुदाई के नशे में अपने आप भिचने लगी थी, और उसके चेहरे पर छाए बेपनाह आनन्द के भाव दिख रहे थे। “Jordar Threesome Chudai Kahani”
जब विपिन भी कुछ थक गया तो हम दोनों ही अलग हो गए। अब मैं बेड के किनारे बैठा और अपने ऊपर ज़ोहरा को ऐसे बिठाया कि उसकी गाण्ड मेरे लण्ड पर फिट हो गई और मैंने उसके घुटनों के नीचे से हाथ निकाल कर उसकी टाँगें ऐसे फैलाईं कि उसकी चूत विपिन के सामने आ गई और उसने अपना लन्ड पेलने में ज़रा भी देर नहीं की और यूँ हम दोनों ही आगे-पीछे से धक्के लगाते ज़ोहरा को बुरी तरह पेलते रहे।
उसकी इस घड़ी बेसहारा हो गई चूचियां बुरी तरह हिलती उछलती रहीं। जब इस तरह विपिन थक गया तो वो मेरी जगह बैठ गया और मैं उसकी जगह खड़े हो क़र ज़ोहरा को चोदने लगा। इस बीच शायद ज़ोहरा का पानी तीन बार छूट चुका था पर अब भी वो वैसे ही मज़ा ले रही थी।
इसी तरह जब पोजीशन बदल-बदल कर उसे चोदते हम दोनों ही थक गए, तो दोनों ही उसे लेकर बिस्तर पर ऐसे लेट गए कि उसके दोनों तरफ लण्ड घुसाए मैं और विपिन चिपके थे और बीच में ज़ोहरा सैंडविच बनी हुई थी। ज़ोहरा का मुँह विपिन की तरफ था और वो उसके होंठ चूसने में लगा था और मैं ज़ोहरा की गाण्ड मारते पीठ से चिपका उसकी चूचियों को मसल रहा था।
फिर जब ज़ोहरा के शरीर में चरम आनन्द की लहरें महसूस हुईं तो हम भी उसी पल में चरमोत्कर्ष पर पहुँच गए और तीनों ही एक साथ आवाज़ें निकालते ऐसे झड़े कि हम दोनों के बीच भिचने से ज़ोहरा की हड्डियां तक चरमरा गईं और उसकी चूत और गाण्ड एक साथ ढेर सारे माल से भर गई। ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.
जब हम दोनों के लण्ड एकदम वीर्य से खाली होकर ‘सुकड़ने’ लगे तो दोनों ने ही लण्ड बाहर निकाल लिए और चित लेट कर बुरी तरह हांफने लगे। इस ताबड़तोड़ चुदाई ने हम तीनों को ही इस बुरी तरह थका डाला था कि जब निपट कर हम बिस्तर पर फैले तो दिमाग पर नशा सा सवार था और हमें पता भी न चला कि कब हम नींद की आगोश में चले गए।
मुझे नहीं पता कि कितनी देर बाद मेरी नींद टूटी लेकिन जब उठा तो आवाज़ें कानों में पड़ रही थीं और सामने नज़ारा यह था कि ज़ोहरा डॉगी स्टाइल में झुकी हुई थी, उसका चेहरा मेरे सामने था और चुदाई के नशे के कारण अजीब सा हो रहा था और वह मुझे देख रही थी। “Jordar Threesome Chudai Kahani”
जबकि विपिन पलंग के नीचे खड़ा उसकी चूत में अपना लण्ड पेले उसके चूतड़ों को थामे आंधी तूफ़ान की तरह उसे चोद रहा था और उसकी जाँघों से ज़ोहरा की गाण्ड के टकराने से ‘थप.. थप.. पट.. पट’ की पैदा होती आवाज़ कमरे में गूँज रही थी। इसी आवाज़ ने मुझे जगाया था।
मैं तो ज़ोहरा को चोदते ही रहता था लेकिन विपिन के लिए ज़ोहरा नया माल थी और ज़ोहरा के लिए भी विपिन एक नया और अलग ज़ायका था इसलिए ज़ाहिर था कि वह नहीं बाज़ आने वाले थे। मेरे होंठों पर मुस्कराहट आ गई और मुझे मुस्कराते देख ज़ोहरा भी मुस्कराने लगी और मैं अधलेटा हो कर उसे विपिन से चुदते हुए देखने लगा।
कमरे में ज़ोहरा की चूत पर चलते विपिन के लण्ड की ‘पक.. पक..’ और दोनों की जाँघें और गाण्ड टकराने से पैदा होती ‘थप.. थप..’ वैसे ही गूंजती रही। अच्छा है कि विपिन जी भर के उसे चोद ले… उसकी भी ख्वाहिश पूरी हो जाए मैं यही सोचते हुए फिर सो गया। आप को मेरी कहानी कैसी लगी, उत्साहवर्धन के लिए बताइएगा ज़रूर। [email protected]
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