मम्मी की चूत में सरसों का तेल लगा के पेला पापा ने

मेरे घर में तीन लोग रहते हैं मैं, माँ और पापा। हमारे घर में 1 बेडरूम है। मैं, पापा और माँ एक साथ सोते हैं। एक रात को मैंने देखा कि पापा माँ को किस कर रहे हैं। मैं चुपचाप देखने लगा। अब पापा ने माँ की साड़ी उतार दी। वो उनकी कमर को किस करने लगे। उनकी नाभि में उँगली घुसा रहे थे। Ghar Sex

अब उन्होंने माँ का ब्लाउज़ खोल दिया और ब्रा भी उतार दी। वो माँ के स्तनों को चूमने-चाटने लगे। अब उन्होंने माँ का पेटीकोट भी कमर तक चढ़ा दिया। फिर वो मम्मी के दाहिने चुची को धीरे-धीरे दबाने लगे। पापा के इस तरह से करते हुए देखकर मम्मी बोली, “ये क्या कर रहे हैं आप?”

तो पापा बोले कि “आज मैं तुम्हारी और अपनी इच्छा को पूरा करना चाहता हूँ।”

इस तरह से कहते हुए पापा मम्मी के चुचियों को दबाने लगे। पाँच-छह बार दबाने के बाद पापा ने अब मम्मी के दोनों हाथों को अपने एक हाथ से दबाकर रखा था। इसके बाद पापा ने मम्मी के कंधे के पास से बाल को हटाते हुए अपने होंठों को मम्मी के कंधे और गर्दन के बीच धीरे-धीरे रगड़ने लगे और मम्मी के चुची को धीरे-धीरे दबाने के साथ ही दूसरे हाथ से मम्मी की चूत को सहलाने लगे।

जैसे ही पापा ने मम्मी की चूत को सहलाना शुरू किया तो मम्मी अपने आप को रोक नहीं पाई और बोली, “ये क्या कर रहे हैं?”

पापा बोले, “तो क्या हुआ? उसे क्या पता कि ये क्या होता है। उससे बोल देंगे कि हम एक खेल खेल रहे हैं।”

पापा ने मम्मी की जाँघ को थोड़ा सा फैलाया क्योंकि उस वक्त तक मम्मी की दोनों जाँघें बिल्कुल ही सटी हुई थीं। अब मम्मी की चूत पूरी तरह से दिख रही थी। पापा ने डिब्बे से सरसों के तेल को निकाला और मम्मी की चूत पर लगाते हुए जब मम्मी की चूत को सहलाने लगे तो मम्मी ने पापा के लंड को उनके लुंगी से निकाल दिया जो कि आठ इंच लंबा था।

उसे लेकर मम्मी भी सहलाने लगी। अब मैंने देखा कि मम्मी और पापा लगभग एक मिनट तक यूँ ही अपने काम को अंजाम देते रहे। इसके बाद पापा मम्मी की जाँघ पर बैठ गए और माँ की चूत पर अपने लंड को जैसे ही सटाया तो मम्मी ने अपने दोनों हाथों से चूत को फैला दिया।

पापा ने मम्मी की चूत में अपने लंड को ले जाने के लिए अपने कमर को धीरे-धीरे सरकाना शुरू किया तो मम्मी ने अपने साँसें खींचनी शुरू कर दी। मैंने देखा कि पापा मम्मी की चूत में अपने लंड के टॉप को डाल दिया। अब पापा मम्मी के ऊपर लेट गए और अपने कमर को हिलाना शुरू कर दिया।

अब मम्मी के मुँह से “आह्ह्ह आह्ह्ह आह्ह्ह ओह्ह्ह आह्ह्ह ऊम्म्म ऊम्म्म” की आवाज़ निकलने लगी। कभी-कभी पापा ज़ोर-ज़ोर से झटके लगाते तो मम्मी पूरी तरह से हिल जाती थी। मम्मी ने अब अपने हाथों को पापा की पीठ पर रख लिया था और पापा की पीठ को सहला रही थी।

अब पापा मम्मी के गालों को चूमने लगे और अपने दोनों हाथों से मम्मी की दोनों चुचियों को दबाने लगे तो मम्मी भी मस्ती में “आह्ह्ह आह्ह्ह आह्ह्ह ओह्ह्ह आह्ह्ह ऊम्म्म ऊम्म्म आह्ह्ह आह्ह्ह आह्ह्ह ओह्ह्ह आह्ह्ह ऊम्म्म ऊम्म्म” की अजीब ही आवाज़ निकाल रही थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

कुछ देर में पापा ने अपने आधे लंड को मम्मी की चूत में डाल दिया था। अब पापा ने मम्मी के पैरों को फोल्ड कर लिया और मम्मी की जाँघों को फैलाते हुए अपने आप को मम्मी के दोनों पैरों के बीच में एडजस्ट किया। मम्मी ने ऐसा करने में उनकी मदद की।

अब पापा ने मम्मी को फिर से झटका देने शुरू किया तो मम्मी अपने गर्दन को उठा-उठा के आहें भरना शुरू कर दिया। अब पापा ने मम्मी से पूछा, “दर्द कर रहा है क्या?” तो मम्मी ने एक अजीब आवाज़ में कहते हुए जवाब दिया, “नहींीी आह्ह्ह ओह्ह्ह”।

अब पापा ने एक तरफ अपने कमर को ज़ोर से झटका मारा और दूसरी तरफ उन्होंने मम्मी की ब्रा को फाड़ दिया। मैंने मम्मी के मुँह से ज़ोर की चीख के साथ मम्मी के पैर को पटकते हुए देखकर समझ गया कि पापा ने न सिर्फ मम्मी की ब्रा को फाड़ा है बल्कि उन्होंने मम्मी की बुर को भी फाड़ दिया था।

अब पापा अपने कमर की स्पीड को बढ़ा दिया और कुछ ही देर में उनका पूरा लंड मम्मी की चूत में चला गया था। कुछ देर तक यूँ ही छटपटाने के बाद मम्मी ने अब पापा का पूरा साथ देना शुरू कर दिया। कुछ देर के बाद पापा मम्मी के होंठों को अपने होंठों में दबा लिया और अपने लंड को मम्मी की चूत में ज़ोर-ज़ोर से अंदर-बाहर-अंदर-बाहर करने लगे।

यह सिलसिला मैंने पूरे आधे घंटे तक देखा। तब जाकर दोनों संत पड़े रहे और सो गए। मैं वहीं खड़ा रात भर मम्मी को देखता रहा। भोर में जब मेरी नींद खुली तो मैंने देखा कि वो दोनों वैसे ही सोए हुए थे। अचानक मम्मी की नींद खुली तो वो अपने आप को उसके बाहों में नंगी अवस्था में देखा तो समझ गई। पापा भी जग गए थे।

अब पापा ने मम्मी के गाल पर एक चुमा लिया। अब पापा ने एक डिब्बे को लेकर आए और मम्मी की कमर के पास रखा। अब मम्मी की चूत में तेल लगाने लगे तो मम्मी ने भी अपने हाथों में तेल लेकर उनके लंड में तेल लगाने लगी। तेल लगाने के बाद वो मम्मी की जाँघ पर बैठ गए। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

अब मम्मी ने अपने चूत को फैला दिया। पापा ने अपने लंड को मम्मी की चूत पर सटाकर ज़ोर से झटका मारा तो मम्मी के मुँह से चीख को सुनकर समझ गया कि मम्मी की चूत में पापा का लंड चला गया। अब पापा ने मम्मी की चुचियों में तेल लगाने के बाद चुचियों को मसलने के साथ ही मम्मी की चूत में अपने लंड को अंदर और अंदर ले जाने के लिए ज़ोर-ज़ोर से झटके मारने लगे। मम्मी अपने प्यास को बुझा रही थी।

पापा कुछ देर तक यूँ ही मम्मी के ऊपर लेटे रहे। इसके बाद उठकर जब उन्होंने मम्मी की चूत से अपने लंड को निकाला तो मम्मी ने आँखें खोली और मुस्कुराते हुए अपने चेहरे को ढक लिया। तो पापा ने हँसते हुए बोला, “अब चेहरा क्या ढकाना है।” और उन्होंने मम्मी के हाथों को उनके चेहरे से हटाते हुए पूछा, “मज़ा आया क्या?” तो मम्मी ने सर हिलाते हुए जवाब दिया, “हाँ मज़ा आया।”

अब पापा मम्मी के ऊपर से हट गए। पापा ने अपनी लुंगी को पहन लिया। जैसे ही मैं उल्टी तरफ करवट लगाकर लेट गया, पापा उठकर माँ के पैरों के बीच बैठ गए और उनके पैरों को पकड़कर उनकी टखनों को चूमने और चूसने लगे। माँ अपनी पैर को खींचना चाह रही थी, लेकिन पापा ने उनको ज़ोर से पकड़ रखा था।

पापा ने माँ की दोनों टखनों को बारी-बारी से चूमा और चूसा और इससे माँ भी चुपचाप लेटी रही। मैंने अब उन लोगों की तरफ करवट ले ली। पापा उठकर माँ की कमर के पास जाकर बैठ गए। फिर पापा ने माँ की टाँगों को दबाने लगे। टाँग दबाते-दबाते पापा अपना हाथ ऊपर की तरफ बढ़ा रहे थे।

पापा के हाथों के साथ-साथ माँ की पेटीकोट भी उठ रहा था और पापा ने अपने हाथों से माँ की पेटीकोट उनकी घुटने के ऊपर तक उठा दी और उनकी टाँगें नंगी हो गईं। माँ बहुत डर रही थी और चुपचाप लेटी हुई थी। पापा धीरे-धीरे अपना हाथ माँ की जाँघों पर फेरने लगे और फिर धीरे से अपने हाथ को ऊपर की तरफ ले जाने लगे।

अब उनका हाथ माँ की कमर तक पहुँच गया और फिर रुक गया। वो माँ की कमर पर प्यार से हाथ फेरने लगे। उनकी कमर को चूमने लगे। अपना हाथ इधर-उधर घुमाकर पापा माँ की पेटीकोट के नाड़े तक पहुँच गए। पापा अपने एक हाथ माँ की चूत के ऊपर रखकर पेटीकोट का नाड़ा खींच दिया।

नाड़ा खींचते ही माँ का पेटीकोट ढीला होकर कमर पर खुल गया। पेटीकोट खोलने के बाद पापा अपना हाथ माँ की चुची पर ले गए और उनकी चुची को पकड़कर धीरे-धीरे दबाने लगे। माँ पापा के हाथ को हटाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन पापा ने अपना हाथ नहीं हटाया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

मैं बगल में लेटे हुए थे और मेरे डर के मारे माँ कुछ बोल नहीं पा रही थी। पापा भी चुपचाप माँ के बगल में बैठकर उनकी चुची से जी भरकर खेलते रहे और फिर बाद में उनकी ब्रा के हुक खोल दिए और उनकी ब्रा उतार दी। माँ उनको रोकती रही, लेकिन पापा उनकी चुची अपने मुँह में भरकर चूसने लगे।

पापा कुछ देर तक माँ की निप्पल और फिर उनकी चुची को चूसते रहे और फिर माँ को उल्टा लेटने के लिए कहा। माँ उल्टी लेट गई और पापा उनके नंगी पीठ को सहलाते रहे फिर उनकी ब्रा को उनके शरीर से खींचकर निकाल दिया। फिर पापा पीछे से अपना हाथ बढ़ाकर उनकी चुची को फिर से पकड़कर मसलने लगे और अपना मुँह नीचे की तरफ ले जाकर उनकी कमर और चूतड़ पर चुमा देने लगे।

माँ उनको रोक नहीं पा रही थी। फिर पापा माँ की टाँगों से उनकी पेटीकोट खींचकर उतार दिया और माँ पूरी तरह से नंगी हो गई और पापा के बगल में लेटी रही। अब पापा भी अपना शॉर्ट और अंडरवीयर उतार फेंका और उनकी टाँग को फैला दिया। पापा माँ की चूत को अपने हाथों में लेकर मसलने लगा और उसके अंदर उँगली पेलकर अंदर-बाहर करने लगे।

पापा माँ की चूत में तब तक उँगली पेलते रहे जब तक न चूत से काफी लार नहीं निकला और समझ गए कि अब माँ अपनी चूत चुदवाने के लिए तैयार है। फिर पापा अपने आप को माँ की खुली हुई जाँघों के बीच पोजीशन बनाकर अपना लंड उनके चूत पर रख दिया।

पापा अपना कमर हिलाकर अपना लंड माँ की चूत के अंदर डाल दिया। उनका लंड आसानी से माँ की चूत के अंदर समा गया और माँ भी अपनी कमर उचकाकर मेरे लंड को अपनी चूत की और गहराई में लेने की कोशिश करने लगी। पापा भी झटके मार-मारकर माँ को चोदना शुरू कर दिया।

मैं बगल में लेटे हुए था इसलिए वो ज़्यादा आवाज़ नहीं कर सकते थे और न ही ज़्यादा उछल-कूद कर सकते थे और इसलिए वो अपनी चुदाई बहुत धीरे-धीरे कर रहे थे। धीरे-धीरे चुदाई करने से उनको बहुत आनंद मिल रहा था और फायदा ये था कि पापा माँ को ज़्यादा देर तक चोद सकते थे। लेकिन माँ बहुत गरम हो गई थी। माँ ने अपना पैर उठाकर उनकी कमर पर रख दिया। पापा उनके पैरों को अपने हाथों से पकड़कर उनको धीरे-धीरे लेकिन गहरे और ज़ोरदार झटकों के साथ चोदने लगा।

फिर पापा ने देखा कि माँ अपनी चूतड़ अब ज़ोर-ज़ोर से और जल्दी-जल्दी उछाल रही है और अपने होंठों को चबा रही है। मैं समझ रहा था कि अगर मैं बगल में न सोता होता तो माँ ज़रूर अपनी कमर उचल-उचलकर उनका लंड अपनी चूत में लेती और बड़बड़ाती। फिर उन्होंने अपने दोनों पैरों को फिर से पापा की कमर पर रखकर कसके उनको पकड़ लिया। लेकिन तभी पापा ने मुझे जागते हुए देख लिया।

वो बोले, “बेटे तुम सोए नहीं?”

मैंने कहा, “नींद ही नहीं आ रही।”

उन्होंने पूछा, “क्यों?”

मैंने कहा, “आप मम्मी के साथ पता नहीं क्या कर रहे हो।”

Kavya Singh

नमस्ते! मैं काव्या सिंह हूँ - इलाहाबाद विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में मास्टर डिग्री वाली और पिछले 7 साल से हिंदी में इतनी बोल्ड कहानियाँ लिख रही हूँ कि पाठक दोबारा पढ़े बिना रह नहीं सकते। मैं भारतीय समाज के हर छुपे हुए जज़्बात को शब्दों में ढालती हूँ - वो इच्छाएँ, वो चाहतें जो आप दिन में छुपाते हैं लेकिन रात में महसूस करना चाहते हैं। राष्ट्रीय स्तर पर मेरी कहानियों को पुरस्कार मिले हैं और लाखों पाठकों ने मेरी कहानियों से अपनी रातों को गरमाया है। चलो, आज मेरी कहानी में डूब जाओ!

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