बेवा अम्मी की आग शांत की दोनों भाइयों ने-2

पिछला भाग पढ़े:- बेवा अम्मी की आग शांत की दोनों भाइयों ने-1

सेक्स कहानी के पिछले पार्ट में आपने पढ़ा कैसे मैंने अपने बेटों को मुठ मार कर माल निकालते देखा। अब आगे-

मैं सोच रही थी कि अब मेरे दोनों बेटे जवान हो गये थे। अब मुझे इन दोनों की शादी करवा देनी चाहिए। यहीं सब सोचते-सोचते ही मुझे नींद आ गई। मैं सुबह जब उठी तो दोनों बेटे जिम जा चुके थे। मैंने उनके लिए नाश्ता तैयार कर दिया और अपने डेली काम पे लग गई।

सारा दिन बीत गया और फिर रात को 9:30 मैं अपने रूम मैं चली गई। आज मैं सोई नहीं थी, जाग ही रही थी। बस मैं नाटक कर रही थी सोने का। करीब 12:30 बजे मैं अपने रूम मैं से बाहर आई तो देखा कि स्टडी रूम की लाइट जल रही थी। मैंने जब अपनी आंख दरवाजे के होल पे लगाई तो देखा कि वो दोनों अभी कंप्यूटर ऑन ही कर रहे थे और रहीम कह रहा था: राशिद, अम्मी सो गई कि नहीं? तूने ठीक से देखा कि नहीं?

तो राशिद बोला: हाँ मैंने देखा है। अम्मी सोई हुई हैं।

फिर उन्होने मूवी ऑन की और लग गये देखने, और साथ ही दोनों ने अपने लंड भी निकाल लिए थे और उन्हें भी मसलने लग गये थे। एक बार तो मेरा मन किया के दोनों को अन्दर जा कर अभी एक-एक थप्पड़ लगा दूँ। लेकिन फिर मैं वहीं पे ही खड़ी सब देखती रही।

और फिर कल रात की तरह आज भी दोनों ने फ्री हो कर कंप्यूटर बंद कर दिया और वो अपने रूम में चले गये। लेकिन मैं उनसे पहले ही अपने रूम में पहुँच चुकी थी। फिर एक हफ्ते वो स्टडी रूम में नहीं आए और फिर एक शनिवार रात वहीं सब हुआ जो एक हफ्ते पहले हुआ था।

अगले दिन वो मुझे ये कह कर गये कि माँ आज हम अपने दोस्तों के साथ कहीं बाहर जा रहे हैं, शाम को देर से लौटेंगे। तो मैंने कहा कि ठीक है और घर आ कर मैंने भी कंप्यूटर ऑन किया और चैटिंग करने लगी। चैटिंग करते-करते मेरी बात एक मुंबई के लड़के साहिल से हुई जो कि 28-29 साल का था। मैं काफ़ी देर उससे बातें करती रही और उसने मुझे अपने और मैंने उसे अपनी लाइफ के बारे मैं बताया।

तो वो बोला कि, “फिर तो आप बोर हो जाती होंगी?” तो मैंने कहा कि, “वो तो है।” तो उसने मुझे एक लिंक भेजते हुए कहा कि, “आंटी यहाँ पे कुछ कहानियां बहुत मजेदार होती हैं। जब बोर हो रहे होगे तो पढ़ लेना।” मैंने पूछा, “ये कैसी कहानियां हैं।” तो बोला कि, “जब आप पढ़ोगे तो पता चल जाएगा। बहुत मस्त होती हैं।” मैंने कहा कि ठीक है।

और फिर वो बोले कि अभी उसे जाना था हम कल बात करेंगे। मैंने कहा ठीक है और फिर उसने साइन आउट कर दिया। मैंने सोचा कि मैं क्या करूँ? मैंने वो लिंक पे क्लिक करा तो मेरी आँखें फटी की फटी ही रह गई। वहाँ पे लिखा था सेक्सी स्टोरी, देवर-भाभी, भाई-बहन और बाप-बेटी की कहानियां।

मैं ना चाहते हुए भी उन्हे पढ़ने लगी। मेरा मन नहीं मान रहा था उन्हे पढ़ने को। लेकिन फिर भी मैंने उन्हें पढ़ना बंद नहीं किया। फिर मैंने एक कहानी पढ़ी माँ और बेटे की। वो स्टोरी पढ़ते-पढ़ते मैं तो हैरान ही रह गई, और मैंने कंप्यूटर बंद कर दिया और उठ खड़ी हुई। लेकिन मेरे होश अपनी जगह पे नहीं थे कि क्या दुनिया में ऐसा भी हो सकता है।

फिर मैंने रात का खाना तैयार करा और इतने में रहीम और राशिद भी आ गये। फिर हमनें खाना खाया और हम अपने-अपने रूम में चले गये सोने के लिए। आज मैं रूम में जाते ही सो गई। लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी। रात के 12 बज चुके थे, लेकिन मैं जाग रही थी। करीब 1 बजे मैं उठी और रूम से बाहर निकली और स्टडी रूम के पास गई। लेकिन आज वहां पे कोई भी नहीं था। स्टडी रूम की लाइट बंद थी।

आज ना जाने को मेरा मन वहीं सब दुबारा देखने का हो रहा था। मैं वापिस अपने रूम मैं आ गई और सोने की कोशिश करने लगी। पता नहीं मुझे कितने बजे नींद आई, लेकिन सुबह उठी तो दोनों जिम जा चुके थे। अगले दिन फिर मैं जल्दी अपने रूम में चली गई और लेट गई। उस दिन भी मेरी आंखों में नींद नहीं थी।

मैं करीब 1 बजे उठी और स्टडी रूम की तरफ गई तो देखा कि लाइट जल रही थी। मैं झट से हाल के पास गई और अंदर देखने लगी। तो मैंने देखा कि आज भी दोनों अपने-अपने लंड को हिला रहे थे। लेकिन आज मुझे उन पर गुस्सा नहीं आ रहा था। ना जाने आज ये सब मुझे देखना अच्छा लग रहा था, और मेरा मन कर रहा था कि मैं ये सब देखती ही रहूं, और मेरा एक हाथ अपनी चूत को भी सहला रहा था।

मुझे लगा कि मेरे भी वहां पे खुजली होने लगी थी। फिर वो दोनों फ्री हो गये और कंप्यूटर बंद कर दिया। मैं जल्दी से अपने रूम में गई और सीधी बाथरूम में गई। मैंने अपनी नाईटी उपर की और पेंटी उतार कर अपनी चूत मैं उंगली आगे-पीछे करने लगी और कोई 5 मिनट बाद फ्री होकर आपने बेड पे आ गई।

मैंने सोने की कोशिश की लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी। आज बार-बार मेरी आँखों के सामने मेरे बेटों के तने हुए फूंकारते हुए लंड घूम रहे थे। मुझे बार-बार वहीं सीन याद आ रहे थे। मैंने आँखें बंद की तो लगा जैसे रहीम और राशिद कह रहे थे, “आओ अम्मी, आ जाओ, हम तुम्हारी प्यास बुझा देंगे, तुम हमारी बुझा दो।”

मैंने झट से आँखें खोल दी। आज वो स्टोरी पढ़ने के बाद मेरे मन में भी ये ख़याल आने लगे थे कि क्या ऐसा हो सकता था? क्या मैं भी अपने बेटों से चुदवा सकती थी? मज़े ले सकती थी? यही सब सोचते-सोचते रात निकल गई और सुबह सारा दिन स्कूल में मेरा मन नहीं लगा, और मैं जल्दी घर आ गई।

रात को फिर मैंने 1 बजे उठ कर देखने की कोशिश की। लेकिन आज फिर वो दोनों सो रहे थे। मैं आपने रूम में आ गई। मेरा मन कर रहा था कि मैं भी उन दोनों के बीच में बैठ कर आज वही मूवी उनके साथ देखूं। ये सब सोचते-सोचते मेरे मन ने फ़ैसला कर लिया था कि मैं अपने बेटों को पटाने की कोशिश करूँगी, और उनसे ही अपनी प्यास बुझाउंगी।

अगले दिन मैंने स्कूल से छुट्टी ले ली, ये कह कर कि मेरी तबीयत ठीक नहीं थी, और घर पे ही रहने का फ़ैसला किया। जब दोनों बेटे कॉलेज चले गये, तो मैंने पीछे से वहीं वेबसाइट खोली और उसपे मां-बेटे की और बाकी जो भी थी सभी कहानियां पढ़ी, ताकि ये सोच सकूँ कि मुझे अपने बेटों को कैसे पटाना था। और मैंने चैटिंग करने की कोशिश की साहिल से, लेकिन वो ऑनलाइन ही नहीं था। सो मैंने इस वेबसाइट के लिए उसे थैंक्स कहा।

मैं 1 बजे तक कहानियां पढ़ती रही, और फिर मैंने सारा प्लान तैयार कर लिया कि मुझे क्या करना था।

इसके आगे क्या हुआ, वो आपको अगले पार्ट में पता चलेगा।

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अगला भाग पढ़े:- बेवा अम्मी की आग शांत की दोनों भाइयों ने-3

Nisha Gupta

हैलो! मैं निशा गुप्ता हूँ - जयपुर विश्वविद्यालय से संचार विज्ञान में मास्टर और पिछले 6 साल से डिजिटल दुनिया में हिंदी कहानियाँ लिखने वाली एक अनुभवी लेखिका। मैं वो कहानियाँ लिखती हूँ जो पढ़ते ही आपके मन में आग लगा दें। मेरी कहानियों में वो सब कुछ है जो आप चाहते हैं - बोल्ड, बेबाक और बेरोकटोक। मेरे लेखन को हजारों पाठकों ने सराहा है और कई पुरस्कार भी मिले हैं। मैं यहीं हूँ आपके मज़े के लिए — तो लेटे रहो और पढ़ते जाओ!

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