बेवा अम्मी की आग शांत की दोनों भाइयों ने-3

पिछला भाग पढ़े:- बेवा अम्मी की आग शांत की दोनों भाइयों ने-2

हिंदी अन्तर्वासना कहानी अब आगे-

जब वो कॉलेज से आए, तो मैं पूरी तरह से रेडी थी। मैंने लो कट वाली नाईटी पहन ली थी, जो कि मैं ज्यादातर तब ही पहनती थी, जब मैं रात को अपने पति के साथ होती थी। क्यूंकि‌ उसमें से मेरी ब्रा और पेंटी हल्के-हल्के दिखाई देते थे।

उसका गला इतना नीचे था कि पहनी हुई ब्रा और चूची का उभार गले में से, अगर मैं थोडा झुक जाऊं, तो साफ दिखाई देता था। मैंने रात का खाना तैयार किया और टेबल पे लगा दिया।‌ फिर दोनों को आवाज़ लगी। खाने के लिए वो दोनों ही टेबल पे आ चुके थे। आज से पहले और अब से पहले मैं कभी भी उनके सामने इस नाईटी मैं नहीं गई थी।

अभी मुझे पहली बार उनके सामने जाना था इस नाईटी में। वो दोनों टेबल पे पास-पास बैठे हुए थे। जैसे ही मैं खाना लेकर उनके सामने गई तो, मुझे देखते ही दोनों की आँखों में मैंने कुछ चमक सी देखी। उन दोनों ने एक-दूसरे की तरफ देखा और थोड़ा सा मुस्कुरा पड़े। लेकिन मैंने उनकी तरफ देखा नहीं और उनके बिल्कुल सामने खड़ी होकर, थोड़ा झुक कर, उन्हें खाना और सब्जी देने लगी।

मेरे झुकने की वजह से मेरी ब्रा उन्हें सॉफ दिखाई देनी थी। मैंने देखा कि दोनों ही चोर नज़रों से मेरी चूचियों को ही घूर रहे थे। मैं मन ही मन अपने पे मुस्कुरा उठी कि पहली बार में ही मैं उन्हें अपना जलवा दिखाने में कामयाब हो गई हूं। फिर हमने खाना खा लिया और हम टीवी देखने लगे।

आज मैं उनके सामने सोफे पे बैठी हुई थी और मैंने देखा कि वो भी बार-बार मेरी तरफ देख रहे थे। लेकिन मैंने ऐसे शो किया जैसे मुझे पता ही ना हो। फिर वो जब भी मेरी तरफ देखते, मैं जान-बूझ कर अपनी चूची को थोड़ा सा मसल देती या उन्हें सहलाने लगती, और कभी-कभी उन्हें अपने हाथों से उपर को उठाती।

मैंने देखा कि मैं जब भी ऐसा करती थी, वो मेरी तरफ ही देख रहे होते थे। फिर रात के 9 बज गये और मैं अपने रूम मैं चली गई। ऐसे ही 1-2 हफ्ते बीत गये, लेकिन बात इससे आगे नहीं बढ़ रही थी और ना ही लास्ट 1-2 हफ्ते से वो रात को स्टडी रूम में आए थे।

एक शनिवार जब हम खाना खाने के बाद टीवी देखने के लिए बैठे, तो मैंने आज उन्हें अपनी चूची को मसलना तो दिखाया ही, साथ ही जब भी वो देखते थे, मैं अपनी चूत को भी एक हाथ से सहला देती थी। ऐसे जैसे की खुजली कर रही हूं। आज मैंने देखा कि मैं जब भी उनकी तरफ देखती थी, तो वो दोनों ही अपने अपने लंड को सहलाने लगते थे। मुझे लगा कि अब बात कुछ आगे बढ़ रही थी।

मैंने देखा कि उनके लंड उनकी पैंट मैं तने हुए थे और फनफना रहे थे। मुझे देखते ही वो उन्हें मसल देते थे। फिर करीब 9 बजे मैं अपने रूम में चली गई। आज मेरे मन में कुछ और ही करने का इरादा था। मैं सो गई और 12 बजे बाहर गई। लेकिन वो आज भी वहां नहीं थे। सुबह जब मैं उठी तो मैं सबसे पहले उनके रूम में गई। मैंने देखा कि वो दोनों जिम जा चुके थे।

मैं अपने रूम मैं वापिस आई। मैंने अपने बाथरूम का नल खराब कर दिया और नाश्ता बनाने लग गई। जब वो दोनों वापिस आए तो मैंने रूम में ही उन्हें नाश्ता पकड़ा दिया। वो दोनों खाने लगे तो मैंने कहा कि और कुछ चाहिए। तो दोनों ने मेरे बूब्स को घूरते हुए कहा: कि नहीं।

तो मैंने कहा कि: ठीक है, फिर मैं आज यहाँ पे तुम्हारे बाथरूम में नहा लेती हूं। मेरे बाथरूम का नल खराब हो गया है।

मैंने रहीम से कहा कि कॉलेज से आते वक़्त वो प्लंबर को साथ में ले आए, ताकि वो नल ठीक कर सके। तो वो बोले कि ठीक है। मैं अपने रूम में गई। वहां से अपनी ब्रा-पेंटी और दूसरे कपड़े लेकर आ गई, और बाथरूम में घुस गई। मैंने ये सब सिर्फ़ इसलिए किया था कि मैं सिर्फ़ ये देखना चाहती थी कि उन पर कुछ असर हुआ भी था कि नहीं। अगर उन पर असर हुआ था, तो क्या वो अपनी माँ को नंगी देखते हैं कि नहीं। अगर नहीं देखते तो मेरी सारी मेहनत बेकार थी।

मैं जैसे ही बाथरूम मैं घुसी, मैंने अपनी आँखें दरवाजे के होल पे लगा दी और देखा कि उन्होने जल्दी से नाश्ता खत्म किया और रहीम बाथरूम की तरफ आ गया। राशिद को उसने अपने रूम की तरफ जाने को कहा। मैं समझ गई कि वो उस रूम में से मुझे देखेगा। जब रहीम होल पे झुकने लगा, तो मैं पीछे हट गई और मैं अपने कपड़े उतारने लग गई।

अब मैं जान-बूझ कर होल के बिल्कुल सामने ब्रा और पेंटी में खड़ी थी। फिर मैंने धीरे से ब्रा उतारी और फिर पेंटी भी उतार दी और मैंने शावर ऑन कर दिया। अब मैं कभी रहीम को और कभी राशिद को अपनी चूत के दीदार करवा रही थी। मेरी चूत पे काफ़ी बॉल उगे हुए थे। मुझे पता था कि दोनों ही बहुत बेताब हो कर अपनी माँ को नहाते हुए देख रहे होंगे।

मैंने दोनों के सामने खूब मसला अपनी चूची को और अपनी चूत को और फिर नहा कर कपड़े पहनने लगी। जब मैं बाहर आई तो रहीम और राशिद बेड पे बैठे हुए थे।

मैंने दोनों की तरफ हल्की सी मुस्कान उछालते हुए पूछा: नाश्ता कर लिया बच्चों?

तो वो बोले कि: हाँ कर लिया अम्मी।

फिर मैं अपने रूम में गई। अब मुझे तसल्ली थी कि मैं जल्दी ही कामयाब हो जाऊंगी। फिर रात को हम टीवी देखने के बाद अपने-अपने रूम में चले गये और मैं सोने का नाटक करने लगी। करीब 12:30 बजे मैं उठी और स्टडी रूम की तरफ गई। वहाँ पे जाते ही मेरी आखें चमक उठी। मैंने देखा कि स्टडी रूम की लाइट जल रही थी।

इसका मतलब था कि वो दोनों ही अन्दर थे। मैंने की-होल से आखें सटा दी। मैंने देखा कि उनके लंड तने हुए थे और उनके हाथों में थे। वो मस्त हो कर मुठ मार रहे थे। तभी मेरे कानों में राशिद की आवाज़ पड़ी।

वो बोला कि: भाईजान आपसे एक बात कहूं तो नाराज़ तो नहीं हो जाओगे?

तो रहीम बोला कि: पागल है तू, आज तक मैं नाराज़ हुआ हूं कभी तुझसे भला भाई? बोल क्या बात है?

राशिद: भाईजान बात ये है कि क्या तुम्हें नहीं लगता कि आज कल माँ कुछ सेक्सी सी होती जा रही हैं?

रहीम बोला: वो कैसे?

तो राशिद बोला: आज कल वो नाईटी देखी है आपने उनकी?

तो रहीम बोला: पगले एक बात मैं कहूं?

तो राशिद बोला: कहिए।

रहीम बोला: जो भी है हमारी अम्मी है। बड़ी मस्त चीज़ है। हमारी अम्मी का फिगर बहुत कमाल का है। अरे पगले, मेरा तो मन करता है कि आज ये मूवी बंद कर और माँ के नाम पे मूठ मार लू।

तो राशिद बोला: मन तो मेरा भी ऐसा ही है।

और उनकी ये बातें सुन कर तो मैं मस्त हो उठी थी कि मेरा तीर निशाने पे लगा है।

इसके आगे क्या हुआ, वो अगले पार्ट में पता चलेगा।

अगला भाग पढ़े:- बेवा अम्मी की आग शांत की दोनों भाइयों ने-4

Nisha Gupta

हैलो! मैं निशा गुप्ता हूँ - जयपुर विश्वविद्यालय से संचार विज्ञान में मास्टर और पिछले 6 साल से डिजिटल दुनिया में हिंदी कहानियाँ लिखने वाली एक अनुभवी लेखिका। मैं वो कहानियाँ लिखती हूँ जो पढ़ते ही आपके मन में आग लगा दें। मेरी कहानियों में वो सब कुछ है जो आप चाहते हैं - बोल्ड, बेबाक और बेरोकटोक। मेरे लेखन को हजारों पाठकों ने सराहा है और कई पुरस्कार भी मिले हैं। मैं यहीं हूँ आपके मज़े के लिए — तो लेटे रहो और पढ़ते जाओ!

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