मामा जी के साथ मेरी मस्त रंगरलियां-3

पिछला भाग पढ़े:- मामा जी के साथ मेरी मस्त रंगरलियां-2

हिंदी सेक्स कहानी अब आगे-

“मेरी नज़र मामा जी के लंड से हट ही नहीं रही थी। मैं तो बस यही सोच रही थी कि ऐसा भी लंड होता है क्या इतना लम्बा, इतना मोटा। मुझे एक बार तो विश्वास ही नही हुआ कि ऐसा भी लंड किसी इंसान का भी हो सकता है?”

“इतना बड़ा लंड देख कर मेरी फुद्दी, जो कुलभूषण से चुदाई करवाने के चक्कर में पहले से ही गीली थी, उसमें बाढ़ आ गयी। एक-दम से मेरे दिमाग़ में ये सवाल आया कि जब ये लंड किसी लड़की की फुद्दी में जाता होगा तो फुद्दी का क्या हाल हो जाता होगा?”

“दुसरे ही सेकंड में मेरे मन में एक और ख्याल आ गया – “इतना मोटा लंड जाता ही कैसे पता होगा लड़की की फुद्दी में?”

“इसके साथ ही मेरे मन में एक और ख्याल आया जब मामा जी ने कहा था, “कुलभूषण, मुझे नहीं जरूरत पड़ती लड़की पटाने की एक पटी कि वो फिर खुद ही अपनी सहेलियों को, अपनी भाभी को, अपनी ननद को वो खुद ही मेरे पास ले आती थी।”

“बिजली की तरह ये सब ख्याल मेरे दिमाग में चल रहे थे, “तो क्या ये सब मामा जी के इस लंड का कमाल था जो घोड़े के लंड जैसा मोटा और लम्बा था?”

“कहां तो मैं सोच रही थी कि अगले दिन मैं कुलभूषण से मामा जी के बार-बार मुझे देखते हुए लंड खुजलाने वाली बात करूंगी और अब? मैं सब कुछ भूल चुकी थी। ना तो मैं हिल ही पा रही थी और ना ही मेरे नजर मामा जी के लंड से हट ही रही थी। मेरी फुद्दी कुलबुलाने लग गयी थी।”

“मुझे लग रहा था जैसे मामा जी का लंड मेरी फुद्दी में है और मुझे अपनी फुद्दी मामा जी के लंड से भरी हुई लगने लगी थी। मैंने अपने दिमाग से ये ख्याल झटकने की कोशिश की, मगर मेरी नज़र मामा जी के इतने बड़े लंड से हट ही नहीं रही थी।”

“अचानक मामा जी घूमे और मामा जी की नज़र मुझ पर पड़ गयी। मामा जी पेशाब कर चुके थे, मगर मामा जी ने अपना खड़ा लंड हाथ में ही पकड़ा हुआ था। मामा जी अपने लंड को आगे-पीछे करते हुए मेरे तरफ आने लगे और मेरे सामने आ कर बोले, “क्या हुआ किरण यहां क्या कर रही हो? बाथरूम जाना है?”

“मेरे पैर तो जैसे फर्श के साथ चिपक गए थे, मेरी जुबान को जैसे ताला लग गया था। मेरी नज़र मामा जी के मोटे लम्बे लंड से हट ही रही थी।”

“कुलभूषण का मेरे लंड पकड़ने के बावजूद कोइ हरकत ना करना और अब मामा जी का ऐसा लम्बा मोटा लंड देख कर – मेरी फुद्दी जो पहले से ही गरम थी अब उसमे में आग लग चुकी थी।”

“अब मुझे उसी वक़्त चुदाई चाहिए थी।” “मामा जी उसी तरह लंड पकड़े-पकड़े और लंड को आगे-पीछे करते हुए मेरे बिल्कुल मेरे सामने ही आ गए और मेरे कंधे पर हाथ रख कर बोले, “क्या हुआ किरण, तबीयत ठीक है? कुलभूषण सोया हुआ है क्या?”

“जिस तरीके से मामा जी ने अपना लंड पकड़ा हुआ था और जिस तरीका से मामा जी लंड आगे-पीछे कर रहे थे जैसे मुट्ठ मार रहे हों – देख कर कर मेरी तो जैसे आवाज़ ही बंद हो चुकी थी।”

“मुझे तो जैसे लकवा मार गया था – ना मैं हिल ही पा रही थी, ना ही कुछ बोल ही पा रही थी।”

“मामा जी कुछ देर ऐसे ही खड़े मेरी तरफ देखते रहे और फिर मामा जी नंगे तो थे ही। मामा जी ने अपना हाथ मेरे कंधे पर से हटा कर मुझे कमर से पकड़ा और बोले, “चलो किरण यहां क्यों खड़ी हो चलो, अंदर कमरे में चलते हैं। मामा जी का एक हाथ मेरी कमर में था और दूसरे हाथ में मामा जी ने अपना लंड पकड़ा हुआ था।”

“मैं मामा जी के साथ खींचती चली गयी। अंदर आ कर मामा जी ने मुझे फिर पूछा, “किरण तबीयत तो ठीक है?”

“मैंने फिर भी कुछ जवाब नहीं दिया और तब मामा जी ने अपना लंड छोड़ा और मुझे बिस्तर पर सीधा लिटा दिया। मेरा दिमाग़ काम नहीं कर रहा था। मुझे समझ नहीं आ रहा था ये क्या हो रहा था। मैं यहां क्यों आई हूं, मामा जी क्या कर रहे हैं?”

“मामा जी ने मेरी सलवार उतार दी और मेरे चूतड़ों के नीचे तकिया रख दिया। मेरी टांगें उठा कर फैला दी। मामा जी ने मेरी टांगें चौड़ी कर के एक बार मेरे फुद्दी चूसी और हाथ से लंड पकड़ कर मेरी फुद्दी पर रखा और फुद्दी में ऊपर-नीचे करने लगे।”

“जैसे ही मामा जी का लंड फुद्दी के छेद पर जरा सा अटका, तो मामा जी एक पल के लिये रुके। मामा जी ने लंड एक झटका लगाया और पूरा लंड मेरी चिकने पानी से भरी फुद्दी में अंदर तक बिठा दिया।”

“मेरी कलाई से भी मोटे मामा जी का लंड जैसे ही मेरी फुद्दी में गया, मेरी फुद्दी एक-दम फ़ैल गयी। जैसे ही मामा जी का लंड मेरी फुद्दी में गया, मेरी पूरी फुद्दी में एक अजीब सी सनसनाहट हुई और मुझे ऐसा मजा आया जैसा कभी भी नहीं आया था। मेरे मुंह से एक हल्की सी सिसकारी निकली – मज़े की सिसकारी “आह।”

“फुद्दी तो मेरी गरम ही थी मोटे लंड से जैसी ही मेरी फुद्दी फ़ैली, मुझे लगा मुझे तो मजा ही आने वाला है, मेरी फुद्दी पानी छोड़ने वाली है।”

“और वही हुआ भी। जैसे ही मामा जी ने चुदाई का धक्का लगाने के लिए लंड थोड़ा सा बाहर निकाल कर अंदर किया, मेरी फुद्दी पानी छोड़ गयी और मुझे मजा आ गया।”

“मेरे मुंह से अपने आप ही निकल गया, “ये क्या हुआ, मुझे तो मजा भी आ गया।” और हो गयी मामा जी के साथ मस्त चुदाई।

“मामा जी ने बस इतना ही कहा, “आह किरण”, और मामा जी ने मुझे अपनी बाहों में जकड़ लिया, मेरे होंठ अपने होंठों में ले लिए पूरी रफ़्तार से मुझे चोदने लगे। मामा जी की चुदाई मस्त थी। मामा जी का मोटा लंड फुद्दी में मस्त रगड़े लगा रहा था – पूरी फुद्दी की गहराई तक तो मामा जी का लम्बा लंड जा ही रहा था। जन्नत जैसा मजा मिल रहा था मुझे इस चुदाई में।”

“मुझे एक बार और मजा आ गया और फिर तीसरी बार मजा आ गया। आधा घंटा हो चुका था मामा जी का लंड मेरी फुद्दी में था और मामा जी अब भी मस्त चोद रहे थे मुझे l मैं हैरान थी कि इतनी चुदाई के बाद भी मामा जी का लंड पानी क्यों नहीं छोड़ रहा।”

“चौथी बार जैसे ही मुझे मजा आने वाला हुआ और जैसे ही मेरे चूतड़ घूमे और मामा जी के धक्कों की रफ़्तार एक-दम बढ़ गयी। मामा जी ने मेरे होंठ छोड़े जोर से दहाड़े, “आअह किरण निकल गया मेरी जान किरण निकल गया तेरी टाइट फुद्दी में। आह किरण मजा आ गया आज तो चुदाई का। क्या मस्त टाइट फुद्दी है। आह किरण मेरी जान। इतना बोल कर मामा जी ने फिर से मेरे होंठ अपने होंठों में ले लिए।”

“मामा जी के लंड से गरम-गरम गाढ़ा शहद निकल कर मेरी फुद्दी में जा रहा था और मुझे जन्नत जैसा मजा आ रहा था।”

“मामा जी को मजा आ चुका था। मामा जी के धक्के मेरी फुद्दी में रुक चुके थे, लेकिन मामा जी मेरे ऊपर ही लेटे हुए थे। मामा जी का लंड गरम-गरम पानी मेरी फुद्दी में निकाल चुका था। मेरी फुद्दी मामा जी के लेसदार गरम पानी से भरी पड़ी थी।”

“कुछ देर मामा जी ऐसे ही मेरे ऊपर लेटे रहे। जैसे ही मामा जी का लंड ज़रा सा ढीला हुआ, मामा जी ने मेरे होंठ छोड़े मेरे ऊपर से उतरे और बस इतना ही कहा, “आज तो मज़ा ही आ गया” और जा कर सोफे पर बैठ गए।”

“मैं भी उठी और बिना मामा जी की तरफ देखे, बिना कुछ बोले मैंने अपनी सलवार उठाई और लगभग भागती हुए अपने कमरे में आ गयी और बिस्तर पर नंगी ही लेट गयी।”

“मज़े के मारे अभी भी मेरी फुद्दी अभी फड़क रही थी। मुझे विशवास ही नहीं हो रहा था कि मामा जी का हाथी की सूंड जैसा लंड मैं फुद्दी में डलवा कर आयी हूं – मामा जी से चुदाई करवा कर आयी हूं, और इतना मजा भी आ सकता है चुदाई का?”

“मुझे सच में विश्वास ही नहीं ही हो रहा था कभी चुदाई का इतना मजा भी आता है? मैं लेटी हुई थी मगर मामा जी का लंड मेरे आँखों के आगे से हट ही नहीं रहा था। पंद्रह मिनट मैं ऐसे ही लेटी। फिर मैं उठी और मैंने अपनी कमीज भी उतार दी और लेटे लेटे अपने मम्मों के निप्पल मसलने लगी।”

“मेरी फुद्दी में फिर से कुछ कुछ होने लगा। मेरा मन फिर से चुदाई करवाने का होने लगा। मैंने करवट ली और कुलभूषण का लंड हाथ में ले लिया।”

“मैंने सोचा कुलभूषण से ही एक चुदाई करवा लूं। कुलभूषण का लंड बिलकुल ढीला था। मेरे हिलाने से भी ना तो कुलभूषण ले लंड में ही कोइ हरकत हुई और ना ही कुलभूषण में ही कोइ हरकत हुई। कुलभूषण बड़ी ही गहरी नींद में था।”

“मेरी फुद्दी फिर से गरम हो चुकी थी। मैंने अपनी फुद्दी में उंगली डाली, फुद्दी चिकनी पड़ी थी।”

“मैं लेटी हुई अपनी फुद्दी में उंगली करके फुद्दी का पानी छुड़ाने के चक्कर में थी। मगर मामा जी का मोटा लंबा लंड मेरी आँखों के आगे से हट ही नहीं रहा था।”

“उंगली से मेरी फुद्दी का कुछ भी नहीं हो रहा था, मुझे एक मस्त लंड चाहिए था एक मर्द का लंड, वो भी तभी के तभी – कुलभूषण का लंड – मस्त चुदाई चाहिए थी मुझे उस वक़्त।”

“मगर कुलभूषण तो नशे में धुत्त हो कर सोया हुआ था। फुद्दी मारना तो दूर वो तो लंड पकड़ कर पेशाब करने की भी हालत में नहीं था।”

“मेरे बस में कुछ नहीं रहा था, मेरा दिमाग़ ही काम ही नहीं कर रहा था। अचानक से मैं उठी और मशीन की तरह नंगी ही मामा जी के कमरे की तरफ बढ़ गयी।”

“मामा जी के कमरे का दरवाजा खुला ही था। मामा जी सोफे पर बैठे जैसा मैं मामा जी को छोड़ कर गयी थी। मामा जी के हाथ में व्हिस्की से भरा गिलास था और मामा जी का लंड तना हुआ था बिलकुल सीधा – घोड़े के लंड जैसा लम्बा मोटा लंड। मामा जी बस इतना ही बोले, “आओ किरण।”

“और ये कह कर मामा जी ने लंड अपने हाथ में ले लिया।”

“मैं बिना कुछ बोले जा कर मामा जी के सामने बैठ गयी और मामा जी का लंड मुंह में ले लिया।”

“मामा जी बोले कुछ नही, बस आह किरण, आह मेरी किरण बोलते हुए मेरे सर पर हाथ फेरते रहे।”

“थोड़ी देर मामा जी का लंड चूसने के बाद, जब मुझसे नहीं रहा गया तो मैं उठी और जा कर बेड के किनारे पर बैठ गयी और मामा जी की तरफ देखने लगी।”

“अगले ही पल मामा जी ने मामा जी ने मुझे वहीं बैठे बैठे पीछे की तरफ लिटा कर मेरे चूतड़ों के नीचे एक मोटा तकिया रख कर मेरी फुद्दी ऊंची कर दी और नीचे बैठ कर हाथ के अंगूठों से मेरी फुद्दी फैला कर मेरी फुद्दी चूसने चाटने लगे।”

“मामा जी की चुदाई में तो जादू था ही था, मामा जी की चुसाई भी कमाल की थी।” जल्दी ही मेरी फुद्दी में आग लग गयी। मेरे चूतड़ घूमने लगे। मामा जी समझ गए कि मेरी फुद्दी गरम हो चुकी थी और लंड मांग रही है।”

“मामा जी उठे और टांगें थोड़ी से और ऊपर करके लंड फुद्दी के छेद पर रखा और एक ही झटके से लंड पूरा फुद्दी में बिठा दिया। मामा जी का लंड पूरा जड़ तक मेरी फुद्दी के अंदर था। मुझे मामा जी के लंड का टोपा अपनी फुद्दी के आख़री हिस्से पर महसूस हो रहा था, और मामा जी के बड़े बड़े टट्टे, फुद्दी के नीचे की तरफ, चूतड़ों पर टकराते हुए महसूस हो रहे थे।”

“मामा जी के मोटे लंड से मेरी फुद्दी तो पहले की तरह ही फ़ैल गयी थी। मामा जी ने मुझे चोदना शुरू ही किया था कि मुझे पहले की ही तरह एक-दम ही मजा आ गया।”

“ने चिल्लाई, “मामा जी ये तो मुझे फिर मजा भी आ गया।”

“मामा जी बोले, “कोइ बात नहीं किरण बेटा, अभी तो बहुत मजे आएंगे, और मामा जीने मुझे चोदना जारी रखा।”

“क्या मस्त चुदाई थी – मन तो कर रहा था ये चुदाई कभी खत्म ही ना हो।” [email protected]

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Nisha Gupta

हैलो! मैं निशा गुप्ता हूँ - जयपुर विश्वविद्यालय से संचार विज्ञान में मास्टर और पिछले 6 साल से डिजिटल दुनिया में हिंदी कहानियाँ लिखने वाली एक अनुभवी लेखिका। मैं वो कहानियाँ लिखती हूँ जो पढ़ते ही आपके मन में आग लगा दें। मेरी कहानियों में वो सब कुछ है जो आप चाहते हैं - बोल्ड, बेबाक और बेरोकटोक। मेरे लेखन को हजारों पाठकों ने सराहा है और कई पुरस्कार भी मिले हैं। मैं यहीं हूँ आपके मज़े के लिए — तो लेटे रहो और पढ़ते जाओ!

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