मामा जी के साथ मेरी मस्त रंगरलियां-8

पिछला भाग पढ़े:- मामा जी के साथ मेरी मस्त रंगरलियां-7

हिंदी चुदाई कहानी अब आगे-

“मैं सोफे पर उलटे पीछे की तरफ चूतड़ करके लेटी हुई थी।”

“मामा जी ने एक बार मेरी चूतड़ों का छेद चाटा, और अगले ही पल मामा जी का लम्बा मोटा लौड़ा मेरी फुद्दी में अंदर था। हमेशा की तरह ऐसे ही लेटे-लेटे पूरे एक घंटा चोदा मामा जी ने मुझे। हमेशा की तरह मुझे कई बार मजा आया, मगर मामा जी का लंड खड़े का खड़ा ही था – वो भी हमेशा की तरह।

“खैर, जब मुझे इस चुदाई के तीन चार मजे आ गए, तो हम दोनों जा का बिस्तर पर लेट गए। लेटे-लेटे मुझे मामा जी की वो वाली बात याद आ गई जब मामा जी ने कहा था किरण एक ज़बरदस्त आईडिया है मेरे पास, मजा आ जाएगा तुम्हें चैल में – ऐसा मजा कि पूरी ज़िंदगी याद रहेगा तुम्हें।”

“मैंने मामा जी से पूछा, “मामा जी, आप जो कह रहे थे किरण तुम चैल आओगी तो चैल में हम कुछ और भी प्रोग्राम बनाएंगे – ऐसा प्रोग्राम कि मजा आ जाएगा तुम्हें – ऐसा मजा की पूरी ज़िंदगी याद रहेगा तुम्हें। कैसे प्रोग्राम की बात कर रहे थे आप मामा जी?”

मामा जी जी बोले, “अरे किरण अभी क्यों, एक बार पहुंच तो जाओ चैल, फिर अपने आप पता चल जाएगा।”

“मैंने कहा, “मामा जी इतना इंतजार नहीं हो पायेगा, आप अभी ही बताइये। ये कहते हुए मैंने मामा जी का खड़ा लंड हल्के से दबा दिया।”

“मामा जी बोले, “तो चलो सोफे पर बैठ कर आराम से बात करते हैं।”

“हम दोनों जा कर सोफे पर बैठ गए। मैंने मामा जी का मोटा खड़ा लंड फिर से हाथ में ले लिया।”

“मामा जी कुछ देर सोचते रहे, फिर बोले, “किरण जितना मजा तुम्हें मैं दे रहा हूं, इतना ही मजा चैल में तुम्हें तुम्हारी मामी नाती भी देगी।”

“मैं हैरान से बोली, “नाती मामी मुझे मजा देंगी, मतलब? और कैसे मजा देगी नाती मामी मामा जी?”

“मामा जी ने मेरे फुद्दी पर हाथ रख दिया और उंगली फुद्दी में ऊपर-नीचे करते हुए बोले, “किरण नाती बहुत कुछ करेगी तुम्हारे साथ – तुम्हारी फुद्दी चूसेगी, तुम्हारी फुद्दी के साथ अपनी फुद्दी से धक्के लगाएगी जैसे तुम्हारी चुदाई कर रही हो। यही सब नाती तुमसे भी अपने साथ भी करवाएगी।”

“मेरी हैरान की सीमा नहीं थी – ये मैं क्या सुन रही हूं? नाती मामी, और ये सब?”

“मैं उसी हैरानी के साथ बोली, “फुद्दी चूस कर फुद्दी चुसवा कर? मतलब लेस्बियनों – समलैंगिकों वाले काम करके? नाती मामी समलैंगिक भी है? और फिर मामा जी आपके घर होते हुए आपके सामने ही ये सब करेगी नाती मामी?”

“मामा जी ने मेरी फुद्दी में उंगली डालने की कोशिश करने लगे। सीधा टांगें नीचे करके बैठी होने के कारण, मामा जी की उंगली मेरी फुद्दी मैं जा नहीं पा रही थी, मैंने टांगे उठा कर सोफे पर रख दी और दोनों टांगे फैला दी। मेरी फुद्दी थोड़ी सी खुल गयी और मैंने कहा, “लो मामा जी, अब डाल लो फुद्दी में उंगली, अब आराम से जाएगी।”

“ये कहते हुए मैं हंस दी।”

“और जब मामा जी ने उंगली डाली तो मामा जी की उंगली मेरी चिकनी हुई पड़ी चूत के अंदर आराम से चली गयी। मामा जी कुछ देर उंगली मेरी फुद्दी में अंदर-बाहर करते रहे फिर बोले, “किरण नाती कोइ लेस्बियन-वेस्बिअन नहीं है।”

“ये बोल कर फिर मामा जी कुछ देर चुप हो गए और मैं मामा जी की तरफ देखती रही। मैं समझ गयी थी कि मामा जी कुछ और भी कहना चाहते हैं।”

“कुछ देर बाद मामा जी बोले, “किरण, असल में चैल में हम पांच दोस्त हैं, हम पांचों आपस में ग्रुप सेक्स करते हैं l शहरी भाषा में कहें तो वाइफ स्वैपिंग – बीवियों की अदला बदली – तू मेरी बीवी चोद, मैं तेरी बीवी चोदूंगा। तू भी मजे ले नई फुद्दी के, मैं भी मजे लूंगा नई फुद्दी के।”

“मैं हैरान!

“बीवियों की अदला-बदली? मैंने मामा जी से पूछा, “मामा जी ये क्या बोल रहे हो आप? बीवियों की अदला-बदली? मतलब? मैं समझी नहीं।”

“मामा जी बोले, “मतलब साफ़ है किरण – हम दोस्त आपस में “हम दोस्तों में ये होता है – तू मेरी बीवी चोद मैं तेरी बीवी चोदता हूं।”

“फिर मामा जी बोले, “और किरण ये ग्रुप सेक्स में ये सब लोग एक-दूसरे के सामने करते हैं, एक ही कमरे में – एक-दूसरे के सामने एक-दूसरे की बीवी की चुदाई करते हैं – और कभी-कभी तो ये सब एक ही बेड, एक ही बिस्तर पर भी हो जाता है।”

“मैंने हैरानी से कहा, “कमाल है मामा जी, ऐसा भी होता है क्या?”

“मामा जी बोले, “होता है किरण बेटा होता है, आज कल सभी छोटे बड़े शहरों में ये होने लग गया है।”

“मैंने पूछा तो मामा जी आप लोग? मेरा मतलब आप और आपके दोस्त, आप ये सब कैसे, कहां करते हो?”

“मामा जी बोले, “किरण जैसा कि मैंने बताया, हम पांच दोस्त हैं – मैं, अमर, हेमंत, केशव और सुनील, और हमारी बीवियां। हम पांचों का ये ग्रुप है। पहले ये चार का ग्रुप था, मैं और नाती इसमें नहीं थे इस ग्रुप में। मगर तेरी मामी नाती से ऐसा कुछ हो गया कि हम भी इस ग्रुप में आ गए।”

“मामा जी बता रहे थे, “किरण हम पांचों दोस्त तो बहुत पहले से ही थे – बचपन से ही एक-दूसरे को जानते हैं। चैल कोइ लुधियाना या अमृतसर तो है नहीं, छोटा सा शहर है। हम चारों इक्क्ठे ही पढ़े हैं। हेमंत हमसे दो या शायद तीन क्लास आगे था, लेकिन वो था हमारा दोस्त ही।”

“अब हम पांचों की ही चैल के मेन बाजार में बड़ी-बड़ी दुकाने, शोरूम्स हैं। हम चारों ही अच्छा कमा खा रहे हैं, सब करोड़ों में खेल रहे हैं। वैसे भी हम पांचों खानदानी अमीर हैं।”

“हमारे दोस्तों में एक है अमर, अमर की बीवी है पुष्पा। अमर का लिबर्टी शूज़ का बहुत बड़ा शो रूम है। दूसरा है केशव, केशव की बीवी है कैलाश। केशव का दवाईयों का होलसेल का काम है और साथ ही केमिस्ट के शॉप है।”

तीसरा है हेमंत। हेमंत की बीवी है सीमा। ये ग्रुप सेक्स सीमा की पहल से ही शुरू हुआ है। उम्र में हेमंत और सीमा सब से बड़े है – बत्तीस-तैत्तीस के होंगे। हेमंत सब से अमीर भी है। हेमंत की चैल के मेन बाजार मैं बेकरी की बहुत बड़ी शॉप है और चैल के बाहरी इलाके में रिसोर्ट और तिमंजला होटल भी है।”

“हेमंत के इस तिमंजले होटल की नीचे के दो मंजिलों में हर मंजिल में आठ कमरे हैं। सब से ऊपर की तीसरी मंजिल पर बड़ा हाल है और इस हाल के एक तरफ दो कमरे हैं। हॉल में तीन बाथरूम हैं और दूसरे दोनों कमरों में भी बाथरूम हैं। हाल में चार बड़े बेड लगे हुए हैं। असल में तो ये हॉल किसी बड़ी फैमिली के लिए है, जिसमें आठ दस मेंबर हो। मगर हेमंत इस हाल को किराए पर नहीं देता। यहीं ज्यादातर हमारा ग्रुप सेक्स होता है।”

“चौथा है सुनील। सुनील की बीवी है रेनू जो आज कल सुनील से रूठी हुई है – क्यों रूठी हुई है, वो मैं बाद में बताऊंगा। सुनील का गरम ऊनी कपड़ों का शोरूम है। सुनील का और मेरा बिज़नेस तकरीबन एक जैसा ही है। हम दोनों ऊंची ब्रांड के कपड़े रखते हैं, मगर हम दोनों में एक अंडरस्टेंडिंग है – मैं गरम ऊनी कपड़े नहीं रखता और सुनील गरम ऊनी कपड़ों के अलावा दुसरे रेडीमेड कपड़े नहीं रखता जो मैं रखता हूं।”

“कपड़ों की बिक्री तो अब पूरा साल ही चलती रहते है – लेकिन गर्मियों के मौसम में, जब टूरिस्ट बहुत आते हैं, तब तो सांस लेने की भी फुरसत नहीं होती। टीवी ने तो अब गांव कस्बों के लोगों को भी फैशनबल बना दिया है। चैल के आस-पास के लोग भी चैल में हे खरीदारी करने आते हैं।”

“हेमंत और सीमा के बाद अमर और पुष्पा का घर ही है जो बहुत बड़ा है, कई बार ये ग्रुप सेक्स का प्रोग्राम पुष्पा के घर भी बन जाता है।”

“वैसे तो किरण हमारा प्रोग्राम कभी-कभी तो किसी के घर ही बन जाता है – यहां तक की कभी-कभी हमारे घर पर भी।”

मामा जी बता रहे थे, “मतलब किरण, पांच लंड और पांच ही फुद्दीयां। कोइ भी मर्द किसी भी फुद्दी में लंड डाल कर चुदाई कर सकता है – कोइ रोक-टोक नहीं। और ये सब एक-दूसरे के सामने होता है।”

“मामा जी की उंगली मेरी फुद्दी मैं ही थी। मैंने पूछा, “मामा जी ये तो कमाल की बात बता रहे हो आप, लेकिन मामा जी ये सब शुरू हुआ तो हुआ कैसे?”

मामा जी बोले, “किरण ये सारी शरुआत असल में मेरे इस लंड के कारण हुई है, और ये शुरू किया तुम्हारी नाती मामी ने।”

“मेरी हैरानी ख़त्म होने का नाम ही नहीं ले रही थी।”

“मैंने फिर पूछा, “मामा जी आपके लंड की वजह से शुरू हुआ ये बात समझ आती है, आपका लंड तो है ही ऐसा। लेकिन नाती मामी? नाती मामी जी ने ये सब कैसे शुरू किया?”

मामा जी ने मेरी फुद्दी में उंगली अंदर-बाहर करने लगे। मेरी फुद्दी तो गीली ही थी, मामा जी के उंगली अंदर-बाहर करने से फुद्दी अब गरम भी होने लगी थी।

“मामा जी ने एक बार और उंगली फुद्दी में घुमाई और बोले, “सब बताता हूं मेरी जान, सब बताता हूं – इधर आ कर मेरी गोद में बैठ, मेरा लंड फुद्दी में ले ले – सब बताता हूं।”

“मैंने मामा जी का लंड दबाते हुए पूछा, “क्या बात है मामा जी फुद्दी में डालने का मन हो रहा है क्या?”

“मामा जी ने मेरा चुम्मा लिया और बोले, “हो तो रहा है मेरी जान किरण।”

“मैंने कहा, “तो चलिए मामा जी बिस्तर पर लेट जाईये, मैं बैठती हूं आपके लंड पर – मैं लेती हूं आपका लंड फुद्दी में, अपने ग्रुप सेक्स के कहानी भी सुनाईये और मेरी फुद्दी के मजे भी लीजिये – दोनों काम साथ साथ चलेंगे। आपकी गोद में बैठने से भी आपका लंड मेरी फुद्दी में ढंग से अंदर नहीं जा पायेगा – ना आपको ही मजा आएगा और ना मुझे ही।”

“मामा जी उठे और बिस्तर पर लेट गए और मैंने मामा जी के ऊपर बैठ कर मामा जी का पूरा लंड फुद्दी के अंदर ले लिया और बोली, “चलिए मामा जी शुरू हो जाईये, बताईये कैसे नाती मामी ने ये शुरू किया।”

“मामा जी ने जो कहानी सुनायी वो सच में ही बड़ी दिलचस्प थी।”

“मामा जी ने मेरे मम्मों के निप्पल अंगूठे और उंगली में लिए और निप्पल मसलते हुए बोले, “किरण – तुम्हारी मामी नाती, अमर, हेमंत, सुनील और केशव की पत्नियां आपस में सहेलियां भी हैं। सब एक-दूसरे को अच्छी तरह जानती पहचानती हैं – चैल शहर ही कितना बड़ा है?”

“किरण, एक दिन मैं और नाती चुदाई की तैयारी कर रहे थे। मैं नाती की फुद्दी चूस कर हटा था और नाती बैठी मेरा लंड चूस रही थी। तभी नाती ने लंड मुंह में से निकला और नाती मुझसे बोली, “गोपाल एक बात बोलूं, मानोगे?”

“मैंने कहा, “मानूंगा, आज तक मैंने तुम्हारी कौन सी बात नहीं मानी?”

“नाती बोली, “गोपाल, एक दिन पुष्पा, सीमा रेनू और कैलाश बैठी हुई अपनी अपनी चुदाई की बातें कर रही थी। बातों बातों में तुम्हारे घोड़े के लंड जैसे लंड का जिक्र आ गया। उस वक़्त तो हंसी मजाक में हम मजे ले रही थी और थोड़ी गप-शप के बाद मैं घर वापस आ गयी। बात आयी-गयी हो गयी। हममें ऐसे, चुदाई की बातें अक्सर होती ही रहती थी, मगर तुम्हारे लंड का जिक्र पहली बार आया था।”

“नाती बता रही थी, गोपाल जब भी तुम लुधियाना जाते हो तीन चार दिन के लिए, तो पुष्पा, सीमा, रेनू और कैलाश अक्सर यहां हमारे घर में आ जाती हैं, अपना और मेरा टाइम पास करने।”

उस दिन भी तुम लुधियाना गए हुए थे और हम चारों यहां बैठी हंसी मजाक कर रही थीं। उस दिन रेनू नहीं आयी थी। तभी अचानक से सीमा बोली, “नाती, एक बार गोपाल का मोटा लंड हमारे फुद्दीयों में भी डलवाओ ना। हम भी तो देखें ऐसा बड़ा मोटा, लम्बा लंड जब फुद्दी में जाता है तो कैसा लगता है – क्या हाल होता है फुद्दी का।”

“मैंने हंसते हुए कहा, “मजाक कर रही हो सीमा, गोपाल से चुदवाओगी?”

सीमा बोली, “मैं ही नहीं नाती, हम तीनों ही गोपाल का लंड अपनी अपनी फुद्दी में लेंगी – बस एक बार डलवा दो l रेनू से भी बात कर लेंगे, उसे भी एक बार चुदवा देंगे गोपाल से, वो भी तैयार हो जाएगी ऐसा मोटा लंड फुद्दी में लेने के लिए।”

“नाती बोली, “गोपाल क्या बताऊं, जिस तरीके से सीमा पुष्पा और कैलाश के सामने ये बातें कर रही थी, तो मुझे लगा ये तो सीरयस हैं मजाक नहीं कर रहीं हैं – सच में तुम्हारा लंड अपनी फुद्दी में लेना चाहती हैं।”

“मैंने भी कह दिया, “सीमा, मुझे तो कोइ एतराज़ नहीं है अगर गोपाल तुम तीनों को चोदता है, मगर गोपाल से तो एक बार बात करने दो। जो भी वो बोलेगा, वो मैं तुम लोगों को बता दूंगी।”

“हैरानी की बात थी गोपाल तीनों एक ही साथ बोली, “ठीक है नाती कर लो बात, पर गोपाल क्यों मना करेंगे? बैठे बिठाये, प्लेट में सजी हुए तीन तीन – बल्कि चार-चार फुद्दीयां चोदने को मिलेंगी, उनके तो उल्टा मजे ही मजे हैं।”

“गोपाल क्या बताऊं, सीमा की बातों से माहौल सेक्सी हो चुका था, मैं भी मस्ती में आ चुकी थी। मैंने सीमा से कहा, “चार क्यों सीमा, पांच बोलो ना – मैं भी तो चुदवाउंगी तुम्हारे साथ-साथ।”

“सब मेरी इस बात पर हंस दिए।”

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Nisha Gupta

हैलो! मैं निशा गुप्ता हूँ - जयपुर विश्वविद्यालय से संचार विज्ञान में मास्टर और पिछले 6 साल से डिजिटल दुनिया में हिंदी कहानियाँ लिखने वाली एक अनुभवी लेखिका। मैं वो कहानियाँ लिखती हूँ जो पढ़ते ही आपके मन में आग लगा दें। मेरी कहानियों में वो सब कुछ है जो आप चाहते हैं - बोल्ड, बेबाक और बेरोकटोक। मेरे लेखन को हजारों पाठकों ने सराहा है और कई पुरस्कार भी मिले हैं। मैं यहीं हूँ आपके मज़े के लिए — तो लेटे रहो और पढ़ते जाओ!

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