Ghar Me Kamshastra Ki Padhai Dono Bahno Ke Sath 2

Hindi Sex Story हैलो फ्रेंड्स, इस कहानी के पिछले भाग में आप लोगों ने पढ़ा की कैसे सुभम ,रिंकी और सुनिधि एक साथ काम वासना की दुनिया में खोकर मौज मस्ती करते हैं. तो सुभम अपनी बहन रिंकी की चुदाई करके ढीला पड़ गया. लेकिन २३ साल का जवान लौंडा एक चुदाई करके हार मानने वालों में से नहीं ,तो दोनों बहनें बेड पर नग्न अवस्था में लेटी हुई थी. Ghar Me Kamshastra Ki Padhai Dono Bahno Ke Sath 2.

और रिंकी ,जिसकी उम्र २२ साल ,गोरा सुंदर मुखड़ा तो सुडौल बदन साथ ही चूचियां बड़ी नारंगी का जोड़ा तो कमर पतली पर वो चूतड़ के मामले में थोड़ी धनी है. गोल गुंबदाकार टाईट चूतड़ जिसके दोनों फांक स्प्रिंग की तरह हिलते हैं. किसी के भी लंड को टाईट करने के लिए काफी है । रिंकी अपने चुत में गिरी वीर्य को एक टॉवेल से साफ की फिर वाशरूम चली गई. तो सुनिधि बोली “डार्लिंग कितने देर में तेरा सोया हुआ शेर जाग उठेगा. (मैं बेड पर उठते हुए बोला) चिंता मत कर तेरे साथ आधे घंटे के बाद सेक्स करूंगा.

तो देर रात तक तू ही मेरी बाहों में रहेगी “फिर मैंने एक टॉवेल कमर से लपेट लिया और अपने रूम गया. वहां रेफ्रिजरेटर से ठंडी बियर लेकर बैठे हुए पीने लगा तो पॉकेट में एक ज़ेनेगरा कैप्सूल खरीद कर रखा था. इस दवाई को खाने के १०-१५ मिनट बाद ही लंड अकड़ कर टाईट हो जाता है. तो मैं तेजी से ठंडी बियर पीने लगा और तभी मेरे रूम में रिंकी और सुनिधि आई “ओह अकेले अकेले बियर चल रहा है. (सुनिधि)हम दोनों खाना खाकर तेरा खाना यहीं ला देते हैं फिर तुम्हारी मर्जी. जब मन हो खाना”मैं सर हिलाकर हामी भर दिया तो सुनिधि अपने तन पर नाईटी डाल बदन को छिपा रखी थी.

२० साल की ये छोकरी देखने में जितनी सुंदर है उससे कहीं अधिक बोल्ड और हॉट. तो इसके गुलाबी ओंठ साथ ही सेक्सी चूचियां ,चिकनी जांघें और उसके बीच की लालिमा लिए बुर बिल्कुल लंबी फांकें. साथ ही मेंढ़क की तरह फूली हुई और चूतड़ V आकार की ,मेरा सुस्त लंड टॉवेल के अंदर था तो बियर पीकर मैं अपने बेड पर लेट गया। मेरा ७-८ इंच लम्बा लंड जल्द ही टाईट हो जाता तो ज़नेगरा कैप्सूल की जरूरत शायद तीसरी बार चुदाई में जरूरी होती. पर सुनिधि को चोदने के बाद किसे चोदता ? रिंकी को या सुनिधि को या अपनी ४१-४२ साल की मॉम को जोकि फिलहाल डैड के साथ एक पार्टी में है.

तो ये बता दूं कि मॉम गरिमा कोई रूढ़िवादी विचारधारा की औरत नहीं है. उसकी ड्रिंक्स की आदत से हमसब वाकिफ हैं. तो लखनऊ जैसे बड़े शहर में मॉम किधर और किसके साथ रंगरेलियां मनाती हैं ये जान पाना कठिन है. फिलहाल बेड पर लेटा था तो दोनों बहनें रूम में आई और रिंकी एक प्लेट में खाना लाकर टेबल पर रखी. तो उसे दूसरे प्लेट से ढक दी और सुनिधि बोली “क्या दीदी भी रुकेगी. या फिर (मैं दीवाल घड़ी देखता हुआ) अभी रात के ०९:४० हो रहे हैं तो समझो तीन घंटे तक सेक्स करने का मौका है. रुक तू भी लेकिन पहले सुनिधि की बुर चोदूंगा फिर अगले राउंड में रिंकी को चोदूंगा.

“दोनों बेड पर आकर बैठ गई तो सुनिधि मेरे छाती पर हाथ फेरते हुए झुकी ओर मेरे चेहरा को चूमने लगी और उसके पिछले भाग दोनों घुटने पर थे. मैं उसके चूतड़ को नाईटी पर से ही सहलाने लगा तो उधर रिंकी मेरे टॉवेल हटाकर सुस्त पड़े लंड को सहलाने लगी. फिर सुनिधि अपनी नाईटी खोलकर नग्न अवस्था में ही मेरे छाती पर चुम्बन दे रही थी. तो मेरा हाथ उसके बूब्स दबाने लगा और उसकी चिकनी चूतड़ पर हाथ फेर रहा था. रिंकी मेरे गान्ड के नीचे तकिया डालकर मेरे पैर फैला दी तो मैं “क्यों अपनी चूची से मेरी गान्ड चोदेगी. (रिंकी शरमाने लगी)फिलहाल तो तेरी गान्ड चाटूंगी फिर होगा कामशास्त्र की पढ़ाई.”

अब मेरा हाथ सुनिधि की चुत को टटोलने लगा तो वो मेरे पेट और कमर चूम चूमकर मुझे कामुक करने लगी. रिंकी मेरे गान्ड की छेद फैलाए जीभ से चाटने लगी तो मेरे लंड का अंडकोष दुबारा से वीर्य प्रवाह का एहसास करने लगा। मेरे कमर तक चूमकर सुनिधि मेरे चेहरा पर अपना चेहरा की और ओंठ चूमते हुए मेरे चेहरा को सहला रही थी. २० साल की लौंडिया की स्लिम फिगर मुझे काफी कामुक करने लगी. फिर वो अपने जीभ निकाल मेरे मुंह से लगाई तो मैं मुंह खोलकर उसकी जीभ अंदर लिए चूसने लगा. उधर रिंकी गान्ड को चाट चटकर मेरे लंड में दुबारा जान फूंकने की कोशिश कर रही थी.

तो सुभम बियर के नशे में झूमते हुए सुनिधि के जीभ को पल भर चूसा फिर सुनिधि पूछी “तुम्हें क्या चाहिए भैया (मैं उसके गांड़ पर दो तीन जोरदार चाटा मारा). सब कुछ बेबी ,फिलाहल मेरे मुंह को तेरे चुत का रस चाहिए. “वो हंसकर वाशरूम चली गई तो रिंकी गान्ड चाटने के बाद मेरे लंड जोकि फिलहाल ३-४ इंच की लंबाई के साथ टाईट था. को पकड़ हिलाने लगी और मैं “थोड़ा चूस ले साली फिर तेरी छोटी बहन कि चुत चोदता हूं. “तो रिंकी मेरे लंड के सुपाड़ा को जीभ से चाटते हुए जांघ सहलाने लगी और नग्न धड़ंग सुनिधि आकर मेरे मुंह पर ही बैठ गई।

रिंकी के सेक्सी चुत मेरे मुंह से एक इंच की दूरी पर थे. तो उसके दोनों जांघों के बीच मेरा चेहरा था और उसकी चूतड़ ठीक मेरे मुंह के ऊपर तो मैं सुनिधि की चुत के छेद को फैलाकर अपना हाथ उसके कमर पर लगाया. और सर थोड़ा उपर किए चुत में जीभ पेलकर चाटने लगा तो रिंकी मेरे लंड को मुंह में भरे चुभ्ला रही थी. और मानो लंड अब उसकी मुंह में अकड़ कर दुबारा चुदाई को आतुर था. अब सुनिधि मेरे मुंह पर बैठे खुद ही चुत फैला दी और मेरा एक हाथ उसके बूब्स दबाने लगा. साथ ही जीभ चुत चाटने में लीन था मेरा लन्ड फिर से अकड़ने लगा. तो रिंकी लंड को मुंह से निकालकर वाशरूम चली गई और मैं अब सुनिधि को हटने बोला।

सुभम उठकर वाशरूम गया फिर फ्रेश होकर वापस आया तो सुनिधि बेड पर लेटी हुई थी. अपने तन को चादर से ढक कर मुझे देख मुस्कराई तो मेरे पीछे रिंकी भी आ गई. अब मैं सुनिधि की टांग के पास बैठा फिर चादर हटाकर उसे नंगा कर दिया. तो वो अपने जांघ पर जांघ चढ़ाए चुत रानी को छुपाने लगी तो मैं उसके जांघ सहलाने लगा. उसकी चिकनी जांघों को झूमकर चूमना शुरु किया तो उसकी जांघ एक दूसरे से अलग होने लगी “उह आह सी सी इतनी खुजली. चाट ना मेरी बुर (उसके फैले जांघों के बीच चेहरा लगाकर चुत पर चुम्बन देने लगा).

अब सिर्फ चुदाई “फिर उसकी चुत और अपने लंड को आमने सामने करने के लिए चूतड़ के नीचे तकिया लगा दिया. लंड पकड़े जांघों के बीच बैठा फिर सुपाड़ा को चुत में घुसाने लगा और रिंकी अपने बदन से नाईटी हटाकर सुनिधि के बूब्स को पकड़कर दबाने लगी. मेरा लन्ड चुत के अन्दर जाने लगा तो ५-७ बार चुदवाने से किसी छोरी की चुत फलक कर चौड़ी नहीं हो जाती. तंग रास्ते पर लंड रुक सा गया तो मैं अपना धैर्य बनाए हुए उसके चुत में आराम से लंड घुसाता रहा. लेकिन १/४ भाग लंड के बाहर थे तो जोर का धक्का लगा कर चुत में पूरा लंड पेलकर चोदने लगा.

और सुनिधि “बाप रे फाड़ दिया बुर को निकाल बे साले (रिंकी उसकी चूची को पकड़ निपल को जीभ से चाटते हुए). आइंदे पहली चुदाई का मजा लेना और दूसरी चुदाई मेरे जैसी चूद्दकड़ ही बर्दास्त कर सकती है फाड़ इस साली की बुर को.” तो रिंकी अपनी बहन की चूची मुंह में लिए चूसने लगी तो मैं बैठे हुए उसकी चुत चोद रहा था. और सुनिधि “ओह आह उई और नहीं भाई धीरे धीरे चोद ना “तो रिंकी उसकी चूची मुंह से निकालकर हंसने लगी. “अबे साली रण्डी तू तो मुझसे पहले ही ना सील तुड़वाई थी ,चुपचाप चुद्वा नहीं तो मुझे चुदने दे. (वो बोली)अभी तो बुर में काफी गर्मी है जरा अंदर बारिश तो होने दे. “Ghar Me Kamshastra Ki Padhai”

फिर तू ही चुदाई का आनंद लेना” तो चुत की छोटी सी छेद में मेरा ७-८, इंच लम्बा और डेढ़ इंच मोटा लंड तेज रगड़न दे देकर घर्षण पैदा कर रहा था. और यहीं तो चुदाई का असली आनंद है अगर बुर पूरी तरह से फैली और गहराई बहुत ज्यादा हो. तो फिर मेरे जैसे लौंडे के लंड से उस चुत की क्या भलाई होगी तो अब सुनिधि “उह ओह अब मेरा रस निकलेगा आह निकल पड़ा.” तो मैं अपने गीले लंड बाहर करके चुत पर हाथ फेरने लगा. फिर झुककर चुत के छेद जोकि पहले से थोड़े खुले हुए थे को खोला और जीभ घुसाने लगा. आखिर बहन कि चुत के रस का स्वाद जो चखना था और फिर अपने मूसल लंड को रेस्ट दिया. वाशरूम जाकर मूतने लगा।

अभी रात के १०:३५ हो रहे थे तो सुनिधि को चोदकर एक बार फिर से रिंकी को चोदना था. तो उसके लिए ज़नेग्रा कैप्सूल पास में खरीद रखा था ,वापस आकर सुनिधि की चुत को तौलिया से साफ किया. तो रिंकी बोली “मैं अपने रूम आराम करने जा रही हूं ,तुम्हारा जी करे तो खड़ा लंड लेकर आना (मैं रिंकी की चूची जोर से दबा दिया). जरूर मेरी सेक्सी बेबी”वो चूतड़ हिलाते मेरे सामने से चली गई. तो मेरे बेड पर सुनिधि नग्न अवस्था में लेटे चुदाई का इंतजार कर रही थी।

मैं उठकर टुडे गोली का स्ट्रीप लाया फिर उसकी चुत में उंगली घुसा कर रास्ता का जायजा लिया तो फैली हुई चुत में गोली घुसाने के बाद उसके स्तन को पकड़ दबाने लगा. और मेरे खंबे से लंड पकड़ सुनिधि बोली “एक बात बताओ जानू (मैं झुककर चूची को मुंह में लेने लगा). बोल बेबी (वो) तुम दोनों बहनों में किसको अधिक चाहते हो. (मैं)दोनों को तुम छोटी हो तो तुमसे अधिक प्यार है “फिर उसकी चूची मुंह में लेकर चूसने लगा. तो वो मुझे अपने छाती से लगाए चूची पिलाने लगी और कुछ देर बाद मैं उठकर सुनिधि के रसीले चुत में लंड पेल दिया. “Ghar Me Kamshastra Ki Padhai”

अंदर गोली के पिघलने से चिपचिपाहट थी तो पूरा लंड डाले अब धीरे धीरे चोदने लगा. और उसके जिस्म पर लेट कर दे दनादन चुदाई करता हुआ ओंठ चूमा “तब बेबी ,मजा आ रहा है ना. (वो मेरे पीठ सहलाते हुए ओंठ चूमने लगी). हां ,बहुत मस्त लंड है तेरा और हमेशा तू मुझे सेकेंड राउंड में ही चोदना.” तो मैं चोद चोदकर हांफने लगा लेकिन अभी कुछ पल और चोदकर ही झड़ता ,दोनों चुदाई में मस्त थे. और फिर ७-८ मिनट की चुदाई का अंत हुआ “ले बे रण्डी निकल गया (वो मुझे चूमने लगी )कोई नहीं ,इतना ही काफी है.” फिर दोनों फ्रेश हुए.

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Ritu Agarwal

हैलो दोस्तों! मैं ऋतु अग्रवाल हूँ - कानपुर विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र में मास्टर डिग्री पाने वाली और पिछले 5 साल से हिंदी में वो कहानियाँ लिख रही हूँ जो आपकी रूह को छू लें और तन को तड़पा दें। मैं मानव व्यवहार और इंसानी इच्छाओं पर गहरा रिसर्च करती हूँ ताकि हर कहानी असली और दिलकश हो। मेरी कहानियाँ लाखों पाठकों ने पढ़ी हैं और हर कोई वापस आता है। मैं समझती हूँ आप क्या चाहते हैं - और वही लिखती हूँ जो आपको पागल कर दे। तो चलो, मेरी कहानी से आज की रात को खास बनाते हैं!

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