भैया जी अब मेरे सैंया जी

प्रेषिका : पायल गुप्ता

अन्तर्वासना के सभी पाठकों को पायल का नमस्कार। आज मैं आपको अपने जीवन की एक घटना सुनाने जा रही हूँ। हमारा परिवार एक समृद्ध परिवार है, जिसमें मेरा भाई और हमारे मम्मी-पापा हैं। मेरी उम्र 18 साल है और मेरे भाई की 19 साल है। वो अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए चेन्नई में अकेला रहता है।

मेरी गर्मी की छुट्टियाँ चल रही थीं, मैंने पापा से कहा- मुझे भी कंप्यूटर कोर्स करना है और मैं भी दो माह के लिए चेन्नई जाना चाहती हूँ। थोड़े दिन भैया के साथ रह लूँगी और मन भी लग जाएगा।

पापा ने हाँ कर दी और अगले दिन मैं चेन्नई पहुँची। भैया स्टेशन पर लेने आया। यहाँ आकर वो काफी स्मार्ट हो गया था। भैया का केवल एक कमरा था, जिसमें बाथरूम भी था।

आते ही मैंने भैया से कहा- मुझे नहाना है।

भैया कुछ सोच में पड़ गए।

मैंने कहा- क्या हुआ?

तो बोले- बात यह है कि यहाँ बाथरूम का दरवाजा लगता नहीं है।

मुझे कुछ शर्म आई, पर मैंने उनसे कहा- कोई बात नहीं आप ही तो हैं, आप थोड़े ही अन्दर आ जाओगे।

यह कहकर हम दोनों को हंसी आ गई। मैं नहाकर निकली तो भैया मुझे ही देख रहे थे। मैंने टी-शर्ट और स्कर्ट पहना हुआ था। कुछ दिन में ही मैंने भाई के अन्दर एक अजीब बात देखी, वो मेरे अंगों को निहारता रहता था और मुझे छूने की कोशिश करता था।

यह बात सोचकर मेरे मन में भी थोड़ी गुदगुदी हुई। मेरा नया-नया यौवन भी चाहता था कि कोई उसे देखे। एक रात भइया पेशाब करने उठा, मैं उस समय सोई नहीं थी। मेरी आँख खुली तो मुझे भैया का लिंग दिखा, मेरे बदन में सनसनी दौड़ गई। फिर अचानक भाई मेरे बिस्तर पर आकर लेट गया।

मैंने पूछा- भैया क्या हुआ?

तो बोला- नींद नहीं आ रही है !

मैंने पूछा- क्यों?

तो कहने लगा- बहुत गर्मी है, मैं यहाँ कुछ देर पंखे के नीचे सो जाता हूँ।

मेरे मुँह से निकला- भैया गर्मी है तो अपनी शर्ट उतार कर सो जाओ।

उसने अपनी शर्ट उतार दी, मेरा दिल दहकने लगा, ऐसा लगा कि जैसे मेरी चूत के अन्दर आग लग गई हो।

तभी भाई बोला- पायल तुम भी कपड़े बदल लो, मेरी एक शर्ट ढीली है, वो पहन लो।

मुझे भी गर्मी लग रही थी, मैंने कहा- ठीक है, पर आप बाहर तो जाओ !

तब उसने कहा- लाइट बंद करके बदल लो।

मैंने लाइट बंद कर अपनी सलवार उतारी और फिर कुर्ती उतारी। अब मैं ब्रा-पैन्टी में थी, तभी मुझे अपनी जांघ पर भैया का हाथ महसूस हुआ, जो मेरी चड्डी को टटोल रहा था। मैंने कुछ नहीं कहा और शर्ट पहन कर भैया के बगल में लेट गई। तभी मुझे महसूस हुआ कि भैया भी अपना पजामा उतार चुके हैं। हम दोनों पिंघलते जा रहे थे, बस अब एक झिझक थी जो तोड़नी थी।

उस पूरी रात, हम चिपककर सोते रहे। भैया का हाथ मेरे स्तनों को लगता रहा और मैं अपने हाथों से भैया के लिंग की नाप लेती रही।

अगले दिन मैंने जल्दी उठकर कपड़े पहन लिए और नहाने चली गई। मैंने बाथरूम में जाकर अपने कपड़े उतारे ही थे कि मुझे एक छिपकली दिख गई। मेरी चीख निकल गई, भाई दौड़कर बाथरूम में आया तो मुझे नंगी देखकर खड़ा रह गया और मैं डर के कारण भाई से चिपक गई। भाई भी मुझसे चिपक गया।

मैंने बस चड्डी पहनी हुई थी। भाई ने मेरी चड्डी के अन्दर हाथ डाल दिया और मैं सिसक गई।

मेरे गोरे-गोरे स्तन भाई के सीने से चिपक गए। मेरे निप्पल कड़क हो गए, तभी मैं उससे दूर हट गई और अपने कपड़े पहन लिए।

भाई मेरे पास को आया और बोला- पायल, मुझे तुम्हें नंगी देखना है।

मैंने नजर झुका कर कहा- देख तो लिया है।

तो वह बोला- ऐसे नहीं, अच्छे से।

मैंने कहा- कैसे?

तो बोला- तुम अपनी टी-शर्ट उतारो। मैं बेड पर लेट गई और अपनी टी-शर्ट उतारकर बोली, “क्या देखना है देख लो।

फिर उसने मेरी ब्रा भी उतार दी, मेरे मस्त स्तन अब उसके सामने खुले थे।

वो बोला- मैं इन्हें छू लूँ?

मैंने इतरा कर कहा- अगर छूने न देना होता, तो ब्रा ही क्यों उतारती।

फिर उसने अपने दोनों हाथ मेरे मम्मों पर रखकर मेरे चूचुक चूसने लगा। मैं तड़प गई, फिर उसने मुझे पूरा नंगा कर दिया और खुद भी पूरा नंगा हो गया। हम दोनों फिर से बाथरूम में गए और फुव्वारे के नीचे खड़े हो गए। उसने साबुन लेकर मेरे अंग-अंग पर लगाया। मैं भी उसे नहलाने लगी। उसका लिंग मेरी चूत को छू रहा था और वो बेदर्दी से मेरे मम्मे मसल रहा था।

फिर उसने बाथरूम में ही मुझे लिटा दिया और मेरी चूत मैं अपना लिंग डाल कर चूत को फाड़ दिया। मेरे सगे भाई ने मेरी अनछुई चूत का उदघाटन कर दिया, मेरे कौमार्यभंग होने से दर्द के मारे मैं चिल्ला उठी और वो धक्के लगाता गया। मेरी चूत से खून भी निकलने लगा था। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !

उसके बाद क्या हुआ? यह तो आप सब जानते ही हैं। मैंने जिन्दगी मैं पहली बार यौन सुख का पूरा आनन्द लिया। भैया अब मेरा सैंया बन गया था। जितने दिन मैं उसके पास रही, मेरी हर रोज चुदाई होती रही और अब मैं खूब भर गई हूँ।

अपनी अगली कहानी फिर कभी जरूर सुनाऊँगी, यह कहानी आपको कैसी लगी, मुझे जरूर लिखिए।

Ananya Verma

अरे! मैं अनन्या वर्मा हूँ - लखनऊ विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान की पढ़ाई करने वाली और पिछले 4 साल से हिंदी में ऐसी कहानियाँ लिख रही हूँ जो आपकी अंगुलियाँ स्क्रीन पर रोक दें। मैं इंसानी इच्छाओं, ख्वाहिशों और वो पलों को समझती हूँ जो आप छुपाना चाहते हैं लेकिन महसूस करना चाहते हैं। मेरी कहानियों में वही बात है जो दिल को छूती है और तन को सिहराती है। हज़ारों पाठकों ने मेरी कहानियाँ पढ़कर गर्म रातों का मज़ा लिया है। तो चलो, आज की रात मेरी कहानी से बनाते हैं!

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