चुदासी बहन खुद भैया का मोटा लंड पकड़ने लगी 2

हेलो दोस्तों मैं रेणु श्रीवास्तव, उम्र २२ वर्ष, कद ५ फीट ६ इंच, गोरा चेहरा तो खूबसूरत बदन, सुराहीनुमा गर्दन, चौड़ी छाती, बूब्स मानों टेनिस बॉल के जोड़े हों, कमर पतली तो चूतड V शेप में और जांघें चिकनी तो चूत टाईट, उसकी फांकें मोटी तो चूत बारमुक्त और कोमल, दोस्तों आपने मेरी कहानी के पिछले भाग “ चुदासी बहन खुद भैया का मोटा लंड पकड़ने लगी 1 ” में आपने पढ़ा कि कैसे मैं अपने बड़े भैया रोहित के साथ शारीरिक संबंध बना ली और भैया भी मेरे साथ एंजॉय किए लेकिन सच पूछिए तो ये सिर्फ ओरल सेक्स था और संभोग क्रिया से हम दोनों कोसों दूर थे. Bhai Bahan Real Sex

भैया के साथ दो दफे ओरल सेक्स हुआ था और उसके बाद मैं उनसे थोड़ी दूरी बना ली थी कारण की मुझे शर्मिंदगी महसूस होने लगी लेकिन एक ही छत के नीचे रहकर दूरी बनाए रखना कठिन काम है। एक शाम मैं बालकनी में बैठकर कॉफी पी रही थी कि भैया वहां आ गए और मैं उनको देख कुर्सी से उठकर बैठ गई तो वो बोले “तुम आराम से बैठो बेबी.”

(वो मेरे सामने की कुर्सी पर बैठ गए) ये बताओ कि तुम मुझसे नजरें क्यों चुरा रही हो क्या मैने तुम्हारे साथ कुछ गलत किया. (मैं रोहित को देख बोली) नहीं सब गलती मेरी हैं मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए. (रोहित मेरे जांघ पर हाथ रख सहला दिया) वी विल मिट टुनाइट. (मैं बोली) क्या आज रात लेकिन कहां. (वो बोला) इसी घर में मेरे रूम में क्यों असली मस्ती नहीं करनी है. (मैं सर झुकाकर बोली) “पता नहीं डर भी लग रहा है.”

और रोहित उठकर चला गया, वैसे चूत की सील तुड़वाऊंगी लेकिन क्या रोहित के साथ ही थोड़ी कंफ्यूज थी फिर सोची की मस्ती की जाए, रात के १०:०० बजे तक सबलोग साथ में खाना खाए फिर मैं अपने रूम चली गई, मेरे रूम में मेरे साथ छोटी बहन पूनम रहती थी और मैं बिस्तर पर लेटकर देर रात की सोच रही थी तभी पूनम पूछी “क्या बात है दीदी तुम टेंशन में दिख रही हो.”

(मैं हंस दी) “नहीं तो.” और फिर हम दोनों बहनें नींद में सो गए, मैं कॉलेज गई थी इसलिए थकान के मारे नींद आ गई और मैं गहरी निंद्रा में सो गई. मेरी नींद देर रात खुली वो भी पेशाब लगने के कारण और मैं उठकर मूतने गई और देखी कि रात के ०१:३० बजे हैं तो मैं हिम्मत करके रोहित के रूम में चली गई.

और देखी कि रोहित बेड पर लेटकर मोबाइल में कुछ देख रहा है, मुझे देख बोला “ओह बेबी इतनी देर कहां थी मैं तेरे इंतजार में जगा हूं.” (मैं दरवाजा बंद कर उसके बेड पर बैठ गई) “क्या करती पूनम जागी हुई थी इसलिए मुझे इंतजार करना पड़ा.” और रोहित उठकर बैठा फिर मुझे बाहों में लेकर चूमने लगा.

तो मैं उसके गोद में बैठ गई, अपने जिस्म को मिडिज से ढक रखी थी और उसके गोद में बैठते ही मेरा ड्रेस बिकनी लाइन तक आ गया. और रोहित मेरे बूब्स को दबाने लगा साथ ही गाल चूम रहा था. तो मैं उसके लण्ङ के उभार को पकड़े दबाने लगी. फिर रोहित मेरे ओंठ चूम लिया “तुम इसी तरह मेरी गोद में बैठकर चुदाई का मजा लोगी कैसा लगेगा.”

(मैं शर्म से चेहरा उसके कंधे पर रख दी) “ओह रोहित पहले मुझे स्वाद तो चखने दे फिर क्या पता इस आसन में कब मजा ले पाऊंगी.” मैं उसके गोद में टांग चिहारे बैठी थी तो मेरा पैर उसके कमर से लिपटा था और मेरी पीठ पर हाथ रख रोहित मेरे ओंठ चूम लिया.

फिर ओंठ मुंह में भर चूसने लगा तो मैं उसके पीठ सहलाने लगी, वो मेरी मिडिज का लेस खोल बदन से निकाल दिया और मैं नंगी हुई उसके गोद में थी। रोहित अब मेरे पीठ सहलाते हुए मेरे जीभ मुंह में भर चूसने लगा तो मैं उसके पीठ पर हाथ फेरने लगी. ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

मैं उसके मूसल लण्ङ का एहसास अपने नाभि पर पा रही थी तो दोनों जिस कदर नग्न अवस्था में बैठे थे मानों मैं काम की मूर्त लग रही थी. मेरे जीभ चूसने में रोहित मशगूल था तो मैं उसके छाती से बूब्स रगड़ते हुए उसके पीठ पर नाखून गड़ाने लगी, रोहित मेरे चूतड के नीचे हाथ लगाए चूत को सहलाने लगा.

तो मैं अब जीभ निकाल उसके कंधे पर सर रख दी और रोहित मेरे जिस्म को सहलाते हुए चूत में उंगली डाले कुरेदने लगा तो मैं उसके गाल चूम ली “रोहित तुम वो लेकर आये हों कि नहीं.” (रोहित मेरी चूत में उंगली करता हुआ मस्त था) क्या बेबी. (मैं उसके कान के पास फुसफुसाई) कंडोम. (वो मेरी चूत से उंगली निकाल दिया फिर मुझे बेड पर लिटाया) “बेबी इट्स हॉट, उसकी जरूरत नहीं होगी.”

फिर मैं चित हुए लेटी थी तो रोहित मेरे गाल चूमते हुए बूब्स को पकड़ दबाने लगा और मैं कामुक होने लगी. वो मेरे गाल चूम चूची को पकड़े मुंह में भर चूसने लगा तो मेरी चूची उसके मुंह में थी. मैं ३२ सी साईज की ब्रा पहनती थी और चूची टाइट साथ में मुलायम थी तो रोहित चूची चूसता हुआ मेरी दूसरी चूची दबाने लगा.

और मैं उसके लण्ङ को पकड़ हिलाने लगी, उसका लन्ड लंबा और मोटा था जिसे मैं चूत में लेकर चुदाना चाहती थी. फिर मैं “आह उह उई मेरे राजा अब दूसरी चूची चूसो न.” फिर भी वो मेरी चूची चूसता रहा और दूसरे बूब्स दबाते हुए लाल कर दिया था, मेरी चूत में कीड़े रेंगने लगे और मैं अपने पैर बिस्तर पर रगड़ रही थी.

तभी रोहित मेरी दूसरी चूची मुंह में भर चूसने लगा तो मैं अब कामुकता के आगोश में आकर आहें भर रही थी “ओह आह अआआह रोहित प्लीज मेरी चूत चोद दो.” तो रोहित मेरी जांघों के बीच हाथ लगाए चूत में उंगली डाले कुरेदने लगा और मैं तो बेड पर निढाल लेटी हुई थी.

कुछ देर बाद रोहित के बाल पकड़े चेहरा पीछे कर चूची मुंह से निकाल ली तो रोहित मेरे बदन को चूमने लगा. और मैं काम वासना की दुनिया में खो चुकी थी. अब चूत गर्म हो चुका था और भैया मेरी कमर तक को चूम लिए फिर चूत से उंगली निकाल मेरी चूतड के नीचे तकिया लगाए तो मैं जांघों को फैलाई.

भैया चूत को झुककर चुंबन देने लगे तो मै उसके बाल सहलाने लगी फिर वो मेरी चूत को उंगली से फैलाया और जीभ डाल चाटने लगा. मेरी चूत में गुदगुदी हो रही थी और मैं “आह ओह मेरे राजा आअह्ह बहुत मजा आ रहा है चाट चाटकर रस निकाल दो.” और रोहित मेरी चूत को चाट रहा था तो मैं अपने पांव इधर उधर मार रही थी. ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

फिर मेरी चूत से रस निकलने लगा और भैया उसे चाटकर चेहरा ऊपर किए और मैं फ्रेश होने चली गई। मैं बाथरूम से आई तो सीने से टॉवेल लपेट ली थी और रोहित बेड पर लेटा हुआ था तो उसके बदन पर चादर था. मै उसके कमर के पास बैठ उसके चादर को हटाई तो उसका लन्ड मेरे हाथ में था. “Bhai Bahan Real Sex”

जिसे मैं पकड़ चूमने लगी और वो मेरी चूची को पकड़ दबाने लगा, भैया का लण्ङ चूमने के बाद मैं मुंह खोल लण्ङ अंदर ली फिर चूसने लगी. मुझे लण्ङ चूसना अच्छा लगता था और मैं लण्ङ चूसते हुए उसके जांघ सहलाने लगी तो भैया बोला “एक दवाई है उसे वेजिना में डालकर छोड़ देना फिर मैं मजा दूंगा.”

मैं अब चेहरा ऊपर नीचे करते हुए मुखमैथुन करने लगी तो रोहित “आह ओह आअह्ह रेणु चूस चूस साली रण्डी तू तो एक नंबर की चुदासी लड़की है.” मै कुछ देर तक मुखमैथुन का मजा ली. फिर बेड पर लेट गई तो रोहित उठा और एक दवाई अपने पेंट से निकाला, मै समझ गई कि आज की रात मेरी चूत का कचूमर निकलेगा.

फिर भी चूत की सील को ब्रेक कराना जरूरी था तब ही तो चुदाई का मजा ले सकती थी. अब भैया मेरी जांघों को फैलाकर बुर को उंगली से फैलाए फिर चूत में एक टेबलेट डाल उंगली से अंदर करने लगे. तो मैं लेटी रही, फिर वो मेरी चूत के अंदर दवाई कर मेरे ऊपर सवार हुए और मेरे ओंठ चूसने लगे. “Bhai Bahan Real Sex”

तो मैं भैया के पीठ सहलाने लगी। मेरी चूत में दवाई गर्मी से पिघलने लगा और चूत रसीली होने लगी. अब भैया मेरी जिस्म चूमते हुए कमर तक आए फिर मेरी जांघों को फैलाकर घुटने के बल लन्ड पकड़े बैठ गए और मुझे बोले “थोड़ा दर्द होगा सो बर्दास्त करना जोर से चिल्लाओगी और मॉम जाग गई तो समझ लो.”

(मैं बोली) “कोई बात नहीं सब बर्दास्त कर लूंगी.” और वो अपना सुपाड़ा सहित १/३ लण्ङ चूत में घुसाए मेरे कमर को पकड़े जोर का धक्का दिया. तो मेरी चूत मानों चरक गई और मैं दर्द से कराह उठी “उई मां फट गई मेरी चूत रोहित थोड़ा आराम से.”

(वो धीरे धीरे मेरी चूत चोदने लगा और मेरी बूब्स दबाए जा रहा था) तुम मेरी रानी है वाकई दर्द को आराम से बर्दाश्त कर ली क्या जोर जोर से धक्का दूं. (मैं बोली) “फिलहाल इसी गति से चोदो ना फिर तेजी से चोदना.” और ऐसे गंदे शब्द का प्रयोग कर मैं शर्मा भी रही थी. “Bhai Bahan Real Sex”

अब मेरी चूत में लहर होने लगी फिर भी थोड़ा सहज महसूस कर रही थी तो रोहित रुकने वाला नहीं था. अब मेरे ऊपर सवार हुए धकाधक चोदने लगा तो मैं उसके लण्ङ का धक्का बर्दाश्त करते हुए चुदाने लगी “ओह आह अआआह रोहित तुझसे चुदाई का आनंद लेते हुए मैं अपनी चूत का सिल तुड़वा ली.” ये कहानी आप क्रेजी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है.

(भैया मेरे ओंठ चूम लिए) “बेबी तुम्हें दुबारा जब चुदाने का जी करे बेफिक्र होकर कहना मैं तुझे बहुत मजा दूंगा.” और भैया का लण्ङ तो चूत में खंजर लग रहा था, मेरे जिस्म पर भैया सवार थे तो मैं उनके नीचे लेटी हुई थी, मेरे कमसिन बदन को वो रौंद रहा था तो उसका लन्ड मेरी चूत को गर्म कर चुका था.

मुझे मालूम था कि चूत से खून जरूर निकला होगा आखिर चूत की झिल्ली जो टूट चुकी थी और अब मैं रोहित के ओंठ चूम ली “बहुत मजा आ रहा है लेकिन थोड़ा दर्द है.” (उसका लन्ड गपागप अन्दर बाहर होने लगा) “बेबी तेरी चूत की असली चुदाई कल रात होगी तब तुम्हें असली मजा मिलेगा.”

और रोहित ८+१० धक्का देकर चूत में वीर्य स्खलित कर मेरे पर लेटा रहा तो मैं उसके गाल चूम ली “इतनी जल्दी निकल आया रोहित.” (रोहित हंस दिया) “पगली ७-८ मिनट तक तो चुदाई किया वैसे देर तक भी चोदूंगा.” फिर दोनों अलग हुए और मैं किसी तरह उठकर फ्रेश हुई फिर कपड़ा पहन अपने रूम जाकर सो गई।

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Ritu Agarwal

हैलो दोस्तों! मैं ऋतु अग्रवाल हूँ - कानपुर विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र में मास्टर डिग्री पाने वाली और पिछले 5 साल से हिंदी में वो कहानियाँ लिख रही हूँ जो आपकी रूह को छू लें और तन को तड़पा दें। मैं मानव व्यवहार और इंसानी इच्छाओं पर गहरा रिसर्च करती हूँ ताकि हर कहानी असली और दिलकश हो। मेरी कहानियाँ लाखों पाठकों ने पढ़ी हैं और हर कोई वापस आता है। मैं समझती हूँ आप क्या चाहते हैं - और वही लिखती हूँ जो आपको पागल कर दे। तो चलो, मेरी कहानी से आज की रात को खास बनाते हैं!

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