मेरी सेक्सी बुआ के मटकते चूतड़-2

अब तक आपने पढ़ा.. मैंने देखा.. फूफाजी और बुआ दोनों नंगे बैठे हुए थे। बुआ फूफा जी के लंड को अपने हाथ में पकड़ कर हिलाए जा रही थीं और बुआ के दोनों दूध झूल रहे थे, फूफा जी बुआ के चूचों को मसल रहे थे। अचानक बुआ पूरा लंड मुँह में लेकर चूसने लगीं। अब आगे..

फूफाजी बुआ को बोल रहे थे- आह्ह.. साली.. दस दिन से मेरे लंड में पानी जमा है.. चूस.. जल्दी-जल्दी..

बुआ जोर-जोर से लंड को चूसने लगीं और फूफाजी भी बुआ की गाण्ड को चाट रहे थे। वे अपनी जीभ को बुआ की गाण्ड के छेद में घुसा रहे थे। पूरा रूम मदमस्त आवाजों से गूँज रहा था। दोनों कामान्ध होकर सीत्कारें भर रहे थे- आह्ह.. और जोर से.. आह्ह.. मजा आ.. गया.. आह्ह..

थोड़ी देर बाद बुआ बोली- चोदो मुझे जल्दी..

फूफाजी ने भी आव ना ताव देखा और शुरूआत बुआ की गाण्ड से की, उन्होंने अपना पूरे 6 इंन्च का मोटा लंड बुआ की गाण्ड में घुसेड़ दिया। हल्के से बुआ चिल्लाईं.. उसके बाद बुआ अपनी गाण्ड को चुदवाने लगीं और मजा लेने लगीं।

फूफाजी बुआ को जोर-जोर से चोद रहे थे और ‘आह्ह.. ओह्हो..’ की आवाजें निकल रही थीं। एक बार फूफाजी झड़ गए.. लेकिन बुआ अभी तक झड़ी नहीं थीं।

उनके फूफाजी बुआ के दूध चूसने लगे.. दबाने लगे, बुआ तड़प रही थी, पागलों की तरह दोनों हरकतें कर रहे थे। कुछ देर में फूफाजी का लंड फिर से खड़ा हो गया।

ये सब देखकर मैं भी अपने लंड को पकड़ कर हिलाने लगा, मुझे भी मजा आ रहा था और मैं पूरा मजा ले भी रहा था। मैं सोचने लगा कि जब देखने में इतना मजा आता है.. तो फिर बुआ को चोदने में कितना मजा आएगा।

फूफाजी ने अपने लंड को सीधे बुआ की चूत में घुसा दिया और बुआ को चोदने लगे। फूफाजी अपनी कमर को आगे-पीछे करके बुआ की बुर पर जोर-जोर से धक्का लगा रहे थे।

बुआ चुदाई की मस्ती में आवाजें निकाल रही थीं। कुछ देर की चुदाई के बाद वे दोनों झड़ गए और उसी तरह दोनों नंगे एक-दूसरे से लिपट कर सो गए। मैं भी और एक बार अपने लंड को हिलाकर सो गया।

फिर जब मैं सुबह उठा.. तो बुआ रसोई में खाना पका रही थीं। मैं नहाने चला गया.. जब मैं नहा कर आया.. तो देखा फूफाजी ऑफिस जाने के लिए तैयार हो रहे थे और बुआ नाश्ता बना रही थीं, फूफाजी नाश्ता कर रहे थे और बुआ ने मुझे भी बुलाया।

‘सूरज बेटा नाश्ता कर लो..’ ‘जी बुआ.. आ रहा हूँ..’

मैंने भी फूफाजी के साथ नाश्ता कर लिया और मैं अपने कमरे में पढ़ने के लिए चला गया.. क्योंकि मेरे कल से एग्जाम थे। फूफाजी भी नाश्ता करने के बाद ऑफिस चले गए.. अब घर में बुआ और मैं रह गए थे। मैं पढ़ रहा था और बुआ अपने कमरे में टीवी देख रही थीं।

मैं पढ़ाई करते-करते सो गया था। जब मैं सो कर उठा.. उस समय 2:30 बजे का हो रहा था। मैं फ्रेश होने के लिए बाथरूम गया.. उसके बाद मैं वापिस कमरे में आया। थोड़ा आराम करने के बाद मुझे भूख लग आई थी.. तो मैंने सोचा कि बुआ को खाना लगाने की बोलता हूँ।

मैं बुआ के कमरे में गया.. तो देखा बुआ पैर फैलाए हुए सो रही हैं.. उनकी छाती से पल्लू हटा हुआ था.. सिर्फ़ ब्लाउज था.. जिससे उनका जोबन साफ़ नजर आ रहा था।

बुआ की बड़ी-बड़ी चूचियों को देख कर मैं पागल हो गया। मैंने सोचा अभी जाकर बुआ की चूचियों को दबाकर मजा लूट लूँ।

मैं बुआ के एकदम सामने जाकर उनके गोरे-गोरे पैरों को निहार रहा था.. मैंने सोचा कि मुझे अगर बुआ के नंगे शरीर को चाटने का मौका मिले.. तो मैं सीधे जन्नत की सैर कर लेता।

अभी मैं ये सब सोच ही रहा था कि जाने कब बुआ जाग गईं.. मुझे पता ही नहीं चला।

बुआ मुझे देखते हुए बोलीं- क्या देख रहे हो बेटा? ‘कुछ नहीं बुआ.. आप बहुत खूबसूरत हो.. आप बहुत सेक्सी लग रही हो..’ बुआ बोली- सेक्सी का क्या मतलब होता है? बुआ पढ़ी-लिखी नहीं थीं.. तो मैं बोला- सेक्सी का मतलब होता है कामुक..

तो बुआ शर्मा गईं.. और बोलीं- क्या बोल रहे हो बेटे.. मैं तो अब बूढ़ी होने को चली.. पूरे 42 की हो गई हूँ.. और मैं तुझे इतनी अच्छी लग रही हूँ। ‘हाँ बुआ.. आप तो पूरी 32 की लग रही हो..’ ‘क्या बोल रहा.. तू बहुत बदमाश हो गया है..’ ‘सच में बुआ.. आप हो ही इतनी खूबसूरत..’

बुआ बोलीं- छोड़ो ये सब बातें.. तुम यहाँ पर किस लिए आए थे? तो मैं बोला- बुआ मुझे भूख लगी है। बुआ बोलीं- हाँ भूख तो मुझे भी लगी है.. चलो खाना खाते हैं।

मैं टेबल पर बैठा था.. कुछ देर में बुआ खाना ले कर आईं और हम दोनों साथ में बैठ कर खाना खाने लगे।

अचानक फूफाजी का फोन आया.. उन्होंने बोला- मुझे ऑफिस के काम से बाहर जाना है दस दिनों के लिए.. सुबह निकलना है.. तो बुआ ने जल्दी खाना खाया और फूफाजी के जाने की तैयारी मतलब पैकिंग आदि करने चली गईं।

मैं भी खाना खाकर बुआ के कमरे में गया और बुआ को बोला- मैं कुछ मदद कर दूँ बुआ.. आपका काम जल्दी खत्म हो जाएगा। तो बुआ बोलीं- नहीं बेटा.. तेरी परीक्षा है.. तू अपनी तैयारी कर.. मुझसे सब हो जाएगा। मैं बोला- बुआ अभी तो मैं फ्री हूँ.. बुआ बोलीं- ठीक है..

मैं बुआ के साथ पैकिंग करने लगा। पैकिंग के बहाने कभी-कभी मैं बुआ की गाण्ड पर हाथ फेरा लेता.. तो बुआ कुछ नहीं बोलतीं.. तो मेरी थोड़ी हिम्मत बढ़ गई। ड़फिर मैं इसी तरह कभी गाण्ड पर फेरता.. तो कभी चूचियों को टच कर देता। ।मुझे ये सब करने में बहुत अच्छा लग रहा था.. और मेरा लंड भी खड़ा हो गया था।

कुछ ही देर में फूफा आ गए.. रात को सब लोगों ने खाना खाया और सोने चले गए.. क्योंकि सुबह स्टेशन जाना था। इसलिए मैंने भी सोचा कि वे दोनों भी जल्दी सो जाएंगे.. लेकिन होना कुछ और था।

रात को जब मैं पढ़ाई खत्म करके पेशाब करने गया.. उस वक्त 11 बज रहे थे। क्योंकि कल मेरा भी एग्जाम था.. इसीलिए मुझे भी जल्दी सोना था।

सुबह मुझे जल्दी उठना था.. लेकिन सब गड़बड़ हो गया। जब मैं पेशाब करके वापिस लौट रहा था तो बुआ के कमरे से चुदाई की आवाजें आ रही थीं।

जब मैं दरवाजे के पास गया.. तो देखा अन्दर से बन्द था। अन्दर क्या चल रहा है.. मुझे देखना था इसलिए मैं छेद जैसी कोई जगह ढूँढ़ रहा था। मुझे दरवाजे की कुँजी की छेद से देखने की जगह मिल गई.. और बस शुरू हो गया।

जिसका अनुमान था मुझे.. आखिर वही दिखा.. बुआ और फूफा दोनों नंगे थे।

बुआ बोल रही थीं- मैं दस दिन कैसे बिताउँगी चुदाई के बिना? तो फूफा बोले- उंगलियों से काम चला लेना। फूफा बुआ को चूम रहे थे।

ये सब देख कर मेरा भी लंड तन कर खड़ा हो गया था। फूफा बुआ की चूचियों को चूस रहे थे.. तो कभी बुआ को होंठ चूस रहे थे।

कभी वे बुआ की पीठ को सहला रहे थे.. तो कभी पूरे बुआ के नंगे शरीर को चूमते हुए उनकी बगलों को सूँघ रहे थे। सुना है महिलाओं की बगलों से जो पसीने की महक आती है.. उससे और जोश आ जाता है।

इतना होने के बाद दोनों गर्म हो चुके थे। फिर फूफा ने अपने लंड को बुआ के मुँह में घुसेड़ दिया और बुआ आइसक्रीम की तरह उनका लवड़ा चूसने लगीं। उनके मुँह से ‘उम्माह.. उम्माह..’ की आवाज आ रही थी।

मैं भी अपना लंड धीरे-धीरे आगे-पीछे कर रहा था। फूफाजी झड़ने वाले थे.. तो बुआ बोलीं- मेरे मुँह में सारा रस निकाल दो। फूफाजी उनके मुँह में झड़ गए और बुआ ने उनका सारा रस पी कर लवड़ा साफ़ कर दिया। फूफा के लंड को बुआ ने चूस-चूस कर लाल कर दिया था।

अब बुआ की चूत को फूफाजी ने चाटना शुरू किया। कुछ ही देर में बुआ ‘आहें’ भरने लगीं ‘आह.. ऊह.. आह..’

अब तक फूफा का लंड फिर से खड़ा हो गया था.. तो फूफाजी ने बुआ को घोड़ी बनाया और उनकी गाण्ड मारने की तैयारी करने लगे। पहले अपने लंड में फूफाजी ने तेल लगाया और बुआ की गाण्ड में भी तेल मल कर लंड को बुआ की गाण्ड में डालने लगे।

लौड़ा धीरे-धीरे अन्दर घुस रहा था। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !

जब पूरा लंड बुआ की गाण्ड में घुस गया.. तब बुआ जोर से चिल्लाईं। फूफाजी रूके नहीं.. और वे कमर को आगे-पीछे हिलाने लगे। लगता था कि अब बुआ को भी मजा आने लगा था.. इसलिए बुआ गाण्ड उठा-उठा कर चुदवा रही थीं।

फूफा जी ने भी धक्का मारना तेज कर दिया। पूरा कमरा ‘पच..फच.. छट… छप..’ की आवाजों से गूंज रहा था। बुआ की चूचियाँ हवा में लटक रही थीं और झूल रही थीं।

ये सब देखने में मुझे बहुत मजा आ रहा था। जब फूफाजी झटके मार रहे थे.. तब बुआ के मम्मे हिल रहे थे। थोड़ी देर में फूफाजी झड़ गए। कुछ देर बाद फूफाजी बुआ की गाण्ड चाटने लगे और बुआ भी मस्ती से अपनी गाण्ड चटवा रही थीं। कुछ देर के बाद बुआ फूफाजी के लंड को चूसने लगीं। बुआ ने लंड चूस-चूस कर फिर से लंड को खड़ा कर दिया।

बुआ की रसीली गाण्ड देखकर मुझसे भी रहा नहीं गया। मैंने अपना लंड हिलाना शुरू किया.. और कुछ ही देर में मैं झड़ गया.. तब जा कर मेरे लंड को शांति मिली।

उधर कमरे के अन्दर फूफाजी ने बुआ की चुदाई जारी रखी हुई थी।

चुदाई की मनमोहक आवाजें आ रही थीं। फूफाजी अब बुआ की चूत की चुदाई कर रहे थे.. वे जोर-जोर से बुआ को चोद रहे थे और बुआ भी गाण्ड उठा-उठा कर चुदवा रही थीं। बुआ अपने कमरे में जोर से सिसकारियाँ ले रही थीं- आह.. राजा.. आह ऊऊऊऊऊ।

थोड़ी देर में दोनों झड़ गए और सो गए.. क्योंकि सुबह फूफाजी को स्टेशन जाना था। उन्होंने रात में बुआ की दम से चुदाई की थी।

सुबह सब लोग जल्दी उठे.. क्योंकि मेरा एग्जाम था.. इसलिए मैं भी उठा था.. फूफाजी को बाहर जाना था। फूफाजी चाय पी कर चले गए।

दोस्तो, मेरी सच्ची कहानी कैसी लगी.. आप लोग को जरूर बताइएगा। [email protected]

Ananya Verma

अरे! मैं अनन्या वर्मा हूँ - लखनऊ विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान की पढ़ाई करने वाली और पिछले 4 साल से हिंदी में ऐसी कहानियाँ लिख रही हूँ जो आपकी अंगुलियाँ स्क्रीन पर रोक दें। मैं इंसानी इच्छाओं, ख्वाहिशों और वो पलों को समझती हूँ जो आप छुपाना चाहते हैं लेकिन महसूस करना चाहते हैं। मेरी कहानियों में वही बात है जो दिल को छूती है और तन को सिहराती है। हज़ारों पाठकों ने मेरी कहानियाँ पढ़कर गर्म रातों का मज़ा लिया है। तो चलो, आज की रात मेरी कहानी से बनाते हैं!

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