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भीड़ भरी लोकल ट्रेन

हाई जानू…अब तक मैंने तुम्हे वो सब बताया जो मैंने अपने मॉडलिंग करियर में एक्सपीरियेन्स किया। मैंने जो सक्सेस पाई और उस दौरान जो खोया…वो सिर्फ़ तुम्हे बताया। sex kahaniya

रीतिन ने मुझे धोखा दिया लेकिन मैं महक के लिए खुश थी।

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antarvasnasexstories.org par sex in train desi chudai kahaniya & mast antarvasna sex kahaniउस दिन उन दोनो को बिस्तर में विटनेस करने के बाद मैं घर गयी और एक दो फोन कॉल किये।

अगले दिन मैंने महक को एक नोट लिखा, जिसमें मैंने उसे बताया कि मैं कुछ दिनो के लिए अपने गाँव जा रही हूँ।

मैं खुश हूँ उसके और रीतिन के लिए, गुड बाई। मैं एक रेलवे स्टेशन के बाहर खड़ी थी।

शाम का वक़्त था और स्टेशन क्राउडेड था।

कुछ पेवेर्ट्स मुझे देख कर मेरे आस पास घूम रहे थे।

मैंने उन्हे थोड़ी देर इग्नोर किया और फिर एक ट्रेन आ गयी।

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राहुल ट्रेन से उतरा, वही लड़का जिसके साथ मेरा एक शॉर्ट अफयेर चला था केरला में, और मुझे देख कर उसके चेहरे पर एक मुस्कान आई।

मैंने भी एक स्माइल दिया और उसे अपने पास आते हुए देखा।

राहुल जैसे ही मुझ तक पहुँचा उसने मुझे कस के गले लगाया और मैंने भी उसे एक वॉर्म हग दिया।

उसके बॉडी को अपने बॉडी पर फील करके मुझे वो वॉटरफॉल में उसके साथ बिताए पल याद आ गया।

राहुल ने मुझे वहाँ इतना प्यार किया और बदले में कुछ नही माँगा।

मेरा फ़र्ज़ है कि अब मैं भी उसके लिए वो करूँ जो उसने मेरे लिए किया।

मैं उसे अपने गाँव ले जाने वाली थी… उसके साथ मज़े करने।

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हम अलग हुए और मैंने रियलाइज़ किया की हमने वहाँ कुछ ज़्यादा ही सेन्सुअली एक दूसरे को हग किया था जिस कारण रेलवे स्टेशन में मौजूद यात्री हमें घूर रहे थे।

राहुल ने पूछा कि अब कहाँ जाना है?

मैंने कहा- अभी एक लोकल ट्रेन से हमें कल्याण जाना है।

राहुल ने अपना बेग पिक अप किया और कुछ देर में ट्रेन आ गई।

राहुल को अकंपनी करना था वरना मैं वूमेन्स कम्पार्टमेंट में ही बैठती.

अभी हम क्राउड के साथ जनरल कम्पार्टमेंट में घुसे, क्राउड के पुस करने से हम अलग हुए और कुछ देर बाद जब ट्रेन स्टार्ट हुई राहुल को मैंने कुछ कदम दूर खड़ा देखा।

मैं पाँच या छह आदमियो के बीच थी।

कम्पार्टमेंट पूरा क्रेंप्ड था इसलिए वो मुझ से दबे हुए थे।

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मैंने भी बिना सोचे स्लीवलेस ड्रेस पहनी थी और अब मेरे बड़े बदन को छूने का मौका मिल रहा था उन आदमियो को, मैंने उन्हे इग्नोर किया और बस सफ़र के एंड का इंतज़ार करने लगी।

कुछ देर बाद मैंने कुछ फील किया… मेरे बैक पर किसी ने अपना हाथ रख दिया था।

कुछ देर में वो हाथ मेरे वेस्ट के नीचे गया।

मैं उसे पलट कर थप्पड़ मारना चाहती थी लेकिन मैं जानती थी कि लोकल ट्रेन में ऐसा सीन क्रियेट करना मेरे लिए भी डेंजरस साबित हो सकता है इसलिए मैं चुप रही।

मैंने मुड़ के देखा तो जाना की यह कोई कॉलेज स्टूडेंट था मेरे मुड़ने से उसने हाथ हटा दिया।

लेकिन फिर पाँच मिनट बाद उसका हाथ मेरे वेस्ट पर आया.

मैंने जस्ट नॉर्मल कमीज़ पहनी थी जिस कारण वो मेरे फ्लेशी बदन को फील कर पा रहा था.

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