दीदी का प्यार और चुदाई

प्रेषिका : सीमा

मेरा नाम सीमा है, यह बात तब की है जब मैं ग्यारहवीं कक्षा में पढ़ती थी। मैं दिल्ली में अपनी दीदी और जीजा के साथ रहती हूँ। मेरी दीदी मुझसे बहुत प्यार करती हैं। यह मुझे तब पता चला, जब मुझे गयारहवीं कक्षा में फेल कर दिया गया। इस बात को सुन कर मेरी दीदी बहुत दुःखी हुईं, और मैं भी बहुत उदास हो गई। जब दीदी ने मुझे उदास देखा तो वो मेरे स्कूल की टीचर से मिलने चली गईं, और मैं भी उनके साथ चली गई। वहाँ जाकर दीदी ने मेरे स्कूल टीचर से बात की तो वो कहने लगे कि अब कुछ नहीं हो सकता है।

मैं बता दूँ कि मेरी दीदी की उमर 27 साल है। उनका नाम रानी है। जब बात नहीं बनी, तो दीदी रोने लगीं, और उनके पैर पकड़ने लगीं। मुझे यह सब देख कर बहुत बुरा लग रहा था कि मेरी वजह से उन्हें किसी के पैर पकड़ने पड़ रहे हैं। तब भी मेरा खडूस टीचर नहीं माना।

थोड़ी देर बाद दीदी के बहुत कहने पर उसने उसने मेरी दीदी को घूर कर अपनी वासना भरी नजरों से देखा, बोला- कुछ हो सकता है, पर तुम्हें थोड़ी तकलीफ़ होगी।

मैं और दीदी कुछ समझ नहीं पाये पर दीदी ने उसे हाँ कह दिया, वे उनसे बोलीं- मैं अपनी बहन के लिये कुछ भी तकलीफ उठाने को तैयार हूँ।

उसने दीदी से अन्दर ऑफिस में आने को कहा और मुझसे बाहर ही रुकने को कह दिया। मैं वहीं रुक गई और रानी दीदी अन्दर चलीं गईं। दीदी थोड़ी देर तक नही आईं तो मैंने ऑफिस के दरवाजे की दरार से झाँक कर देखा कि मेरे टीचर ने दीदी को गोद में बैठा रखा था और उनकी चूत को ऊपर से ही मसल रहा था। फ़िर थोड़ी देर में दीदी आ गईं।

तब मैं समझ गई कि मेरे लिये दीदी ने उसके साथ अपने जिस्म का सौदा कर लिया है। हम लोग वहाँ से घर को चल दिये तो मैंने पूछा कि- मेरे टीचर ने क्या कहा?

दीदी बोलीं- रविवार को उनके घर बुलाया है, फ़िर सब ठीक हो जायेगा।

रविवार को मैं और मेरी दीदी 11 बजे मेरे टीचर के पास चले गये। वहाँ जब उसने मेरी दीदी को देखा तो उसके चेहरे पर एक वासना युक्त मुस्कान थी। उसने हमें अन्दर बुलाया, और फ़िर थोड़ी देर में एक प्रश्न पत्र लाया और मुझसे बोला कि- तुम इसे हल करो, मैं तुम्हारी दीदी से कुछ बात कर लूँ।

और वो दीदी को कमरे में ले गया, मैं जानती थी कि वो दीदी को चोदेगा। मैंने सोचा कि ये सब बातें सिर्फ़ सुनी ही है, अब एक बार देख भी लूँ, और जब मैंने अन्दर देखा तो वो दोनों बातें कर रहे थे, कि किस तरह उन्होंने मुझे पागल बनाया।

यह सब सुन कर मैं हैरान रह गई कि मेरी दीदी ने अपनी चुदाई के लिये मुझसे झूठ बोला, मगर मुझे चुदाई के दृश्य देख कर बड़ा रोमांच भी हो रहा था और मैं उनकी चुदाई देखने लग गई।

उसने पहले दीदी के पूरे जिस्म को चूमना शुरू किया और फ़िर दीदी को नंगा कर दिया। दीदी पूरी नंगी थीं, और उन्होंने अजय (मेरे टीचर का नाम अजय है) को भी नंगा कर दिया और जब मैंने अजय के 7 इन्च के हथियार को देखा तो मैं हैरान रह गई, पर मेरी दीदी उसके हथियार को लॉली पॉप की तरह चूस रही थीं। वो मुझे अच्छा नहीं लग रहा था।

फ़िर अजय ने दीदी को लेटा दिया और उनकी चूत को चूसने लगा और मुझे भी कुछ कुछ होने लगा। फ़िर अजय ने दीदी को घोड़ी बना कर उनके लटकते दुद्दुओं को अपने हाथों से मसलने के साथ साथ उनकी गान्ड चाटना शुरू कर दी। थोड़ी देर गान्ड चाटने के बाद उसने अपना हथियार दीदी की चूत पर रखा और एक ही धक्के में आधा अन्दर घुसा दिया, दीदी को जोर से दर्द हो रहा था, वे सिसिया रहीं थीं, पर थोड़ी देर बाद उनको भी मजा आने लगा और वो कहने लगीं- अजय, अपनी इस कुतिया को चोद दो।

अजय ने दीदी को अपनी गोद में उठा कर चोदना शुरू कर दिया। फ़िर उसने दीदी को वापस बिस्तर पर लेटा दिया और जोर जोर से उनकी चूत में धक्के मारने लगा तभी उसने हथियार बाहर निकाल कर, अपना मुँह दीदी की चूत की तरफ कर लिया और अपना लण्ड दीदी के मुँह में दिया और दीदी उसे चूसने लगीं।

अजय ने पास में रखी सॉस की बोतल उठाई और दीदी की चूत पर सॉस डाल दिया, और उस सॉस के साथ साथ दीदी की चूत को भी चूसने लगा। ये सब देखना मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।

मैं सोच रही थी कि काश, मैं दीदी की जगह होती तो मैं भी खूब चुदती। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं।

फ़िर मैंने देखा कि अजय ने दीदी को फिर से घोड़ी बना कर अपना लौड़ा दीदी की गान्ड में घुसेड़ दिया। दीदी की चीख निकल गई और उनके चूतड़ों में से थोड़ा सा खून भी निकलने लगा।

थोड़ी देर तक अजय अपना फनफनाता लौड़ा कभी दीदी की चूत में, कभी गान्ड में डालता रहा और फ़िर आखिर में मैंने देखा कि उसके मुहँ से दीदी के लिये गालियाँ निकलने लगीं, वो कह रहा था- ले साली छिनाल, रंडी, कुतिया मेरे माल का स्वाद चखने को तैयार हो जा, और एक तेज ‘आह आह’ की आवाज के साथ उसने अपना लौड़ा दीदी की चूत से निकाल कर अपना माल दीदी के मुँह पर गिरा दिया और फ़िर दीदी ने भी अपना मुँह खोल कर उसके हथियार को चूस चूस कर सारा माल चाट लिया।

फ़िर उसने भी दीदी की चूत को चूसा और थोड़ी देर बाद दीदी ने भी अपना माल निकाल दिया, जिसे अजय ने पूरा पी लिया, फ़िर दोनों ने एक दूसरे को खूब चूमा।

उनकी चुदाई देख कर मेरी पैन्टी भी गीली हो गई थी। दीदी ने अपने कपड़े उठाये तो मैंने जल्दी से दरवाजे से हट कर वहीं सोफे पर सोने का नाटक किया।

दीदी और अजय बाहर आये। अजय ने मुझे सोता देख अपनी लुंगी में से अपना लौड़ा निकाल कर मेरे हाथ पर रख दिया तो मैं डर गई,

तो दीदी बोलीं- यह क्या कर रहे हो?

अजय बोला- इसे भी लौड़े का मज़ा दे दूँ।

दीदी बोलीं- अभी नहीं, यह अभी लौड़ा लेने के लिये तैयार नहीं है।

और फ़िर अजय ने अपना लौड़ा मेरे मुँह पर रख दिया और उसे रगड़ने लगा।

तभी मेरे जीजा जी का फोन आ गया, फ़िर दीदी ने मुझे जगा कर बोला- घर चलो तुम्हारा काम हो गया है, और मेरा भी।

दीदी को लगा कि मुझे कुछ नहीं पता है पर मैं सब जानती थी।

जब हम घर जा रहे थे तो दीदी ने बोला- तुम अपने होठों पर जीभ फ़िराओ।

मैंने जीभ फ़िराई तो दीदी ने पूछा- कैसा लग रहा है?

मैंने बोला- बहुत अच्छा।

पर मुझे उसका स्वाद बहुत गन्दा लगा।

आपको अपनी अगली कहानी जिसमें मेरे जीजू ने मेरी सील तोड़ी थी, बताऊँगी तब तक सभी को मेरा प्यार !

आपको मेरी कहानी कैसी लगी। मुझे ज़रूर बताएँ !

Ananya Verma

अरे! मैं अनन्या वर्मा हूँ - लखनऊ विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान की पढ़ाई करने वाली और पिछले 4 साल से हिंदी में ऐसी कहानियाँ लिख रही हूँ जो आपकी अंगुलियाँ स्क्रीन पर रोक दें। मैं इंसानी इच्छाओं, ख्वाहिशों और वो पलों को समझती हूँ जो आप छुपाना चाहते हैं लेकिन महसूस करना चाहते हैं। मेरी कहानियों में वही बात है जो दिल को छूती है और तन को सिहराती है। हज़ारों पाठकों ने मेरी कहानियाँ पढ़कर गर्म रातों का मज़ा लिया है। तो चलो, आज की रात मेरी कहानी से बनाते हैं!

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