प्रेषक : राजा गर्ग मैं और प्रियंका लगभग रोज़ मिलते थे। मेरी सारी हसरतों को वो पूरा करने में माहिर थी, उसने अपने बेटे को मेरा स्टूडेंट बना दिया था। मैं रोज़ उसके घर जाता और उसके पति के जाने के बाद उस बेटे को होमवर्क दे कर दूसरे कमरे में जाता और उसे दीवार के सहारे लगा कर कभी उसके होंठ चूसता, कभी उसके मम्मे। उसके मम्मे मेरे दांतों के निशान से भरे पड़े थे। उसने अपने पति को बोल रखा था कि ये उसने खुद बनाए हैं। उसके होंठों को मैंने चूस-चूस कर सुजा दिया था। बड़ा स्वाद था साली के होंठों में, मज़ा देकर मेरा खड़ा कर देती थी। मेरा जब भी मन करता मैं उसकी चूत का ढक्कन ज़रूर बजाता। कभी भी उसके कमरे में जाकर उसे बिस्तर पे लिटाया और उसकी साड़ी ऐसे ही उठा दी और बस शंटिंग मशीन चालू कर देता था। जब तक मन करता उसकी चूत मारता, जब मन भर जाता, तब चुम्मा चाटी चालू। बाहर उसका बेटा पढ़ता रहता, अन्दर उसकी माँ चुदती रहती। बड़ी नाइंसाफी होती उस बेचारे के साथ। एक बार उसके पीरियड चल रहे थे, तो वो बोली- मेरी गांड ही मार लो बस ! उस दिन जितना वो तड़फी थी, वो उतना पहले कभी नहीं तड़फी थी। मैंने लंड उसकी गांड के छेद पे लगाया और सहलाने लगा। फिर मैंने हाथ धोने वाला साबुन हाथों में लिया और उसकी गांड के छेद पे और अपने लंड पर लगा लिया और लंड उसके छेद पे लगा कर एक ही बार में पूरा घुसा दिया, वो चीख पड़ी। मैंने झट से अपने हाथ से उसका मुँह बंद किया तो कमीनी ने दांतों से मेरा काट खाया। मैंने फिर अपना लंड बाहर निकाला और उसकी गांड में फिर डाला और धीरे-धीरे उसकी गांड मारनी चालू कि वो दर्द से तिलमिला रही थी, मगर मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था। मैं उसकी तब तक मारता रहा, जब तक वो बदहवास नहीं हो गई। मैंने उसकी गांड मार कर उसे बिस्तर पर ही छोड़ दिया और अपने आप को धोने चला गया। जब तक मैं वापस आया, वो वैसे ही बदहवास सी बिस्तर पर पड़ी थी। उससे शायद उठा नहीं जा रहा था। मैंने उसे उठाया और उसके कपड़े देकर कहा- ले अब पहन ले और जाकर अपने बेटे को देख.. क्या कर रहा है..! जब भी हम कभी बाहर घूमने जाते तब मैं उसके हर अंग का स्वाद ढंग से चखता, फिर वो चाहे उसकी चूत हो या उसकी गांड, या उसकी बगलें हों या उसकी कमर, उसके हर अंग को मैंने ढंग से चाट चुका था। कभी मेरा चाटने का मन नहीं होता तो घन्टों उससे अपना लंड चुसवाता रहता। उसे भी मज़ा आता था, वो मज़े ले-ले कर मेरा लंड चूसती रहती। एक बार तो मैंने मूवी हॉल में ही उससे अपना लंड चुसवाया था और उसकी टी-शर्ट उतार कर मजे से उसके मम्मे चूसे थे। उसके निप्पल बहुत बड़े-बड़े थे, तो उन्हें चूसने में मज़ा भी बड़ा आता था। उस औरत के अन्दर बहुत आग थी। शायद उसका पति उसे वो सब नहीं दे पा रहा था, जिसके लिए उसने उससे शादी की थी। उसे शायद इसका ये ही मतलब मालूम था, बस, उसके मम्मों के दूध का स्वाद चखने की एक बड़ी तमन्ना बाक़ी रह गई थी। यह तमन्ना भी उसने मेरी एक साल के आस-पास ही पूरी कर दी। उसके पति को एक और बच्चा चाहिए था, तो उसने ‘हाँ’ बोल दी। मैंने कुछ टाइम के लिए उसके पास जाना छोड़ दिया मगर जब 14 महीने बाद मैं उसके पास गया, तब उसे माँ बने 5 महीने हो चुके थे। शरीर भी उसका पहले से भद्दा और फ़ैल गया था, मगर मुझे तो कुछ और ही काम था। मैं उसके घर जब गया, तब उसका बेटा स्कूल में था और वो अपने दूसरे बच्चे के साथ कमरे में बैठी थी। मैं उसके साथ उसी के कमरे में गया और उसे वहीं पकड़ लिया। वो बोली- यहाँ नहीं। मैंने कहा- यहाँ कोई दिक्कत नहीं है, इसे क्या पता चलेगा। और इतना कह कर, मैंने उसके मम्मे को कस के जकड़ लिया। वो मेरी उस जकड़ से छूट ही नहीं पाई। उसने ब्लाऊज पहन रखा था, जो मेरे हाथ में आ गया और चिर गया। वो बोली- थोड़ा सा तो सब्र करो, अगर इतने में कोई आ गया, तो मैंने कपड़े कैसे पहनूंगी, नंगी थोड़ी ही जाऊँगी किसी के सामने। मैंने उसे छोड़ दिया, वो दूसरे कमरे में गई और वहाँ जाकर अपने कपड़े उतारे और अपने लिए दूसरे कपड़े निकाले और फिर मुझे वहाँ बुला लिया। वो नंगी खड़ी थी। मैं उसके पास गया और जैसे ही मैंने उसके मम्मे को जकड़ा तो उसमे भरा हुआ दूध छलक कर बाहर आ गया, जैसे किसी दूध की थैली में छेद हो गया हो। मैं मचल गया और उसके मम्मे दबाने लगा। उसमें से दूध बाहर आने लगा। जैसे कोई भैंस के थन दुहता है, वैसे मैं उसके थन दुह रहा था। उनमें से लगातार दूध आ रहा था और मैं उसके मम्मे में से सारा दूध निकलने में लगा था। थोड़ी देर बाद जब उसके मुम्मे लाल होने लगे तो मैंने उसे दीवार के सहारे लगाया और उसके मम्मे को चूसने लगा। पहली बार जब मैंने उसके मम्मे को चूसा, मेरा मुँह उसके दूध से भर गया। क्या मस्त एहसास था वो…! मैं पूरी तरह मदहोश और बेकाबू हो चुका था, मैं प्रियंका के मुम्मे चूसे जा रहा और उनमें से निकलता हुआ दूध मेरे मुँह में जा रहा था। फिर मैंने एक बार उसके दूध का घूँट भरा और उसके मुँह को खोला और उसमें डाल दिया। मैंने एक छोटा कप लिया और उसमें उसका दूध निकाला और फिर आराम से बैठ कर पिया। मैं अपनी ठरक मिटा चुका था। मेरा काम पूरा हो चुका था मगर वो जाकर बिस्तर पर लेट गई और उसे लगा कि अब मैं उसकी लूँगा.. मगर मैं मूड में नहीं था। मैं कमरे के बाहर चला गया तो वो पीछे से आई और और मुझसे बोली- तुम्हारा काम तो हो गया, मगर मेरा क्या? मैं बोला- जानू, आज बस इतना ही मूड था। मगर वो बोली- आज मेरा मूड है, इतने दिन हो गए। मगर मैंने कहा- आज नहीं, हाँ मगर किसी और दिन, तुम्हारी सारी हसरतें पूरी करूँगा, चिंता मत करो। इतना कह कर मैं उसके घर से बाहर निकल गया। और वहाँ से चला गया मगर उसके पास जाने का फिर कभी मन नहीं हुआ। प्रियंका की चुदाई की बड़ी याद आती है, उसका स्वार्थ चुदाई के लिए तो था, पर वो मुझे बहुत चाहती थी, जबकि मैं उसको सिर्फ अपने लौड़े के लिए एक आइटम समझता था। मुझे आप अपने विचार यहाँ मेल करें।
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उन दोनों की ही कोशिशों से वह जल्दी ही इस झटके से उबर गई और उसने महसूस किया कि उसकी योनि में उठी दर्द की लहरें अब ठंडी पड़ रही थीं। उसके चेहरे पर राहत के आसार आते देख सोनू ने लिंग को पीछे खींचा और शिश्नमुंड तक बाहर निकाल कर फिर वापस अंदर ठेल […]
रानो ने कमरे से निकलते वहाँ जलते नाईट बल्ब को बुझा दिया था और बाहर निकल गई थी और एक मिनट बाद जब वापस आई थी तो उसे महसूस हुआ कि साथ में कोई और है। रानो ने दरवाजा बंद किया होगा और अंधेरा और गहरा गया। ‘कितना अंधेरा है दी।’ उसे फुसफुसाहट सुनाई दी […]
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