अन्तर्वासना के सभी पाठकों को सरोज़ की खुली हुई टांगों से नमस्कार.
मैंने कुछ ही दिन पहले अन्तर्वासना के बारे में सुना था, फ़िर जब साइट खोली और इधर की सेक्स कहानियां पढ़ीं तो मेरी चुत एकदम मस्त हो गई. चूचियां गर्म हो गईं.
मैं चुदाई की स्टोरीज़ पढ़ कर एक कामुक हसीना बन गई और लंड के लिए बेचैन हो गई.
मेरा नाम तो आपको पता ही है. मेरी उम्र 18 साल की हो चुकी है. मैं स्कूल में पढ़ती हूँ तो उधर मेरी दोस्ती उन लड़कियों से हुई, जो अमीरज़ादियां थीं.
मैं मिडिल क्लास परिवार से थी. मेरी पॉकेट मनी कम ही थी.
मैंने एक अमीरज़ादे को अपना आशिक बना लिया. मैं बेहद खूबसूरत हूं और अपनी सभी सहेलियों के मुकाबले बहुत सेक्सी हूं.
मेरी सभी सहेलियां चुदासी रंडियां ही हैं. वे किसी भी हष्ट-पुष्ट लौंडे को देखते ही उसे अपनी चुत में घुसेड़ लेती हैं. उसके ऊपर खूब खर्च करती हैं और मस्ती से चुदवाती हैं.
मगर मेरे पास पैसे नहीं होते थे तो मैं कसमसा कर रह जाती थी.
फिर उस अमीरज़ादे लड़के से मेरी दोस्ती हो गई और अफ़ेयर के दस दिन बाद ही उस कमीने ने मेरी कुंवारी बुर की सील तोड़ डाली. मुझे खुद भी चुदने की चुल्ल थी तो मैं उसके साथ एक बढ़िया से होटल में चली गई और उधर उसने मुझे नंगी करके चोद दिया.
एक बार लंड का चस्का लगा तो मैं भी सेक्स समुन्दर में गोता लगाने लगी. वह मेरे ऊपर खूब पैसे खर्च करने लगा था; मुझे बहुत शॉपिंग करवाता, मंहगे कपड़े, मोबाइल, गोल्ड की चैन आदि गिफ्ट देता रहता और बदले में मुझे चोद लेता.
हमारा अफ़ेयर 3 महीने चला ही था कि एक दिन उसका एक्सिडेंट हो गया. उस दुर्घटना में उसकी एक टांग टूट गई.
मैं उससे मिलने गई और मैंने उसे दिलासा देते हुए कहा- जल्दी ठीक हो जाओगे. वह भी दुखी था मगर क्या किया जा सकता था.
उसके कुछ ही दिन बाद एक रात की बात है.
उस रात को लगभग नौ बजे के आस पास मेरे पापा के दो दोस्त घर पर आए. हम सभी ने उनका स्वागत किया.
वे लोग तीन दिन के लिए आए थे. उसी दिन मम्मी को जरूरी काम से नानी के यहां जाना था तो वे चली गई थीं.
मैंने और मेरी छोटी बहन ने पापा के दोनों दोस्तों की खूब सेवा की. पापा को अपने पुराने दोस्त मिल गए थे और घर पर मम्मी भी नहीं थीं, तो पापा को खुली छूट मिल गई थी.
उन्होंने अपने दोस्तों के लिए बार होटल से बढ़िया डिनर दारू वगैरह का इंतजाम किया.
उस रात पापा ने उनके साथ खुद भी खूब दारू पी और पिलायी. दारू के बाद पापा न.शे में लुड़क गए तो मैं उन लोगों को रूम दिखाने आ गई.
मैं उन्हें गेस्ट रूम में छोड़ कर वापिस आ गई. पापा दीवान पर ही टांग पसार कर सो गए थे.
उनका पैग अभी भरा हुआ था. मैंने इधर उधर देखा और गिलास उठा कर हलक के नीचे उतार लिया.
मेरा मन हो गया था कि पापा के दोस्तों के सो जाने के बाद कमरे में दारू का मजा और लूँगी.
मगर तभी मुझे याद आया कि पापा के दोस्त ने पानी दे जाने के लिए कहा था. तो मैं पानी का जग भर कर गेस्ट रूम में रखने गई.
एक अंकल फ़्रेश होने के लिए बाथरूम में गए थे और दूसरे अंकल कपड़े चेंज कर रहे थे. उन्होंने बनियान पहन ली थी और पजामा पहनने वाले थे.
मैं जग लेकर कमरे में गई तो मेरी नज़र न चाहते हुए भी सीधी उनके फ़ूले हुए कसे लंड पर चली गई.
दारू की मस्ती भी हल्की हल्की मेरे ऊपर चढ़ रही थी और मैं कई दिनों से चुदी भी नहीं थी. तो अंकल का माँसल शरीर छाती के बाल और फ़ूला हुआ लंड देख कर मेरी टांगों के बीच में खुजली होने लगी.
मैंने अंकल को पानी का जग दिया और कमरे से वापस आ गई. मेरी बहन सो चुकी थी.
मैं वापस पापा के पास आई और एक गिलास में दारू भर कर अपने कमरे में आ गई.
अब मैं दारू की चुसकियां लेती हुई अपने मोबाईल में अन्तर्वासना की साइट खोल कर लंड चुत की चुदाई की कहानी पढ़ने लगी थी. मेरे मन में बार बार उन अंकल का फ़ूला हुआ लंड आने लगा था.
मैंने दरवाज़ा तो बंद कर ही लिया था, खिड़की का परदा भी फैला लिया और बेड पर बैठ कर दारू का मजा लेने लगी.
मैंने दो सेक्स कहानी पढ़ ली थीं और अपने दूध व चुत को मसल मसल कर मस्ती भी कर ली थी मगर आज बिना चुदे नींद नहीं आ रही थी.
मैंने अपना पजामा नीचे किया और अपनी जांघों पर हाथ फ़ेर कर अपनी चूत को सहलाने लगी. मेरी चुत भभक रही थी तो मैंने चड्डी के अन्दर उंगली डाली और चुत में उंगली डाल कर दाना रगड़ती हुई मस्त होने लगी.
अब मुझे ख्याल आया कि एक सिगरेट भी ले आऊं.
तो मैं वापस पापा के कमरे में गई. उन्हें देखा तो वे सो चुके थे.
मैंने सिगरेट की डिब्बी उठाई और अपने कमरे में आ गई.
इस बार मैंने दरवाजा बंद नहीं किया क्योंकि मैंने शराब पी ली थी, तो न.शे में बंद करना भूल गई थी.
मैंने खिड़की खोली और सिगरेट सुलग कर धुआं बाहर उड़ाने लगी.
मुझे मालूम ही नहीं था कि मेरे कमरे में परदे के पीछे अंकल आ गए थे और वे चोरी छिपे सब कुछ देख रहे थे. मैं चुदास से इतनी ज्यादा गर्म हो गई थी कि मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए और नंगी हो गई.
अब मुझे प्यास लगी तो मैंने बोतल उठाई. उसमें पानी दारू में मिलाने के कारण खत्म हो गया था.
मैं और पानी लेने जाने की सोचने लगी.
मैं सिगरेट खत्म करके एक पतली सी सामने से खुलने वाली फ्राक नुमा बेबीडॉल पहन कर किचन से पानी लेने आ गई. जब मैं किचन में घुस ही रही थी कि उसी वक्त मेरे पीछे से दो मज़बूत बांहों ने मेरी पतली कमर को पकड़ लिया.
जब तक मैं चिल्लाती, तब तक एक हाथ मेरे मुँह पर आ गया और मेरी आवाज ही नहीं निकल सकी.
मैंने पलट कर देखा तो मुझे हैरानी हुई. मुझे यकीन ही नहीं था कि अंकल ने मुझे पकड़ा होगा.
मैं भी उनसे चुदने का मूड बना चुकी थी तो एकदम से मुड़ी और उनके सीने से चिपक गई.
वे भी समझ गए कि लौंडिया राजी है तो उन्होंने मेरे मुँह से हाथ हटाया और पागलों की तरह मुझे भँभोड़ने लगे. वे मुझे किचन में ही धकेलते हुए ले गए और उधर ले जाकर अंकल ने मुझे उठा कर किचन की पट्टी पर ही बिठा दिया.
मैंने भी अपनी दोनों टांगों से अंकल को जकड़ लिया और वे मेरे होंठ चूसने लगे.
फिर उन्होंने अपने एक हाथ को मेरी बेबीडॉल के अन्दर डाल दिया और मेरे एक दूध को दबाने लगे. दूसरा हाथ उन्होंने मेरी टांगों में डाल दिया और नंगी चूत को मसलने लगे.
मैं सिर्फ़ आहें भर रही थी कि तभी दूसरे अंकल भी किचन में ही आ गए. वे दोनों मुझे पर भूखे कुत्तों की तरह टूट पड़े और मेरे एक एक दूध को अपने मुँह में भर कर चूसने लगे.
मैं भी प्यार से उन दोनों को छोटे छोटे बच्चों की तरह दुग्ध-पान करवाने लगी थी. उन दोनों की उम्र 40 साल से ऊपर की ही थी.
मैंने कहा- इधर मेरी बहन आ जाएगी. वे बोले- तो आ जाने दो उसे भी चोद देंगे!
मैंने कहा- अबे यार अंकल, कमरे में बिस्तर पर चोद लेना, इधर से चलो. यह सुनकर एक अंकल ने मुझे अपनी गोदी में उठा लिया और बेडरूम में ले आए.
उधर आ कर अंकल ने मुझे बेड पर धकेल दिया और दूसरे अंकल ने कमरे का दरवाजा बंद कर दिया. अब तक पहले वाले अंकल ने मेरी बेबीडॉल खोल कर अलग कर दी थी और मुझे नंगी कर दिया था.
वे मुझसे अपना कच्छा उतारने को बोले. मैं घुटनों के बल हो गई और अंकल का कच्छा उतार कर उनके लंड को देखने लगी.
वे बोले- मुँह में ले लो! मैंने अंकल का लंड मुँह में भर लिया और दूसरे अंकल के लौड़े की मुठ मारने लगी.
मैं रंडी बन कर बारी बारी से दोनों के लंड चूस रही थी. फिर पहले वाले अंकल ने मुझे सीधा लिटा दिया और अपना हथियार पेलने की तैयारी करने लगे.
उन्होंने मेरी टांगों को फैला कर चौड़ाया और लंड का सुपारा चुत के मुँह पर रख कर रगड़ने लगे. मैंने इशारा किया कि जल्दी से पेल दो.
उन्होंने अगले ही पल अपनी कमर को जुंबिश दी और लंड पेल दिया. मैं काफी दिनों से चुदी नहीं थी और अंकल का लंड भी मेरे ब्वॉयफ्रेंड से बड़ा था तो झेलने में थोड़ी सी परेशानी हुई. मगर मैंने दारू पी रखी थी तो ज्यादा तकलीफ़ नहीं हुई.
जल्दी ही मैंने पूरा लंड चुत में डलवा लिया. उनका लंड छह इंच लम्बा व मोटा था. मगर मैं दूसरे अंकल के लंड को देख रही थी क्योंकि उनका और ज्यादा मोटा व लम्बा था.
उनका लंड शायद आठ इंच लंबा और खीरे के जैसा मोटा व काला था. वह अंकल मद्रासी थे, तो उनके जिस्म की ताकत भी ज्यादा दिख रही थी.
यह बात मैंने उनके लौड़े को चूसने के टाइम पर ही समझ ली थी इसलिए मैंने पहले छह इंच लंड वाले अंकल से चुदना सही समझा था कि इनके लौड़े से चुत रवां हो जाएगी तो आठ इंच वाले से भी मजे से चुद जाऊंगी. अंकल धकापेल मेरी चूत चोद रहे थे और मैं दूसरे वाले अंकल के आठ इंच वाले लंड को चूसती हुई मस्ती में चुद रही थी.
मैं चुत चुदवाती हुई नीचे से चूतड़ भी हिला रही थी.
उम्र का भी असर होता है, इसलिए मुझे चोदने वाले अंकल महज़ पांच मिनट में ही झड़ गए और उन्होंने मेरी चुत में ही अपना रस छोड़ दिया.
मेरी चुत अभी भी भभक रही थी.
अब दूसरे मद्रासी अंकल की बारी आ गई. वे मेरे ऊपर चढ़ गए और मुझसे बोले- अपने चूतड़ों के नीचे तकिया रख ले, मेरा लंड तुझे और ज्यादा मजा देगा.
मैं पहले वाले अंकल से चुद कर झड़ी नहीं थी तो मैंने झट से अपनी गांड के नीचे तकिया लगा लिया. मद्रासी अंकल ने अपना आठ इंच कर लंड सैट किया और एक झटके में ही अन्दर पेल दिया.
मुझे उनके लौड़े से चुदने में बहुत तकलीफ़ हुई, लेकिन मैं कई बार चुदी हुई थी तो झेल गई. अब दूसरे अंकल ने अपनी दारू की बोतल से पैग बनाया और मुझे पिला दिया. एक गिलास उन्होंने खुद भी गटक लिया.
अब अंकल ने मेरे मुँह में अपना झड़ा हुआ लंड वापस से डाल दिया और मैं चूसने लगी. दूसरे मद्रासी अंकल ने पोज बदलने का कह कर मुझे घोड़ी बना लिया और वे मुझे पीछे से चोदने लगे.
मैं मजे में चुदवा रही थी और मस्त आवाजें निकाल रही थी. ‘आह सीईईइ यस अंकल साले हरामी … फ़ाड़ डाल मेरी चूत मादरचोद आह मैं झड़ने वाली हूं … जल्दी जल्दी चोद भोसड़ी के अंकल … स्लेपिंग माई एस एंड चीक्स!’
वे बोले- साली रंडी आज सारी रात तेरी चुत गांड दोनों फाडूंगा फ़िक्र मत कर … कुतिया आज तेरी जवानी का हलवा बना देंगे! ‘कमीने बहन के लौड़े … साले मेरे बाप की उम्र का है बुड्ढा ठरकी … कुंवारी चूत मारने मिल गई कुत्ते को!’
तभी अंकल ने मुझे वापस से सीधा किया और हंसते हुए बोला- तू और कुंवारी … बहन की लौड़ी छिनाल लड़की … आज ले तू लंड का मजा ले! यह कह कर मद्रासी अंकल ने फ़िर से लंड चुत में डाल दिया और ज़ोर ज़ोर से चोदने लगे.
तभी उनका लंड एकदम से तेजी पकड़ने लगा और मैं भी अपनी चरम पर आ गई.
तभी मेरी चूत और उनका लंड दोनों एक साथ ही बह गए. अंकल के लंड का गर्म माल जब मेरी चूत को पीने मिला, तो चुत तृप्त हो गई.
अब दूसरे वाले अंकल पुनः तैयार हो गए थे. उन्होंने इस बार मेरी गांड में लंड लगाया तो मैं चिहुँक गई.
मैंने कहा- गांड में नहीं! मगर वे दोनों नहीं माने और मद्रासी अंकल ने मेरे मुँह पर एक कपड़ा बांध कर मेरी चुत और गांड दोनों छेदों को एक साथ बजाने का मन बना लिया था.
मैं सकपका गई थी कि एक साथ दो लंड से ब्लू फिल्मों में सैंडविच चुदाई देखी तो थी, मगर मेरे साथ ही यह सब होगा, इसकी मैंने कल्पना भी नहीं की थी. दोस्तो, उस रात उन दोनों अंकलों ने मुझे भरपूर दारू पिला कर मेरी चुत गांड को एक साथ चोदा, वह बड़ी ही मजेदार सेक्स कहानी है. यदि आप लोग चाहेंगे तो मैं जरूर लिखूँगी.
आपके ईमेल व कमेंट्स की प्रतीक्षा में आपकी रंडी सरोज