वो पूस की एक रात-1

मेरा नाम माही है। मैं अन्तर्वासना का बहुत बड़ा प्रशंसक हूँ। आज मैं आप लोगों को अपनी पहली सेक्स कहानी सुनाने जा रहा हूँ। मुझे यकीन है कि आप सबको यह बहुत पसंद आएगी। कृपया अपने विचार मुझे मेल करें।

मेरी उम्र बत्तीस साल है और मैं शादीशुदा हूँ। दोस्तो, चुदाई का ज्ञान तो मुझे बचपन में ही हो गया था जब मैंने दस साल की उम्र में अपनी नई नई चाची को पहलवान चाचा से कड़कड़ाते जाड़े की एक रात में खनकती चूड़ियों और कराहती हुई आवाज के साथ पूरी नंगी चुदते हुए देखा था। मुझे अच्छी तरह तो याद नहीं पर तकरीबन सात आठ बार तो चाची को पेशाब जरूर आया था और अगले पूरा दिन वो ठीक से चल नहीं पा रही थी। अब लगता है चाचा ने उसी रात उनकी आगे और पीछे के सारे छेद कस कर बजा डाले थे। उस दिन से शादीशुदा औरत की जो सेक्सी छवि दिल में बनी, आज तक वो मुझे शादीशुदा औरतों को देख कर उत्तेजित कर जाती है।

शादीशुदा औरत जैसी सेक्स अपील कुंवारी लौंडियों में क्या होगी वो चूतड़ों का मस्त भराव हो या मुसम्मी जैसी छातियाँ, मस्त पाव-रोटी जैसी फूली चूत हो या पाताल सी गहरी दराज में छुपी गद्देदार गोलमोल गांड ! सर से पाँव तक चोदने का इन्तजाम …….यारों सोच कर ही लंड की जड़ में पानी उतर आया.. एक बात और… शादीशुदा औरतें लाली, लिपस्टिक, मेंहदी, बिंदी, सिन्दूर लगाकर और पहन-ओढ़ कर और मस्त चोदने का आइटम बन जाती हैं। शादीशुदा औरत को चोदने में एक आनंद और है…. वो मतलब भर का सेक्स ज्ञान पहले से रखती हैं इसली वो कई गुना ज्यादा मजा देतीं हैं और सबसे आख़िरी बात… शादीशुदा औरतों की सील टूटी हुए होती है इसलिए किसी तरह का कोई ख़तरा भी नहीं रहता।

मित्रों मैं बड़ा सौभाग्यशाली रहा हूँ कि मुझे केवल उन्नीस साल की उम्र में ही एक शादीशुदा औरत को चोदने का मौक़ा मिला पर वो कथा बहुत लम्बी है। अपनी चुदाई की पहली दास्ताँ लिख रहा हूँ, गुरुदेव ने यदि प्रकाशित की और आप लोगों को पसंद आई तो लिखता रहूँगा, अपने सेक्स के सभी अनुभव बांटूंगा। आज अपना पहला अनुभव लिख रहा हूँ।

यह दिसंबर के महीने की बात है, मैं इंटर का छात्र था। जाड़े की छुट्टियों में मेरी भाभी के मायके में शादी थी। मुझको भाभी के साथ जाना पड़ा क्योंकि भैया को छुट्टी नहीं मिल पाई थी। शादी में भाभी के भाई की साली भी आई थी मेरा रंग तो सांवला था पर नियमित जिम करने के कारण जिस्म बहुत हट्टा कट्टा और गठा हुआ है। मेरे लम्बे चौड़े जिस्म को देख कर पहली ही नज़र में वो जैसे हसरत से मेरी ओर देख कर मुस्कुराई थी, मैं उसी से समझ गया था कि ये लौंडिया पट सकती है। नज़रों का लड़ाना पहली ही मुलाक़ात से शुरू हो गया।

राधा नाम था उसका ! मैंने पहली ही नज़र में नाप ले लिया था उसका। चूतड़ खूब गोल-गोल मस्त कसाव लिए थे, गांड की दरार बहुत गहरी थी और हमेशा सलवार का कपड़ा उसकी दरार में घुसा दिखता था, शायद बड़े चूतड़ों वाली लौंडिया की गांड में पसीना खूब आता है और जब वे बैठ कर उठती हैं तो कपड़ा अपनी दरार में ले लेती हैं जैसे उनकी गांड बहुत भूखी हो। उसकी चूचियों की मस्ती तो और भी गजब थी, हर चूची मर्द के लौड़े को चुनौती देती थी कि अगर है दम तो बिना मुझे सलाम करे रुक कर दिखा।

गोरी बाहें, गोरे गाल, लाल होंठ, लम्बे बाल… चोदने के लिए एक सम्पूर्ण आकृति।

गाँव में जाड़े का माहौल और भी ठंड भरा था। बूढ़े लोग बाहर आग के पास थे। बिजली तो गाँव में चार घंटे आती थी वो भी दिन में। रात में खाना खाते वक्त वो मुझसे टकरा गई मेरा हाथ उसकी गदराई चूचियों पर लगा तो जैसे मुझे 440 वोल्ट का करंट लग गया।

बहुत ही नरम चूचियाँ …हाय मन तड़प गया ! वो मुस्कुरा कर पलट गई मेरे लंड की लार टपक गई।

रात के दस बजे थे, मैं बाहर आग के पास बैठा राधा की चूत के सागर में लंड के स्नान का जुगाड़ सोच रहा था। तभी मैंने देखा कि अँधेरे में कोई लोटा लिए संडास के लिए घर से बाहर जा रहा था। कोई लड़की थी, मैंने गौर से देखा तो वो राधा ही थी।

मैं दबे पाँव उसके पीछे चल दिया। रात अंधेरी थी कोहरा भी पड़ रहा था, कुछ भी ठीक से नहीं दिख रहा था। घर के पीछे ही आम की बाग और उससे सटे हुए खेत थे शायद वहीं कहीं वो चिकनी लौंडिया अपनी मस्त बुर खोल कर मूतने वाली थी और गोल गोल गांड फैला कर हगने वाली थी। जैसे ही वो बाग़ में पहुँची, साला मन तो किया कि पकड़ कर उसे बाग़ के किनारे बनी एक टूटी कोठरी में खींच ले जाऊँ, पर डर था कि अगर वो चिल्ला पड़ी तो बड़ी बदनामी होगी। इसलिए मैंने दूसरा तरीका सोचा- क्यों ना उसको हगते और मूतते हुए देखा जाए !

मैं एक पेड़ के पीछे छुप गया। वो अपनी सलवार का नाड़ा खोल कर गोरे गोरे चूतड़ों को आज़ाद करती हुई हगने के लिए बैठ गई।

पुर्र्र पुर्रर्र पूस्स पूं पूं …पाद छोड़ते हुए हगने के लिए वोह जोर लगा रही थी शायद उसकी गांड बहुत टाईट थी या पेट गड़बड़ था काफी दम लगाने पर उसके हगने की आवाज़ आई।

मैं बिल्कुल पीछे के पेड़ के पीछे था अँधेरे मे भी उसके गोरे चूतड़ साफ़ चमक रहे थे। उसका मूत निकल रहा था और चूत से आती सुरीली आवाज़ बता रही थी कि राधा अभी कोरी थी। कुछ हग लेने पर उसे जैसे बड़ा आराम मिला था और वोह आह की आवाज निकाल रही थी।

तभी मैंने पास पड़ी एक डंडी उठाई और चुपके से उसका लोटा गिरा दिया, उसका सारा पानी गिर गया।

हाय रे ! वह बोली। अब क्या करूँ? वह बड़बड़ाई।

मैं तभी थोड़ा दूर जाकर सामने से आने का नाटक करते हुए उसकी ओर बढ़ा। वह चिल्लाई- कौन है?? इधर मत आना… अरे मैं हूँ माही ! कौन है वहाँ? मैंने अनजान बनते हुए पूछा।

‘अरे वहीं रुक जाओ !’ वो चिल्लाई- …यहाँ मत आना… अरे राधा ? तुम इतनी रात में यहाँ ….क्या?? अरे मैं मैदान के लिए… पर मेरा लोटे का पानी गिर गया है…प्लीज मेरी मदद करो, …कहीं से पानी ला दो… ‘अब यहाँ पानी कहाँ है ? कुछ और मदद करूँ क्या…’ थोड़ा और पास आकर मैं बोला।

क्या??? वो परेशान थी। मेरा रूमाल ले लो, इसी से काम चला लो… अँधेरे में मैं रूमाल हाथ में लिए उसके पास पहुँच गया। छी…. वो पेड़ के पीछे जा कर बोली… ऐसे भी कोई ?!? तो फिर बैठी रहो रात भर यहाँ ! या ऐसे ही कपड़े पहन लो… मैं चला !

मैं मुड़ा ही था कि वो बोल पड़ी- अरे सुनो तो….रुमाल ही लाओ ! पर दूर से दो ! मेरा लंड मीनार हो चुका था, हगासी गांड चोदने का अपना मज़ा है। मैंने हाथ बढ़ाया, जैसे ही उसने रूमाल लेना चाहा… दूसरे भाग में पढ़ें कि क्या हुआ !

Ananya Verma

अरे! मैं अनन्या वर्मा हूँ - लखनऊ विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान की पढ़ाई करने वाली और पिछले 4 साल से हिंदी में ऐसी कहानियाँ लिख रही हूँ जो आपकी अंगुलियाँ स्क्रीन पर रोक दें। मैं इंसानी इच्छाओं, ख्वाहिशों और वो पलों को समझती हूँ जो आप छुपाना चाहते हैं लेकिन महसूस करना चाहते हैं। मेरी कहानियों में वही बात है जो दिल को छूती है और तन को सिहराती है। हज़ारों पाठकों ने मेरी कहानियाँ पढ़कर गर्म रातों का मज़ा लिया है। तो चलो, आज की रात मेरी कहानी से बनाते हैं!

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