मेरी प्रिविक्षिका

प्रेषिका : मोना सिंह

मेरा नाम दीपक है। मैंने अन्तर्वासना की काफी कहानियाँ पढ़ी हैं और वो सब मुझे बहुत पसंद आई और मेरा मन मचल उठा अपनी एक सच्ची कहानी आपको बताने का !

तो दोस्तो, मैं एक २६ वर्षीय लम्बा, भरा-पूरा एथलीट हूँ और मुझे सेक्स करना एक कला लगता है।

अब मैं आपको अपनी आपबीती सुनाता हूँ।

बात एक दिन इतवार की है, उस दिन मैं जल्दी सुबह अपने कसबे (रुरल जयपुर) से जयपुर आया प्रतियोगी-परीक्षा देने के लिए ! मेरा परीक्षा-केन्द्र शास्त्री नगर, जयपुर के एक स्कूल में बना और मुझे अपने कमरे के गेट के पास वाली कुर्सी मिली।

थोड़ी देर में स्कूल की घंटी बजी और एक सुंदर सी मेडम पश्न-पत्र और उत्तर-पुस्तिका लेकर कमरे में आई। वो एकदम सुंदर नैन नक्श वाली और हुस्न की मल्लिका लगती थी। थोड़ी देर में उसने सबको पेपर बांटे और फिर मेरे पास वाली कुर्सी पर बैठ गई और कभी मेरी उत्तर-पुस्तिका और कभी मेरे ऊपर लगातार देखती रही। परन्तु मेरा मन उस समय केवल परीक्षा देने का ही था सो मैंने इस बात पर विशेष ध्यान नहीं दिया।

थोड़ी देर में वो मेडम मेरी चोरी छुपे मदद करने लगी और मुझे प्रश्न हल करवाने लग गई और मैं उसका पूरा पूरा फ़ायदा लेने लगा। मैंने अपना पेपर नियत समय से आधा घंटा पहले ही ख़त्म कर लिया और उसकी तरफ प्यार से देखने लग गया। अब वो भी मुझे प्यार से बातें पूछने लगी कि तुम कहाँ रहते हो और क्या करते हो?

मैंने बताया- मैं फुलेरा में रहता हूँ और शाम को ६ बजे वापस ट्रेन से जाऊंगा।

तो मेडम बोली- ठीक है, परीक्षा के बाद गेट के पास मेरा इंतजार करना !

मैं कुछ नहीं बोला और परीक्षा ख़त्म हुई तो गेट के पास मैं उसका इंतजार करने लगा।

थोड़ी ही देर में मेडम आई और मैं उसके साथ हो लिया। लगभग १० मिनट पैदल चलते चलते हमने इधर उधर की बातें करते करते उसके घर पहुंचे जो कि ऊपर वाली मंजिल में एक अलग थलग घर था। वो मुझे लेकर अन्दर आई और दरवाज़ा बंद कर दिया।

अब वो मुझे ऊपर से नीचे तक निहारती ही रही। तो मैंने मेडम से उनका नाम पूछा, उसने बताया की नीलम है।

थोड़ी देर में वो मेरे लिए पानी लेकर आई और मुझे खाना भी खिलाया। जब मैं खाना खा रहा था तो वो मेरे सामने ही अपने कपड़े बदलने लगी तो मैंने शरमाकर दूसरी तरफ गर्दन कर ली लेकिन वो एक झीनी सी नाईटी पहनकर मेरे सामने बैठ गई और मुझे प्यार से खाना खिलाने लग गई।

दोस्तो, मैं आपको बताऊँ, अब मैं उसकी हर इच्छा में एक सुखमय आनंद ले रहा था। खाना ख़त्म करने के बाद वो अचानक मुझसे लिपट गई और मुझे चूम लिया। मुझसे भी रहा ही नहीं गया और मैंने उसको अपनी बाहों में जकड़ लिया और उसके खूबसूरत लबों पर अपने लब रख दिए, उसको बेतहाशा चूमने लग गया और नाईटी के ऊपर से ही उसके मम्मों से खेलने लगा। क्या गजब के मम्मे थे !

मैंने उसे उठाकर दूसरे कमरे में बेड पर लिटा दिया और बोला- मेडम, आप बहुत सेक्सी हो !

तो वो मुस्कराने लगी। अब मुझे जल्दी हो रही थी सो मैंने उसकी नाईटी खोलकर पूरा नंगा कर दिया। कसम से क्या चीज़ लग रही थी वो !

मैंने उसकी बुर में अपने हाथ से खुजली करी, वो मचल उठी और मेरे कपड़ों को खोलकर मुझे नंगा कर दिया। अब वो मेरे लंड पर हाथ फिरा रही थी और थोड़ी देर में उसने मेरे लम्बे मोटे से लंड को मुँह में ले लिया। उस समय मैं जैसे स्वप्नलोक में था। मैंने उसे कहा- मैडम और जोर से चूसो !

उसने कहा- मैडम नहीं, मुझे नीलू कहो !

मैने कहा- नीलू मैडम और जोर से !

उसने फिर कहा- सिर्फ नीलू ! ओके ?

मैंने कहा- ओके ! नीलू मेरी जान !

नीलू ने अब मुझे पकड़ कर साइड में लिटा दिया और मेरे ऊपर बैठ गई और मेरे लंड को अपनी बुर में पेलने की तैयारी करने लगी। मैं उसका बराबर साथ दिए जा रहा था।

थोड़ी देर में मैंने उसे अपने नीचे लिटाकर खूब चोदा और ऐसे जमकर चुदाई की कि वो एकदम मस्त हो गई और बोली- मेरी जानू ! मेरी जिन्दगी का सबसे खूबसूरत दिन आज था जो तुम मुझे मिले !

वो और मैं उस दिन लगभग ५ घंटे तक चुदाई-चुदाई खेलते रहे ! एक दूसरे को छेड़ते और खूब मज़े लूटते रहे ! उस दरमयान मैंने उसके खूब स्तन दबाये और जमकर एक दूसरे का रसपान किया, एक बार गांड भी मारी।

अब इतने में शाम हो गई और वो सब तरह से संतुष्ट होकर बोली- मेरे राजा दीपक, तुम मुझे मिलते रहना !

मैंने भी वादा किया और इजाज़त ली और चल पड़ा स्टेशन की ओर !

मैंने घर आकर उससे फोन पर बात की और बताया- मैं ठीक से पहुँच गया हूँ और तुम्हारी याद आ रही है !

तो वो रोने लगी और फ़ोन पर ही मुझे अगली मुलाकात का समय देने लगी !

मैंने तुरंत हाँ कर दी !

दोस्तो, फिर हम महीने में ४-५ बार मिलते और खूब मज़े करते। लेकिन एक दिन वो मुझसे दूर चली गई उसका तबादला हो गया दिल्ली और मैं अकेला पड़ गया।

अब मुझे उसकी बहुत याद आती है और मैं आपको विश्वास दिलाना चाहूँगा कि मैं उस प्यारी मैडम को कभी नहीं भूल पाया।

दोस्तो, मैंने अपनी इस कहानी में गन्दे शब्द ज्यादा प्रयोग नहीं किये क्योंकि मैं एक अच्छे घराने का सदाचारी नवयुवक हूँ और हमारे संस्कार ऐसे है कि मुझे गाली भी नहीं आती है।

कृपया मेरी कहानी के बारे में और मेरी नीलू मैडम के भविष्य में साथ के बारे में अपने अनमोल विचार और सुझाव मुझे जरूर मेल करें।

Ananya Verma

अरे! मैं अनन्या वर्मा हूँ - लखनऊ विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान की पढ़ाई करने वाली और पिछले 4 साल से हिंदी में ऐसी कहानियाँ लिख रही हूँ जो आपकी अंगुलियाँ स्क्रीन पर रोक दें। मैं इंसानी इच्छाओं, ख्वाहिशों और वो पलों को समझती हूँ जो आप छुपाना चाहते हैं लेकिन महसूस करना चाहते हैं। मेरी कहानियों में वही बात है जो दिल को छूती है और तन को सिहराती है। हज़ारों पाठकों ने मेरी कहानियाँ पढ़कर गर्म रातों का मज़ा लिया है। तो चलो, आज की रात मेरी कहानी से बनाते हैं!

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