कितने लेते हो?

विक्की एक्सिस

मैं तीन महीने पहले अहमदाबाद में एक दिन शाम को घूम रहा था, मैं पैदल ही था, मेरी बाइक घर पर थी। मैं एक राजमार्ग पर एक ढाबे के बाहर खड़ा था।

थोड़ी देर बाद वहाँ पर एक सुन्दर कार मेरे सामने आई तो मैं उस कार को देखता ही रह गया। कार के शीशे काले थे तो अन्दर कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। मैं तो कार देख कर खुश हो रहा था।

पाँच मिनट बाद आगे का शीशा नीचे हुआ, अन्दर देखा तो एक सुन्दर भाभी लाल रंग की साड़ी में बैठी थी, बाल खुले थे, होंठों पर लाल लिपस्टिक लगाई हुई थी। वो अप्सरा से भी सुन्दर लग रही थी। उसकी उम्र लगभग 35 साल होगी पर वो 20-25 साल जैसी लग रही थी।

वह मुझे देख कर हल्के से मुस्कुराई। मुझे लगा कि शायद वो ऐसे ही देख रही है पर वो काफ़ी देर तक मेरी ओर देखती रही।

हिचकिचाहट में मैं नीचे देखने लगा। थोड़ी देर बाद उसने होर्न बजाया तो मैंने उसकी तरफ़ देखा तो उसने मुझे अपने पास बुलाया।

मैं थोड़ा घबरा गया। मैं डरते हुए कार के पास गया।

उसने बोला- कितने लेते हो? मैं तो सोचने लगा- यह किस विषय में बात कर रही है? मैंने पूछा- किसके?

तो वो बोली- नाटक मत करो ! जल्दी बताओ ! देर हो रही है !

मैं अभी कुछ सोच कर बोलूं, उससे पहले उसने मुझे अन्दर बैठने को कहा। मैं मन्त्र-मुग्ध सा अन्दर बैठ गया।

फिर वो बोली- अब बताओ कितने लेते हो? पाँच हजार ? या ज्यादा?

मैंने सिर्फ अपना सिर हाँ कहते हुए हिलाया। पर मेरी धड़कन तेज़ हो गई थी, पसीना छुट रहा था।

वो बोली- चलो चलते हैं !

फिर वो सीधा मुझे उसके घर ले गई। तब लगभग नौ बजे थे। उसका घर तो बहुत ही बढ़िया था, एक शानदार बंगला था।

वो बोली- बैठो ! मैं आती हूँ !

थोड़ी देर में वो बाहर आई, मेरे पास बैठ गई और मेरा शर्ट निकलने लगी।

मैंने कहा- क्या कर रही हो? उसने कहा- पैसे दे रही हूँ।

मुझे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था।

उसने कहा- क्या-क्या सर्विस देते हो? मैंने कहा- सभी !

वो खड़ी हुई और अपनी साड़ी उतारने लगी और मुझे भी अपने कपड़े उतारने के लिए कहा।

मेरा मन तो उस पर पहले ही आ गया था, मैंने अपने कपड़े उतार दिए और पूरा नंगा हो गया। उसने भी अपने पूरे कपड़े उतार लिए थे। वो मेरे लंड को देख कर सीधा उसको चूमने लगी। थोड़ी देर तो वो लंड के साथ ही खेलती रही। मेरा लंड पूरा सात इंच का हो गया था, फ़िर वो मेरा लण्ड मुँह में लेकर चूसती रही।

थोड़ी देर में मैं झड़ गया।

अब मुझे अन्दर अपने बेडरूम में ले गई और मुझे लेटा कर उसने अपनी चूत मेरे मुँह पर रख दी। काफ़ी देर तक उसने चूत चटवाई, उसकी चूत पूरी पानी पानी हो गई। फिर वो मेरे ऊपर लेट कर मेरा लंड चूत में डलवा कर पूरी हिलने लगी। मैं भी उसका साथ दे रहा था।

पूरी रात मैं उस भाभी को चोदता रहा। हम दोनों को ही बहुत मज़ा आया। सुबह नौ बजे मैं वहाँ से निकलने की तैयारी कर रहा था तो उसने मुझे छः हजार दिए और कहा- एक हजार ज्यादा दे रही हूँ क्योंकि तुमसे बहुत मज़ा आया है।

थोड़े दिन बाद मुझे पता चला कि मैं उस दिन जहाँ खड़ा था, वो काल-बॉय खड़े होने की जगह थी, वहाँ से औरतें आकर काल-बॉय ले जाती हैं।

उस दिन से मेरा और उसका तय हो गया था कि हफ़्ते में मैं उसके पास तीन दिन जाता था वो मेरे सभी खर्चे और जो भी चीज़ चाहिए वो देती थी।

मुझे जरुर बताना मेरी कहानी कैसी लगी? [email protected]

Ananya Verma

अरे! मैं अनन्या वर्मा हूँ - लखनऊ विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान की पढ़ाई करने वाली और पिछले 4 साल से हिंदी में ऐसी कहानियाँ लिख रही हूँ जो आपकी अंगुलियाँ स्क्रीन पर रोक दें। मैं इंसानी इच्छाओं, ख्वाहिशों और वो पलों को समझती हूँ जो आप छुपाना चाहते हैं लेकिन महसूस करना चाहते हैं। मेरी कहानियों में वही बात है जो दिल को छूती है और तन को सिहराती है। हज़ारों पाठकों ने मेरी कहानियाँ पढ़कर गर्म रातों का मज़ा लिया है। तो चलो, आज की रात मेरी कहानी से बनाते हैं!

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