कामेच्छा पूर्ति

प्रेषक : यगनेश

हैलो दोस्तो!

मेरा नाम यश है। यह मेरी पहली कहानी है। मैं ईजिन्यीरिंग के तीसरे सेमिस्टर में हूँ। यह कहानी तब की है जब मैं दूसरे सेमिस्टर में था।

मुझे होस्टल में रहना पसंद नहीं था, इस वजह से मैं एक घर में पी जी बन कर रहता था। मेरा कमरा पहले माले पे था। मैं खाना उसी घर में खाता था। उस मकान मालिक की 18 साल की लड़की थी। उसका नाम भावना था। वो आर्ट कोलेज में पढ़ती थी। मेरी उसपर पहले से ही बुरी नजर थी। मैं उससे बात करने का एक भी मौका छोड़ता नहीं था। वो मुझसे काफ़ी घुल-मिल गई थी। मैं कई बार उसके बदन को जानबूझ कर छूता था, फ़िर भी वो कोई प्रतिकार नहीं करती थी। शायद वो भी मुझसे चुदवाना चाहती थी।

एक बार मकान मालिक के दूर के रिश्तेदार की शादी थी। मुझे खाने की परेशानी न हो इस बहाने भावना घर पर ही रुक गई।

मैं समझ चुका था कि भावना मुझसे चुदवाने के लिए ही रुकी थी।

शाम 4:00 बजे मकान मालिक, उसकी बीवी और बेटा निकल गये। अब भावना उसके कमरे मे अकेली थी। मैं उसके कमरे में गया तो उसने कहा कि मैं खाना बना देती हूं, आज हम जल्दी खाना खायेंगे।

मेरे मन में लड्डू फ़ूट रहे थे। फिर भी मैं अपने लंड पे काबू रखे था। शायद मैं ग्रीन सिगनल की राह देख रहा था।

5:00 बजे हम दोनों खाना खाने बैठे। जब वो मुझे खाना दे रही थी तब मैंने कहा- बस ! ज्यादा नहीं !

तब उसने कहा- खा लो ! पूरी रात गुजारनी है।

यह सुनकर मेरा लंड खड़ा हो गया। उसने मेरे लंड की ओर देखा फ़िर वो मुस्कुराई और खाना खाने लगी। खाना खाने के बाद वो सीधा किचन में जाकर बर्तन धोने लगी।

मैं फ्रेश होने के बहाने बाथरुम में गया और जानबूझ कर अपना तौलिया भूलने का नाटक किया। थोड़ी देर बाद मैंने भावना को आवाज लगाकर तौलिया दे जाने को कहा। जैसे ही उसने तौलिया देने के लिये हाथ बढ़ाया, मैंने फिल्मी हीरो की तरह उसका हाथ पकड़ कर उसे बाथरुम में खींच लिया और खुद दरवाजे के सामने खड़ा रह गया ताकि वो भाग न सके।

वो मुझे सिर्फ अंडरवीयर में देखकर शरमा गई। शावर चालू होने की वजह से वो पूरी भीग गई थी। उसका ड्रेस उसके बदन से चिपक गया था। उसकी काली ब्रा साफ दिखाई दे रही थी। मैंने अपने हाथ उसके चूतड़िं पर रख कर उसे अपनी और खींचा। वो मुझसे आकर कस कर लिपट गई। उसकी धड़कनें तेज हो चुकी थी। मैंने उसका कुर्ता निकाल दिया। मैं आगे बढ़ा और उसके दोनों हाथों को पकड़ के उसके गुलाबी होंठों पर अपने होंठ रख कर उसे चूमने लगा। एक हाथ से मैं उसकी चूत पायजामे के ऊपर से सहलाने लगा, दूसरे हाथ से ब्रा के हुक खोल दिये। उसके गोरे स्तनों के चुचूक मुँह में लेकर चूसने लगा। कई बार मैं चुचूकों को काट देता था और उसके मुँह से ऊऊउ….ह की आवाज आती थी। उसने अपना पायजामा और पेन्टी भी निकाल दी।

हम दोनों बाथ-टब में बैठे। मैंने अपने लंड को उसके चूतड़ों के बीच सेट कर दिया और दोनों हाथों से उसके स्तनों को दबाने लगा। वो भी अपने चूतड़ों को मेरे लंड पे रगड़ने लगी।

जैसे ही भावना मेरे पेट पर बैठ गई, तभी मेरा लँड उसकी जांघों के बीच खड़ा हो गया। वो मेरे लंड को सहलाने लगी। हम दोनों एंजोय कर रहे थे।

मैं उसे उठा कर बेडरुम में ले गया। हम दोनों एक दूसरे को चूमने लगे। मैं उसकी टांगों के बीच बैठ के चूत में उँगली डालने लगा। उसके मुँह से आआआ….ह,ऊ उ…ह की आवाजें आ रही थी। चूत में मुझे चिकनाई सी महसूस हुई। वो पूरी गरम हो चुकी थी। मैं उसके उपर लेट गया और उसे एक लम्बा चुम्बन किया।

मैंने उसको बेड के किनारे लेटाया और उसकी टाँगों को अपने कंधो पर रख लिया। अभी उसका शील भंग नहीं हुआ था। उसकी चूत फ़ूल चुकी थी। चूत में से पानी निकल कर बेड पर टपक रहा था। मैं चूत पे अपना लंड रख के धीरे से अंदर धकेलने लगा, मगर थोड़ा ही अंदर जा पाया। मैंने उसके चूतड़ों को पकड़ के जोर से धक्का लगाया, मेरा पूरा लँड अंदर चला गया। वो जोर से चिल्लाई। मैंने उसके सर को पकड़ के उसके होंठों पर लम्बा चुम्बन किया ताकि वो फ़िर से चिल्ला न सके। मुझे लँड पर कुछ गरम महसूस हुआ, चूत में से खून निकल रहा था।

थोड़ी देर बाद मैं लंड को अंदर-बाहर करने लगा। अब उसे भी मजा आ रहा था, वो अपनी कमर हिला कर मेरा साथ दे रही थी। दस मिनट बाद मैं झड गया, अब तक वो 3 बार झड़ चुकी थी।

वो उठ कर बाथरूम गई और अपनी चूत धो कर आई, मैं बैड पर नंगा लेटा हुआ था। वो मेरे लंड के साथ खेलने लगी। उसके छूते ही मेरा लंड फ़िर से खड़ा हो गया। वो डोगी स्टाईल में बैठ गई। उसकी गाण्ड का छेद साफ दिखाई दे रहा था। मैंने उसके चूतड़ों को सहलाते हुए लँड को उसकी गाण्ड में डाला। बहुत मुश्किल से अंदर गया, वो चिल्ला उठी। मैंने लंड को धीरे से बाहर निकाला। मेज़ पर हेयर-ऑयल की बोतल थी, मैंने लंड पर तेल लगा लिया। अबकी बार लंड आसानी से अंदर चला गया।

मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी।

उसके मुँह से आअऊउ…ह, ओओ….ह की आवाजें निकल रही थी। मैंने अपना सारा माल उसी में छोड़ दिया।

वो सीधा लेट गई। मैंने अपना लंड उसकी चूत में डाल के उसे बाहों में ले लिया। हम दोनों काफ़ी थक चुके थे। हम वैसे ही नंगे एक दूसरे से लिपट कर सो गये।

सुबह 6:00 बजे मेरी आंख खुली, तब वो सो रही थी। मैंने उसे जगाया और उसे एक लम्बा चुम्बन किया। हम दोनों साथ में बाथरूम में नहाने गये। वहाँ मैंने उसकी दो बार गाण्ड मारी।

नाश्ते के बाद मैंने उसकी 10:00 बजे से ले कर 12:00 बजे तक दो घंटे जमकर चुदाई की।

शाम 4:00 मकान मालिक और उसका परिवार वापस आ गये।

दो महीने बाद भावना की शादी हो गई। मैंने भी वो घर छोड़ दिया।

Ananya Verma

अरे! मैं अनन्या वर्मा हूँ - लखनऊ विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान की पढ़ाई करने वाली और पिछले 4 साल से हिंदी में ऐसी कहानियाँ लिख रही हूँ जो आपकी अंगुलियाँ स्क्रीन पर रोक दें। मैं इंसानी इच्छाओं, ख्वाहिशों और वो पलों को समझती हूँ जो आप छुपाना चाहते हैं लेकिन महसूस करना चाहते हैं। मेरी कहानियों में वही बात है जो दिल को छूती है और तन को सिहराती है। हज़ारों पाठकों ने मेरी कहानियाँ पढ़कर गर्म रातों का मज़ा लिया है। तो चलो, आज की रात मेरी कहानी से बनाते हैं!

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