चुदासी भाभी की जोरदार चुदाई

Chudasi Bhabhi Ki Jordar Chudai दोस्तो, आज मैं जो कहानी आपसे साझा करने जा रहा हूँ.. वो कहानी भी मेरी एक पाठिका चुदासी भाभी की है जो जयपुर से ही है, और उसकी मर्ज़ी से ही मैं यह कहानी आप लोगों के साथ साझा कर रहा हूँ।

मुझे उम्मीद है कि आप लोगों को यह बहुत अच्छी लगेगी।

मैं अमित जयपुर से हूँ। मेरी ऊँचाई 5’5” है और मैं एक औसत जिस्म वाला बंदा हूँ। मेरे लण्ड का नाप 6.5” है।

मैंने पहले एक कहानी लिखी थी, उसके बाद मेरे बाद खूब सारे मेल्स आए..

उनमें से एक ईमेल एक भाभी का आया जो जयपुर से थी।

मैंने उनको उत्तर दिया..

तो कुछ बात होने के बाद उन्होंने मुझे अपनी फ़ेसबुक आईडी दी और फिर हमने फेसबुक पर चैट चालू की।

अब चैट करते-करते एक दिन हम दोनों ने नम्बर भी साझा किए और फिर व्हाट्सएप पर भी बात हुई।

कुछ दिन बात हम ऐसे ही बात करते रहे।

एक दिन उन्होंने बोला- मुझे आपसे मिलना है।

मैंने- ओके.. कब?

तो उन्होंने कहा- इसी हफ्ते को मेरे पति कुछ दिन के लिए बाहर जा रहे हैं और मैं उनके जाने के बाद तुमको फोन कर दूँगी।

मैंने- ठीक है।

तो हमारा मिलने कर प्रोग्राम बन गया।

तीसरे दिन को उसका फोन आया.. उन्होंने मुझे एक जगह के बारे में बताया और मुझसे वहाँ आने को कहा।

मैं वहाँ पहुँच गया।

मेरे वहाँ पहुँचने के बाद उनका फिर से फोन आया और उन्होंने मुझसे पूछा- पहुँच गए?

मैंने बोला- हाँ.. मैं यहाँ आ गया हूँ।

तो कुछ देर बाद मेरे सामने एक कार आकर रुकी। उसमें से एक मस्त माल उतरी।

उसे देख कर मेरे तो होश उड़ गए। मुझे उम्मीद ही नहीं थी कि यही वो आइटम है जो मुझसे मिलना चाहती है।

वो इतनी सुंदर थी कि मैं आपको क्या बताऊँ।

वो मुझे कहीं से भाभी लग ही नहीं रही थी.. उसने जीन्स और टॉप पहन रखा था।

उसके मम्मे कोई 34 साइज़ के होंगे, लेकिन क्या आग थी..

मैं तो बहुत ही ज़्यादा खुश था।

वो मेरे करीब आई। हम दोनों ने एक-दूसरे को ‘हाय’ किया और वहीं नजदीक के एक गार्डन में जाकर बैठ गए।

मैं फाइव स्टार की चॉकलेट लाया था तो हम दोनों वही खाने लगे।

हमने कुछ देर वहाँ बैठ कर बातचीत की.. तो मैंने उससे पूछा- आपका घर किधर है?

‘यहीं पास में ही है..चलो चलते हैं।’

काफ़ी वक्त हो चुका था तो मैं उसके साथ उसकी गाड़ी में बैठ गया।

10 मिनट के बाद हम उसके घर पहुँच गए।

अन्दर जाने के बाद उसने मुझे बोला- तुम 10 मिनट इन्तजार करो.. प्लीज़।

वो दस मिनट के बाद कॉफ़ी लेकर आ गई।

हम लोग कॉफ़ी पीते-पीते बात कर रहे थे।

उसकी जवानी को देख कर मेरा लवड़ा खड़ा हो गया था और उसने यह देख लिया था।

हम लोगों ने कॉफ़ी खत्म की और फिर वो अन्दर चली गई।

जब वो चुदासी भाभी कपड़े बदल कर वापिस आई तो क्या कातिलना अदा बिखेरते हुए आई वो एकदम आग लग रही थी.. एकदम हूर की परी..

वो एक छोटी सी बेबी-डॉल फ्रॉक में बाहर आई। अब हम लोग कमरे में चले गए।

अन्दर जाते ही मैंने उसे पकड़ लिया और सीधा उसके अधरों पर चुम्बन करने लगा। वो भी पूरी तरह से मेरा साथ देने लगी।

चुम्मा-चाटी करते करते मैंने उसकी वो गुलाबी फ्रॉक को उतार दिया उसने नीचे लाल रंग की चड्डी पहन रखी थी। जिसमें वो एकदम हुस्न की परी लग रही थी।

मैंने उसे सीधा पलंग पर पटक दिया और उसकी ब्रा भी उतार दी।

अब उसके गोरे-गोरे कबूतर मेरे सामने आजाद थे।

मैंने उसके मम्मों को मुँह में ले लिया और जम कर चूसा।

मम्मों को चचोरते हुए मैंने उसकी पैन्टी भी उतार दी और एक ऊँगली उसकी चूत में डाल दी।

वो चुदासी भाभी तो थी ही मेरी इस हरकत से पागल सी होने लगी।

कुछ देर मम्मों को चूसने के बाद मैंने उसे लण्ड चूसने के लिए बोला..

तो उसने पहले तो मना कर दिया। बोली- मैंने पहले कभी नहीं चूसा है।

फिर मैंने उससे कहा- एक बार मेरी खातिर चूस कर तो देखो।

चुदासी भाभी मान गई और हम 69 की अवस्था में आ गए।

अब उसकी चूत पर मेरा मुँह और उसके मुँह में मेरा लण्ड था।

हम दोनों ने एक-दूसरे के गुप्तांगों को बहुत ही मजे से चूसा।

कुछ देर बाद वो झड़ गई.. लेकिन मैं अभी नहीं झड़ा था।

अब वो सिसयाने लगी- प्लीज़ मेरी में पेल दो.. अब नहीं रहा जाता…

सो मैंने उसे घोड़ी बनाया और लण्ड उसकी चूत पर रखा।

मेरी एक ज़ोरदार चोट ने मेरा पूरा लण्ड उसकी चूत में पेल दिया।

वो एक बार तो चिल्लाई.. लेकिन मैं रुका नहीं और उसे पेलना जारी रखा।

कुछ देर बाद वो चुदासी भाभी भी चूतड़ों को आगे-पीछे करके मेरा साथ देने लगी।

अब मैंने चूत में से निकाल कर लण्ड उसकी गाण्ड में डाल दिया।

उसने पहले गाण्ड नहीं मरवाई थी.. सो उसकी गाण्ड में से खून आने लगा और वो चिल्लाने लगी।

लेकिन कुछ देर बाद उसका दर्द कम हुआ तो मैंने चोदना चालू किया।

अब वो तो बहुत ही ज़्यादा पागल हो गई थी।

कुछ देर गाण्ड मारने के बाद मैंने अपना लण्ड फिर से उसकी चूत में डाल दिया और लगभग 15 मिनट चोदने के बाद हम दोनों एक साथ झड़ गए।

मैंने अपना सारा माल उसकी चूत से बाहर ही निकाला और हम नंगे ही एक-दूसरे के साथ चिपक कर सो गए।

कुछ देर बाद हमारा फिर से मूड बन गया और फिर से धकापेल शुरू हो गई।

उस दिन हमने 4 बार चुदाई की। वो बहुत ही खुश थी और फिर बाद में हम काफ़ी बार मिले और चुदाई का मजा लिया।

मुझे उम्मीद है आप लोगों को कहानी अच्छी लगी होगी।

आप मुझे ईमेल कर सकते हैं और इसी आईडी से मुझे फ़ेसबुक पर भी सर्च कर सकते हैं।

मुझे आपके मेल्स और फ्रेंड-रिक्वेस्ट का इंतज़ार रहेगा।

Ananya Verma

अरे! मैं अनन्या वर्मा हूँ - लखनऊ विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान की पढ़ाई करने वाली और पिछले 4 साल से हिंदी में ऐसी कहानियाँ लिख रही हूँ जो आपकी अंगुलियाँ स्क्रीन पर रोक दें। मैं इंसानी इच्छाओं, ख्वाहिशों और वो पलों को समझती हूँ जो आप छुपाना चाहते हैं लेकिन महसूस करना चाहते हैं। मेरी कहानियों में वही बात है जो दिल को छूती है और तन को सिहराती है। हज़ारों पाठकों ने मेरी कहानियाँ पढ़कर गर्म रातों का मज़ा लिया है। तो चलो, आज की रात मेरी कहानी से बनाते हैं!

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