क्या वो किसी नाम का हकदार नहीं !

वेश्यावृति की परिभाषा बहुत सरल है पर केवल समाज के उन लोगों के लिए जो सिर्फ वेश्यावृति के रूप में उन महिलाओं को देखते हैं जो चंद पैसों के बदले अपने शरीर को बेच देती हैं।

हर शाम जला करती हूँ इस कोठे पर हर शाम बोली लगा करती है इस कोठे पर इस कोठे ने मेरे शरीर की कीमत लगा दी और नाम वेश्या का दे दिया पर उस मर्द का क्या जो हर शाम मेरे कोठे पर आया करता है क्या वो किसी नाम का हकदार नहीं!

बचपन में मां ने पूरे तन पर ओढ़नी ओढ़ा दी पर क्यों और कब वक्त ऐसा आया कि स्वयं ही मैंने उस ओढ़नी को हजारों मर्दों के सामने उतार दिया? इन पंक्तियों को जरा ध्यान से पढ़िए, मर्दवादी समाज का दोगला चेहरा नजर आएगा जिसमें उसने अपने शरीर की कीमत लगाने वाली औरत को वेश्या का नाम दे दिया पर जो मर्द उसके पास अपने शरीर की भूख मिटाने आता है उसे नाम देना भूल गया।

कभी-कभी समाज का दोगला चेहरा देख हंसी आती है कि शरीर बेचने वाली वेश्या है पर उसके शरीर को खरीदने वाले का क्या नाम है यह मर्दवादी समाज ने अपने बनाए कानून में बताया ही नहीं। हां, कभी-कभी औरत के शरीर की बोली लगाने वाले को दलाल जरूर बोल देते हैं पर यहां भी औरत के शरीर का उपभोग करने वाले के नाम का उल्लेख नहीं है!

आपको मेरी बातों से लग रहा होगा कि शायद मैं वेश्यावृति के पक्ष में बात कर रही हूँ पर ऐसा नहीं है मैं तो बस यह कहना चाह रही हूँ कि जब शरीर बेचने वाली वेश्या है तो फिर औरत के शरीर की कीमत लगाकर उसको उपभोग करने वाले व्यक्ति को क्यों कोई नाम नहीं दिया गया!! इन सब सवालों से भी परे एक सवाल है जिसे आपने कभी सोचा तो होगा पर मर्दवादी समाज से पूछने की हिम्मत नहीं दिखाई होगी।

जरा सोचिए आधुनिक युग में बहुत से मर्द भी अपने शरीर को बेचकर धन कमा रहे हैं क्या उन्हें भी आप वेश्या बोलते हैं?

फिर क्यों समाज में ऐसी सोच बना दी गई है कि वेश्यावृति शब्द को केवल औरत के नाम से ही जोड़कर देखा जाता है। अनेकानेक ऐसी लड़कियाँ, महिलायें भी हैं जो पर्दे के पीछे तन का सौदा करती हैं और पर्दे पर तन का दिखावा, वो भी बिना किसी मज़बूरी के, पेट की आग बुझाने के लिये नहीं, ऐशो आराम के लिये ! उनकी तस्वीरें भी आप अपने दिल में, बटुए में घर में संजोए फ़िरते होंगे, उनको यह नाम क्यों नहीं?

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Ananya Verma

अरे! मैं अनन्या वर्मा हूँ - लखनऊ विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान की पढ़ाई करने वाली और पिछले 4 साल से हिंदी में ऐसी कहानियाँ लिख रही हूँ जो आपकी अंगुलियाँ स्क्रीन पर रोक दें। मैं इंसानी इच्छाओं, ख्वाहिशों और वो पलों को समझती हूँ जो आप छुपाना चाहते हैं लेकिन महसूस करना चाहते हैं। मेरी कहानियों में वही बात है जो दिल को छूती है और तन को सिहराती है। हज़ारों पाठकों ने मेरी कहानियाँ पढ़कर गर्म रातों का मज़ा लिया है। तो चलो, आज की रात मेरी कहानी से बनाते हैं!

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