रोनी का राज-1

दोस्तो, मेरी यह कहानी थोड़ा अलग किस्म की है, इसे जरूर पढ़िए, यह मेरे जीवन की सत्य घटना है, रिश्ते पल भर में कैसे बदल सकते हैं, यह आप इस कहानी को पढ़कर समझ सकते हैं !

यह कहानी लगभग पंद्रह साल पहले की है जब हम कॉलेज में स्नातक के अंतिम वर्ष में थे। मेरा दोस्त रवि जो आज भी मेरा दोस्त और भाई जैसा है, आजकल वो नेतागिरी में अपना नाम रोशन कर रहा है, रवि बड़े और संपन्न घर से है, शहर में उसके कई मकान दुकानें हैं। गाँव में सैंकड़ों एकड़ जमीने हैं।

हम बचपन से अभिन्न मित्र हैं एक दूसरे के बिना रह नहीं पाते थे ! स्कूल से कॉलेज तक हमारी जोड़ी साथ चली, शहर में ही रवि के एक बड़े से मकान में हम लोग ऊपर वाली दूसरी मंजिल पर रहते थे, नीचे के खंड में दो परिवार किराये से रहते थे। ऊपर हम लोगों के अलावा कोई नहीं रहता था तो हम लोग बहुत मस्ती किया करते थे ! कभी कभार चोरी से बीयर भी पीते थे, कोई सेटिंग मिल गई तो साथ में चुदाई भी करते थे ! वैसे सेटिंग बनाने में मैं ही माहिर था रवि को भी खूब ऐश करवाता था !

एक बार मैंने रवि से कहा- नीचे किरायेदार चोपड़ा आंटी जिसका पति अक्सर बाहर रहता है, उसे पटा लो तो बाहर से दूसरी सेटिंग बनाने की समस्या हल हो जाएगी फिर जब चाहो आंटी को बुला लो !

तो रवि बोला- यार मेरे से नहीं होगा, यह शुभ काम तो तुम ही कर सकते हो, तुम लगे रहो उसे पटाने के लिए ! कोई समस्या हुई तो मैं निपट लूँगा।

आंटी बत्तीस साल से कम तो नहीं होगी मगर लगती पच्चीस की थी, परीक्षा हो चुकी थी इसलिए उसके दोनों बच्चे दादी के पास रहने गए थे या आंटी ने जानबूझ कर बेज दिया था, मुझे शक था कि इसका किसी से चक्कर भी चलता है जो अक्सर आंटी से मिलने भी आता है पर कोई सबूत नहीं था !

मैं खोजबीन में लग गया। एक दिन जब वो रात में आया तो मैंने उसे बालकनी से आते देख निगरानी करने लगा। जैसे ही चोपड़ा आंटी ने बाहर का मुआयना करके दरवाजे लगाये, मैंने रवि को पूरी बात बताकर नीचे चलने को कहा।

रवि ने दरवाजे पर दस्तक दी आंटी बोली- मैं सो गई हूँ, क्या काम है?

रवि बोला- दरवाजा खोलो, फिर बताता हूँ क्या काम है।

थोड़ी देर बाद आंटी दरवाजा खोलकर बाहर आ गई तो रवि ने कहा- अभी तुम्हारे घर कौन आया था?

और आंटी को धकाते हुए अन्दर घुस गया। पलंग पर तीस साल का युवक लेटा हुआ था जो हड़बड़ा कर खड़ा हो गया। रवि ने उसे दो थप्पड़ रसीद करते हुए कहा- आइन्दा यहाँ आया तो तेरी टांगें तोड़ डालूँगा, चल भाग !

वो दुम दबाकर भाग गया।

फिर रवि आंटी की ओर बढ़ने लगा तो मैंने रवि को आँख मारते हुए कहा- इनसे कुछ मत कहो, कल इनके पति आयेंगे, तो उनसे बात करके मकान खाली करवा लेंगे।

और रवि को लेकर ऊपर आ गया।

रवि बोला- यार, तुमने कुछ कहने क्यों नहीं दिया?

मैंने कहा- नीचे दूसरे किरायेदार भी रहते हैं, बखेड़ा खड़ा हो जाता ! अब आगे क्या करना है मैं बताता हूँ, मैं आंटी को तुम्हारे कमरे में भेजूँगा, वो माने या न माने बस उसे दबोच कर तुम उसे चोद लेना, अपनी इज्जत की खातिर वो किसी से कुछ नहीं कह सकती !

फिर मैंने नीचे जाकर आंटी को धीरे से आवाज लगाई तो उसने दरवाजा खोल दिया अपना राज खुलने और पति के डर से तो वैसे भी उसकी नीद उड़ ही गई होगी।

चोपड़ा आंटी बोली- रोनी, रवि से कहना मैं अब ऐसा कभी नहीं करूँगी, मेरे पति को न बताये ! यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं।

तो मैंने कहा- तुम ही ऊपर जाओ रवि से बात कर लो ! अगर तुम्हारी बात न माने तो मैं कोशिश करूँगा !

योजना के मुताबिक वो ऊपर गई, अपनी गलती की माफ़ी मांगते हुए कहा- मेरे पति से कुछ मत कहना !

और रवि ने मेरे बताये संवादों से उसे चुदने के लिए तैयार कर लिया और उसकी चुदाई कर डाली।

फिर मेरे से कहा- तुम भी मजे कर लो !

तो मैंने कहा- आज तुम कर लो, मैं कल कर लूँगा !

फिर सोने से पहले रवि ने एक बार फिर ठोका उसे !

कहानी जारी रहेगी ! 3441

Ananya Verma

अरे! मैं अनन्या वर्मा हूँ - लखनऊ विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान की पढ़ाई करने वाली और पिछले 4 साल से हिंदी में ऐसी कहानियाँ लिख रही हूँ जो आपकी अंगुलियाँ स्क्रीन पर रोक दें। मैं इंसानी इच्छाओं, ख्वाहिशों और वो पलों को समझती हूँ जो आप छुपाना चाहते हैं लेकिन महसूस करना चाहते हैं। मेरी कहानियों में वही बात है जो दिल को छूती है और तन को सिहराती है। हज़ारों पाठकों ने मेरी कहानियाँ पढ़कर गर्म रातों का मज़ा लिया है। तो चलो, आज की रात मेरी कहानी से बनाते हैं!

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