शराबी पति-2

शराबी पति-1

बगल में मर्द सो रहा था, इस अहसास से चूत में खुजली होने लगी, नींद नहीं आ रही थी, जवानी की आग भड़क रही थी, रमेश ने कई दिनों से मुझे नहीं चोदा था.

शायद यही हाल हेमंत का भी था, बाजू में जवान औरत सो रही है और आदमी का लंड खड़ा न हो ऐसा नहीं हो सकता. मेरा अपने आप पर से काबू छूटता जा रहा था. मैं सोच रही थी कि हेमंत पहल करे, वो भी इसी सोच में था. पर आज तक मैंने उसे लिफ्ट नहीं दी थी, इसलिए डर रहा था.

तभी मुझे लगा कि हेमंत के एक पैर का पंजा मेरे पैर के पंजे से छू रहा है. सारे शरीर में करंट दौड़ गया, मेरी अन्तर्वासना भड़क उठी. मैंने वैसे ही उसे छूते रहने दिया, थोड़ी देर बाद उसने उसी पंजे से मेरा पंजे को धीरे से दबाया, मानो मुझसे इजाजत मांगी हो.

हेमन्त के साथ कुछ करने की लालसा इतनी प्रबल हो उठी कि मैं विरोध न कर सकी, मैंने हिम्मत कर उसी अंदाज में उसका पैर दबा दिया.

मेरी ओर से सकारात्मक प्रत्युत्तर पाकर उसकी हिम्मत बढ़ी और चूत की आग के आगे मुझे अपनी मर्यादा इज्जत का ख्याल न आया, पति थाने में, बेटी बीमार, सब भूल कर मैं एक गैर मर्द से चुदने को तत्पर हो उठी.

उसका पैर मेरे पैर से रगड़ खा रहा था. वो अपने पैर से मेरी साड़ी ऊपर कर रहा था, चुदाई की आग में मैं अंधी हो गई थी और मजे ले रही थी.

तभी उसका एक हाथ मेरे ब्लाउज़ के ऊपर आया और धीरे धीरे वो मेरी चूचियाँ दबाने लगा. कुछ देर बाद उसने मुझे बाहों में भरने की कोशिश की. मैंने बड़ी मुश्किल से अपने आप पर काबू कर उससे छुटने की कोशिश की, मैंने कहा- नहीं ई ई ई…

ये एक कमजोर इन्कार था.पर अब वो मानने वाला नहीं था, उसने मुझे क़स कर बाहों में भर लिया और लेटे लेटे मेरे गाल चूमने लगा. मेरा बदन खुद ब खुद ढीला पड़ने लगा, वो समझ गया कि बात बन गई.

मेरे इन्कार की आखिरी कोशिश असफल हो गई, मैं खुद ही उससे लिपटने लगी. उसने मुझे अलग कर साड़ी हटा दी, फिर ब्लाउज़ निकाल दिया, मैं पेटीकोट और ब्रा में थी. वो मुझसे लिपट गया, पीछे हाथ ले जा कर ब्रा के हुक खोल दिए, ब्रा नीचे ढलक गई. मैंने शर्म के मारे दूसरी तरफ मुँह कर लिया तो वो पीछे से चिपक गया और दोने हाथों से मेरे नंगे कबूतर दबाने लगा.

उसका लंड मेरे चूतड़ों की दरार में गड़ रहा था. इसके बाद उसने मुझे चित लिटाया, मेरे पेटीकोट के अन्दर हाथ डाल कर मेरी पेंटी खींची.

मैंने एक फिर उसे रोकने की कोशिश की, पर उसने लगभग जबरन मेरी पेंटी उतार ली, अब मैं भी बगैर चुदे नहीं रह सकती थी, और कोई रास्ता भी नहीं था, बूबे दब चुके थे, पेंटी उतर चुकी थी.

अब उसने अपनी पैंट और अंडरवियर हटा कर अपना लंड निकाल लिया. वो मेरे पति के लंड जैसा ही बड़ा और मोटा था. उसने मेरी टांगें फैलाईं, पेटीकोट ऊपर कर दिया.

मैं बोली- किसी से मत कहना!

उसने हाँ में सर हिला दिया, वो लंड लेकर मेरे ऊपर चढ़ गया लंड का सुपारा मेरी चूत के मुँह पर रख धक्का दिया, तो मेरी गर्म और गीली चूत में लंड आराम से समाता चला गया, मेरे मुँह से अह अह… निकलने लगी, बड़े दिनों बाद चुदाई का मजा आ रहा था.वो वो पहले धीरे धीरे धक्के मार रहा था. थोड़ी देर बाद मैं मजे लेने के लिए अपनी चूत नीचे से उछालने लगी. वो बोला- डार्लिंग, मजा आ रहा है ना? मैं कुछ नहीं बोली, चुपचाप चूत उछाल उछाल कर चुदाती रही.

वो अब जोर जोर से धक्के मारने लगा, जितनी जोर से वो धक्का मारता, उतना ही मजा आता. मेरे मुँह से सी सी सी सी निकलने लगा. उसकी स्पीड बढ़ गई. अह आह आह्ह…

उसका लंड पहले से भी ज्यादा कड़क हो गया, मेरी चूत में से फच-फच की आवाज आने लगी, उसके लंड से गर्म गर्म वीर्य की पिचकारी तीन बार मेरी चूत में गिरी, मैं उससे चिपक गई, दो-तीन झटके मार कर उसका लंड शांत हो गया.

मैं करीब पांच मिनट तक उससे चिपकी रहीम फिर हट गई, वो भी हट गया. मैं दूसरी तरफ मुँह कर सोच रही थी कि जो हुआ वो अच्छा हुआ या बुरा? पर अब तो मैं चुद चुकी थी. अब कुछ नहीं हो सकता था, मैं थक चुकी थी चुदाई के बाद नींद आ गई.

सवेरा होने पर वेटर चाय ले कर आ गया. दोनों बच्चे भी जग गए, चाय पीकर हेमंत बोला- मैं कर्फ़्यू की स्थिति पता करता हूँ. मैं उससे नजर नहीं मिला पा रही थी. वो बाहर गया, फिर आकर बोला- आठ बजे तक हम यहाँ से घर के लिए निकल लेंगे.

रविवार होने से छुट्टी थी, हम सभी लोग हेमंत के घर पहुँचे. सभी मोहल्ले वाले अजीब नजर से मुझे देख रहे थे. उनकी आँखों में एक सवाल था कि रात भर मैं कहाँ रही. मेरी आँखें शर्म से नीची हो रही थी.

मैंने हेमंत के लिए खाना बनाना शुरू कर दिया. हेमंत बाज़ार चला गया फिर लौट कर आया तो उसने मुझे पी-नॉट की गोली दी और बोला- रात को प्रीकॉशन नहीं लिया न! मैं शर्म से लाल हो गई पर सोचा कि इसे मेरा इतना तो ख्याल है.

खाना खाकर मैं अपने घर आ गई. शाम चार बजे मेरे ससुर आये, हमने थाने जाकर पाँच हजार रुपये दिए और रमेश को छुड़ा कर लाये. वो बहुत शर्मिंदा था पर नहीं जानता था कि उसकी बीवी दूसरे मर्द से चुद चुकी थी.

अगले दिन मेरे ससुर चले गए, रमेश की नौकरी जा चुकी थी. वो किराये का ऑटो चलाने लगा, पर उसकी आदत में कोई सुधार नहीं आया.

कहानी जारी रहेगी. [email protected]

शराबी पति-3

Ananya Verma

अरे! मैं अनन्या वर्मा हूँ - लखनऊ विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान की पढ़ाई करने वाली और पिछले 4 साल से हिंदी में ऐसी कहानियाँ लिख रही हूँ जो आपकी अंगुलियाँ स्क्रीन पर रोक दें। मैं इंसानी इच्छाओं, ख्वाहिशों और वो पलों को समझती हूँ जो आप छुपाना चाहते हैं लेकिन महसूस करना चाहते हैं। मेरी कहानियों में वही बात है जो दिल को छूती है और तन को सिहराती है। हज़ारों पाठकों ने मेरी कहानियाँ पढ़कर गर्म रातों का मज़ा लिया है। तो चलो, आज की रात मेरी कहानी से बनाते हैं!

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