पढ़ाई के साथ कामवाली की चुदाई-2

पिछला भाग पढ़े:- पढ़ाई के साथ कामवाली की चुदाई-1

हेलो दोस्तों, मेरा नाम दीपक है। लंड का साइज़ 9.8 इंच है। मैं अपनी नौकरानी सेक्स स्टोरी का अगला भाग लेकर आया हूं। तो अब आगे-

जैसा ही मेरा लंड खड़ा देखा, शिवांगी नीचे झुक गई, और मेरी तरफ आने लगी। मैं अपना लंड उसको दिखाता हुआ बोला-

मैं: मेरी कुत्ती को क्या चाहिए?

तो वो बोली: मालिक आपका घोड़ा।

मैंने कहा: पर मेरे पास घोड़ा तो नहीं है।

तो वो बोली: आपका लोड़ा।

मैंने कहा: अब हुई ना कुछ बात।

ये बोल के वो मेरा लंड मुँह में लेकर चूसने लगी, और लंड चुसाई शुरू हो गई मेरी। वो लंड को ऐसे चूस रही थी, जैसे पहले कभी नहीं देखा हो, एक-दम एक पोर्नस्टार जैसा। मैंने उसका मुँह पकड़ा, और लंड को डीपथ्रोट देना शुरू कर दिया। जब उसको सांस लेने में दिक्कत हुई, तो मैंने अपना लंड बाहर निकाल दिया, और वो एक-दम पीछे हो गई। वो लंबी-लंबी सांस लेना शुरू हो गई आह्ह आह्ह आह्ह ओह्ह।

मैंने उसको उठाया, और किस्स शुरू कर दी। फिर मैंने उसके कपड़े निकालना शुरू किया, और अब वो मेरे सामने पूरी नंगी खड़ी थी।

मैंने उसको कहा: क्या बॉडी है तेरी, इसका तो मैं पूरा मजा लूंगा।

फिर मैंने जब उसकी चूत देखी, तो उसकी चूत पर बाल थे। पर मुझे बाल चूत पर अच्छे नहीं लगते, तो मैंने उसको बोला बाल साफ करके आओ।

उसने कहा: अभी आज नहीं करूंगी, अब जो होगा सुबह ही होगा।

पर मुझे उसकी चुदाई करनी थी, तो मैंने कहा ठीक है। फिर मैंने अपना लंड उसके मुँह में डाल दिया, और वो चूसने लगी। उसके बाद मैंने उसे डॉगी स्टाइल में किया। पर उसको नहीं पता था मेरा इरादा क्या था।

मैंने तेल लिया और उसकी चूत पर डाला। उसकी गांड भी ऑयली हो गई। फिर मैंने उसकी गांड पर एक चांटा मारा। मैंने उसके बाल पीछे से पकड़े, और अपना लंड उसकी गांड पर सेट करके एक धक्का दिया। वो बर्दाश्त नहीं कर पाई और हिलने लगी।

फिर वो बोली: मेरी गांड में क्यों डाला?

मैंने कहा: तूने चूत की सफाई नहीं की थी, और तू मना कर रही थी ना। पर मुझे कुछ ना कुछ तो आज मारना था। तो मैंने तेरी गांड में मेरा लंड डाल दिया।

उसने कहा: निकालो इसको बाहर।

मैंने कहा: चुप साली रंडी, अब चुदती रह।

और मैंने 20 मिनट उसकी गांड मारी। उसके बाद मैं उसकी गांड में डिस्चार्ज हो गया। फिर मैंने लंड बाहर निकाला, तो मेरे लंड का पानी, और उसकी गांड से निकला हुआ उसकी गांड का खून देख मुझे बड़ा मजा आया। मैं वैसे ही वहीं लेट गया।

फिर वो बाथरूम जाने लगी थी। पर जब वो चल रही थी, उससे सही तरह से चला भी नहीं जा रहा था। फिर मैं खड़ा हुआ तो मैंने उससे पूछा-

मैं: कहाँ?

उसने कहा: मैं धोने जा रही हूं।

मैंने उसको रोका और उसको अपने हाथों में उठा लिया। फिर बाथरूम लेकर गया, जहां पर उसने सूसू किया, और अपनी गांड साफ की। जब वो ये सब कर रही थी, तो मेरे लंड में फिर हलचल शुरू हो गई। तो मैंने उसको इशारे से बोला-

मैं: फ़िर तैयार है?

उसने कहा: अभी नहीं, अभी ना मैं गांड मराऊंगी, और ना ही मैं चूत में लूंगी।

मैंने बोला: ब्लोजॉब तो दे सक्ती हो?

उसने नहीं कहा। पर मैं जब उसको उठा के लेकर आया, और हम बिस्तर पर लेटे थे, तब उसने मेरे लंड के साथ खेलना शुरू कर दिया। फिर उसने मेरे लंड को मुँह में लेना शुरू कर दिया। 30 मिनट लंड चूसने के बाद उसने मेरे लंड का पानी पी लिया, और फिर हम सो गए।

जब मैं सुबह उठा, तो मैंने शिवांगी को देखा। वो वहां नहीं थी। तो मैं उठा और वॉशरूम में गया और देखा, तो वो वहां नहीं थी। फिर मैं बाहर आया अपना शॉर्ट्स डाल के। मैंने देखा तो वो चाय बना रही थी किचन में। पर जब मैंने उसको देखा, तो मेरा लंड सलामी देने लग गया।

मैंने देखा तो वो बिल्कुल नंगी खड़ी थी, आगे की और झुक के। तो मैं उसके पीछे गया, और अपने लंड पर अपना थूक लगाया। फिर सीधा उसके पीछे से उसकी चूत में डाल दिया। वो एक दम से डर गई और चीखते हुए बोली-

वो: आह्ह दीपू, तुमने तो मुझे डरा ही दिया। क्या करते हो मेरे मालिक?

मैंने कहा: चुप साली, तू चाय बना, और मैं तेरी चूत की प्यास बुझाता हूँ।

उसकी चूत थोड़ी टाइट थी, जिसकी मुझे और भी मजा आ रहा था। फिर मैंने उसकी एक टांग किचन स्लैब पर रखी, और उसकी अच्छे से चुदाई करने लगा। 30 मिनट तक हमारी ऐसी ही चुदाई चली। मेरा होने वाला था। मैंने पूछा कहां निकालूं, तो बोली अंदर।

मैंने कहा: प्रेग्नेंट हो जाओगी।

उसने कहा: नहीं मैं कभी मां नहीं बन सकती। ये क्लीन चिट है डॉक्टर से मुझे। मैंने 4-5 डॉक्टरों को बताया तो उन्हें बोला सब ने मुझे। इसलिए मेरे पति ने मुझे छोड़ दिया, क्योंकि मैं एक ऐसी औरत हूं, जो कभी बच्चा नहीं दे सकती।

मैंने कहा: कोई ना, तुम बहुत अच्छी हो। अब से तुम मेरी रखैइल बन के रहोगी, ठीक है?

फिर 5 मिनट और उसकी चूत चोदने के बाद मैं उसकी चूत में ही डिस्चार्ज हो गया। उसके बाद वो भी मेरे साथ सो गई। फिर हम लोगों ने नाश्ता किया। आज नाश्ता कुछ इस तरह था- आलू के परांठे और दही। अब खाने का स्टाइल ऐसा – शिवांगी मुझे परोस रही थी। फिर जब मैंने कहा तुम भी बैठ जाओ, तो वो मेरी गोद में आके बैठ गई।

हम दोनों हमें वक्त बिल्कुल नंगे बैठे थे, तो आज उसने मुझे अपने हाथ से खिलाया, और मैंने उसको मेरे हाथ से। मैंने साथ ही उसके स्तनों की मालिश भी की। फिर जब मेरा कॉलेज का टाइम हुआ, तो उसने मुझे फोर्स किया कि दीपू तुम कॉलेज जाओ, तुम्हारी पढ़ाई में कोई बदलाव नहीं आना चाहिए।

मैंने बोला: ठीक है।

उसके बाद से 7 दिन उसको पीरियड्स आ गए। तब मैंने कुछ नहीं किया। फिर जब उसके पीरियड्स ख़तम हुए, तो मुझे मम्मी की एक दोस्त है यू.एस.ए. में, उन्हें कॉल किया-

आंटी: बेटा कहां हो?

मैंने कहा: मैं अभी इंडिया हूं।

वो बोली: जितनी जल्दी हो सके यू.एस.ए. आ जाओ।

मैंने पूछा: क्यों?

तो वो बोली: बेटा तुम्हारे पापा की तबीयत सीरियस है। वो केवल तुमको पूछ रहे हैं। पर तुम्हारी माँ ने मना कर दिया कि वो डिस्टर्ब हो जाएगी।

तो मैंने कहा: मैं आज ही निकल रहा हूं।

मैं घर आया तो मैंने शिवांगी को बोला: मैं जा रहा हूं यू.एस.ए.। मैं नहीं आऊं तब तक तुम यहीं रहो, और अपने किसी दोस्त को बुलाना चाहो तो ठीक है। फिर मैंने उसको 2 लाख निकाल के दे दिए। उसके बाद मैंने फ्लाइट बुक की, और मैं यू.एस.ए. के लिए निकल गया।

फिर मैं जब अस्पताल पहुंच गया, तो पापा से मेरी मुलाक़ात हुई। पापा ने मुझे बस इतना ही बोला-

पापा: अब सब चीज़ तुझे ही देखनी है। तेरी माँ की हर इच्छा पूरी करना। और मैंने तुम्हारे लिए इतना काम लिया है, और बिजनेस खड़ा कर दिया है, कि तू और तेरी मां दोनों आराम से खा सकते हैं।

फिर मैंने पापा से कहा: आप कहीं नहीं जा रहे। और मैं अब आपके साथ ही रहूंगा।

फिर डॉक्टर आई तो मैंने पूछा: क्या हुआ?

तो उसने कहा: आप अभी थोड़ी देर बाहर बैठो।

जब मैं बाहर आया तब 5 मिनट बाद डॉक्टर ने मुझे और माँ को आके बोला “माफ़ करें वह नहीं रहे”। मतलब पापा की मौत हो गयी थी। मैं एक दम से टूट गया और माँ भी। फिर हमने उनका अंतिम संस्कार किया, और मैंने माँ को बोला-

मैं: आप मेरे साथ इंडिया चलो। मैंने पापा का पूरा बिजनेस वहां ही शिफ्ट कर लिया है। हमारे सारे भारतीय कर्मचारी भी वहां पर शिफ्ट होने के लिए तैयार थे, हमारे साथ उनके अपने देश में। पापा की ये आखिरी इच्छा थी।

तो माँ तैयार हो गई। फिर हम लोग इंडिया शिफ्ट हो गए। मैं उस घर में गया जहां मैं और शिवांगी एक साथ रहते थे। माँ अभी आयी थी। मैंने शिवांगी को देखा तो मुझे बड़ा मजा आया, क्योंकि एक महीने के बाद हमने एक दूसरे को देखा था।

अब इसके आगे क्या हुआ, मैं आपको अगली कहानी बताऊंगा। तब तक के लिए बाय। मुझे उम्मीद है कि मेरी कहानियाँ आपको अच्छी लग रही होंगी। कृपया फीडबैक देके मुझे सराहना करते रहना।

अगला भाग पढ़े:- पढ़ाई के साथ कामवाली की चुदाई-3

Nisha Gupta

हैलो! मैं निशा गुप्ता हूँ - जयपुर विश्वविद्यालय से संचार विज्ञान में मास्टर और पिछले 6 साल से डिजिटल दुनिया में हिंदी कहानियाँ लिखने वाली एक अनुभवी लेखिका। मैं वो कहानियाँ लिखती हूँ जो पढ़ते ही आपके मन में आग लगा दें। मेरी कहानियों में वो सब कुछ है जो आप चाहते हैं - बोल्ड, बेबाक और बेरोकटोक। मेरे लेखन को हजारों पाठकों ने सराहा है और कई पुरस्कार भी मिले हैं। मैं यहीं हूँ आपके मज़े के लिए — तो लेटे रहो और पढ़ते जाओ!

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