साहब ने रंडी बनाया-1

नमस्कार दोस्तों, मैं Thor आपके सामने नौकरानी की चुदाई की नई कहानी लेकर आया हूं। मेरी सभी कहानियों को आप लोगों का बहुत प्यार मिल रहा है, उसके लिए मैं आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूं। ये कहानी मुझे उत्तर प्रदेश की वैशाली ने भेजी है। चलिए अब कहानी शुरू करते है वैशाली की जुबानी।

मेरा नाम वैशाली है, और मैं 22 साल की हूं। मेरी शादी 6 महीने पहले हो चुकी है। मेरा रंग ठीक-ठाक गोरा है, और मेरा फिगर 34-28-34 है। मेरे घर में मेरे सास, ससुर, और मेरे पति है। मेरे पति दुबई में मजदूरी करते है, क्योंकि वहां पैसे बढ़ा कर मिलते है। उन्हें वहां गए हुए 5 महीने हो चुके है, और हमारी सिर्फ फोन और वीडियो कॉल पर ही बात होती है। अब आप ये सोच रहे होंगे, कि शादी के एक ही महीने के बाद मेरे पति दुबई चले गए, तो मैं चुदाई के लिए तरस रही होऊंगी। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है, क्योंकि मेरे साहब मुझे जी भर कर सुबह शाम पेलते है। चलिए बताती हूं पूरी बात।

मैं एक गरीब घर की लड़की थी। मेरे पापा एक पेट्रोल पंप पर काम करते थे, और मम्मी घर का काम करती थी। एक छोटा भाई था, जो अभी 3 साल का ही था। स्कूल की पढ़ाई के बाद मैं भी घर पर ही थी, और सिलाई वगैरा करके थोड़े-बहुत पैसे जमा कर रही थी। पापा जहां काम करते थे, वहीं पर एक लड़का काम करता था, जो पापा को मेरे लिए पसंद आ गया। फिर पापा ने उस लड़के से बात की, और उस लड़के ने उसके घर वालों से बात की। फिर दोनों परिवार मिले, और हमारी शादी तय हो गई।

लड़के के पापा मर चुके थे, और मम्मी उसकी एक अमीर घर में बुजुर्ग पति-पत्नी का ध्यान रखती थी। फिर हमारी शादी ही, जिसमें दोनों तरफ के घर-घर के ही लोग थे। शादी के बाद मैं अपने ससुराल गई। मेरे पति मेरे साथ बहुत अच्छे थे। हमारी सुहागरात में उन्होंने मुझे बहुत प्यार किया। वो बड़े प्यार से मेरी चुदाई करते थे। ऐसे ही कब 15 दिन बीत गए, मुझे पता ही नहीं चला। रोज रात मेरे पति मुझे पेलते थे, जिसमें मुझे काफी मजा आता था।

फिर एक दिन मेरे पति बहुत खुश-खुश काम से आए। पूछने पर पता चला कि उन्होंने दुबई में काम के लिए फॉर्म भर रखा था, और उनको वहां काम मिल गया था। उनको कुछ ही दिनों में निकलना था। मैं खुश भी थी, और दुखी भी। खुशी उनको काम मिलने की थी, और दुख उनसे दूर होने का था, क्योंकि मैं उनके साथ नहीं जा सकती थी।

शादी का एक महीना पूरा होते ही मेरे पति चले गए। अब मैं घर पर अकेले बोर होने लगी, क्योंकि सासू मां तो अपने काम पर चली जाती थी। पति भी कॉल करते थे, लेकिन उनके पास बात करने का ज्यादा टाइम नहीं होता था। तभी एक दिन मेरी सास ने कहा-

सासू मां: बेटी तू घर पर बैठी बोर होती रहती है। क्यों ना तू भी मेरे साथ काम पर चल?

मुझे सासू मां की बात ठीक लगी, और मैंने उनको हां बोल दिया। फिर अगले दिन वो मुझे वहीं ले गई, जहां वो बुजुर्ग पति-पत्नी का ध्यान रखती थी। उस दिन मैं पहली बार साहब से मिली। साहब आर्मी के बड़े पद से रिटायर हुए थे, और मेम साहब बैंक में बड़ी पोस्ट से रिटायर हुई थी। दोनों की उमर 60 से ऊपर थी, लेकिन साहब काफी फिट दिखते थे, जबकि मेम साहब का बुढ़ापा साफ दिखता था। मेरी सासू मां उनके खाने, पीने, कपड़े धोने, और घर की साफ-सफाई करती थी। वो काफी सालों से वहां पर थी, और वो लोग उन पर पूरा भरोसा करते थे। उनके अपने बच्चे लंदन में बसे हुए थे।

सासू मां ने मुझे उनसे मिलवाया, और मुझे साफ-सफाई का काम दिलवा दिया। उस वक्त तक मुझे ये नहीं पता था कि साहब मुझे रंडी बनाने वाले थे।

फिर उसी दिन से मैं काम पर लग गई। मैं अच्छे से उनके घर की सफाई करने लगी। शाम को जब हम वापस आ रहे थे, तो साहब ने सासू मां से मेरे काम की तारीफ भी की थी।

फिर ऐसे ही कुछ दिन बीत गए। तभी एक दिन मुझे कुछ महसूस हुआ। मैं ज्यादातर लेगिंग्स और कुर्ती ही पहनती हूं। उनके घर भी मैं यहीं पहन कर जाती थी। वैसे तो मैंने दुपट्टा लिया होता था, लेकिन काम करने के टाइम पर मैं दुपट्टा उतार देती थी। उस दिन जब मैं हॉल में सफाई कर रही थी, तो साहब सोफे पर बैठे थे।

सफाई करते-करते अचानक जब मेरी नज़र साहब की तरफ पड़ी, तो वो मेरी क्लीवेज को घूर रहे थे। जब मैंने उन्हें देखा, तो उनको मेरे देखने का पता भी चल गया, लेकिन वो फिर भी मेरे चूचों को देखते रहे। ये मुझे कुछ अजीब सा लगा, लेकिन मैंने नजरअंदाज किया। फिर मैं वहां से सफाई करके निकल गई।

कुछ दिन बाद फिर से ऐसी एक घटना हुई। मैं सोफा पर कपड़ा मार रही थी। तभी मेरी नज़र सामने लगे शीशे पर पड़ी। मैंने देखा कि साहब मेरी गांड को घूर रहे थे। इस बार भी उन्होंने देख लिया कि मैं उन्हें देख रही थी। लेकिन उन्होंने नज़र नहीं घुमाई।

अब ऐसा रोज़ होने लगा। जब भी मैं साहब के सामने होती थी, तो वो मुझे ही घूरते रहते थे। एक दिन जब मैं उनके सामने सफाई कर रही थी, तो उन्होंने मुझे बुलाया और बोले-

साहब: बेटी एक काम करोगी?

मैं: जी मालिक बोलिए?

साहब: मेरे घुटने में बहुत दर्द हो रहा है, ज़रा दबा दोगी?

मैं: जी बिल्कुल मालिक।

फिर मैं उनके पास उनका घुटना दबाने गई। वो सोफा पर बैठे थे, और मैं नीचे बैठ कर घुटना दबाने लगी। वो मेरे साथ ऐसे ही बातें भी करने लगे। ऐसे ही बातें करते हुए उन्होंने अपना हाथ मेरी पीठ पर रखा, और फिराना शुरू कर दिया। इससे मैं थोड़ी असहज सी हो गई, लेकिन मैंने कुछ नहीं कहा।

मेरे कुछ ना कहने पर उनका हौंसला बढ़ा, और वो हाथ नीचे मेरी गांड तक ले गए, और मेरा चूतड़ दबा दिया। इससे मैं उछल गई, और खड़ी हो गई। मैंने कुछ नहीं बोला, और चुप-चाप वहां से आ गई।

इससे आगे क्या हुआ, वो आपको इस कहानी के अगले पार्ट में पढ़ने को मिलेगा। कहानी की फीडबैक [email protected] पर दे।

अगला भाग पढ़े:- साहब ने रंडी बनाया-2

Nisha Gupta

हैलो! मैं निशा गुप्ता हूँ - जयपुर विश्वविद्यालय से संचार विज्ञान में मास्टर और पिछले 6 साल से डिजिटल दुनिया में हिंदी कहानियाँ लिखने वाली एक अनुभवी लेखिका। मैं वो कहानियाँ लिखती हूँ जो पढ़ते ही आपके मन में आग लगा दें। मेरी कहानियों में वो सब कुछ है जो आप चाहते हैं - बोल्ड, बेबाक और बेरोकटोक। मेरे लेखन को हजारों पाठकों ने सराहा है और कई पुरस्कार भी मिले हैं। मैं यहीं हूँ आपके मज़े के लिए — तो लेटे रहो और पढ़ते जाओ!

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