चुदासी मम्मी चुदवाने के लिए मान गई 14

नमस्कार दोस्तों, मैं आरव शर्मा, चुदाई की शुरुआत के भाग 14 में आप सब का स्वागत करता हूँ। पिछले भाग चुदासी मम्मी चुदवाने के लिए मान गई 13 में आपने पढ़ा कि कैसे मैंने, मम्मी ने, सविता आंटी और प्रिया मौसी ने मिलकर अजीत को फँसाया और सब कुछ रिकॉर्ड कर लिया। अब बस वो घरवालों को दिखाना था। अब आगे। Real Mausi Sex Story

अगले दिन सब सुबह घर के लिए निकल गए। मैं, मम्मी, प्रिया मौसी और सविता आंटी सब सहमे हुए थे क्योंकि आज अजीत का सच सबके सामने लाना था। करीब 10 बजे हम घर पहुँच गए। अंदर नानी और नानू दोनों आराम से बैठके नाश्ता कर रहे थे।

नानी: अरे आ गए बच्चो, घूम लिए हिल स्टेशन?

मैं: हाँ नानी।

नानू: और कॉटेज कैसा लगा आरव?

मैं: नानू कॉटेज बहुत बढ़िया और बड़ा था।

रीना: हाँ पर अजीत जीजू और प्रिया मौसी तो घूम ही नहीं पाए।

नानी: क्यों?

प्रतिक्षा: मम्मी वो प्रिया दीदी का तो पैर मुड़ गया था और इनको सर्दी पसंद नहीं थी इसलिए ये वहीं रुक गए। इसीलिए ये दोनों नहीं घूम पाए।

नानी: अरे प्रिया मेरा बच्चा, पैर कैसा है अब?

प्रिया: अब ठीक है मम्मी।

उसके बाद हम सब अपने-अपने कमरे में चले गए। मैं और सविता आंटी अपने बेड पे लेटे हुए थे। तभी मम्मी और प्रिया मौसी कमरे में आ गए।

मैं: आ गए आप। बढ़िया। अब मेरी बात ध्यान से सुनो। आज अजीत की सच्चाई सबके सामने लानी है। प्रिया मौसी, एक काम करना होगा। आज शाम को जब सब बैठे होंगे, प्लीज़ तब जाके अजीत को सबके सामने एक कस के थप्पड़ मारना। उसके बाद सबको बताना उसने आपके साथ क्या किया, कैसा इंसान है वो। बाकी मैं देख लूँगा।

सविता: हाँ प्रिया घबरा मत, हम सब तेरे साथ हैं।

प्रिया: पर मैं सोच रही थी… क्या सच जानने के बाद राजीव मुझे अपनाएँगे क्या? वो मेरे जैसी औरत के साथ रिश्ता रखेंगे?

मैं: मौसी कैसी बात कर रही हो आप?

मम्मी: हाँ प्रिया ऐसी बात मत कर। राजीव बहुत अच्छे इंसान हैं। वो समझेंगे कि तेरी कोई गलती नहीं है।

सविता: हाँ और तू चिंता मत कर, हम हैं ना।

उसके बाद शाम हो गई थी। अब प्लान को आखिरी स्टेज था। सब साथ बैठे थे, हँसी-मज़ाक कर रहे थे। मैंने प्रिया मौसी की तरफ़ देखा और उनको इशारा किया। वो उठीं और सीधा अजीत के सामने जाके खड़ी हो गईं। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

प्रिया: अजीत।

अजीत: प्रिया दीदी हाँ बोलिए, कुछ चाहिए आपको?

और फिर प्रिया मौसी ने एक ज़ोरदार कस के अजीत को चाँटा मारा। वो इतना ज़ोर का था कि पूरे रूम में सन्नाटा छा गया। सब एकदम चुप हो गए और प्रिया मौसी व अजीत की तरफ़ देखने लगे। फिर प्रतिक्षा मौसी चिल्लाके बोलीं:

प्रतिक्षा: दीदी ये क्या है? आपने मेरे पति को थप्पड़ कैसे मारा?

प्रिया (चिल्लाते हुए और साथ ही रोते हुए): पति नहीं है तेरा… पति नहीं है! हैवान है ये आदमी, हैवान!

नानू: प्रिया क्या बोल रही हो?

प्रिया: सही बोल रही हूँ पापा। हैवान है ये आदमी, जानवर है। ये मुझे जानवरों की तरह नोचा है, इसने कपड़े फाड़े मेरे, मेरे साथ…

प्रतिक्षा: दीदी आग कुछ मत बोलना वरना मैं भूल जाऊँगी आप मेरी बड़ी बहन हैं।

राजीव: प्रिया… क्या… क्या बोल रही हो? मुझे क्या हुआ?

प्रिया: इस आदमी ने मेरे साथ… एक बार, दो बार, बार-बार…

राजीव मौसा बहुत गुस्से में थे। वो सीधा गए और जाते ही अजीत का कॉलर पकड़ लिया। मैं समझ गया था अब मेरी बारी है। मैं सीधा टीवी के पास गया और अपना फ़ोन कनेक्ट करने लगा ताकि वो वीडियो टीवी पे चला सकूँ।

राजीव: साले तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरी बीवी के साथ!

प्रतिक्षा मौसी ने राजीव मौसा को धक्का दिया।

प्रतिक्षा: दूर रहना! मेरे पति हैं। हिम्मत कैसे हुई आपको इनको हाथ लगाने की? और प्रिया दीदी आप मेरी बड़ी बहन हैं, शर्म नहीं आई मेरे पति पे ऐसा झूठा इल्ज़ाम लगाते हुए?

मम्मी: झूठा इल्ज़ाम नहीं है प्रतिक्षा।

अजीत: झूठा इल्ज़ाम नहीं है तो सबूत कहाँ है कि मैंने कुछ किया है? बताओ!

मैं: सबूत यहाँ है मौस्सा जी।

और मैंने वो वीडियो टीवी पे प्ले कर दी। सब के होश उड़ गए। प्रिया मौसी तो राजीव मौसा के गले लगके रो रही थीं। रीना मौसी, नानू-नानी, सब की साँसें रुक गई थीं। अजीत के भी होश उड़ गए थे क्योंकि उसकी पोल खुल गई थी। लेकिन बिचारी प्रतिक्षा मौसी, सबसे बुरा तो उनके लिए लग रहा था। जिस पति से इतना प्यार किया वो उनको कुछ नहीं समझता था। उनसे प्यार तो छोड़ो, उनको छूना भी पसंद नहीं करता था। पूरी वीडियो में अजीत का असली रूप सारे घरवालों के सामने ला दिया।

अजीत: ये सब झूठ है, नकली! प्रतिक्षा मैंने ऐसा कुछ नहीं किया। ये सब गलत है।

मैंने सीधा अजीत को कॉलर से पकड़ा।

अजीत: आरव ये क्या बतमीज़ी है? मौसा हूँ तुम्हारा!

मैं: मौसा नहीं साले कमीने हो तुम!

उसके बाद मैंने अजीत को धुनना शुरू किया।

मैं: प्रतिक्षा मौसी को धोखा दिया, प्रिया मौसी की ज़िंदगी खराब की, मेरी मम्मी, सविता आंटी और रीना मौसी पे भी तेरी गंदी नज़र थी साले!

तभी अजीत ने मुझे धक्का दे दिया लेकिन तभी राजीव मौसा ने अजीत को पकड़ के सूटना शुरू कर दिया।

राजीव: मेरी बीवी के साथ ये करने की तेरी हिम्मत कैसे हुई!

फिर अजीत ने राजीव मौसा को मुक्का मारा।

अजीत: हा हा हा किया मैंने तो क्या है साले? तू तो तेरी बीवी को खुश नहीं कर पाया तो मैंने किया। साला नपुंसक कहीं का! और ये प्रतिक्षा? अरे हाँ नहीं करता इससे प्यार। तुझ जैसी औरत को छूने की इच्छा ना करे प्यार छी! बस इसलिए तेरे साथ था ताकि तेरी बहनों की चुदाई कर सकूँ। साला अगर ये सब नहीं होता तो छोड़ चुका होता। खैर कोई ना, अब देखना तुम सब की ज़िंदगी कैसे बर्बाद करता हूँ। लेकिन पहले वो वीडियो…

मैंने अजीत को अपनी तरफ़ घुमाया और सीधा उसके अंडों में एक लात मारी जिससे वो दर्द में ज़मीन पे लोटने लगा।

मैं: तू किसी की ज़िंदगी बर्बाद नहीं करेगा क्योंकि तू जेल जाएगा समझा! और जहाँ तक रही वो वीडियो की बात तो तू वो वीडियो भी डिलीट करेगा और नहीं करेगा तो हम करवा लेंगे समझा! और चिंता मत कर, तुझे सज़ा दिलाने के लिए हमारे पास काफ़ी प्रूफ है और बहुत सारे गवाह भी समझा!

उसके बाद मैंने अजीत को लातों से मारना शुरू किया और तब तक पुलिस भी आ गई थी।

मैं: सर ये है वो। ले जाइए इसे।

प्रतिक्षा: एक मिनट।

प्रतिक्षा मौसी अजीत के पास गईं और उसे कस के चाँटा मारा।

प्रतिक्षा: क्यों किया मेरे साथ ऐसा? क्या कमी थी मुझमें… ले जाइए इसे।

पुलिस अजीत को लेकर चली गई। घर में एक अजीब सा सन्नाटा था। प्रतिक्षा मौसी प्रिया मौसी के पास गईं और उनको गले लगा लिया।

प्रतिक्षा (रोते हुए): आई एम सॉरी दीदी… आपकी बात पे यकीन नहीं किया। मेरे पति ने आपके साथ… माफ़ कर दो।

नानी (रोते हुए): अरे मेरे बच्चो क्या हो गया तुम्हारे साथ। हे भगवान किस जन्म की सज़ा दी आपने मेरे बच्चों को।

प्रिया: मम्मी ये सज़ा और बढ़ सकती थी अगर आरव नहीं होता तो। आरव ने ही मेरी मदद की थी अजीत का सच सामने लाने में।

राजीव मौसा मेरे पास आए: शुक्रिया बेटा। तूने मेरी पत्नी को बचाया।

मैं: सिर्फ़ मैं नहीं था। मम्मी और सविता आंटी ने भी मदद की थी। इन फ़ैक्ट प्लान ही सविता आंटी ने बनाया था।

रीना: मुझे तो अब तक यकीन नहीं हो रहा अजीत इतना घटिया इंसान था।

मैं: मौसी हम भी नहीं पता था वो इतना बड़ा हैवान है। लेकिन जब कल वो वीडियो देखा तब… खैर अजीत जेल गया। उसे सज़ा होगी। हाँ आज जो हुआ वो शायद हम सब के ज़हन में रहेगा लेकिन उसे भुलाने की कोशिश करनी ही होगी।

तभी नानू नीचे गिर के रोने लगे।

नानू: हे भगवान ये सब मेरी गलती है। मैंने ही प्रतिक्षा की शादी उस अजीत से कराई थी। मुझे नहीं पता था वो ऐसा इंसान है।

प्रिया: पापा आपकी कोई गलती नहीं है।

प्रतिक्षा: हाँ पापा आपको थोड़ी पता था कि अजीत ऐसा इंसान है।

राजीव: प्लीज़ पापा आप खड़े होइए। बैठिए सोफ़े पे बैठिए।

मैं: नानू प्लीज़ रोना बंद।

नानू: आरव बेटा आज जो तूने इस घर के लिए किया है ना उसका एहसान हम कभी नहीं चुक़ा पाएँगे।

मैं: नानू नानू नानू मैंने कोई एहसान नहीं किया है। ये मेरा घर है और आप सब मेरे घरवाले हैं और घरवालों पे एहसान नहीं करते। खैर प्लीज़ आज का दिन बहुत भारी था। प्लीज़ आप सब आराम करें। प्लीज़ अपने-अपने कमरे में जाइए।

सब अपने-अपने कमरे में चले गए। मैं मम्मी और सविता आंटी के पास गया।

मैं: प्लान तो काम कर गया पर बहुत सारे घाव छोड़ गया।

मम्मी: घाव को भरने में टाइम लगेगा।

मैं: मम्मी मैं क्या कह रहा था, आज आप लोग खाना मत बनाओ। मुझे लगता नहीं आप भी क्षमता है आज खाना बनाने की। मैं बाहर से ले आता हूँ।

सविता: आरव ठीक कह रहा है प्रतिमा। तू आराम कर। मैं और आरव जाके खाना लाते हैं।

मम्मी: ठीक है।

उसके बाद मैं और सविता आंटी खाना लेने चले गए। करीब 45 मिनट बाद हम खाना लेकर वापस आए और जब वापस आए तो घर में सब बहुत परेशान थे और प्रतिक्षा मौसी को बुला रहे थे। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

मैं: रीना मौसी क्या सब इतने परेशान क्यों हैं और प्रतिक्षा मौसी को क्यों बुला रहे हो?

रीना: आरव प्रतिक्षा दीदी घर पे नहीं हैं।

मैं: क्या?

रीना: हाँ और उनका फ़ोन भी यहीं है।

सविता: हो सकता है बाहर टहलने गई हों।

रीना: रात के 10 बजे टहलने गई होंगी?

मैं: नहीं-नहीं वो टहलने नहीं गईं। आज इतना कुछ हुआ है, उनको डेफिनेटली सदमा पहुँचा है। वो कहीं कुछ करने… आप लोगों ने पूरे घर में देखा?

रीना: हाँ आरव पूरा घर देख लिया। वो कहीं नहीं हैं।

मैं: बाहर उनको बाहर ढूँढते हैं।

मैं, सविता आंटी, मम्मी, रीना मौसी, राजीव मौसा सब प्रतिक्षा मौसी को ढूँढने में लग गए। रात बहुत हो गई थी और मौसम भी ठीक नहीं था। हम सब अलग-अलग रास्ते पे गए। उनको ढूँढने में भागे जा रहे थे। अलग-अलग जगह पे देखा और साथ ही बर्फबारी भी शुरू हो गई।

बहुत देर ढूँढा लेकिन मौसी कहीं नहीं मिली। फिर मेरी नज़र एक ब्रिज पे पड़ी जहाँ पे एक औरत खड़ी थी। मैंने थोड़ा ध्यान से देखा तो वो प्रतिक्षा मौसी ही थीं। मैं बहुत खुश हुआ लेकिन तभी वो ब्रिज पे चढ़ गईं। मैं समझ गया कि वो क्या करने वाली हैं।

मैं चुपचाप उनके पीछे जाके खड़ा हो गया और धीरे-धीरे उनके पास बढ़ने लगा। मैं नहीं चाहता था कि मेरी किसी भी हलचल से भी मौसी को भनक लगे और वो नीचे कूद जाएँ। मैं उनके पास पहुँच गया और फटाफट उनका हाथ पकड़ के उनको नीचे खींच लिया। लेकिन मौसी बहुत झटपटा रही थीं।

प्रतिक्षा: आरव छोड़ मुझे! छोड़ मुझे मर जाने दे!

मैं: मौसी शांत हो जाओ प्लीज़।

प्रतिक्षा: नहीं आरव मेरे जीने का कोई मतलब नहीं। मुझे छोड़ दे आरव, मुझे मर जाने दे।

वो कंट्रोल में ही नहीं आ नहीं रही थीं। मुझे ना चाहते हुए उनको एक चाँटा मारना पड़ा।

मैं: दिमाग खराब हो गया है क्या आपका? क्या करने जा रही थीं आप? एक बार भी हमारे बारे में नहीं सोचा आपने?

वो घुटनों पे गिर के रोने लगीं।

प्रतिक्षा: तो और क्या करूँ आरव? क्या मतलब है मेरी ज़िंदगी का जब मेरा पति ही मुझे छूना नहीं चाहता? क्या मतलब है ऐसी ज़िंदगी का?

मैं: मौसी उस अजीत की वजह आप अपनी ज़िंदगी खत्म करोगी ताकि उसको और सुकून मिल जाए और हम जो आपसे इतना प्यार करते हैं वो अंदर ही अंदर रोते रहें? मौसी प्लीज़ घर चलो प्लीज़।

थोड़ा बहुत समझाने के बाद मौसी घर चलने के लिए मान गईं। बर्फबारी भी और तेज़ हो गई थी इसलिए मैंने मौसी को अपनी जैकेट पहना दी। हम घर की तरफ़ जा रहे थे लेकिन बर्फबारी की वजह से चलना मुश्किल था। तभी साइड में मुझे एक होटल दिखा। मैं और मौसी वहाँ चले गए। मैंने मौसी को एंट्रेंस के सोफ़े पे बिठाया और मैं रिसेप्शन पे चला गया।

मैं: एक्सक्यूज़ मी।

मैनेजर: येस, हाउ कैन आई हेल्प?

मैं: एक्चुअली मुझे एक अर्जेंट कॉल करनी है लेकिन मेरे पास फ़ोन नहीं है नहीं। क्या मैं लैंडलाइन यूज़ कर सकता हूँ?

मैनेजर: ओह याह सर नो प्रॉब्लम।

मैंने फ़ोन लिया और सीधा मम्मी को कॉल किया।

मम्मी: हेलो आरव हाँ प्रतिक्षा मिली?

मैं: हाँ मम्मी मौसी मिल गई। आप चिंता मत करो।

मम्मी: ओह भगवान का लाख-लाख शुक्र है। अभी कहाँ हो तुम?

मैं: अभी तो हम ये होटल सनशाइन में हैं। बर्फबारी बहुत हो रही है इसलिए हल्की हम आ रहे हैं। थोड़ी देर में निकल जाएँगे यहाँ से।

मम्मी: नहीं मत निकलना। बर्फबारी बहुत तेज़ है। एक काम करो, आज वहीं रुक जाओ। कल हम लोग आ जाएँगे तुम्हें लेने।

मैं: पर मेरे पास पैसे नहीं हैं। रुकूँगा कैसे?

रीना: आरव मैं रीना बोल रही हूँ।

मैं: हाँ मौसी।

रीना: सुन आरव वो होटल सनशाइन का मैनेजर है ना, उसको मैं जानती हूँ। एक बार बात कराना।

मैं: ओह ओके… एक्सक्यूज़ मी।

मैनेजर: येस सर। मैं: मेरी मौसी आपको जानती हैं। उनको आपसे बात करनी है।

मैनेजर: मुझे जानती हैं? गिव मी… हेलो ओह हे रीना हाउ आर यू… याह आई एम फाइन एज़ वेल और बता… ओह अच्छा हाँ कोई प्रॉब्लम नहीं है। मैं रूम दे दूँगा। आरव हियर…

मैं: हेलो हाँ मौसी।

रीना: हाँ आरव रूम में जाओ और आराम करो। लेकिन दीदी पे नज़र रखना। हम कल आ जाएँगे।

मैं: ठीक है।

मैनेजर: आरव ये तुम्हारे रूम की चाबी। रूम 203।

मैं: ओह थैंक यू सो मच।

मैनेजर: इसमें थैंक्यू वाली कोई बात नहीं है। रीना मेरी दोस्त है। उसके लिए इतना तो कर ही सकता हूँ मैं।

मैं: ओह बाय द वे व्हाट्स योर गुड नेम?

मैनेजर: संकेत।

मैं: ओह ओके एंड अगेन थैंक यू।

संकेत: माय प्लेज़र।

उसके बाद मैं और मौसी रूम पे चले गए और मैंने मौसी को बेड पे बिठा दिया। लेकिन मौसी बिल्कुल चुपचाप थीं। पता नहीं आगे और क्या-क्या मुसीबत आने वाली है। बाकी की कहानी अगले भाग में।

Kavya Singh

नमस्ते! मैं काव्या सिंह हूँ - इलाहाबाद विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में मास्टर डिग्री वाली और पिछले 7 साल से हिंदी में इतनी बोल्ड कहानियाँ लिख रही हूँ कि पाठक दोबारा पढ़े बिना रह नहीं सकते। मैं भारतीय समाज के हर छुपे हुए जज़्बात को शब्दों में ढालती हूँ - वो इच्छाएँ, वो चाहतें जो आप दिन में छुपाते हैं लेकिन रात में महसूस करना चाहते हैं। राष्ट्रीय स्तर पर मेरी कहानियों को पुरस्कार मिले हैं और लाखों पाठकों ने मेरी कहानियों से अपनी रातों को गरमाया है। चलो, आज मेरी कहानी में डूब जाओ!

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