ससुराल के बाद मायके में चुदाई की कामुक दास्तां- 7

न्यूड मॅाम डॉटर सेक्स कहानी में मैं अपनी मम्मी को लेस्बियन सेक्स के लिए गर्म कर रही थी. वे भी मेरे साथ समलिंगी सेक्स करने लगी.

कहानी का पिछला भाग छोटे भाई ने मेरी गांड तेल लगाकर मारी

अब आगे न्यूड मॅाम डॉटर सेक्स कहानी:

पापा के ऑफिस जाने के बाद मम्मी चाय लेकर ऊपर आतीं। करीब साढ़े सात बजे के करीब सीढ़ी से किसी के ऊपर आने की आवाज़ आने लगी। मैं समझ गयी कि मम्मी चाय लेकर आ रही हैं।

मुझे लगा कि मम्मी मेरे कमरे का दरवाजा खोलेंगी. लेकिन तभी मैंने महसूस किया कि मम्मी मेरे कमरे का दरवाजा बिना आगे बढ़ गयीं फिर सोनू के कमरे का दरवाजा खोलने की आवाज़ आयी।

मुझे हंसी आ गयी, मैं जान गयी कि मम्मी यही समझ रही होंगी कि मैं आज भी सोनू के कमरे में ही सो रही हूंगी। कमरा खाली मिलने पर वो वापस मेरे रूम की तरफ आयीं।

जैसे ही मेरे रूम का दरवाजा खोलकर घुसीं तो अंदर का माज़रा देखकर समझ गयीं। मैं भी आवाज पर नींद खुलने का नाटक करते हुए उठकर बैठ गयी।

मम्मी मुस्कुराते हुए मुझसे धीरे से बोलीं- अरे तू इधर है. मुझे लगा कि सोनू के रूम में होगी।

मम्मी की निगाह मेरे पैरों की तरफ गयी जहां मैंने कुछ नहीं पहना था। हालांकि टीशर्ट जांघ तक थी तो वो ये नहीं जान पायीं कि मैंने पैंटी नहीं पहनी है।

लेकिन टीशर्ट में हिलती चूचियों की तरफ देख कर समझ गयीं कि मैंने ब्रा नहीं पहनी है।

मम्मी हल्का सा हंस पड़ीं और धीरे से फुसफुसाकर बोलीं- अच्छा तो आज उधर के बजाए सब इधर ही हुआ है। पता नहीं ये बात मम्मी ने जानबूझकर बोली या उनके मुंह से अचानक निकल गया था। लेकिन उनकी बात पर मुझे भी हंसी आ गयी।

हम दोनों ही धीरे-धीरे बात कर रहे थे कि सोनू की नींद ना खुले। वो घोड़े बेचकर गहरी नींद में सो रहा था।

मैं हंसकर उनका गाल नोचते हुए धीरे से बोली- अरे वाह… आज तो बड़े मस्ती के मूड में लग रही हो सुबह-सुबह!

मम्मी टेबल पर चाय रखते हुए सोनू की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए बोलीं- लग रहा है देर रात तक मस्ती चली है तुम दोनों की. इसीलिए ये घोड़े बेचकर सो रहा है।

अभी मम्मी कुछ और बोलतीं, इससे पहले ही मैंने धीरे से मुस्कुराते हुए कहा- अरे सोने दो यार उसे। देर से सोया है वो। वैसे भी तुम्हारे सामने तो नहीं उठेगा।

मम्मी मेरी बात समझ नहीं पायीं और बोलीं- मतलब? मैं मुस्कुराते हुए धीरे से सोनू की कमर के पास कंफर्टर हल्का सा उठाकर अंदर दिखाते हुए बोली- इसलिए।

मम्मी ने देख लिया कि सोनू नंगा सो रहा था और संयोग से सुबह के टाइम सोनू का लंड खड़ा था। मैंने देखा कि मम्मी कुछ देर तक एकटक सोनू के खड़े लंड को देखती रहीं।

6 फीट के हट्टे-कट्टे अपने जवान बेटे के 8 इंच के खड़े लंड को देखकर मम्मी की आंखों में वासना की लहर साफ पता चलने लगी थी। हालांकि जैसे ही मम्मी ने मुझे मुस्कुराते उन्हें घूरते देखा तो तुरंत उन्होंने सोनू के लंड से अपनी नज़र हटा ली।

मम्मी का चेहरा शर्म से हल्का सा लाल हो गया। वो समझ गयी थीं कि मैंने उनकी आंखों में वासना की लहर और चमक देख ली है।

मैं मुस्कुराते हुए अपने घुटनों को मोड़ते हुए बैठ गयी. तभी मम्मी की निगाह मेरे पैरों के बीच नंगी चूत पर चली गयी।

मम्मी का चेहरा देखकर साफ पता चल रहा था कि पहले सोनू का लंड और फिर अब मेरी चूत को देखने के बाद वो थोड़ी नर्वस हो गयी थीं। उन्हें इसकी उम्मीद नहीं थी. अब वो समझ नहीं पा रही हैं कि क्या करें, कमरे से बाहर निकल जाएं या कुछ बोलें।

मैं मम्मी की हालत समझ रही थी। मैंने माहौल को नॉर्मल करने के लिए मम्मी का हाथ पकड़ते हुए मुस्कुराकर बोला- अरे बैठो यार! मम्मी मुझे थप्पड़ मारते हुए थोड़ा नकली गुस्सा दिखाते हुए बोलीं- हट… मुझे नहीं बैठना यहां। मेरी चाय नीचे ठंडी हो रही है। मैं जा रही हूं।

अभी मैं कुछ कहती तब तक मम्मी कमरे से बाहर निकल गयीं। मम्मी के जाने के बाद मैं धीरे से उठी ताकि सोनू जग ना जाए और उसी तरह बिना ब्रा-पैंटी के सिर्फ टीशर्ट में ही चाय का कप उठाते हुए कमरे से बाहर निकली और फिर धीरे से कमरे का दरवाजा बंद कर मम्मी के पीछे मैं भी नीचे चली गयी।

नीचे देखा तो मम्मी हॉल में सोफे पर बैठकर चाय पी रही थीं। मैं भी पीछे-पीछे पहुंच गयी और उनके बगल जाकर सोफे पर बैठ गयी और चाय पीने लगी।

फिर हंसकर बोली- क्या हुआ? क्यों भाग आयी नीचे?

मम्मी मेरा कान पकड़ते हुए हंसकर बोलीं- तू ऐसे ही नंगे नीचे चली आयी। मैं हंसती हुई बोली- नंगी कहां हूँ, टीशर्ट पहनी तो है।

मम्मी बोलीं- और टीशर्ट के नीचे? रात भर तुम दोनों कुछ भी करो लेकिन कम से कम सुबह तो कपड़े पहन लिया कर! मैं हंसकर बोली- अरे, तो ऐसा भाई तुम्ही ने तो पैदा किया है जो अपनी बहन को कपड़े ही नहीं पहनने देता है तो मैं क्या करूं।

मेरी बात पर मम्मी भी मजे लेकर हंसते हुए बोलीं- तेरे पापा भी तो अपनी बहन को नहीं पहनने देते. तो वो तुझे नहीं पहनने देता और कंबल उठाकर दिखाने की क्या ज़रूरत थी। अभी वो जग जाता तो? मैं मुस्कुराते हुए कही- तो क्या हुआ, थोड़ा उसे भी मजा दे देती, बेचारा कब से तुम्हारे सपने देख रहा है। और वैसे वो तुम्हारे बारे में भी जानता है कि तुम ससुर जी और बुआ के साथ कितने मजे लेती हो और क्या-क्या कर चुकी हो।

मेरी बात पर मम्मी का चेहरा हल्का सा शर्म से लाल हो गया।

मम्मी को हल्का सा शरमाते देख मैं बोली- अरे वाह… तुम शरमाती भी हो क्या… ससुर जी तो हमेशा बोलते हैं कि तेरी मम्मी तो तुमसे भी ज्यादा बोल्ड हैं और ज्यादा मजे देती हैं। मम्मी हंसते हुए- क्यों तू भी तो अपने पापा और भाई को मजा देती है।

कल की बातचीत के बाद से मैं महसूस कर रही थी कि मम्मी अब खुद भी मुझसे ज्यादा खुलकर और मजे लेकर बात कर रही थीं।

मैं हंसकर बोली- कहो तो तुम्हें भी मज़े दे दूँ थोड़ा! मम्मी भी मजे लेते हुए बोलीं- हां… पापा और भाई से तो मजे ले ही चुकी हो अब अपनी मम्मी से ही मजे लेना बाकी रह गया है तुम्हें। वैसे किस मजे की बात कर रही हो।

मैं भी अपना एक हाथ गाउन के ऊपर से ही उनकी जांघ पर रख दिया और आंख मारते हुए मुस्कुरा कर धीरे से बोली- क्यों शालू बुआ के साथ मजे करती हो तो मेरे साथ क्या दिक्कत है। कर लो ना मेरे साथ मजे और मायके में पायल की जगह भी तुम ले लो।

मेरी बात पर मम्मी हल्का सा मुस्कुराते हुए बोलीं- क्यों भाई के साथ रात भर में मन नहीं भरा क्या… या रातभर में निचुड़ गया है बेचारा जो सुबह-सुबह मेरे साथ मजे करना चाहती हो।

मैं मुस्कुराते हुए बोली- निचुड़ा कहां था… तुम तो अपनी आंख से देखकर आयी हो अभी कि रात भर मजे के बाद सुबह फिर खड़ा था था उसका। सुबह भी चूसकर निचोड़ना पड़ता है उसे तब जाकर मानता है।

अब धीरे-धीरे मेरे और मम्मी की बातों में कामुकता घुलने लगी थी।

मम्मी ने आगे से खुलने वाला नाइट गाउन पहना हुआ था। मैं मम्मी की तरफ मुंह करके एक दम उनसे चिपक कर सोफे पर बैठ गयी एक हाथ उनके नाइट गाउन के ऊपर से उनकी जांघों पर रख दिया और हल्का-हल्का सहलाते हुए मुस्कुराकर धीरे से बोली- तुम चूसोगी उसका, मैं भी देखना चाहती हूं कि तुम कैसे चूसती हो क्योंकि ससुर जी हमेशा बोलते हैं कि तेरी मम्मी बहुत अच्छे से चूसती हैं।

मम्मी का चेहरा हल्का-हल्का लाल होने लगा था। अब हम दोनों पर धीरे-धीरे वासना का बुखार चढ़ता जा रहा था। मम्मी की आंखें और गोरा चेहरा वासना के नशे में हल्का-हल्का गुलाबी होने लगे थे।

मैंने देखा कि जैसे ही मैंने मम्मी से सोनू के लंड को चूसने की बात की उनका चेहरा लाल हो गया था आंखों में वासना की लहर साफ नज़र आ रही थी।

मम्मी बस इतना बोलीं- पागल है… क्या बोल रही है। कामुकता में मम्मी की आवाज़ हल्की सी कांप रही थी।

मैं मुस्कुराते हुए बोली- अच्छा… अभी कमरे में तो एकटक लार टपकाए घूर रही थी उसके लंड को। माहौल को और ज्यादा कामुक बनाने के लिए मैंने जानबूझकर लंड शब्द का यूज किया था।

मम्मी हल्का सा हंसते हुए मुझे थप्पड़ मारकर बोलीं- तुझे बड़ा मेरे मुंह में लार दिखाई दे रहा था और तू जो पानी देने के बहाने लार टपकाते हुए अपने पापा चूसने जाती थी तब!?

मम्मी इस तरह मजा लेते रिएक्शन देंगी, इसकी मुझे ज़रा भी उम्मीद नहीं थी। इसका मतलब यही था कि मम्मी खुद भी अब बात को आगे बढ़ा रही थीं।

मम्मी ने जो कहा था वो बात तबकी है जब मेरे और पापा के बीच ये चुदाई का खेल अभी शुरू ही हुआ था। वो चूत और लण्ड का एक ही रिश्ता कहानी आप इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

कुल मिलाकर सच यही था कि हम दोनों पर अब हल्का-हल्का वासना का बुखार चढ़ने लगा था। मम्मी भी अब सालों से दबी हुई कामुक इच्छाओं को धीरे-धीरे बाहर लाना चाह रही थीं। वासना की आग भड़क रही थी बस मुझे और हवा देनी थी।

मम्मी ने आगे से खुलने वाला नाइट गाउन पहना हुआ था। मैं खिसककर मम्मी के बगल उनके कंधों पर सिर रखकर उनकी की तरफ मुंह करके एकदम उनसे चिपक कर बैठ गयी एक हाथ उनके नाइट गाउन के ऊपर से उनकी जांघों पर रख दिया और हल्का-हल्का सहलाते हुए मुस्कुराकर धीरे से बोली- जो पूछा है उसका जवाब दो।

हम दोनों जान रहे थे कि अब क्या होने वाला है. और शायद मम्मी भी इसके लिए पूरी तरह तैयार थीं। मेरे सवाल पर मम्मी वासना से हल्की कंपकंपाती आवाज में बोलीं- क्या बोलूँ?

मैं नाइट गाउन को हल्का सा अगल-बगल खिसकाते हुए अपने हाथों को सीधा मम्मी की चिकनी जाघों पर रखकर हल्का-हल्का सहलाते हुए बिना झिझके बोली- यही कि बुआ के साथ वाला मजा मेरे साथ भी करोगी। अभी भी मैं बिना पैंटी और ब्रा के सिर्फ टीशर्ट में बैठी थी।

सोफे पर बैठने से टीशर्ट खिसक कर ऊपर आ गयी थी जिससे मेरी चिकनी चूत साफ दिख रही थी जिसे अभी मायके आने से पहले मैंने साफ किया था। मैंने देखा कि मम्मी की निगाह रुक-रुक कर मेरी जांघ और बीच के दरार में जा रही थी।

मेरे सवाल पर मम्मी भी बिना झिझके मुस्कुराते हुए बोलीं- पापा और भाई के बाद अब मम्मी पर भी डोरे डाल रही हो।

इधर बातों के सिलसिले के साथ मेरे हाथ लगातार मम्मी की जांघों को सहला रहे थे। मैं मुस्कुराते हुए बोली- हां… अगर तुम्हें अगर अपनी बेटी के साथ मजे करने में कोई दिक्कत ना हो तो?

वासना और कामुकता में हम दोनों का शरीर भी तपने लगा था जिसकी गर्माहट हम दोनों ही महसूस कर रही थी।

मेरी बात पर मम्मी बिना कुछ बोले बस हल्का सा मुस्कुरा दीं।

मम्मी जिस तरीके से खुलकर पापा और सोनू को लेकर मुझसे मजाक कर रही थीं या बुआ और पापा के बारे में बिना झिझक मुझसे बात कर रही थी उससे मैं 100% कन्फर्म हो चुकी थी कि मम्मी को परिवार के सगे रिश्तों के बीच सेक्स या चुदाई बेहद पसंद है और मेरी ही तरह उन्हें भी फैमिली सेक्स की फैंटेसी उनके अंदर की कामुकता और वासना दोगुना भड़का देती थी।

अब ये साफ था कि मम्मी खुद भी अपने बेटे से चुदने के सपने देख रही थीं और तैयार बैठी थीं।

इस बीच मम्मी ने गाउन को खिसकाने और जांघो को सहलाने से एक बार भी मुझे रोकने की कोशिश नहीं की. जिससे मेरी हिम्मत बढ़ गयी और मैंने उनके गाउन के रिबन को खोल दिया और गाउन को पूरा अगल-बगल कर दिया।

मम्मी का दूध जैसा मांसल गोरा शरीर चमकने लगा।

मम्मी ने रेड कलर की ब्रा और पैंटी पहना हुआ था। मम्मी की दूध जैसी गोरी और मक्खन जैसी चिकनी जांघों को देखकर मेरे रोंगटे खड़े हो गये। पहली बार मैं मम्मी की जांघें देख रही थी।

मुझे उम्मीद नहीं थी मम्मी सच में इतनी खूबसूरत होंगी। पैंटी चूत के पास एकदम फूली हुई थी।

मैं एकटक पैंटी के ऊपर से उनकी पाव रोटी की तरह फूली हुई चूत को देख कर उसकी खूबसूरती की कल्पना करने लगी।

मम्मी का शरीर तप रहा था और आंखें लाल हो चुकी थीं। मेरे झटके से गाउन खोलने पर मम्मी की सांसें तेज हो गयीं और उन्होंने मना करने के बजाय धीरे अपना एक हाथ मेरी जांघ पर रख दिया और हल्का सा दबाते हुए बोलीं- रहने दो गरिमा, सोनू आ गया तो! कामुकता के चलते उनकी आवाज़ कंपकपा रही थी।

वहीं मम्मी की इस बात पर मुझे भी मौका मिल गया उनके अंदर की दबी इच्छा को बाहर लाने का। मैं मम्मी की जांघ को सहलाते हुए अपने हाथ को ऊपर की ओर खिसकाकर चूत के पास तक लेकर चली गयी और सहलाते हुए मुस्कुराकर धीरे से बोली- अरे, अभी पौने आठ ही बज रहे हैं और वो साढ़े नौ-दस बजे से पहले उठने वाला नहीं है… और आ भी गया तो क्या हुआ, जब पापा अपनी बेटी के साथ मजे कर सकते हैं तो तुम भी अपने बेटे के साथ मजे करो।

फिर आंख मारते हुए बोली- वैसे सोनू भी तुम्हारा दिवाना है और मन तो तुम्हारा भी करता होगा अपने बेटे को अपना ये कामुक और नंगा बदन दिखाने का और उसके साथ मजे करने का।

मेरी इस बात से जैसे मम्मी के शरीर में झुरझुरी सी दौड़ गयी थी और उत्तेजना में उनके रोंए खड़े हो गये जिसे मैं जांघों सहलाते अपने हाथों पर साफ महसूस कर रही थी। वासना से कंपकंपाती और लड़खड़ाती आवाज़ में मम्मी धीरे से मुस्कुराकर बोलीं- सिर्फ बेटे के साथ ही नहीं, बेटी के साथ भी चाहती हूँ।

मैं समझ गयी कि मम्मी को कामुक बातें करना पसंद है और इससे वो ज्यादा कामुकता फील कर रही थीं। मैं उसी तरह जांघ सहलाते हुए धीरे से बोली- तो बेटे के साथ बाद में मजे करना पहले बेटी के साथ मजे कर लो।

मम्मी का हाथ भी मेरी जांघ पर था लेकिन पहली बार अब मम्मी भी हल्का-हल्का अपने हाथों से मेरी जांघ को सहलाने लगी थीं। मैं इशारा समझ चुकी थी कि मामला और आगे बढ़ाने का टाइम आ गया है।

मैंने अपना हाथ मम्मी की जांघ से हटाया और अपनी टीशर्ट को नीचे से पकड़कर एक झटके में सिर के ऊपर से उतार कर सोफे पर रख दिया। मैंने अंदर ब्रा नहीं पहनी थी तो मेरी चूचियां मम्मी के सामने नंगी हो गयीं। अब मैं सिर्फ पैंटी में बैठी थी।

मम्मी एकटक मेरी चूचियों को देखने लगीं। मैं दोनों हाथों से अपनी चूचियों को सहलाते हुए मम्मी की तरफ देखकर पूछी- कैसी हैं? मम्मी चूचियों को देखते हुए ही धीरे से बोलीं- बेहद सुंदर.

मैं पैरों को उठाकर ऊपर किया और मम्मी की तरफ मुंह करके सोफे पर घुटनों के बल खड़ी हो गयी और दोनों चूचियों का हाथ से पकड़े मम्मी के मुंह के पास करके बोली- पियोगी अपनी बेटी का दूध? मेरी भी आवाज़ कामुकता में हल्का-हल्का लड़खड़ाने लगी थी।

मम्मी अपना एक हाथ मेरी चूचियों पर रखते हुए कामुक आवाज़ में बोलीं- जब अपने पापा और भाई को अपना दूध पिला चुकी हो तो मुझे भी पिला दो।

मम्मी ने खुद ही अपना मुंह हल्का सा आगे बढ़ाकर मेरी एक चूची को मुंह में लेकर उसका निप्पल चूसने लगीं। मैं मम्मी के सिर को एक हाथ से अपनी चूची पर दबा लिया और उन्हें चूसते हुए देखने लगी।

एक हाथ से मेरी चूची को पकड़ कर चूसते हुए मम्मी ने अपना दूसरा हाथ से मेरी दूसरी चूची को पकड़कर हल्का-हल्का दबाने लगीं। कुछ देर एक चूची को चूसने के बाद मम्मी ने अपना मुंह हटाते हुए दूसरी चूची पर रख कर उसे चूसने लगीं और फिर बारी-बारी से दोनों चूचियों को चूसने लगीं।

मैं अपना एक हाथ नीचे ले जाकर ब्रा के ऊपर से ही मम्मी की चूची को दबाने लगी। करीब 2 मिनट तक चूचियों को चूसने के बाद मम्मी ने अपना मुंह हटाया और सिर उठाकर मेरी तरफ देखकर मुस्कुराने लगीं।

मैंने मम्मी का सुंदर सा चेहरे को अपने दोनों हाथों में पकड़ा और झुककर अपने होंठ उनके होठों पर रख दिये और एक जोरदार किस किया। मम्मी ने भी मेरे चेहरे को दोनों हाथों में भरकर जवाब देते हुए मेरे होठों को अपनी जीभ से हल्का सा चाटने लगीं।

जैसे ही मैंने मम्मी की जीभ को अपने होंठ पर महसूस किया मैंने तुरंत उनके स्वागत में मुंह को खोल दिया। अब हमारी जीभ आपस में टकराने लगी।

हम दोनों एक-दूसरे के मुंह में जीभ डाले तेजी से किस कर रही थी।

मम्मी जिस तरीके से रिऐक्ट कर रही थीं वो बात मुझे हैरान कर रही थी इससे मैं इतनी देर में मैं इतना तो समझ चुकी थी कि मम्मी ऊपर से जितनी शांत और शालीन दिखती हैं वो अंदर से बिलकुल नहीं हैं, कम से कम सेक्स और कामुकता के मामले में तो बिलकुल भी नहीं… उनके अंदर मुझसे कहीं ज्यादा आग भरी है।

ससुर जी की ये बात कि ‘तेरी मम्मी तुझसे ज्यादा बोल्ड और मजा देती है’ अब मैं अच्छी तरह समझ रही थी।

किस के बाद जैसे ही हमने अपने मुंह को अलग किया हम दोनों एक-दूसरी को देखकर मुस्कुराने लगी।

न्यूड मॅाम डॉटर सेक्स कहानी जारी रहेगी. आप अपने विचार लिखें. [email protected]

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Ananya Verma

अरे! मैं अनन्या वर्मा हूँ - लखनऊ विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान की पढ़ाई करने वाली और पिछले 4 साल से हिंदी में ऐसी कहानियाँ लिख रही हूँ जो आपकी अंगुलियाँ स्क्रीन पर रोक दें। मैं इंसानी इच्छाओं, ख्वाहिशों और वो पलों को समझती हूँ जो आप छुपाना चाहते हैं लेकिन महसूस करना चाहते हैं। मेरी कहानियों में वही बात है जो दिल को छूती है और तन को सिहराती है। हज़ारों पाठकों ने मेरी कहानियाँ पढ़कर गर्म रातों का मज़ा लिया है। तो चलो, आज की रात मेरी कहानी से बनाते हैं!

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